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Browsing: धर्म आध्यात्म

 सुहागन और कुवांरी लड़कियों के लिए किस दिन बाल धोना होता है शुभ 

धर्म आध्यात्म February 6, 2023

 

K.W.N.S.-हिंदू धर्म में नाखून काटने से लेकर बाल धोने तक के बारे में बताया गया है. जिसमें शुभ और अशुभ दिन के बारे में बताए गए हैं. वहीं विवाहित महिलाओं के मामले में ये सभी नियम अलग-अलग होते हैं. सुहागन और कुवांरी लड़कियों के लिए बाल धोने के दिन भी अलग-अलग बताए गए हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी महिलाएं बाल धोती हैं, उनके सौंदर्य के साथ उनके व्यक्तित्व में भी बढ़ोतरी होती है और घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है. लेकिन अगर आपने गलत दिन बाल धो लिया तो जीवन में नकारात्मकता भी बढ़ सकती है. तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में दिन के अनुसार बताएंगे कि किस दिन बाल धोना शुभ होता है, साथ ही इसका क्या असर पड़ता है।
किस दिन बाल धोना होता है शुभ और क्या होता है असर ?
1. दिन सोमवार
हिंदू धर्म में सोमवार के दिन सुहागन महिलाओं को बाल नहीं धोना चाहिए. इससे सुहागन महिलाओं के परिवार की तरक्की में रुकावट आती है. इस दिन कुंवारी लड़कियां बाल धो सकती हैं।
2. दिन मंगलवार
मंगलवार के दिन भी सुहागन महिलाओं को सिर नहीं धोना चाहिए. इससे घर में नकारात्मकता आती है. इसके अलावा इस दिन कुवांरी लड़कियों को भी बाल नहीं धोना चाहिए।
3. दिन बुधवार
बुधवार के दिन सुहागन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां बाल धो सकती हैं. इस दिन बाल धोने से घर में सुख-समृद्धि आती है और व्यापार में वृद्धि होती है।
4. दिन गुरुवार
ऐसा माना जाता है, कि गुरुवार के दिन किसी को भी बाल नहीं धोना चाहिए. इससे उम्र कम हो जाती है और आर्थिक तंगी भई झेलनी पड़ती है. धन हानि होने की भी संभावना रहती है।
5. दिन शुक्रवार
धार्मिक मान्यताओं के अनुासर, शुक्रवार के दिन बाल धोना बेहद शुभ माना जाता है. इससे घर में मां लक्ष्मी और शुक्र देव की कृपा बनी रहती है. पैसे मिलने की संभवाना भी रहती है।
6. दिन शनिवार
शनिवार के दिन बाल धोना अशुभ होता है. इस दिन किसी को भी बाल नहीं धोना चाहिए।
7. दिन रविवार
रविवार के दिन बाल धोना अच्छा माना जाता है. लेकिन सुहागन महिलाओं को इस दिन बाल नहीं धोना चाहिए. इस दिन कुंवारी कन्या और पुरुष बाल धो सकते हैं।
 

भगवान हरि विष्णु ने आत्महत्या को परमात्मा का अपमान बताया, जाने अकाल मृत्यु के बारे में 

धर्म आध्यात्म February 4, 2023

 
 
 
 K.W.N.S.- सनातन धर्म में वैसे तो कई सारे ग्रंथ और पुराण है जिनमें ज्ञान व मानव जीवन से जुड़ी अहम बातों का वर्णन मिलता है लेकिन गरुड़ पुराण बेहद खास होता है ये 18 महापुराणों में से एक माना गया है इसमें मानव जीवन, मृत्यु और मृत्य के बाद आत्मा के सफर के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है। गरुड़ पुराण ग्रंथ में भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ की बातचीत का वर्णन है जिसमें उन्होंने जीवन, मृत्यु, स्वर्ग नरक और मृत्यु के बाद आत्मा के बारे में बताया गया, ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि अकाल मृत्यु क्या होती है अगर आप भी इस शब्द से अब तक अनजान है तो आज हम आपको अकाल मृत्यु के बारे में विस्तार पूर्वक बता रहे है जो कि गरुड़ पुराण से लिया गया है तो आइए जानते है।
क्या होती है अकाल मृत्यु-
गरुड़ पुराण के अनुसार सिंहावलोकन अध्याय में वर्णित किया गया है कि अगर किसी की मृत्यु भूख से पीड़ित होकर, हिंसक प्राणी द्वारा, फांसी लगाकर, विष पीकर, आग में जलन, जल में डूबने, किसी विषैले जीव के काटने, किसी दुर्घटना के कारण या फिर आत्महत्या करने से होती है तो उसे अकाल मृत्यु कहा जा सकता है। गरुड़ पुराण में इन सभी प्रकार के मृत्यु में आत्महत्या को सबसे घृणित और निंदनीय अकाल मृत्यु माना गया है। अगर हम शास्त्रों की बात करें तो भगवान श्री हरि विष्णु ने आत्महत्या को परमात्मा का अपमान करने के बराबर बताया है, ऐसे में कहा गया ​है कि परिस्थिति कैसी भी हो मनुष्य या किसी भी जीव को आत्महत्या नहीं करनी चाहिए वरना वो ईश्वर का दोष कहलाता है। ऐसा करने वाले को ईश्वर बड़ी कठोर सजा देते है।
 

