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Home » धर्म आध्यात्म » Page 7

Browsing: धर्म आध्यात्म

महाशिवरात्रि पर ऐसे बनाएं ठंडाई 

धर्म आध्यात्म February 18, 2023

 
 K.W.N.S.-शिवरात्रि के दौरान कई लोग व्रत रखते हैं और फलाहार खाते हैं. महा शिवरात्रि के खास मौके पर ठंडाई हर घर में बनती है.वैसे तो अब फ्लेवल ठंडाई बाजार में आसानी से मिल जाती हैं लेकिन जो ट्रेडिशनल ठंडाई पीने का मजा है वो फ्लेवर वाली ठंडाई में पाना मुश्किल है. हम आज आपको यहां बताने जा रहे हैं ठंडाई बनाने की आसान रेसिपी सामग्री एक लीटर दूध, आधा कप बादाम, 6 चम्मच खसखस, सौंफ आधा कप, 2 चम्मच काली मिर्च, 5 हरी इलाएची, 2 चम्मच काली मिर्च, 4 चम्मच तरबूज के बीज, 4 चम्मच खरबूजे के बीज, 4 चम्मच ककड़ी के बीज, 2 चम्मच गुलाब की पत्तियां, चीनी स्वादानुसार. 
 ऐसे तैयार करें 
सबसे पहले एक बाउल में बादाम, खरबूजे, तरबूजे और ककड़ी के बीज, खसखस, सौंफ, गुलाब की पत्तियां, काली मिर्च और इलाएची को पानी में रातभर के लिए भिगो दें. बादाम को अलग से भिगोएं. सुबह बादाम को छीलकर बाकी सारे सामान को पानी सहित एक साथ पीस लें. एकदम बारीक पेस्ट तैयार करना है. अब दूध को उबालें और ठंडा होने दें. इसके बाद इसमें स्वादानुसार चीनी मिक्स करें. यदि केसर है तो थोड़ा सा केसर भी डाल दें.अब दो गिलास में पानी लें और एक मलमल का कपड़ा लें. कपड़े में पेस्ट डालें और पानी डालकर उस पेस्ट को छान लें. आप चाहें तो छलनी की मदद से भी छान सकते हैं. इसके बाद इस पानी को दूध में मिक्स कर दें. इसके बाद कुछ समय के लिए इसे फ्रिज में रख दें. चाहें तो थोड़े ड्राई फ्रूट्स को बारीक काटकर इसे गार्निश भी कर सकते हैं. ठंडा होने के बाद इसमें बर्फ डालें. इसके बाद महादेव को भोग लगाएं और सभी को प्रसाद के तौर पर वितरित करें.
 

