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मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के सर्वोत्तम सेवक, सखा और भक्त श्री हनुमान सद्गुणों के भंडार हैं। इनकी पूजा पूरे भारत और दुनिया के अनेक देशों में की जाती है। श्री हनुमान के परम पराक्रमी सेवा मूर्ति स्वरूप से तो सभी परिचित हैं लेकिन वह ज्ञानियों में भी अग्रगण्य हैं। वह अतुलित बल के स्वामी हैं। उनके अंग वज्र के समान कठोर एवं शक्तिशाली हैं। उन्हें ‘वज्रांग’ नाम दिया गया जो आम बोलचाल में ‘बजरंग’ बन गया। बजरंग बली केवल गदाधारी महाबलि ही नहीं बल्कि विलक्षण और बहुआयामी मानसिक और प्रखर बौद्धिक गुणों के अद्भुत धनी भी हैं। राम काज अर्थात अच्छे कार्य के लिए वह सदैव तत्पर रहते थे। वह राम सेवा अर्थात सात्विक सेवा के शिखर पुरुष ही नहीं थे बल्कि अनंत आयामी व्यक्तित्व विकास का महाआकाश है।

विवेक, ज्ञान, बल, पराक्रम, संयम, सेवा, समर्पण, नेतृत्व, सम्पन्नता आदि विलक्षण गुणों के धनी होने के बावजूद उनमें रत्ती भर अहंकार नहीं था। हनुमान सामाजिक समन्वय और विकास के अग्रदूत हैं। वह योद्धा के रूप में पवन गति के स्वामी हैं बल्कि वह सुशासित राम राज्य के पुरोधा और कुल पुरोहित भी हैं। मान्यता है कि पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था जिस कारण मंगलवार के दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। 

चिरंजीवी हनुमान को पवन पुत्र कहा गया है। एक बार हनुमान जी को सुलाकर माता अंजनी गृह कार्य में व्यस्त हो गईं। तभी हनुमान जी की नींद खुल गई तथा भूख से व्याकुल हो सूर्य को मीठा फल समझकर उन्होंने उसे अपने मुख में भर लिया। उस समय ग्रहण चल रहा था। सूर्य की यह गति भांपते हुए राहू ने देवराज इंद्र के पास जाकर उन्हें सारा वृत्तांत सुनाया। तब देवराज इंद्र ने देखा कि छोटे से हनुमान सूर्य को अपने मुख में रख कर खेल रहे हैं और सारा जगत त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है।

उसी समय हनुमान जी की दृष्टि इंद्र की ओर गई और उसे भी फल समझकर खाने लगे। इंद्र ने हनुमान जी को अपनी ओर आता देख कर उन पर वज्र से प्रहार किया। 

वज्र के प्रहार से सूर्य हनुमान जी के मुख से आजाद हो गए और हनुमान जी मूर्च्छित होकर गिर पड़े। तभी वायु देव ने वायु की गति रोक दी जिस कारण सारे जगत में वायु संचार बंद हो गया और सभी जीव मृत्यु को प्राप्त होने लगे। 

देवराज इंद्र समेत सभी देवता तब ब्रह्मा जी के पास गए। तत्पश्चात ब्रह्मा सहित सभी देवताओं ने वायु देव के पास जाकर उनसे विनती की कि वायु का संचार प्रारंभ करें तथा सभी हनुमान जी को बल, बुद्धि और चिरंजीवी होने का आशीर्वाद प्रदान करें। हनुमान जी की मूर्च्छा समाप्त हुई और सृष्टि में नवसंचार होने से मानव सहित सभी जीवों की रक्षा हुई।

