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Home » धर्म आध्यात्म » Page 10

Browsing: धर्म आध्यात्म

पुत्र की आत्मा से मिला था चित्रकेतु को ज्ञान, जानिए क्या है यह कहानी 

धर्म आध्यात्म December 21, 2022

 K.W.N.S.-चित्रकेतु अंगिरा ऋषि की कथा भारतीय दर्शन की व्याख्या करने वाली कथाओं में राजा चित्रकेतु की कथा अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिनसे ऋषि अंगिरा ने तत्त्व ज्ञान की प्राप्ति के लिए एक पुत्र को जन्म दिया। फिर उसी पुत्र की मृत्यु के बाद चित्रकेतु को उनकी आत्मा से ज्ञान प्राप्त हुआ। हम आपको वही कहानी बताने जा रहे हैं जो भारतीय संस्कृति की उत्पत्ति की व्याख्या करती है। राजा चित्रकेतु का मोह पंडित रामचंद्र जोशी के अनुसार पौराणिक कथा के अनुसार राजा चित्रकेतु शूरसेन साम्राज्य के राजा थे। उनकी बहुत सुंदर रानियां थीं। लेकिन किसी भी रानियों के संतान नहीं थी। वंश के नाश की चिंता से राजा ठीक से सो भी नहीं पाता था। एक बार ऋषि अंगिरा राजा को ज्ञान उपदेश देने आए। लेकिन उसने देखा कि राजा मोहवश एक पुत्र चाहता है। 
ऋषि ने सोचा कि जब तक राजा अपने बेटे के वियोग से दुखी नहीं होंगे तब तक वह बेहतर नहीं होंगे। राजा चित्रकेतु के अनुरोध पर ऋषि ने त्वष्टा देवता का यज्ञ किया और रानी को उनका प्रसाद दिया। बोले, इस प्रसाद से जो पुत्र उत्पन्न होगा, वह तुम्हें सुख-दुःख दोनों देगा। एक राजा का जन्म और मृत्यु यज्ञ के प्रसाद से राजा चित्रकेतु की रानी को एक पुत्र की प्राप्ति हुई। इससे राजा और प्रजा दोनों प्रसन्न थे। लेकिन अब राजा को रानी से प्यार हो गया जिसने उसे एक बेटा पैदा किया। इससे ईर्ष्यावश शेष रानियों ने पुत्र को जहर देकर मार डाला। पुत्र की मृत्यु के बाद राजा चित्रकेतु पागल हो गए। 
 चित्रकेतु को पुत्र की आत्मा से ज्ञान प्राप्त होता है राजा चित्रकेतु के पुत्र की मृत्यु के बाद ऋषि अंगिरा फिर उनके पास आए। देवर्षि नारद भी उनके साथ थे। दोनों ने चित्रकेतु को समझाया कि संसार में सभी रिश्ते क्षणभंगुर हैं और स्वप्न के समान कल्पना हैं। शरीर न तो जन्म से पहले है और न बाद में होगा, इसलिए शोक मत करो। लेकिन जब राजा नहीं माने तो देवर्षि नारद ने अपने पुत्र की आत्मा का आह्वान किया। फिर उससे पूछा कि जब माता-पिता आपकी चिंता करते हैं तो आप उनके पास क्यों नहीं रहते? इस पर आत्मा ने पूछा कि मेरे माता-पिता किस जन्म में थे? मैं अपने कर्मों का फल भोगने के लिए अनंत काल से देवताओं, मनुष्यों, पशुओं, पक्षियों आदि के रूप में जन्म लेता आ रहा हूं। जिसमें सभी प्राणी एक-दूसरे के पिता और पुत्र, कभी शत्रु और मित्र बन जाते हैं। ये लोग मुझे अपना पुत्र समझकर रोने के स्थान पर अपना शत्रु समझकर प्रसन्न क्यों नहीं होते? आत्मा सनातन है जो कभी नहीं मरती और शरीर क्षणभंगुर है जो सदा मरता है, फिर ये लोग व्यर्थ क्यों रोते हैं? 
यह कहकर आत्मा चली गई। लेकिन जीवित आत्मा के इन प्रश्नों से राजा चित्रकेतु का मोह भंग हो गया। अंगिरा और देवर्षि ने ऋषि नारद से भगवत प्रथा निर्देश प्राप्त करने के बाद, उन्होंने भगवान की पूजा शुरू कर दी। जिन्होंने बाद में भगवान नारायण के दर्शन किए। बाद में चित्रकेतु ने पार्वती की आज्ञा का पालन नहीं किया और वृत्रासुर भी एक श्राप के कारण राक्षस बन गया।
 