घर में भूलकर भी ये दो चीजें नहीं रखनी चाहिए

धर्म आध्यात्म February 16, 2023

 
K.W.N.S.-पारिवारिक जीवन में रहने वाले लोगों को घर में भूलकर भी ये दो चीजें नहीं रखनी चाहिए. इससे आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. घर में कलह-कलेश की स्थिति पैदा होने लग जाती है. इसलिए अगर आप घर में कुछ भी चीजें रखते हैं, तो उसके बारे में अच्छे से जरूर जान लें. तो ऐसे में आइए आज हम आपको अपने इस लेख में विस्तार से बताएंगे, कि घर में क्या ऐसी दो चीजें हैं, जो भूलकर भी नहीं रखना चाहिए, वरना इससे आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 
घर में भूलकर भी न रखें ये दो चीजें
1.शालीग्राम न रखें
शालीग्राम एक खास पत्थर का होता है. जो बेहद दुर्लभ माना जाता है. लोग घरों में इनकी पूजा करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है? समुद्र के किनारे पाए वाले रत्न शालीग्राम की तरह बाजार में बेचे जाते हैं. वहीं अगर आप बाजार में जाते हैं, तो इस काले रंग के पत्थर को शालीग्राम बोलकर बेचा जाता है, जो शालीग्राम नहीं होता है. शालीग्राम एक खास पत्थर से बना होता है.अगर आप शालीग्राम रखने का सही तरीका नहीं जानते हैं, तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं. अब ऐसे में जो लोग पारिवारिक होते हैं या फिर बिना अनुशासन और एकाग्रता के अपने को व्यतीत करते हैं. उन्हें कभी भी घर में शालीग्राम नहीं रखना चाहिए. अगर वह बिना नियम के शालीग्राम को घर में रखते हैं, तो उन्हें कई तरह की अशांति से गुजरना पड़ सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं, कई ऐसे परिवार भी हैं, जहां कई पीढ़ियों के लोग घर में शालीग्राम लेकर आए हैं और वह शालीग्राम का प्रयोग भी सही ढंग से करते हैं और जीवन में सफल होते हैं, साथ ही मरने के बाद वह शालीग्राम को अगली पीढ़ी को सौंप देते हैं, जिन्हें शालीग्राम का प्रयोग सही ढंग से करना नहीं आता है. ऐसे परिवारों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ जाता है, उनकी जिंदगी में हमेशा दहशत का माहौल बना रहता है। 
2.घर में न रखें एक मुखी रूद्राक्ष
अक्सर लोगों को एक मुखी रूद्राक्ष चाहिए. लेकिन क्या आप जानते हैं, कि इंसान के खुद के कई मुख होते हैं. अगर आप एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करते हैं, तो जाहिर सी बात है, आप मुसीबत में जरूर पड़ सकते हैं. आप परेशानियों को खुद बुलावा देते हैं. आपको एक मुखी रूद्राक्ष तब ही पहनना चाहिए, जब आपका लक्ष्य केवल एक ही हो. इसलिए अगर आप एकमुखी रूद्राक्ष धारण करने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें. वरना आप बड़ी मुसीबत में भी पड़ सकते हैं। 
 

16 फरवरी को है विजया एकादशी, जानें सही मुहूर्त व पूजा विधि

धर्म आध्यात्म February 15, 2023

सनातन धर्म में विजया एकादशी व्रत को बहुत अहम बताया गया है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 16 फरवरी 2023 की को यह व्रत रखा जाएगा। व्रत की शुरुआत सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर होगी। वहीं, 17 फरवरी 2023 की सुबह 2 बजकर 49 मिनट पर समापन होगा। ऐसी स्थिति में व्रत 16 एवं 17 दोनों दिन रखा जा सकता है। इस वर्ष विजया एकादशी पर गुरुवार पड़ने का संयोग भी बन रहा है। गुरुवार और एकादशी दोनों श्रीहरि को समर्पित हैं। आइये जानते हैं किस दिन विजया एकादशी का व्रत रखना उचित होगा।

पंचांग के अनुसार 16 फरवरी 2023 को विजया एकादशी तिथि दिनभर रहेगी और 17 फरवरी की तड़के सुबह तक रहेगी। ऐसी स्थिति में गृहस्थ लोगों के लिए 16 फरवरी को यह व्रत करना उचित माना गया है। वहीं वैष्‍णव संप्रदाय के लोग और साधु-संत 17 फरवरी 2023 को विजया एकादशी का व्रत रखेंगे।

 व्रत पारण का समय

16 फरवरी को जिन लोगों का व्रत रहेगा। उन्हें 17 फरवरी की सुबह 08:01 से 09:18 तक व्रत पारण करना होगा। वहीं, 17 फरवरी को व्रत करने वाले लोगों के लिए 18 फरवरी 2023 की सुबह 07.01 से 09.18 तक का समय व्रत खोलने के लिए शुभ रहेगा।

क्यों रखा जाता है विजया एकादशी का व्रत

विजया एकादशी व्रत करने से शत्रु पर विजय प्राप्ति होती है। भगवान श्रीराम में लंका पर चढ़ाई करने से पहले पूरे विधि-विधान द्वारा इस व्रत को किया था। इस व्रत रहकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और विजया एकादशी व्रत की कथा जरूर पढ़नी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में केले, पीले वस्त्र, पीली मिठाई अर्पित करें। आपके सोए नसीब भी जाग जाएंगे।

