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सुबह उठते ही हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में लग जाता है। कोई मार्निंग वॉक के लिए निकल जाता है, कोई डेली एक्सरसाइज करने लगता है तो कोई अपने घर के काम में बिजी हो जाता है। लेकिन कुछ काम ऐसे होते हैं जिन्हें सबसे पहले आंख खुलते ही अगर व्यक्ति करता है तो उसका पूरा दिन मंगलमय बितता है। तो आइए जानते हैं कौन सा है वो काम जिसे करने से व्यक्ति का पूरा दिन शुभ बित सकता है।
दरअसल, वैसे तो कई काम हैं जिन्हें सुबह करने से दिन शुभ बनाने में मदद करते हैं, लेकिन इन्हीं में से एक सबसे कारगार उपाय है मंत्रोच्चार। वैदिक मान्यताओं के अनुसार सुबह उठते से ही मंत्रोच्चारण करना शुभ होता है। इससे आपके आसपास का वातावरण भी शुद्ध रहता है और आपका दिन भी शुभ बितता है। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि सुबह उठकर कौन से मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। तो यहां जानिये सवेरे आंख खुलते ही इन कुछ खास मंत्रों का उच्चारण करें-
मंत्र- कराग्रे वसति लक्ष्मी: कर मध्ये सरस्वती।
कर मूले तू गोविंदा, प्रभाते कर दर्शनम।
अर्थ: रोजाना सुबह आंखें खोलते ही सबसे पहले हथेलियों के दर्शन कर इस मंत्र का जाप करें। हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में श्री सरस्वती एवं हाथों के मूल में गोविंद का वास होता है। इससे मां लक्ष्मी के साथ देवी सरस्वती और ब्रह्मा जी का आशीर्वाद प्रदान करता है।
मंत्र- समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडले,
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व में
अर्थ: सुबह उठकर भूमि को वंदन करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें जिसका अर्थ है- जमीन प्रतिदिन छोटे-बड़े बोझ का भार झेलती है। भूमि से ही मनुष्य को अनाज, पानी जैसी अनेक वस्तुएं मिलती हैं। ऐसा करने से व्यक्ति को कभी अन्न, धन की कमी नहीं होती।
मंत्र- सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यतिं न संशय:
अर्थ : अगर आप सुबह इस मंत्र का जाप करते हैं तो आपको सभी बाधाओं से मुक्ति मिलेगी। इस मंत्र का अर्थ है मनुष्य माता के प्रसाद से सभी बाधाओं से मुक्त होगा और धन, धान्य एवं संतान से सम्पन्न होगा इसमें कोई संदेह नहीं है।
सुबह उठने के बाद अगर कोई भी व्यक्ति इन मंत्रों का उच्चारण करता है तो उसे कभी समस्याएं नहीं आती और आती भी हैं तो वे जल्द ही चली भी जाती हैं। साथ ही आपको कार्य में सफलता और पॉजिटिव एनर्जी भी मिलती है।
डिसक्लेमर -‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

K.W.N.S.-प्रत्येक वर्ष मार्गशीष यानी अगहन मास की पूर्णिमा तिथि वाले दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। ये दिन मां पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप को समर्पित है। इस दिन अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा करने से संकट के समय में भी कभी अन्न की कमी नहीं होती है। मां अन्नपूर्णा से ही धरती पर अन्न की पूर्ति होती है। इसलिए अन्नपूर्णा माता का स्थान रसोई घर में माना जाता है। अन्नपूर्णा जयंती के दिन मां पार्वती समस्त सृष्टि का भरण-पोषण करने वाली देवी अन्नपूर्णा के रूप में पृथ्वी पर प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा की साधना और भोजन का सम्मान करने वाले व्यक्ति को कभी भूखा नहीं रहना पड़ता है। इसलिए इस दिन घर की महिलाओं या अन्न का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसे में चलिए जानते हैं अन्नपूर्णा जयंती का महत्व समय और पूजा विधि… अन्नपूर्णा जयंती 2022 तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 07 दिसंबर 2022 को सुबह 08 बजकर 01 मिनट से होगी।