आज इस मंत्र पढ़ लेंगे तो सब संकट कट जाएंगे 

धर्म आध्यात्म December 20, 2022

K.W.N.S.-पुराणों और आगमों में हनुमानजी को ग्यारहवां रुद्रावतार और भगवान राम का अनन्य भक्त बताया गया है। जिस पर भी उनकी कृपा हो जाती है, वह इस भव सागर से पार हो जाता है। उसके सभी संकट, सभी समस्याएं पलक झपकते दूर हो जाती हैं। यूं तो बजरंग बली को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में कई उपाय बताए गए हैं। इनमें से भी कुछ उपाय ऐसे हैं जो तुरंत असर दिखाते हैं और उन्हें करते ही लाभ होता है। जानिए ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में 
प्रेतबाधा, भूत-पिशाच आदि नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए  मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में जाएं। वहां पर उनका अभिषेक करें एवं उन्हें लाल पुष्प, माला, जनेऊ, नारियल, लड्डू-पान आदि अर्पित करें। धूप बत्ती एवं दीपक जलाएं। इसके बाद वहीं पर बैठकर उनके महामंत्र “ॐ दक्षिणमुखाय पच्चमुख हनुमते करालबदनाय” का 11 माला (108 मनकों वाली) जप करें। इस उपाय को करते ही कोई भी नेगेटिव एनर्जी हो, वह तुरंत आपका पीछा छोड़ देगी। 
 नौकरी पाने के लिए
 यदि कोई व्यक्ति बेरोजगार है और एक अच्छी नौकरी ढूंढ रहा है तो यह उपाय करना चाहिए। उपाय में उसे मंगलवार के दिन सुबह हनुमानजी की विधिवत पूजा कर “मर्कटेश महोत्साह सर्वशोक विनाशन” का 108 बार पाठ करें। इससे नौकरी लगने के योग बनने लगते हैं और शीघ्र नौकरी मिलती है। समस्त संकटों से मुक्ति के लिए हनुमानजी का एक उपाय ऐसा भी है जो हर संकट की काट है। व्यक्ति पर चाहे जिस भी तरह का संकट आया हो, इससे दूर हो जाता है। आपको मंगलवार के दिन हनुमानचालिसा की चौपाई “जै जै जै हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं” का 108 बार जप करें। इसके बाद इस उपाय को तब तक करते रहें जब तक आपकी समस्या दूर न हो जाएं।
 

घर के मंदिर में किस धातु की मूर्ति को रखना चाहिए, माना जाता है अशुद्ध

धर्म आध्यात्म December 19, 2022

 
K.W.N.S.-घर के मंदिर में अक्सर उन चीजों को जगह दी जाती है, जिन्हें हम सच्चे मन से मानते हैं. अक्सर आपने देखा होगा कुछ लोग अपने घर के मंदिर में मूर्तियां रखते हैं. वह मूर्ति किसी भी धातु की हो सकती हैं. ऐसे में लोगों को पता होना चाहिए कि अपने घर के मंदिर में किस धातु की मूर्ति को रखना चाहिए और किस धातु की मूर्ति को नहीं बनवाना चाहिए. आज का हमारा लेख इसी विषय पर है. आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आप अपने घर में किस धातु की मूर्ति को रख सकते हैं. पढ़ते हैं आगे…
घर में रखे इस धातु की मूर्ति
 आप अपने घर में चांदी की मूर्ति रख सकते हैं. तांबे की मूर्ति की पूजा सोने की मूर्ति की पूजा के बराबर होती है. ऐसे में आप तांबे की मूर्ति अपने घर में रख सकते हैं. इसके अलावा पीतल की मूर्तियां भी अपने घर के मंदिर में रख सकते हैं. इसकी पूजा से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है. आप अपने घर में सोने और चांदी की मूर्तियां भी रख सकते हैं. इन मूर्तियों की यदि नियमित रूप से पूजा की जाए तो घर में न केवल सकारात्मक ऊर्जा आती है बल्कि घर में उर्जा का संचार भी होता है. अपने घर में किस धातु की मूर्ति ना रखें आप अपने घर में स्टील, एल्युमीनियम और लोहे की मूर्ति को ना रखें. यह मूर्तियां अशुद्ध मानी जाती हैं. इन मूर्तियों की पूजा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा सकती है. ऐसे में यदि आप अपने घर में नयी मूर्ती ला रहे हैं तो सबसे पहले उनकी धातु के बारे में जान लें.
 