 
 K.W.N.S.-निर्वाण दिवस : दादाजी धूनीवाले या धूनी वाले दादाजी की गिनती भारत के महान संतों में की जाती है। दादाजी धूनीवाले का अपने भक्तों के बीच वही स्थान है जैसा कि शिर्डी के साईं बाबा का। उनका समाधि स्थल खंडवा शहर में है। दादाजी स्वामी केशवानंदजी महाराज एक बहुत बड़े संत थे और लगातार घूमते रहते थे। प्रतिदिन दादाजी पवित्र अग्नि (धूनी) के समक्ष ध्यानमग्न होकर बैठे रहते थे, इसलिए लोग उन्हें दादाजी धूनीवाले के नाम से स्मरण करने लगे।
दादाजी धूनीवाले को शिव का अवतार मानकर पूजा जाता है और कहा जाता है कि उनके दरबार में आने से बिन मांगी दुआएं भी पूरी हो जाती हैं। दादाजी का जीवन वृत्तांत प्रामाणिक रूप से उपलब्ध नहीं है, परंतु उनकी महिमा का गुणगान करने वाली कई कथाएं प्रचलित हैं। दादाजी का दरबार उनके समाधि स्थल पर बनाया गया है। देश-विदेश में दादाजी के असंख्य भक्त हैं। दादाजी के नाम पर भारत और विदेशों में सत्ताईस धाम मौजूद हैं। इन स्थानों पर दादाजी के समय से अब तक निरंतर धूनी जल रही है। मार्गशीर्ष माह में (मार्गशीर्ष सुदी 13) के दिन सन् 1930 में दादाजी ने खंडवा शहर में समाधि ली। यह समाधि रेलवे स्टेशन से 3 किमी की दूरी पर है।
दादाजी का मुख्य समाधि स्थल खंडवा में हैं लेकिन कुछ ऐसे स्थान भी है, जहां दादाजी कुछ दिनों तक रहे थे। ऐसे स्थानों में से एक स्थान नगर से 3 किमी दूरी पर नर्मदा किनारे नावघाटखेड़ी में स्थापित है। 1973 में स्थापित इस स्थान को पादुका स्थली भी कहते हैं। 1930 में इंदौर से खंडवा आते समय दादाजी इसी स्थान पर चातुर्मास के लिए ठहरे थे। तभी से यहां दादाजी की चरण पादुकाएं स्थापित है। उनके भक्तों ने इस स्थान को पवित्रता के साथ सजाए रखा है। 
राजस्थान के डिडवाना गांव में एक समृद्ध परिवार के सदस्य भंवरलाल दादाजी से मिलने आए। मुलाकात के बाद भंवरलाल ने अपने आपको धूनीवाले दादाजी के चरणों में समर्पित कर दिया। भंवरलाल शांत प्रवृत्ति के थे और दादाजी की सेवा में लगे रहते थे। दादाजी ने उन्हें अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया और उनका नाम हरिहरानंद रखा। हरिहरानंदजी को भक्त छोटे दादाजी नाम से पुकारने लगे। दादाजी धूनीवाले की समाधि के बाद हरिहरानंदजी को उनका उत्तराधिकारी माना जाता था। हरिहरानंदजी ने बीमारी के बाद सन् 1942 में महानिर्वाण को प्राप्त किया। छोटे दादाजी की समाधि बड़े दादाजी की समाधि के पास स्थापित की गई। 
 कैसे पहुंचे : सड़क मार्ग- साथ ही इंदौर से 135 किमी, भोपाल 175 किमी के साथ-साथ रेल मार्ग तथा सड़क मार्ग से आप खंडवा पहुंच सकते हैं। रेल मार्ग- यहां पहुंचने के लिए रेल मार्ग से खंडवा मध्य एवं पश्चिम रेलवे का एक प्रमुख स्टेशन है तथा भारत के हर भाग से यहां पहुंचने के लिए ट्रेन उपलब्ध है। हवाई अड्डा- यहां से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देवी अहिल्या एयरपोर्ट, इंदौर 140 किमी की दूरी पर स्थित है।
 

K.W.N.S.-हम सभी रात में सोते हुए सपने  देखते हैं. ऐसा माना जाता है कि सपने भविष्य  का संकेत देते हैं. हर व्यक्ति के सपने अलग-अलग होते हैं. किसी को अच्छे सपने आते हैं, किसी को बुरे सपने आते हैं. अच्छे सपने और बुरे सपने किसी व्यक्ति के वश में नहीं होते. यदि कोई व्यक्ति सोचे कि वह सिर्फ अच्छे सपने देखे तो ऐसा संभव नहीं है. विज्ञान  यह भी मानता है कि हमारे दिनभर किए गए कार्यों को हमारा दिमाग रात में सोते समय सपने के रूप में हमें दिखाता है. इसी क्रम में आज हम बात करने जा रहे हैं कि यदि हमें सपने में खुद का चेहरा आईने में दिखाई दे तो इसका क्या मतलब होता है. यदि सपने में आपको भी अपना चेहरा आईने में दिखाई देता है तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है. इस विषय में आधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा।
सपने वो काल्पनिक दुनिया होते हैं, जो हमें असल दुनिया से बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाते हैं, जिसे हम स्वप्न लोक कहते हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई ना कोई मतलब जरूर होता है. देखे जाने वाले कुछ सपने शुभ होते हैं और कुछ अशुभ माने जाते हैं. स्वप्न शास्त्र में उन सभी सपनों का अर्थ बताया गया है.सपने में शीशे में चेहरा देखना यदि किसी सपने में आप अपने आपको किसी दर्पण के सामने खड़े हुए देखते हैं या दर्पण में आप अपने आप को देख रहे हैं तो यह सपना आपके लिए एक चेतावनी हो सकती है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना आपको आने वाले दिनों में आपके जीवन में आने वाले शारीरिक और मानसिक कष्ट के बारे में संकेत देता है. इस प्रकार का सपना देखने का मतलब है कि आप दो मुंहे लोगों के बीच में फंस गए हैं, ऐसे में आपको सावधान रहने की बहुत जरूरत है. यह लोग कभी भी आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं. सपने में दर्पण देखना यदि आप सपने में आईना देखते हैं तो यह आपके लिए एक शुभ सपना हो सकता है. सपने में दर्पण देखने का मतलब है कि आप आर्थिक तरक्की करने वाले हैं. यह आपको आपके जीवन में होने वाले धन लाभ के बारे में संकेत देता है।
 