व्रत विधि

विजया एकादशी से एक दिन पहले वेदी बनाकर उस पर सप्त धान्य रख लें। कलश की स्थापना एवं पूजन करें। हाथ में पुष्प-अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लीजिए। पंच पल्लव को कलश में रखकर चतुर्भुज स्वरूप भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना करें और अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप, फल, फूल, तुलसी एवं मिष्ठान अर्पित करें और घी के दीप प्रज्वलित कीजिए। घी का दीपक जलाने के बाद एकादशी व्रत की कथा सुनें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। इसके बाद तुलसी माला से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें। आरती उतारें और दान पुण्य करें।

शिवरात्रि पर दिन भर रहेगा शिवपूजा का मुहूर्त

धर्म आध्यात्म February 12, 2023

शिवरात्रि 18 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन शिवपूजा के लिए पूरे दिन मुहूर्त रहेगा। यानि आप कभी भी शिवरात्रि पर पूजा कर सकते हैं। बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉं सतीश सोनी के अनुसार महाशिवरात्रि का महापर्व 18 फरवरी से शुरू होकर 19 फरवरी की शाम तक रहेगा। भगवान शिव की पूजा लिए दिन भर मुहूर्त रहेंगे। जो लोग निशीथ काल मैं पूजा करना चाहते हैं। उनके लिए रात 12:09 से रात 1:00 बजे तक मुहूर्त रहेगा। चतुर्दशी तिथि 18 फरवरी शनिवार को रात 8:02 से अगले दिन 19 फरवरी को शाम 4:18 तक रहेगी।

डॉं सोनी ने आगे बताया ईश्वरी साधना के लिए वर्ष में में चार रात्रिया सर्वश्रेष्ठ मानी गई हैं। जिसमें पहली रात्रि महाशिवरात्रि, दूसरी रात्रि होलिका दहन की रात्रि, तीसरी रात्रि दीपावली की रात्रि और चौथी और अंतिम रात्रि दशहरा विजयादशमी की रात्रि इन चार रात्रि में की गई भक्तों की साधना कभी बेकार नहीं जाती।

क्या करें, महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष

 -महाशिवरात्रि के दिन गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक करने से दरिद्रता का नाश होता है। और धन्य धन्या की प्राप्ति होती है।

 – जिन जात को को जोड़ों के दर्द गठिया के दर्द रहते हैं। वह महाशिवरात्रि पर बीज मंत्र का सवा लाख जाप करें और राहत मिलती है।

 -यदि जीवन में शत्रुओं का प्रभाव बढ़ गया हो। अथवा शत्रु परेशान करते हो। तो गोमती चक्र पर का नाम लिखकर शिव जी के चरणों में अर्पित कर दें। इससे शत्रुओं मनोदशा आपके प्रति बदल जाएगी।