अगले दिन यानी की 08 दिसंबर 2022 को सुबह 09 बजकर 37 मिनट पर पूर्णिमा तिथि की समाप्ति है। ऐसे में इस साल अन्नपूर्णा जयंती 8 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी। अन्नपूर्णा जयंती पूजन विधि अन्नपूर्णा जयंती के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूरे घर और रसोई, चूल्हे की अच्छे से साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। खाने के चूल्हे पर हल्दी, कुमकुम, चावल पुष्प अर्पित करें। धूप दीप प्रज्वलित करें। इसके साथ ही माता पार्वती और शिव जी की पूजा करें। माता पार्वती ही अन्नपूर्णा हैं। विधि पूर्वक पूजा करने के बाद माता से प्रार्थना करें कि हमारे घर में हमेशा अन्न के भंडारे भरे रहें। मां अन्नपूर्णा पूरे परिवार एवं समस्त प्राणियों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इस दिन अन्न का दान करें जरूरतमंदो को भोजन करवाएं। अन्नपूर्णा जयंती का महत्व कहा जाता है कि जिस घर में मां अन्नपूर्णा की आशीर्वाद रहता है, वहां किसी प्रकार का अभाव नहीं रहता है। मां अन्नपूर्णा का कृपा से अन्न के भंडार भरे रहते हैं। इसलिए अन्नपूर्णा जयंती के दिन मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा करनी चाहिए। इस दिन प्रातः उठकर मां अन्नपूर्णा की पूजा करना चाहिए।
K.W.N.S.-विघ्न विनाशक गणेश आदिदेव शंकर और माता पार्वती के पुत्र हैं. लेकिन गणेश जी की पूजा माता लक्ष्मी के साथ होती है. यह सवाल कई बार दिमाग में आता होगा, तो आइये बताते हैं इसकी कथा. काशी के पं. शिवम शुक्ला ने बताया कि एक बार माता लक्ष्मी को अहंकार हो गया कि उनकी सभी पूजा करते हैं, और पाने के लिए लालायित रहते हैं. भगवान यह बात समझ गए, उन्होंने कहा कि देवी भले ही संसार आपकी पूजा करता हो और आपको पाने के लिए लालायित रहता हो , लेकिन आप में एक कमी है. आप अपूर्ण हैं. इस पर माता लक्ष्मी ने कारण पूछा. माता लक्ष्मी क्यों थी अपूर्ण इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि जब तक कोई स्त्री मां नहीं बनती, तब तक वह पूर्ण नहीं होती. निःसंतान होने के कारण आप अपूर्ण हैं. यह जानकर माता लक्ष्मी दुखी हो गईं और उन्होंने अपनी पीड़ा माता पार्वती को बताई और उनके दो पुत्रों में से एक गणेश को गोद देने के लिए कहा. माता पार्वती ने लक्ष्मीजी की पीड़ा देखकर गणेशजी को गोद दे दिया. इसके बाद से गणेशजी माता लक्ष्मी के दत्तक पुत्र बन गए.इसी के बाद से माता लक्ष्मी ने भगवान गणेश को वरदान दिया कि जो व्यक्ति मेरे साथ तुम्हारी पूजा नहीं करेगा, उसके पास मैं नहीं रहूंगी. तभी से माता लक्ष्मी के साथ गणेशजी की पूजा होने लगी. प्रथम पूजा के अधिकारी वैसे भी गणेश प्रथम पूज्य हैं. कोई भी पूजा और धार्मिक अनुष्ठान उनकी पूजा के बाद ही शुरू होता है और बिना उनकी पूजा के पूरा नहीं होता. इसीलिए सभी अनुष्ठान शुरू करने के लिए विघ्न विनाशक की पूजा होती है।

K.W.N.S.-सनातन धर्म में तीर्थ-स्थानों में पूजा-पाठ को लेकर कई तरह के नियम और परंपराएं हैं जिनका पालन सदियों से हो रहा है। इसी के तहत देश के कुछ मंदिरों में जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, वहीं केरल में एक ऐसा मंदिर है जिसमें पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। अगर इस मंदिर में दर्शन करना ही है तो प्रवेश करने के लिए पुरुषों को भी महिलाओं की तरह ही 16 श्रृंगार कर जाना होता है। केरल के कोल्लम जिले में स्थित यह मंदिर श्री कोत्तानकुलांगरा देवी का है। इस मंदिर के नियम के अनुसार यहां सिर्फ महिलाएं और किन्नर ही प्रवेश पा सकते हैं। वहीं पुरुषों को प्रवेश के लिए स्त्री का वेश धारण करना पड़ता