उल्लू का दिखना शुभ याअशुभ है, जानिए कब और कैसे?

धर्म आध्यात्म December 17, 2022

K.W.N.S.-हिंदू धर्म में उल्लू से जुड़ी कई मान्यताएं हैं. स्थिति के अनुसार उल्लू का दिखना शुभ और अशुभ दोनों हो सकता है. इन मान्यताओं के संबंध में कोई संगति नहीं है क्योंकि यह विशुद्ध रूप से स्थानीय और सामुदायिक मान्यताओं पर आधारित है. ऐसी मान्यताएं कभी भी शास्त्रों पर आधारित नहीं होतीं. उल्लू को मां लक्ष्मी की सवारी है. वैसे तो लोगों का मानना है की उल्लू दिखे तो शुभ माना जाता है या उल्लू की आवाज भी शुभ होता है, लेकिन शायद ही लोग जानते हैं कि कब और उल्लू का दिखना और उसकी आवाज को शुभ माना जा सकता है. तो आइए आज जनते हैं कि उल्लू कब और किस ओर दिखे तो इसे शगुन मानते हैं। 
 उल्लू को कैसे शुभ और अशुभ मानें यदि उल्लू छज्जे या छत पर बैठकर आवाज करने लगे तो परिवार के किसी महत्वपूर्ण सदस्य की शीघ्र मृत्यु होगी उल्लू लगातार तीन दिन तक घर के मुख्य द्वार या दरवाजे के पास रोए तो घर में चोरी से आर्थिक या धन हानि होगी. यदि यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति को उल्लू होम-होम की आवाज करते हुए मिले तो यह शुभ माना जाता है. यात्रा के दौरान उल्लू के आवाज करने का अर्थ है मनोकामना पूर्ण होगी. बाईं ओर उल्लू देखना या बाईं ओर से उल्लू की आवाज सुनना पुण्य और सौभाग्य माना जाता है। 
उल्लू को दाहिनी ओर देखना या उसकी आवाज सुनना अपशकुन माना जाता है. पीठ की ओर उल्लू का दिखना सौभाग्य माना जाता है. उल्लू को रात का राजा कहा जाता है, साथ ही माना जात है कि उल्लू में तांत्रिक शक्तियां होती है और उसे अच्छा या बुरा होने का पूर्वाभास हो जाता है. उल्लू कैसा होता है उल्लू एक छोटा और शांत स्वाभाव का पक्षी माना जाता है. विश्व में पाए जाने वाले उल्लुओं की प्रजाति में सबसे छोटा उल्लू होता है जो करीबन 5 से 6 इंच का होता है. इसके साथ सबसे बड़े उल्लू की लम्बाई करीबन 32 इंच तक होता है. आम तौर पर एक उल्लू का पंजा बेहद ही जहरीला और ताकतवर होते है. यह एक मांसाहारी जीव होता है जो अपने पंजे का इस्तेमाल करके शिकार करता है. इनकी आंखें बहुत बड़ी होती हैं. उल्लू एक ऐसा जीव है जो अपने सिर को करीब 270 डिग्री तक घूमा सकता है। 
 उल्लू के बारे में जानकारी उल्लू को रात में जगने और दिन में सोने की आदत होती है. भारत में मात्र 2 ही प्रजाति के उल्लू पाए जाते हैं. उल्लू एकलौता ऐसा पक्षी हैं, जो रात में भी दूर से चीजों को साफ से देख सकते हैं. उनके आंखों की पुतली बहुत पतली होती है, इस वजह से इन्हें दिन की रौशनी में देखने में परेशानी होती है. यह एक आम कारण है जो बताता है की उल्लू दिन में क्यों सोता है। 
 