 
K.W.N.S.-मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है, इनको खुश रखने से घर में धन की वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है. इनको खुश रखने के लिए लोग कई तरह की पूजा-पाठ करवाते हैं, व्रत रखते हैं. जिससे उनके जीवन में मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहे, तो ऐसे में आइए आज हम आपको बताएंगे कि शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को कौन से फूल चढ़ाने चाहिए, जिससे वह प्रसन्न हो और हमारी सारी मनोकामना पूरी करें. 
शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को चढ़ाएं ये फूल 1-लाल गुड़हल का फूल चढ़ाएं गुड़हल का फूल मां लक्ष्मी का सबसे प्रिय फूल माना जाता है, इससे धन में वृद्धि होती है और घर की सुख-शांति बनीं रहती है. 2-सफेद कनेर का फूल चढ़ाएं मां लक्ष्मी को सफेद कनेर का फूल चढ़ाने से घर की सुख-शांति बनीं रहती है और आपको तनाव से मुक्ति मिलती है, इसका पेड़ अगर आप अपने घर में लगा रहे हैं, तो इससे आपके घर कभी धन की कमी नहीं होगी।
3-मां लक्ष्मी को चढ़ाएं लाल गुलाब शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को लाल गुलाब चढ़ाना बेहद शुब होता है. इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है और भौतिक सुख की प्राप्ति होती है. 4-मां लक्ष्मी को चढ़ाएं गेंदे का फूल मां लक्ष्मी को गेंदे का फूल चढ़ाना भी बेहद शुभ होता है. इसे चढ़ाने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और मां लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं. 5-मां लक्ष्मी को चढ़ाएं कमल का फूल साक्षात मां लक्ष्मी कमल के फूल पर विराजती हैं, इसे चढ़ाने से व्यक्ति पर देवी मां मेहरबान रहती हैं और समाज में मान-सम्मान दिलाती हैं और आपके सारे दुख दूर कर देती हैं।
 

 
K.W.N.S.-वास्तु शास्त्र के अनुसार मिट्टी के बर्तनों बहुत शुभ होते हैं। मान्यता के अनुसार, घर में मिट्टी के बर्तन, मटके या सुराही रखने से मां लक्ष्मी का वास होता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उन्हें सही जगह पर रखें। साथ ही उनका इस्तेमाल भी सही ढंग से किया जाना चाहिए। इसलिए आज वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे सुराही के बारे में। सुराही के बारे में शायद आप सभी ने सुना होगा। न भी सुना हो तो कोई बात नहीं हम आपको बता देते हैं। सुराही, यानि की पानी भरने के लिये उपयोग में आने वाला मिट्टी का बर्तन। 
सुराही रखने से घर में बढ़ता है धन गांव के लोग तो शायद आज भी पानी भरने के लिये सुराही या फिर माट का ही प्रयोग करते हैं, लेकिन आजकल इसकी जगह फ्रिज में रखी पानी की बोतलों ने ले ली है। आजकल के बच्चे मिट्टी के बर्तन का पानी पीना पसंद नहीं करते। चाहे आपको सुराही का पानी पीना पसंद हो या न हो लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी से भरी एक सुराही घर में जरूर रखनी चाहिए। घर में पानी से भरी सुराही रखने से धन की कभी कमी नहीं होती। सुराही न मिले तो मिट्टी का छोटा घड़ा रखना भी लाभदायक होता है।
इस दिशा में रखें सुराही ध्यान रखे कि इसमें हमेशा पानी भरा होना चाहिए। साथ ही इसे रखने के लिये उत्तर दिशा का चुनाव करना चाहिए क्योंकि उत्तर दिशा को जल के देवता की दिशा माना जाता है। वास्तु शास्त्र में ये थी चर्चा सुराही के बारे में। उम्मीद है आप इस वास्तु टिप्स को अपनाकर जरुर लाभ उठाएंगे। (आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।
 