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के ये होते हैं फायदे 

धर्म आध्यात्म February 11, 2023

 
K.W.N.S.-महाशिवरात्रि का व्रत दिनांक 18 फरवरी को है. इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अरचना की जाती है. इस दिन बेलपत्र के बिना भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है. इसे चढ़ाने से भगवान शिव बेहद प्रसन्न होते हैं और उनका मस्तक शीतल रहता है. शिवपुराण में बेलपत्र के महत्व के बारे में बताया गया है.जो भी व्यक्ति भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते हैं,उसे 1 करोड़ कन्यादान के सामन पुण्य की प्राप्ति होती है. तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में विस्तार से बताएंगे कि बेलपत्र चढ़ाने का नियम क्या है, बेलपत्र तोड़ने का नियम क्या है, साथ ही इससे क्या लाभ होता है।
 शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के ये होते हैं फायदे 1.भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से दरिद्रता दूर हो जाती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है. 2.जो महिलाएं भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र चढ़ाती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. 3.अगर आपकी कोई मनोकामना है, तो बेलपत्र पर चंदन से राम या फिर ओम नम: शिवाय लिखकर भोलेनाथ को चढ़ाएं. 4.भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से शिव की कृपा बनी रहती है और सभी संकटों से छुटकारा मिलता है।
 शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम 1.अगर आप भगवान शिव को तीन मुखी वाला बेलपत्र चढ़ाते हैं, तो ध्यान रखें उसमें कोई दाग या फिर धब्बा नहीं होना चाहिए. 2.मुरझाए हुए बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित न करें. 3.बेलपत्र को पहले साफ पानी से धो लें, फिर उसके चिकने हिस्से को शिवलिंग पर चढ़ाएं. 4.बेलपत्र बासी या फिर जूठा नहीं होना चाहिए. 5.शिवजी को कम से कम 1 बेलपत्र तो जरूर चढ़ाएं, वैसे बेलपत्र 11, 21 की संख्या पर चढ़ाया जाता है. बेलपत्र तोड़ने के ये होते हैं नियम 1.अगर आप बेलपत्र तोड़ने जा रहे हैं, तो भगवान शिव का स्मरण जरूर करें. 2.बेलपत्र को पूरी टहनी सहित नहीं तोड़ना चाहिए. 3.बेलपत्र चतुर्थी, नवमी तिथि, शिवरात्रि, अमावस्या या फिर सोमवार के दिन न तोड़ें. 4.एक तिथि के खत्म होने के बाद जब दूसरी तिथि शुरु हो रही है, तो बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
 

वास्तु शास्त्र के मुताबिक बेहद शुभ मने गए है ये मूर्ति

धर्म आध्यात्म February 10, 2023

 
K.W.N.S.-घर की साज सजावट में मूर्तियों का सबसे ज्यादा योगदान होता है। महिलाएं अपने घर को सजाने के लिए घर में तरह-तरह के शोपीस और स्टैच्यू का इस्तेमाल करती हैं। कांच, मेटल, पीतल और अन्य तरह के मटेरियल से बने ये स्टैच्यू घर की शोभा बढ़ाते हैं। लेकिन फैशन के इस दौर में कभी-कभी हम अनजाने में अपने घर पर कुछ ऐसा उठा लाते हैं जो वास्तु दोष को पैदा करता है।
तो आइए आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि कौन-कौन सी मूर्तियां आपके घर को सुंदर बनाने के साथ-साथ वास्तु दोष से भी मुक्ति दिलाती हैं। आज के इस लेख में हम आपको ऐसी सात मूर्तियों के बारे में बताने वाले हैं जिन्हें घर में रखना वास्तु शास्त्र के मुताबिक बेहद शुभ माना गया है।
1- हंसों का जोड़ा- हंस को प्यार, सद्भावना और शांति का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक यदि आप अपने घर पर हंसों के जोड़े का स्टैच्यू रखते हैं तो आपके परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है। इसके अलावा आर्थिक तौर पर भी यह प्रतिमा सकारात्मक बदलाव लेकर आती हैं। पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है और दोनों में विश्वास और सम्मान का भाव रहता है।
2- तोते का स्टैच्यू- तोते को प्रेम और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार तोते का स्टैच्यू घर में रखने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। यह स्टैच्यू बच्चों के कमरे में लगाने से उनकी एकाग्रता बढ़ती है और उनका पढ़ाई में मन लगता है। घर में खुशहाली भरा माहौल रहता है और आर्थिक स्थिति भी बेहतर होती है।
3- हाथी का स्टैच्यू- पौराणिक काल से हाथी को वैभव और ऐश्वर्य का प्रतीक माना गया है। मां गजलक्ष्मी की सवारी होने की वजह से हाथी को सुख-समृद्धि वाला शुभ जीव माना जाता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में हाथी का स्टैच्यू घर में रखना बेहद शुभ फलदायी माना गया है।
4- कछुए का स्टैच्यू- वास्तु शास्त्र में कछुए को बेहद शुभ माना जाता है। पौराणिक काल से ऐसी मान्यता है कि कछुआ भगवान विष्णु का ही रूप है। वास्तु शास्त्र ए मुताबिक कछुए का स्टैच्यू घर की उत्तर दिशा में रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है।
5- मछली का स्टैच्यू- वास्तु शास्त्र में मछली को बेहद शुभ माना गया है। लोग घर में ऐक्योरियम रखते हैं लेकिन यदि आप के लिए ऐक्योरियम रखना संभव ना हो तो आप चांदी या पीतल की मछली भी अपने घर में रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार मछली की मूर्ति घर के पूर्व या उत्तर दिशा में रखने से घर से नकारात्मकता दूर होती है।
6-गाय का स्टैच्यू- सनातन धर्म में गाय को दिव्य पशु का दर्जा प्राप्त है। सनातन धर्म के अनुयायी इसे माँ का दर्जा देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार भी गाय को शुभ फल देने वाला मानते हैं इसलिए गाय का स्टैच्यू घर में रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
7- ऊंट का स्टैच्यू- वास्तु शास्त्र में ऊंट का स्टैच्यू बेहद शुभ माना जाता है। आप अपने घर के ड्राइंग रूम या लिविंग रूम में ऊंट का स्टैच्यू रख सकते हैं। इससे आपको व्यापार और नौकरी दोनों में लाभ मिलेगा।
वास्तु के मुताबिक ये वो सात मूर्तियां हैं जिसे घर में रखने से घर का वास्तु दोष खत्म होता है और साथ ही घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की शुभता बढ़ती है। इन सात मूर्तियों में से कोई एक भी मूर्ति आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काफी है।
 