अशोक के पत्ते से करें नए साल में ये खास, घर आएंगी खुशियां 

धर्म आध्यात्म December 15, 2022

 
 K.W.N.S.-नया साल आने के कुछ ही दिन रह गए हैं। ऐसे में हर कोई ऐसे काम करता है, जिससे आने वाला साल खुशियां के साथ बीते। नए साल में घर को पूजा पाठ के साथ घर को सजाते हैं। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार में फूल, आम और अशोक के पत्ते से बनी तोरण लगाते हैं। आम के पत्तों के बारे में आपने खूब सुना होगा। लेकिन आपको बता दें कि हिंदू धर्म में अशोक के पत्तों का भी काफी महत्व है। अशोक व्यक्ति के हर दुख का नाश कर देता है। रामायण में भी अशोक वाटिका के बारे में बताया गया है। जब लंकापति रावण मां सीता का हरण करके लंका लाया था, तो उन्होंने अशोक वाटिका में ही आश्रय लिया था। इसलिए अशोक की पत्तों से नए साल में कुछ उपाय कर सकते हैं, इन्हें करने से भाग्योदय होता है।
आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए नए साल में अशोक की जड़ लेकर आएं और इसे धोकर सुखा लें। इसके बाद इसे अपनी तिजोरी या अलमारी में रख लें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होगी। विवाह में आ रही है अड़चन अगर किसी वजह से आपके शादी में किसी न किसी रह की अड़चन आ रही है, तो नए साल के पहले दिन स्नान वाले पानी में अशोक के कुछ पत्ते डाल लें। इसके बाद पत्तों को उठाकर किसी पेड़ के नीचे डाल दें। ऐसा करने से आने वाले साल में जल्द विवाह हो जाएगा। 
सकारात्मक ऊर्जा के लिए नए साल में अशोक के पत्तों, फूल आदि से तोरण बनाकर मुख्य द्वार पर लगाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होगी । इसके साथ ही सकारात्मक ऊर्जा आपके घर में अधिक आएगी। इस बात का ध्यान रखें कि जब अशोक के पत्ते सुख जाएं, तो वह बदल दें। गृह क्लेश के लिए परिवार के सदस्यों या फिर दंपति के बीच किसी न किसी बात पर वाद विवाद बना रहता है, तो घर के बड़े सदस्य को अशोक के पेड़ में नियमित रूप से जल देना चाहिए ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहेगी। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अगर पति-पत्नी के बीच लगातार तनाव बना हुआ है, तो अशोक के सात पत्ते लाकर देवी-देवता के सामने रख दें। जब ये सूख जाए , तो दोबारा रख दें। ऐसा करने से दांपत्य जीवन में खुशियां आएगी।
 

सपने में काली बिल्ली देखना,  इसका क्या है मतलब जाने 

धर्म आध्यात्म December 15, 2022

 K.W.N.S.-रात को देखे गए कुछ सपने बहुत ही शुभ माने जाते हैं तो कुछ सपनों के पीछे अशुभ संकेत छिपे होते हैं. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक हर सपना कुछ कहता है और हर सपने के पीछे एक मतलब छिपा होता है. कई बार हम कुछ सपने देखते हैं जो कि दिनभर हमारे दिमाग में छाए रहते हैं और हम उनका मतलब जानना चाहते हैं. ऐसा ही एक सपना है कि अगर आपको सपने में काली बिल्ली दिखाई दे तो इसका क्या मतलब है? सपने में काली बिल्ली देखना 
 स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आपको सपने में बिल्ली दिखाई दे तो उसका शुभ-अशुभ होना इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस रंग की बिल्ली दिखाई दी है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को सपने में काली बिल्ली दिखाई दे तो यह एक शुभ संकेत है. सपने में काली बिल्ली देखना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आपको धन लाभ हो सकता है. वहीं अगर आप सपने काली बिल्ली को अपने ऊपर या किसी अन्य पर हमला करते देखते हैं तो यह अशुभ माना जाता है. ये किसी अनहोनी का संकेत हो सकता है. ऐसा हो तो भविष्य में आप पर कोई संकट आ सकता है. परिवार में किसी सदस्य की सेहत खराब हो सकती है या धन हानि के योग भी बन सकते हैं. 
अगर आपको सपने में काले रंग की बिल्ली दिखाई देती है तो उस व्यक्ति को शिवलिंग पर जल से अभिषेक करना चाहिए, अभिषेक करते समय ऊं नम: शिवाय का जाप भी जरूर करें. इससे आपको शुभ फल प्राप्त होगा और जीवन में आने वाली परेशानियां कम हो जाएंगी. सपने में सफेद बिल्ली देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार ऐसा सपना आने वाले समय में झगड़े का संकेत देता है. वहीं यदि सपने में आपने सफेद रंग की बिल्ली देखी है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है. क्योंकि यह धन हानि का संकेतक माना जाता है. इसके अलावा बिल्ली के दिखने का स्पष्ट मतलब यह है कि आपकी किसी से लड़ाई हो सकती है.
 