शालिग्राम की पूजा करने के लिए करें इन नियमों का पालन

धर्म आध्यात्म February 3, 2023

 
K.W.N.S.- हिंदू धर्म में शालिग्राम का विशेष महत्व है. शालिग्राम को साक्षात भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. शैव संस्कृति के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव जहां-जहां से गुजरे थे, तब उनके पैरों के नीचे आने वाले कंकड़-पत्थर शालिग्राम का रूप ले लिए थे. बता दें, शालिग्राम कुल 33 प्रकार के होते हैं. जिनमें से 24 प्रकार के शालिग्राम को भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है और 24 अवतारों से माना जाता है. इसका साथ ये भी कहा जाता है, जिस भी व्यक्ति के घर शालिग्राम होता है, उसके जीवन में कभी दुख, कष्ट, परेशानियां नहीं आती हैं. लेकिन अगर आपके घर है, तो उससे संबंधित कुछ नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है, तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में शालिग्राम से संबंधित कुछ नियमों के बारे में बताएंगे, जिसका अगर आपने पालन नहीं किया तो आपको कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
कैसे होता है शालिग्राम का निर्माण
क्या आज जानते हैं, नेपाल के गंडकी नामक नदी में शालिग्राम के पत्थर पाए जाते हैं. इस पत्थर में एक चक्र होता है. उस चक्र का निर्माण एक कीड़े से होता है, जो उसी नदी में खासकर पाया जाता है।
शालिग्राम की पूजा करने के लिए करें इन नियमों का पालन
1.आचरण शुद्ध रखना चाहिए
शालिग्राम वैभव धर्म का सबसे बड़ा रूप माना जाता है. ये सात्विकता का प्रतीक माना जाता है. इनके पूजन से विचार और आचार में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. अगर आप मांस, मदिरा का सेवन करते हैं, तो आपको भूलकर भी शालिग्राम का पूजा नहीं करना चाहिए।
2.रोजाना करें पूजन
रोग, यात्रा और महावारी के अलावा आपको शालिग्राम की पूजा प्रतिदिन करनी चाहिए.
3.एक ही शालिग्राम होना चाहिए
ध्यान रहे, कि घर में केवल एक ही शालीग्राम होना चाहिए.
4.शालिग्राम को पंचामृत से कराएं स्नान
पूजा करने से पहले शालिग्राम को रोजाना पंचामृत से स्नान कराना चाहिए.
5.चंदन और तुलसी से करें पूजा
शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी पत्ता रखें. ध्यान रहे, चंदन की एक लकड़ी को लें, उसे शिला पर घिसे और फिर उससे शालिग्राम को चंदन लगाएं।
 

गण्डकी नदी काली और त्रिशूली नदियों के संगम से बनी 

धर्म आध्यात्म February 2, 2023

 