रहस्यमयी गुफा का नाम पाताल भुवनेश्वर है.

धर्म आध्यात्म February 9, 2023

 
K.W.N.S.- भारत में अगर मंदिरों और गुफा की बात की जाए, तो यहां कई रहस्यमयी मंदिर और गुफाएं है, जिनको आप शायद ही जानते होंगे. कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका वैज्ञानिक भी आज तक पता नहीं लगा पाएं हैं. इन्हीं मंदिरों में से एक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का मंदिर शामिल है. ऐसा कहा जाता है, कि इस गुफा में दुनिया के खत्म होने का रहस्य छुपा है. लेकिन इसकी सच्चाई क्या है, इसके बारे में किसी को भी नहीं पता है. तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में विस्तार से बताएंगे कि आखिर इसके पीछे का रहस्य क्या है।
इस रहस्यमयी गुफा का नाम पाताल भुवनेश्वर है. ये गुफा पिथौरागढ़ जिले में स्थित है. इस गुफा के बारे में सनातन धर्म में उल्लेख किया गया है. ऐसा माना जाता है कि इस गुफा में खत्म होने का राज छिपा है. ये बेहद रहस्यमयी गुफा है. आपको गुफा से होकर ही इस मंदिर में आना-जाना पड़ता है. यह गुफा समुद्र तल से 90 फीट गहरी है. अगर आप जब भी इस गुफा के अंदर मंदिर की तरफ जाएंगे, तो हाथी की कलाकृति आपको देखने को मिलेगी. कहते हैं, कि नागों के राजा अधिशेष ने दुनिया का भार अपने शीश पर संभाला हुआ है।
इस मंदिर में हैं चार दरवाजें
पुराणों के अनुसार, मंदिर में पहला रणद्वार, दूसरा पापद्वार, तीसरा धर्मद्वार और चौथा मोक्षद्वार है. ऐसा बताया जाता है कि जब रावण मरा था, तब पाप का दरवाजा बंद हो गया था और कुरुक्षेत्र में महाभारत के बाद रणद्वार बंद कर दिया गया था।
अगर स्कंदपुराण के अनुसार, बात कि जाए तो पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर में भगवान शिव रहते हैं. इसी मंदिर में सभी देवी-देवता भगवान शिव की पूजा करने भी आते हैं।
किसने किया इस मंदिर का खोज
पुराणों में इस रहस्यमयी मंदिर की खोज सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्णा ने की थी. त्रेतायुग में ऋतुपर्णा ही अयोध्या में शासन किया करते थे. तभी इसी स्थान पर नागों के राजा अधिशेष और ऋतुपर्णा की मुलाकात हुई थी और नागों के राजा इस गुफा के अंदर राजा ऋतुपर्णा को लेकर गए थे और उन्हें भगवान शिव के दर्शन मिले थे. इसके बाद पांडवों ने द्वापर युग में इस रहस्यमयी गुफा को खोजा था और यहां पूजा करने आया करते थे।
 