रविवार को करें ये उपाय, जीवन के हर क्षेत्र में मिलेगी तरक्की

धर्म आध्यात्म December 11, 2022

सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहा जाता है, इनकी उपासना से जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की मिलती है। माना जाता है कि आराधना रविवार के दिन करने का विशेष फल मिलता है और सूर्य देव जल्द प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सप्ताह के सातों दिन सूर्य देव की उपासना करना चाहिए, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर पाते तो रविवार के दिन ही पूजन कर सकते हैं। आइए जानते हैं सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार के दिन करें यह उपाय…

– रविवार को प्रात: काल स्नान कर सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। जल को इस तरह अर्पित करना चाहिए कि प्रकाश उसमें से निकलकर आपके ऊपर आए।

– रविवार के दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

– अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो रविवार के दिन सूर्य देव के साथ माता लक्ष्मी का पूजन भी करें, जिससे आपकी आर्थिक उन्नति होने लगती है।

– नौकरी और व्यवसाय में उन्नति पाने के लिए जल में चावल और गुड को मिलाकर प्रवाहित करें, इससे सूर्य देव आपको इन क्षेत्रों आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

– सूर्य देव का आशीर्वाद पाने के लिए रविवार के दिन व्रत रखना चाहिए। उपवास के दौरान अन्न और नमक का सेवन नहीं करें।

– ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य ग्रह बलवान होते हैं उनके समाज में प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है और चेहरे पर तेज आता है।

– रविवार के दिन जरूरतमंद को दान कर आप सूर्य देव की कृपा पा सकते हैं।

डिसक्लेमर- ‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

11 दिसंबर को रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जाने चंद्रमा निकलने का समय

धर्म आध्यात्म December 10, 2022

 P. T. – संकष्टी चतुर्थी व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित व्रत होता है। महिलाएं इस दिन व्रत करके अपने संतान की लंबी आयु व जीवन के संकटों से छुटकारा पाने के लिए करती हैं। इस बार संकष्टी चतुर्थी का व्रत 11 दिसंबर, 2022 को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति यह व्रत रखता है उसके जीवन में चल रही सभी समस्याएं खत्म होती हैं और भगवान गणेश द्वारा उनकी सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती है। क्योंकि भगवान गणेश ही बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले देवता है।

 संकष्टी गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त और पारण का समय

चतुर्थी तिथि 11 दिसंबर 2022 को शाम 4 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 12 दिसंबर 2022 को शाम 6 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। इस बार 11 दिसंबर को चंद्रोदय का समय शाम 7 बजकर 45 मिनट पर बताया गया है।

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

-चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहने।

– इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके गंगाजल छिड़कें, जिससे जगह शुद्ध हो जाए।

– भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा करें, उन्हें फल व लड्डू का भोग लगाएं।

– पूजा के बाद व्रत का संकल्प लें और गणेश चालीसा और गणेश पाठ करें।

– फिर शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें।

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत के दिन करें ये उपाय

1. संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को अपने दोनों हाथों से लाल फूल अर्पित करें। फूल चढ़ाते समय ‘ऊँ गं गणपतये नम:’ मंत्र का जाप करें। इस उपाय को करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

2. संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन आठ मुखी रुद्राक्ष का विधिवत पूजन करें और गले में माला को धारण कर लें। ऐसा करने से नौकरी में उच्च पद की प्राप्ति के योग बढ़ जाते हैं।

3. संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को रोली और चंदन का तिलक लगाएं। साथ ही गणेश जी के मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है – ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ: निर्विघ्नं कुरूमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा…’ इस उपाय को करने से व्यक्ति की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार रात में कपड़े धोना, जीवन में परेशानियां को दे रहे हैं न्योता 

धर्म आध्यात्म December 9, 2022

 

K.W.N.S.-हम अक्सर अपने आराम के लिए रात में कपड़ें धो लेते हैं, इससे समय की बचत भी हो जाती है और कपड़े भी जल्दी सूख जाते हैं. वहीं वास्तु शास्त्र के अनुसार रात में कपड़े धोना जीवन में परेशानियां ला सकता है, इसलिए रात में कपड़ें धोने की मनाही होती है. ये अशुभ माना जाता है.तो आइए आज हम आपको अपने इस लेख बताएंगे कि रात में कपड़े क्यों नहीं धोना चाहिए, इसके अलावा रात में कपड़े धोने से हमें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
 रात में भूलकर भी न धोएं कपड़े, परेशानियों को दे रहे हैं न्योता -हर समय रहती है तनाव की स्थिति रात में कपड़े धोने से घर में तनाव की स्थिति रहती है. इसलिए कपड़े सुबह ही धोएं. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का भी प्रभाव पड़ता है और किसी भी काम में बाधा उत्पन्न होने की स्थिति पैदा होती है और आप कितना भी काम समय पर क्यों न करने की कोशिश करें, वो काम कभी सफल नहीं हो पाता है. 
दिन में ही कपड़े धोएं, होंगे फायदे- 
वास्तु शास्त्र में रात में कपड़े नहीं धोना चाहिए, इसका साइंटिफिक कारण यह है कि रात में कपड़े सूखने में काफी समय लगता है और रात में कीटाणु रहते हैं, जिसकी वजह से वह कपड़े पर लगते हैं और हम बीमार पड़ जाते हैं. इसलिए हमेशा कपड़े दिन में ही धोना चाहिए. -कपड़े धोने के समय इन बातों का रखें ध्यान अगर आप रात में कपड़े धो रहे हैं, तो खुले में न सुखाएं. इससे कपड़े में हानिकारक कीटाणु चिपक जाते हैं उसकी वजह से खतरनाक बीमारियों का सामना करना पड़ता है, इसके अलावा घर की सारी सुख-समृद्धि चला जाती है, इसलिए रात में भूलकर भी कपड़े न धोएं. घर की खुशहाली चली जाती है. -रात में कपड़े सूखने के दौरान चांद का नकारात्मक ऊर्जा कपड़े पर पड़ता है और इससे हमें किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती है, हमारा मन हमेशा विचलित स्थिति में ही रहता है.
 

देवी देवता की विधिवत आरती करने का तरीका जाने महत्व

धर्म आध्यात्म December 8, 2022

K.W.N.S.-हिंदू धर्म में देवी देवता की विधिवत पूजा करने का काफी महत्व है। मान्यता है कि पूजा करने से मन में शांति के साथ आत्मा की तृप्ति मिलती है। इसके साथ ही सकारात्मक ऊर्जा अधिक पैदा होती है। देवी देवता की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पूजा के बाद आरती जरूर करना चाहिए। बिना आरती किए पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। ग्रंथों और पुराणों में आरती से जुड़े कई नियम बताए गए हैं कि किस दिशा में दीपक रखें और कैसे करें आरती। आइए जानते हैं देवी देवता की आरती करने का सही तरीका। शास्त्रों के अनुसार, सबसे पहले भगवान के चरणों का चार बार, नाभि के दो बार, मुख की ओर एक बार और फिर सिर से लेकर चरणों तक सात बार आरती की जाती है। इस तरह आरती कुल 14 बार करनी चाहिए।कितने दीपक के आरती करना शुभशास्त्रों के अनुसार, देवी देवता की आरती के लिए दीपक हमेशा पंचमुखी या फिर सप्तमुखी ही जलाना चाहिए।
 

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