K.W.N.S.-गंडक या गण्डकी नदी काली और त्रिशूली नदियों के संगम से बनी है, जो नेपाल की उच्च हिमालय पर्वतश्रेणी से निकलकर उत्तर भारत में बहती है। संगम से भारतीय सीमा तक इसे नारायणी नदी भी कहते हैं। बूढ़ी गंडक नदी एक समानांतर धारा है। यह नदी दामोदर कुंड से निकलकर बिहार के सोनपुर में गंगा नदी में मिल जाती है। यानी सैंकड़ों किलोमीटर का घुमावदार सफर तय करके पटना के सामने गंगा नदी में मिल जाती है। आओ जानते हैं इसका पौराणिक महत्व।
महाभारत के सभापर्व में इस नदी का उल्लेख मिलता है- ‘तत: स गंडकाञ्नछूरोविदेहान् भरतर्षभ:, विजित्याल्पेन कालेनदशार्णानजयत प्रभु:।’ सदानीरा जिसका उल्लेख प्राचीन साहित्य में अनेक बार आया है, संभवत: गंडकी ही है- ‘गंडकींच महाशोणां सदानीरां तथैव थ।’- 29; 4-5। इस नदी का तीर्थरूप में भी वर्णन किया गया है- ‘गंडकीं तु सभासाद्य सर्वतीर्थ जलोद्भवाम् वाजपेयमवाप्नोति सूर्यलोकं च गच्छति’।
नदी का परिचय : हिमालय पर्वत श्रेणियों के धौलागिरि पर्वत के मुक्तिधाम से निकली गंडक नदी गंगा की सप्तधारा में से एक मानी जाती है। नदी मूलरू से तिब्बत से निकलकर नेपाल होते हुए उत्तर प्रदेश के महराजगंज, कुशीनगर होते हुए बिहार के सोनपुर के पास गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी को बड़ी गंडक, गंडकी, शालिग्रामी, नारायणी, सप्तगंडकी आदि नामों से जानते हैं। करीब 1310 किलोमीटर के लंबे सफर में कई धार्मिक स्थल हैं।
शालिग्राम : शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ, काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और ज्योतियुक्त शालिग्राम का पाया जाना तो और भी दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है। देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम व तुलसी का विवाह संपन्न कर मांगलिक कार्यों का प्रारंभ किया जाता है। हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार इस दिन तुलसी-शालिग्राम विवाह करने से अपार पुण्य प्राप्त होता है।
गंडकी और अयोध्या : इस नदी से तो विशालकाय शिलाएं अयोध्या में लाई जा रही है जिनसे श्रीराम और सीता की मूर्तियां बनाई जाएगी। दावा किया जा रहा है कि ये शिलाएं करीब 6 करोड़ साल पुरानी हैं। एक शिला का वजन 26 टन जबकि दूसरे का 14 टन है। यानी दोनों शिलाओं का वजन 40 टन है। गंडक की एक सहायक नदी काली गंडकी नदी है। इसे शालिग्रामी नदी भी कहा जाता है। इसी शालिग्राम नदी से यह शिलाएं निकाली गई हैं।
 

भगवान गणेश के इस कुबेर मंत्र का करें जाप

धर्म आध्यात्म February 1, 2023

 
 K.W.N.S.-बुधवार के दिन गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. क्योंकि बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन इनकी पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और सभी संकटों का नाश हो जाता है. बुधवार के दिन इनकी आरती करने से और चालिसा का पाठ करने से आपकी सभी मनोकामना भी पूर्ण हो जाती है. तो ऐसे में आइए आज हम आपको अपने इस लेख में कुछ चमत्कारिक मंत्रों के बारे में बताएंगे जिसे करने से आपको सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी और आपके जीवन के सभी संकट दूर हो जाएंगे।
भगवान गणेश के इस कुबेर मंत्र का करें जाप
1.ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
अगर आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, तो आपको इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए. इससे व्यक्ति को कर्ज से भी छुटकारा मिलता है और धन के नए स्त्रोत भी बनते हैं. इसके साथ आपके सभी काम बिना किसी बाधा के पूरे हो जाते हैं।
2.भगवान गणेश के गायत्री मंत्र का करें जाप
ये भगवान गणेश का बेहद प्रभावशाली मंत्र है. इस मंत्र का रोजाना 108 बार जाप करना चाहिए और इस मंत्र का बोलकर उच्चारण कर जाप करें. इससे भगवान गणेश बेहद प्रसन्न होते हैं. इस मंत्र का 11 दिन लगातार जाप करना चाहिए।
3.भगवान गणेश के तांत्रिक मंत्र का जाप करें
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।।
इस मंत्र का रोजाना 108 बार जाप करना चाहिए. इससे व्यक्ति के जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं.इस मंत्र का जाप भगवान शिव, गणेश और मां पार्वती की पूजा करने के बाद करना चाहिए।
भगवान गणेश की पूजा करने के बाद करें आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
 

महादेव के अद्भुत दर्शन करना चाहते हैं तो एक बार पाताल भुवनेश्वर जरूर जाएं। आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ

धर्म आध्यात्म January 31, 2023

 

K.W.N.S.-पाताल भुवनेश्वर: देवों के देव महादेव को कई नामों से जाना जाता है। वे भोला, शंकर, शिव, नटराज, नीलकंठ, पशुपतिनाथ, त्रिनेत्रधारी, रुद्र आदि नामों से जाने जाते हैं। धर्म शास्त्रों में निहित है कि महादेव अरण्य संस्कृति के प्रमुख देवता हैं। उनका न आदि है और न अंत। ये अनंत और सनातन हैं। सनातन धर्म में शैव संप्रदाय के लोग भगवान शिव की गहन पूजा करते हैं। वहीं आम लोग सोमवार, शिवरात्रि और सावन के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं। भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। इस मौके पर लोग शिव मंदिर जाते हैं। वहीं, देवों के देव महादेव के दर्शन के लिए लोग देश के अलग-अलग स्थानों पर धार्मिक तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। अगर आप भी महादेव के अद्भुत दर्शन करना चाहते हैं तो एक बार पाताल भुवनेश्वर जरूर जाएं। आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ- पाताल भुवनेश्वर कहाँ है?
देवताओं की भूमि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में पाताल भुवनेश्वर है। गंगोलीहाट राष्ट्रीय राजमार्ग 309ए से जुड़ा है। देहरादून से पिथौरागढ़ के लिए बस, रेल और हवाई सेवा उपलब्ध है। आप अपनी सुविधानुसार पिथौरागढ़ पहुंच सकते हैं। वहां से आप सड़क मार्ग से गंगोलीहाट जा सकते हैं।
पाताल भुवनेश्वर धार्मिक स्थल
पाताल भुवनेश्वर गुफा गंगोलीहाट में जमीन से 90 फीट नीचे स्थित है। कहा जाता है कि इस गुफा में स्थित शिवलिंग का आकार बढ़ता जा रहा है। जिस दिन यह शिवलिंग छत को छू लेगा। उस दिन सृष्टि का अंत होगा। सनातन शास्त्रों में उल्लेख है कि राजा रितुपर्णा ने पाताल भुवनेश्वर गुफा की खोज की थी। सूर्यवंश के राजा रितुपर्णा का शासन काल त्रेता युग में था। स्कंद पुराण में भी पाताल भुवनेश्वर का वर्णन है कि देवों के देव महादेव यहां निवास करते हैं और देवी-देवता उनकी स्तुति करने आते हैं। खोज के दौरान राजा रितुपर्णा पहली बार पाताल भुवनेश्वर पहुंचे। तभी उन्हें देवों के देव महादेव के दर्शन हुए। आप लोहे की जंजीरों की मदद से गुफा में प्रवेश कर सकते हैं। पत्थरों से बनी गुफा में पानी रिसता रहता है। पाताल भुवनेश्वर एक रहस्यमयी जगह है।
 

यह दो दिन भूलकर भी न जलाएं अगरबत्ती, वरना हो जाएंगे कंगाल

धर्म आध्यात्म January 30, 2023

 
 
K.W.N.S.-हिंदू धर्म में देवी-देवता की पूजा करते समय सिंदूर, फूल, माला, नैवेद्य, फल, अक्षत, चंदन से लेकर अगरबत्ती, धूप बत्ती जलाते हैं। हर एक चीज का अपना अलग-अलग महत्व है। कुछ पूजा सामग्री देवी-देवता से समर्पित होते हैं। लेकिन एक चीज है जो सभी देवी-देवता के समक्ष इस्तेमाल की जाती है। वह है अगरबत्ती। आमतौर पर अगरबत्ती का इस्तेमाल अधिकतर घरों में किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगरबत्ती को सप्ताह के हर एक दिन नहीं जलाना चाहिए।
इस दिन न जलाएं अगरबत्ती
वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंगलवार और रविवार के दिन पूजा के समय अगरबत्ती नहीं जलाना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन अगरबत्ती जलाने से सुख-समृद्धि पर बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही पैसों की तंगी का सामना करना पड़ सकता है।अगरबत्ती बांस से बनी होती है। इसलिए रविवार और मंगलवार के दिन बांस नहीं जलाना चाहिए। ऐसा करने से संतान के ऊपर भी बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही परिवार में लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं।
अगरबत्ती न जलाएं, तो है बेहतर
वास्तु शास्त्र , धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बांस को वंश का प्रतीक माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि बांस को कभी नहीं जलाना चाहिए। इससे वंश की वृद्धि पर नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही पितृदोष लगता है। इसलिए कोशिश करें कि बांस से बनी हुई अगरबत्ती को न जलाएं, तो बेहतर है।
पड़ता है भाग्य पर बुरा असर
फेंगशुई के अनुसार, बांस जलाने से भाग्य पर बुरा असर पड़ता है। घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने के साथ हर व्यक्ति की तरक्की पर बुरा असर पड़ता है।
अगरबत्ती की बजाय करें धूपबत्ती का इस्तेमाल
शास्त्रों के अनुसार, अगरबत्ती के बदले आप चाहे तो धूपबत्ती जला सकते हैं। क्योंकि इसमें बांस का इस्तेमाल नहीं होता है।