है। इस मंदिर में न सिर्फ महिलाएं और किन्नर बड़ी संख्या में देवी पूजन के लिए आते हैं बल्कि पुरुष भी नियम के अनुसार महिलाओं के कपड़े पहन कर देवी की पूजा करते हैं। श्री कोत्तानकुलांगरा देवी मंदिर में हर साल चाम्याविलक्कू का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में पुरुष श्रद्धालु आते हैं। जिन्हें मंदिर में प्रवेश के लिए न सिर्फ स्त्रियों के कपड़े पहनने पड़ते हैं बल्कि उनकी तरह 16 श्रृंगार करते हुए गहने, गजरा आदि भी लगाना पड़ता है। चाम्याविलक्कू त्योहार में शामिल होने वाले पुरुष श्रद्धालुओं को सजने-संवरने के लिए एक अलग से मेकअप रूम बनाया जाता है। जहां पर वे महिलाओं की तरह 16 श्रृंगार करते हैं। इस मंदिर में प्रवेश के लिए भले ही कपड़ों आदि को लेकर नियम और शर्तें हों लेकिन उम्र का कोई बंधन नहीं है। यहां हर उम्र का पुरुष महिलाओं की तरह श्रृंगार करके प्रवेश पा सकता है। श्री कोत्तानकुलांगरा देवी के मंदिर की खास बात यह भी है कि इसके गर्भगृह के ऊपर छत और कलश नहीं है। मान्यता यह भी है कि यहां देवी स्वयं प्रकट हुई थीं। देवी के पूजन के लिए यहां पर बड़ी संख्या में किन्नर आते हैं। मान्यता है कि श्री कोत्तानकुलांगरा देवी की शिला को जब पहली बार कुछ चरवाहों ने देखा तो उन्होंने वस्त्र, फूल आदि अर्पित करके देवी का पूजा किया। जिसके बाद देवी की इस शिला से दिव्य शक्ति निकलने लगी। इसके पश्चात् इस मंदिर का निर्माण हुआ हालांकि इस मंदिर के बारे में यह भी कथा मिलती है कि जब कुछ लोगों द्वारा यहां इस शिला पर नारियल फोड़ा गया तो इस शिला से खून निकलने लगा था। उस चमत्कार को देखने के बाद लोगों ने इस शक्तिपीठ पर पूजन प्रारंभ कर दिया।

K.W.N.S.-बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित माना जाता है। भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है। कहा जाता है कि भगवान गणेश का नाम लेकर शुरू किया गया कोई भी कार्य कभी असफल नहीं होता है। बुधवार के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं। ये दिन बिगड़े कामों को बनाने के लिए उत्तम होता है। मान्यता है कि जहां विघ्न विनाशक श्री गणेश का वास होता है, वहां रिद्धि-सिद्धि, शुभ-लाभ और माता लक्ष्मी भी विराजती हैं। इनकी कृपा से सब मंगल ही मंगल होता है। गणेश जी की पूजा से बुद्धि कुशाग्र होती है। इसके अलावा बुधवार के दिन कुछ उपाय करने से विघ्नहर्ता गणेश की कृपा प्राप्त होती है। तो चलिए जानते हैं बुधवार के दिन भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए क्या उपाय करने चाहिए… गाय को हरी घास का चारा खिलाएं घर की आर्थिक समस्या को दूर करने के लिए बुधवार के दिन गाय को हरी घास का चारा खिलाएं। साथ ही भगवान गणेश के मंदिर जाकर उन्हें दूर्वा अर्पित करें। लड्डू दान करें ज्योतिष के अनुसार, बुधवार को कांसे की थाली पर चंदन से ‘ऊँ गं गणपतयै नम:’ लिखें और उसमें पांच लड्डू रखकर किसी मंदिर में दान कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से कुंडली में धन प्राप्ति के योग बनते हैं। बुध को मजबूत करने के उपाय यदि आपका बुध कमजोर है तो आप हमेशा अपने पास हरे रंग का रुमाल रखें। साथ ही बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल दान या हरे वस्त्रों का दान करें। इसके अलावा इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है। सिंदूर का तिलक बुधवार के दिन पूजा करते समय भगवान गणेश के माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद अपने माथे पर भी लगाएं। इससे कार्यों में सफलता मिलेगी।