उज्जैन में एक ऐसा मन्दिर जहां भगवान काल भैरव को अर्पित किया जाता है मदिरा

धर्म आध्यात्म February 8, 2023

 

K.W.N.S.-हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष 16 नवम्बर के दिन भगवान काल भैरव जी का जन्मोत्सव धूम-धाम से मनाया जाएगा। बता दें कि प्रत्येक वर्ष काल भैरव जयंती मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Kaal Bhairav Ashtami) तिथि के दिन मनाई जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस तिथि पर भगवान शिव के रौद्र रूप का अवतरण हुआ था। इस विशेष दिन पर भगवान काल भैरव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही भैरवनाथ भगवान के भक्त लाखों की संख्या में देश के विभिन्न कोनों में स्थित भैरव मन्दिर में दर्शन के लिए उमड़ते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
भारत में भगवान काल भैरव के कई मन्दिर स्थापित हैं। जहां पूजा-पाठ करने के लिए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भक्त आते हैं। भगवान काल भैरव को तंत्र-मंत्र के स्वामी के रूप में भी जाना जाता है। उनकी पूजा में कई प्रकार के सामग्री का प्रयोग किया जाता है। लेकिन उज्जैन में एक ऐसा मन्दिर है जहां भगवान को मदिरा अर्पित की जाती है।
उज्जैन में है भगवान काल भैरव का यह प्रसिद्ध मन्दिर
मध्य प्रदेश के उज्जैन में विश्व-प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। लेकिन यहां भगवान काल भैरव का एक ऐसा मन्दिर भी स्थापित है, जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। भगवान भैरवनाथ का यह मन्दिर उज्जैन के भैरवगढ़ में शिप्रा नदी के किनारे बना हुआ है। यहां की खासियत है कि इस मन्दिर में भगवान भैरवनाथ की मूर्ति मदिरापान करती है। साथ ही यह भी मान्यता है कि उनकी पूजा के बिना बाबा महाकालेश्वर की पूजा भी अधूरी रह जाती है।
 

गायत्री मंत्र का जाप 

धर्म आध्यात्म February 7, 2023

 
K.W.N.S.-गायत्री मंत्र बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है. सफलता को सिद्ध करने के लिए इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है. अगर कोई भी व्यक्ति सच्चे मन से और विधिपूर्वक इस मंत्र का जाप करते है तो उसके जीवन के लिए ये बेहद कल्याणकारी साबित होता है. ये मंत्र रोग और शत्रु पर विजय दिलाने का कार्य करता है. अगर आप गायत्री मंत्र का जाप करते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. तो ऐसे में आइए आज हम आपको अपने इस लेख में गायत्री मंत्र के लाभ के बारे में बताएंगे और साथ ही गायत्री मंत्र के नियम के बारे में भी बताएंगे.
गायत्री मंत्र का जाप करने से होते हैं ये लाभ
इस मंत्र का जाप हर क्षेत्र में सफलता पाने के लिए सिद्ध माना गया है. मनोकामना पूर्ति के लिए गायत्री मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए. अगर आप नौकरी या फिर बिजनेस में किसी कारणवश परेशान हैं, तो गायत्री मंत्र का जाप जरूर करें. गायत्री मंत्र की खास बात यह है कि इस मंत्र का जार किसी विशेष समय की आवश्यकता नहीं होती है.
रोगों से मुक्ति पाने के लिए गायत्री मंत्र का जाप बेहद अचूक माना गया है.
गायत्री मंत्र का जाप करने से पहले शुभ मुहूर्त जानकर, एक कांसे के पात्र में जल भरें और फिर लाल आसन पर बैठ जाएं.
गायत्री मंत्र के साथ ऐं ह्रीं क्लीं का संपुट लगाकर जाप करें. इसके बाद जाप करने के बाद उस पात्र में भरे जल का सेवन करें. इससे रोगों से छुटकारा मिलता है.
गायत्री मंत्र के नियम
अगर आप गायत्री मंत्र का जाप कर रहे हैं, तो गुरु के मार्गदर्शन के बिना न करें.
इस मंत्र का करने के लिए सबसे पहले स्नान करें.
अगर आप इस मंत्र का जाप ब्रह्म मुहूर्त में करते हैं, तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही इस मंत्र का जाप करें.
अगर आप इस मंत्र का जाप शाम को कर रहे हैं, पश्चिम दिशा की ओर मुख करके इस मंत्र का जाप करें.
 