घर के लगाएं ये शुभ चिह्न

धर्म आध्यात्म January 29, 2023

 
K.W.N.S.-घर का मंदिर सबसे पवित्र और शुद्ध मानी जाती है. घर के पूजास्थल में सभी देवी-देवता वास करते हैं, उनका रोजाना पूजा करने से घर का वातावरण सुखद और सकारात्मक रहता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का पूजा स्थल हमेशा ईशानकोण दिशा में होना चाहिए, इससे शुभ फल की प्राप्ति की होती है. वहीं वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के पूजास्थल पर कुछ ऐसे चिह्नों को लगाना बेहद शुभ होता है, इससे कई लाभ मिलते हैं और सभी काम मंगल होते हैं. तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख में कुछ ऐसे चिह्नों के बारे में बताएंगे, जिसे अपने घर में लगाने से आपके सभी काम मंगलमय होंगे और आपके घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा.
घर के लगाएं ये शुभ चिह्न
1.घर में लगाएं ओम का चिह्न
घर के पूजास्थल पर आप ओम चिह्न केसर या फिर चंदन से बनाएं. ऐसी मान्यता है कि ऊँ बनाने से और इसका जाप करने से एकाग्रता बनी रहती है. शुभ संचार की प्राप्ति होती है. घर-परिवार में खुशी का माहौल रहता है. इससे मान-सम्मान में भी बढ़ोतरी होती है. आपके जीवन में चल रही सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और तरक्की के सभी रास्ते खुल जाते हैं.
2.घर में बनाएं स्वास्तिक का चिह्न
घर के मुख्य द्वार ये फिर पूजा स्थल पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं और उसके नीचे शुभ-लाभ लिखें. ऐसी मान्यता है कि घर में सकारात्मकता का संचार होता है. घर के वास्तु दोष दूर हो जाते हैं. ध्यान रहे, जब आप स्वास्तिक का चिह्न बना रहे हैं, 9 उंगली लंबा और चौड़ा होना चाहिए. स्वास्तिक घर के अशुभ प्रभावों को कम करता है. मां लक्ष्मी की कृपा बनीं रहती है और करीयर में तरक्की के योग बनते हैं.
3.घर में बनाएं श्री का चिह्न
घर में श्री का चिह्न बनाने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. आप श्री सिंदूर या फिर केसर से बनाएं. इससे आपके घर कभी धन-धान्य में कमी नहीं होती है. पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आती है. जिसके भी घर मे श्री का चिह्न होता है, उनके घर कभी पैसों की कमी नहीं होती है.
4.घर में बनाएं मंगल कलश का चिह्न
घर के पूजा स्थल पर मंगल कलश का चिह्न बनाएं. इससे घर का वातावरण शुद्ध रहता है और आपके किसी भी काम में कोई अड़चन नहीं आती है. घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. पारिवारिक संबंधों में मजबूती आती है.
5.घर में बनाएं गाय का खुर
घर के पूजाघर में गाय का खुर और लक्ष्मी जी का पैर बनाएं. यह मंगल का प्रतीक माना जाता है. गाय का खुर बनाने से देवी-देवता की कृपा बनी रहती है और आपके सभी काम मंगलमय होते हैं. इससे आपकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है.
 