K.W.N.S.-हर कोई अपना भाग्य चमकता देखना चाहते हैं, साथ ही इंसान की चाहत होती है कि उसे जीवन में कभी आर्थिक तंगी का सामना ना करना पड़े. लेकिन कई बार कठिन परिश्रम करने के बावजूद भी धन हानी होती या बचत नहीं हो पाता है. ऐसे में व्यक्ति के निराश हो जाता है. इस कारण से कई बार तो मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है. शास्त्रों के अनुसार मेहनत के साथ-साथ किस्मत का साथ होना भी बेहद जरूरी होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोजना सुबह उठकर 5 काम करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त बनी रहती है.हमारे पूर्वज कहते हैं कि दिन कि शुरुआत अच्छी हो ते सारे काम बनते जाते हैं और पूरा दिन खुशनुमा गुजरता है. लेकिन क्या आपको पता है कि दिन की शुरूआत कैसे करें. आइए जानते हैं भाग्य को चमकाने के क्या करना चाहिए.. हथेली के दर्शन मॉर्निग को गुड मॉर्निंग बनाना हो तो सुबह उठकर सबसे पहले आपने ईष्ट देव का स्मरण करें. उसके बाद अपने दोनों हथेलियों के दर्शन करने चाहिए, हाथों को देखते हुए, इस मंत्र का जाप करें- “कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती, करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्” इस मंत्र को बोलना बेहद शुभ माना गया है. इतना करने के बाद हथेलियों को चेहरे पर फेरें माना जाता है कि ऐसा करने से ब्रह्मा जी, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहेगी. धरती को स्पर्श सुबह हथेलियों के दर्शन करने के बाद पैरों को जमीन पर रखने से पहले धरती को प्रणाम करने से आप पूरा दिन पॉजिटिव फील करेंगे।
धरती हमारे भार को सहन करती हैं, इसलिए उनका शुक्रिया किया जाता है. सूर्य देव को जल सूर्योदय से पहले उठ कर शौच के बाद स्नान करना चाहिए. इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके तांबे के लोटे से भगवान सूर्य को जल अर्पित करें. सूर्य देव को अर्पित किए जाने वाले जल में लाल फूल, रोली मिलाना शुभ माना जाता है. इसके बाद ओम् सूर्याय नमः मंत्र को बोलते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें. तुलसी को जल सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद तुलसी में भी जल चढ़ाएं. तुलसी में जल अर्पित करते वक्त ‘ओम् नमो भगवते वासुदेवाय’ यह मंत्र बोलना चाहिए. तुलसी में जल अर्पित करने के बाद उसके नीचे दीया भी जलाएं. मान्यता है कि रोजाना सुबह ऐसा करने से मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु का भी आशीर्वाद मिलता है. घर में नमक-पानी का पोछा वास्तु शास्त्र के मुताबिक सूर्योदय से पहले पानी में नमक मिलाकर घर में पोछा लगाने से निगेटिव एनर्जी दूर रहती है. साथ ही घर में सुख-शांति भी बनी रहती है।

K.W.N.S.-हिमाचल प्रदेश में वैसे तो कई देवी-देवताओं के मंदिर है जिनका इतिहास बहुत पुराना है. लेकिन हिमाचल के नूरपुर के प्राचीन किला मैदान में स्थित भगवान श्री बृजराज स्वामी जी का यह मंदिर बेहद की खास है. पूरे विश्व में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां श्री कृष्ण की मूर्ती राधा जी के साथ नहीं बल्कि मीरा बाई के साथ स्थापित है. ये दोनों मूर्तियां इतनी अलौकिक और आकर्षक है कि जिनके दर्शन मात्र से व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है. मूर्तियां ऐसी बनी हैं मानों जैसे स्वयं भगवान श्री कृष्ण आप के समक्ष खड़े हों. जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर की अलौकिकता और बढ़ जाती है. मंदिर का इतिहास ये बात है 1629 से 1623 ई. जब चितौडग़ढ के राजा के निमंत्रण पर नूरपुर के राजा जगत सिंह अपने राज पुरोहित के साथ वहां पहुंचे. जिस महल में राजा जगत सिंह व उनके पुरोहितों को रात्रि विश्राम के लिए ठहराया गया था, उसके बगल में एक मंदिर था. रात में राजा को उस मंदिर से घुंघरूओं तथा संगीत की आवाजें सुनाई दी.