 सुहागन और कुवांरी लड़कियों के लिए किस दिन बाल धोना होता है शुभ 

धर्म आध्यात्म February 6, 2023

 

K.W.N.S.-हिंदू धर्म में नाखून काटने से लेकर बाल धोने तक के बारे में बताया गया है. जिसमें शुभ और अशुभ दिन के बारे में बताए गए हैं. वहीं विवाहित महिलाओं के मामले में ये सभी नियम अलग-अलग होते हैं. सुहागन और कुवांरी लड़कियों के लिए बाल धोने के दिन भी अलग-अलग बताए गए हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी महिलाएं बाल धोती हैं, उनके सौंदर्य के साथ उनके व्यक्तित्व में भी बढ़ोतरी होती है और घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है. लेकिन अगर आपने गलत दिन बाल धो लिया तो जीवन में नकारात्मकता भी बढ़ सकती है. तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में दिन के अनुसार बताएंगे कि किस दिन बाल धोना शुभ होता है, साथ ही इसका क्या असर पड़ता है।
किस दिन बाल धोना होता है शुभ और क्या होता है असर ?
1. दिन सोमवार
हिंदू धर्म में सोमवार के दिन सुहागन महिलाओं को बाल नहीं धोना चाहिए. इससे सुहागन महिलाओं के परिवार की तरक्की में रुकावट आती है. इस दिन कुंवारी लड़कियां बाल धो सकती हैं।
2. दिन मंगलवार
मंगलवार के दिन भी सुहागन महिलाओं को सिर नहीं धोना चाहिए. इससे घर में नकारात्मकता आती है. इसके अलावा इस दिन कुवांरी लड़कियों को भी बाल नहीं धोना चाहिए।
3. दिन बुधवार
बुधवार के दिन सुहागन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां बाल धो सकती हैं. इस दिन बाल धोने से घर में सुख-समृद्धि आती है और व्यापार में वृद्धि होती है।
4. दिन गुरुवार
ऐसा माना जाता है, कि गुरुवार के दिन किसी को भी बाल नहीं धोना चाहिए. इससे उम्र कम हो जाती है और आर्थिक तंगी भई झेलनी पड़ती है. धन हानि होने की भी संभावना रहती है।
5. दिन शुक्रवार
धार्मिक मान्यताओं के अनुासर, शुक्रवार के दिन बाल धोना बेहद शुभ माना जाता है. इससे घर में मां लक्ष्मी और शुक्र देव की कृपा बनी रहती है. पैसे मिलने की संभवाना भी रहती है।
6. दिन शनिवार
शनिवार के दिन बाल धोना अशुभ होता है. इस दिन किसी को भी बाल नहीं धोना चाहिए।
7. दिन रविवार
रविवार के दिन बाल धोना अच्छा माना जाता है. लेकिन सुहागन महिलाओं को इस दिन बाल नहीं धोना चाहिए. इस दिन कुंवारी कन्या और पुरुष बाल धो सकते हैं।
 

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