गृह क्लेश से निजात पाने के लिए करें ये छोटा सा उपाय, घर में बढ़ेगी पॉजिटिविटी

धर्म आध्यात्म January 22, 2023

वास्तु शास्त्र में मनुष्य जीवन से जुड़ी कुछ समस्याओं का समाधान मिल जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारे घर में रखी हर एक चीज हमारे जीवन पर असर डालती है। फिर चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक प्रभाव हो, इसलिए अपने घर में रखी छोटी से छोटी वस्तुओं की जगह व दिशाओं पर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कुछ गलतियों की वजह से हमारे घर में वास्तु दोष भी बढ़ सकते हैं।

बता दें, कई बार घर में मौजूद इन वास्तु दोषों की वजह से घर में हमेशा कलह रहता है, घर में आर्थिक समस्या बनी रहती है। तो अगर आपके घर पर भी आए दिन लड़ाई-झगड़ा होता है और पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध अच्छे नहीं रहते तो आपको अपने आसपास की कुछ चीजों को बदलने की जरूरत है। तो आइए वास्तु के अनुसार जानते हैं क्या उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

घर के मुख्य द्वार पर करें ये उपाय

अगर आप अपने घर से वास्तु दोष दूर करना चाहते हैं तो इसके लिए मुख्य द्वार से जुड़ा उपाय आपके लिए अच्छा हो सकता है। इसके लिए आप सुबह के समय थोड़े से जल में हल्दी मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर इस पानी के छींटे मारें।

इसके बाद द्वार के दोनों तरफ साफ जल प्रवाहित करें। इस उपाय से आपके घर में नकारात्मकता प्रवेश नहीं करेगी और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगेगा।

वास्तु दोष के समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए व घर का वास्तु सही रखने के लिए आप हर दिन सुबह घर के मंदिर में धूप जलाएं।

मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें। इसके आसपास किसी तरह की गंदगी ना रखें, जिस घर में गंदगी होती है वहां लक्ष्मी माता कभी नहीं टिकती हैं।

धन धान्य और ऐश्वर्य की वृद्धि के लिए तिजोरी में रखनी चाहिए ये चीजे

धर्म आध्यात्म January 21, 2023

K.W.N.S.-हर किसी की चाहत होती है कि घर में खुशियां ही खुशियां आएं और कभी भी धन की कमी का सामना न करना पड़े। इसके लिए कड़ी मेहनत करने के साथ-साथ कई तरह के जीवन में परिवर्तन करते हैं। लेकिन कई बार अधिक धन लाभ होने के बाद भी पैसों की तंगी का सामना करना पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कई बार कुछ कारणों से पैसों का बेवजह खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में चाहे तो तिजोरी में कुछ चीजों को रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तिजोरी में इनमें से कोई एक चीज रखने से ही मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार तिजोरी में कौन सी चीजें रखना होगा शुभ।
यंत्र
धन धान्य और ऐश्वर्य की वृद्धि के लिए यंत्र की स्थापना करना शुभ माना जाता है। पूजा घर में तो आप लक्ष्मी, कुबेर यंत्र आदि की स्थापना करते हैं। लेकिन आप चाहे तो तिजोरी या फिर अलमारी में ऐश्वर्य वृद्धि या धनदा यंत्र की स्थापना कर लें। ऐसा करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होगी।
सुपारी
सुपारी का विशेष महत्व है। पूजा पाठ के समय सुपारी का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। सुपारी को गौरी और गणेश के अलावा ब्रह्मदेव, यमदेव, इंद्रदेव और वरुण देव का प्रतीक माना गया है। इसलिए एक छोटी सुपारी लेकर विधिवत पूजा करके तिजोरी या अलमारी में रख लें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी हमेशा वास करेगी।
भोजपत्र
अखंडित भोजपत्र का इस्तेमाल करके भी आप पैसों की तंगी से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए लाल चंदन में पानी से घोल लें। इसके बाद मोर पंख की मदद से भोजपत्र में ‘श्रीं’ लिखें। इसके बाद इसे अपनी तिजोरी में रख लें।
हल्दी की गांठ
हिंदू धर्म में हल्दी का विशेष महत्व है। आप चाहे तो इस्तेमाल करके आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। इसके लिए लाल रंग के एक कपड़े में 5 हल्दी की गांठ बांध लें। इसके बाद इसे तिजोरी या फिर अलमारी में रख दें।
पीली कौड़ी
वास्तु शास्त्र के अनुसार, पांच कौड़ी एक पीले या फिर लाल रंग के कपड़े में बांध लें। इसके बाद इसे मां लक्ष्मी को अर्पित करके विधिवत पूजा करें। इसके बाद इसे अलमारी या फिर तिजोरी में रख दें।

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