जब उन्होंने महल की खिड़की से बाहर झांका तो मंदिर में एक औरत कमरे में श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने भजन गाते हुए नाच रही थी. उस मंदिर में श्री कृष्ण व मीरा की मूर्तियां साक्षात थी. जब नूरपुर के राजा ने पूरी बात अपने पुरोहितों को बताई तो वापसी के वक्त उन्होंने इन मूर्तियों को उपहार स्वरूप मांग लिया. चितौडग़ढ़ के राजा ने उन्हें प्रसन्नता के साथ मूर्तियां भेंट कर दी. इसके बाद नूरपुर के राजा ने अपने दरबार को मंदिर में बदल कर वहां इन दोनों मूर्तियों को स्थापित कर दी. मंदिर में आते हैं श्री कृष्ण मान्यता है कि इस मंदिर में हर रात भगवान श्री कृष्ण आते हैं. इसलिए रोजना इस मंदिर में पूजा-पाठ होता है और रात के समय मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं. मंदिर बंद करने से पहले मूर्तियों के समक्ष शयनासन, चरण पादुकाएं व एक गिलास पानी से भरा रखा जाता है. सुबह जब मंदिर का दरवाजा खोला जाता है तो शयनासन पर सिलवटों होती हैं और पानी की गिलास गिरा होता है. माना जाता है कि रात में श्रीकृष्ण व मीराबाई यहां विश्राम करते हैं.

K.W.N.S.-सनातन धर्म में प्राचीन काल से ही हवन करने की परंपरा चली आ रही है. हवन करने से न केवल घर में शुद्धि आती है बल्कि नकारात्मक ऊर्जा भी नष्ट हो जाती है. यही वजह है कि शुभ मौकों और त्योहारों पर घर में हवन करवाने को अच्छा कहा गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हवन के बाद निकलने वाली राख भी उतनी ही काम की होती है. कहा जाता है कि हवन की राख में कई चमत्कारिक गुण होते हैं, जो किसी भी व्यक्ति का जीवन बदल सकते हैं. आइए जानते हैं कि हवन की राख के क्या-क्या फायदे हैं. हवन की राख से मिलेंगे ये फायदे आर्थिक समस्या होती है दूर अगर आप आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं. मेहनत करने के बावजूद आपकी आमदनी नहीं बढ़ रही तो आप हवन की राख का उपाय कर सकते हैं. इसके लिए आप हवन की राख को ठंडा होने दें. इसके बाद 3-4 लाल कपड़ों में हवन की राख को बांध दें. फिर उन थैलियों को घर में पैसा रखने वाली जगहों पर रख दें. मान्यता है कि ऐसा करने से धन संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और घर में पैसों की बरकत बनी रहती है. हवन की राख से उतार सकते हैं नजर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को नजर उतारते तो देखा ही होगा. इसके लिए वे आमतौर पर लाल मिर्च या तेल-नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं. धार्मिक विद्वानों का कहना है कि हवन की राख के जरिए भी बुरी नजर को दूर रखा जा सकता है. इसके लिए घर के सभी सदस्यों को हवन की राख का टीका लगाना चाहिए. ऐसा करने से बुरी शक्तियां परिवार से दूर रहती हैं. कलह से मिल जाती है निजात आपके बनते हुए काम बिगड़ रहे हैं या परिवार के लोगों में अक्सर कलह बनी रहती है तो इसकी वजह घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां हो सकती हैं. इन शक्तियों को कमजोर करने के लिए आप हवन की राख को अपने मकान-दुकान के चारों ओर छिड़कर रेखा बना दें. माना जाता है कि ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियां घर छोड़कर भाग खड़ी होती हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. रात में नहीं आते डरावने सपने जिन लोगों को रात में डरावने सपने आते हैं, उनके लिए भी हवन की राख काफी फायदेमंद हो सकती है. ऐसे लोग रोजाना रात में राख का टीका लगाकर सोएं. कहा जाता है कि लगातार 4 दिनों तक इस उपाय को करने से डरावने सपने आने बंद हो जाते हैं. साथ ही रात में नींद भी सुकूनभरी आती है, जिससे अगला दिन बढ़िया गुजरता है.

K.W.N.S.-आपको घर में समृद्धि आएगी या दरिद्रता, यह काफी हद तक आपकी मेहनत और किस्मत पर निर्भर करता है. कहते हैं कि जो लोग अपने जीवन में वास्तु नियमों का पालन नहीं करते, उन्हें अक्सर दुख भोगने पड़ते हैं. वास्तु शास्त्र का ऐसा ही एक नियम रसोई में इस्तेमाल होने वाले चकला-बेलन के बारे में भी है. वास्तुविदों का कहना है कि अगर हम चकला-बेलन का सही विधि से इस्तेमाल नहीं करते हैं तो घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते हैं, जिससे परिवार को अनेक संकट झेलने पड़ जाते हैं. भूले से भी न आए चकला बेलन से आवाज वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब आप रसोई में चकला-बेलन का इस्तेमाल करके रोटी बना रहे हों तो भूल से भी खट-खट की आवाज नहीं आनी चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना जाता है. इससे मां अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं. आपको रोटी बनाते हुए टूटे चकला-बेलन का उपयोग भी नहीं करना चाहिए. रोटी बनाने के अच्छी तरह धोना न भूलें जब आप चकला-बेलन का इस्तेमाल कर रोटी बना लें तो काम होने के बाद उन्हें साफ पानी से धोकर रखना न भूलें. वास्तु शास्त्र में चकला-बेलन को बिना साफ किए रखना गलत माना गया है. चकला-बेलन को साफ करके रखना आपकी सेहत के लिए भी जरूरी होता है. अनाज के डिब्बे पर ना रखें चकला-बेलन कई बार महिलाएं चकला बेलन के इस्तेमाल के बाद उन्हें धोकर उल्टा रख देती हैं. वास्तु शास्त्र में ऐसा करना गलत माना गया है. आप चकला-बेलन को साफ करने के बाद उन्हें हमेशा सीधे ही रखें. साथ ही इस बात का ध्यान दें कि उन्हें कभी भी अनाज के डिब्बे के ऊपर नहीं रखना चाहिए. ऐसा करना गरीबी को घर में न्योता देने जैसा होता है. इस दिन खरीदना माना जाता है शुभ वास्तु शास्त्र में चकला बेलन के खरीदने के दिन के बारे में भी सजग किया गया है. वास्तुविदों के मुताबिक अगर आपको नया चकला-बेलन खरीदना है तो उन्हें कभी भी मंगलवार या शनिवार को न खरीदें. इसके बजाय बुधवार का दिन चकला-बेलन की खरीदारी के लिए शुभ होता है. इस दिन चकला-बेलन की खरीदारी से आपकी रसोई साल भर सुख-समृद्धि से भरी रहती है.

K.W.N.S.- पटना। आज यानी मंगलवार को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है। इसका असर पूरे भारत में दिखाई देगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण शाम 5 बजकर 05 मिनट से प्रारंभ होकर 6ः19 बजे समाप्त होगा, लेकिन सूतक सुबह 8 बजे के पहले लग जाएगा। वहीं बिहार के मिथिला क्षेत्र समेत गया में चंद्र ग्रहण का असर लगभग डेढ़ घंटे तक दिखाई देगा। जानें कब शुरू होगा ग्रहण शास्त्रों की मानें तो मिथिला क्षेत्र में यह चंद्रग्रहण शाम 4.59 पर शुरू हो होगा और 6.20 पर समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार मिथिला में चंद्र ग्रहण का असर लगभग डेढ़ घंटे तक दिखाई देगा और ग्रहण का सूतक सुबह 8 बजे के पहले लग जाएगा। वहीं बिहार के गया में चंद्र ग्रहण का असर शाम 5 बजे से लेकर शाम के 06:19 मिनट तक रहेगा। ग्रहण के समय रखें कुछ सावधानियां हिंदू धर्म की मानें तो ग्रहण के समय कुछ सावधानियां बरतनी जरुरी होती है। खासकर गर्भवती महिला को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
शास्त्रों में गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान अधिक श्रम न करने और सूर्य या चंद्र किरणों के आगे जाने से मना किया जाता है ताकि गर्भस्थ शिशुओं पर विकिरण का कोई असर न पड़े। ग्रहण के दौरान ऐसी महिलाओं को सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनने चाहिए। राहु के काले, नीले, स्लेटी या गहरे रंगों से परहेज करना चाहिए। जानें क्या कहते है ज्योतिषी ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, मंगलवार को लगने वाले चंद्र ग्रहण 4 राशियों के लाभदायक रहेगा, जिसमें मिथुन राशि, कर्क राशि, वृश्चिक राशि और मकर राशि शामिल है। इसके अलावा अन्य 8 राशियों के लोगों के लिए यह चंद्रग्रहण सामान्य या अहितकारी होगा। इन 8 राशियों वाले जातकों के लिए यह ग्रहण देखना शुभ नहीं रहेगा। बता दें कि जब ग्रहण का सूतक काल चला होता है उस समय जितना संभव हो सके कम बोलना चाहिए और भगवान की भक्ति में अपना मन लगाएं, भगवान का ध्यान करें, उनकी स्तुति करें।