 
   K.W.N.S.- सूर्यदेव संपूर्ण सृष्टि के महत्वपूर्ण आधार हैं, क्योंकि भगवान सूर्य  के उदय होते ही पूरे जगत का अंधकार नष्ट हो जाता है और चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश फैलता है। अत: कुछ देर सूर्यदेव की किरणें हमारे शरीर पर पड़ने मात्र से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है तथा मन शांत होकर ऊर्जा से भरपूर हो जाता है। हमारी भारतीय परंपरा में वैदिक काल से सूर्योपासना अनवरत चली आ रही है। प्रतिदिन भगवान सूर्यदेव की उपासना करने तथा उन्हें जल का अर्घ्य देकर मंत्र जाप करने का महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यतानुसार प्रतिदिन सूर्योपासना अथवा सूर्य को जल चढ़ाने से हमारे अंदर आत्मविश्वास जागृत है तथा नकारात्मकता दूर हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 
आइए जानते हैं 5 खास बातें-
 1. प्रतिदिन प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व शुद्ध होकर स्नान करें। तत्पश्चात उदित होते सूर्य के समक्ष कुश का आसन लगाकर सूर्यदेव का स्मरण करते हुए सूर्य अर्घ्य दें। 2. प्रात:काल के समय पूर्व दिशा में जैसे ही सूर्यागमन होने से पहले नारंगी किरणें प्रस्फूटित होती दिखाई दे रही हो, तभी दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़ कर जल इस तरह चढ़ाएं कि सूर्य जल चढ़ाती धार से दिखाई दें तथा हमेशा सूर्य को जल का अर्घ्य धीरे-धीरे चढ़ाएं ताकि जलधारा आपके आसन पर आकर गिरे, अगर यह जलधारा जमीन पर गिरती हैं तो आपको जल में समाहित सूर्य ऊर्जा का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। अत: इस बात का ध्यान अवश्‍य रखें कि यह सीधे भूमि पर न गिरें।
3. सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय ‘ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।’ को कम से कम 11 बार अवश्य पढ़ें। साथ ही मंत्र- ‘ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय। मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा:।।’ मंत्र को तीन बार बोलें। 4. सूर्य अर्घ्य के बाद सीधे हाथ की अंजूरी में जल लेकर अपने चारों ओर छिड़कें। तथा उसी स्थान पर 3 परिक्रमा करके आसन उठा लें तथा उस स्थान को नमन करें। इस तरह की गई सूर्यदेव की उपासना से जीवन में यश, सिद्धि, समृद्धि तथा सफलता प्राप्त होती है। 
 5. मान्यतानुसार प्रतिदिन अथवा हर रविवार को पूरे मन से सूर्योपासना की जाए तो यह बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है। इस दिन सूर्यदेव का पूजन अवश्य करें। एक तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल चंदन, रोली, लाल कनेर के पुष्प, अक्षत और गुड़ डालकर अर्घ्य देने से सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा कार्य करने के प्रति आत्मविश्वास जागृत होता है। सूर्य पिता का कारक है और जिस तरह पिता के होने से व्यक्ति में आत्मविश्वास होता है उसी तरह सूर्य की शीतल रश्मियां जल के साथ जब ह्रदयस्थल पर पड़ती है तो दिल मजबूत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। 
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  K.W.N.S.-साल 2022 खत्म होने और नए साल 2023 की शुरुआत होने में बस एक महीना बाकी है। इस 31 दिसंबर को शनिवार को पड़ रहे नए साल की पूर्वसंध्या के जश्न और रविवार से शुरू होने वाली 1 जनवरी के अलावा, जो हमें हमारे व्यस्त जीवन में आवश्यक राहत प्रदान करेगा, हमें उन शादियों और शुभ कार्यक्रमों की तैयारी भी शुरू करनी होगी जो अगले साल आ रहे हैं। जब एक पारंपरिक भारतीय शादी की बात आती है तो पहला कदम हिंदू कैलेंडर के आधार पर शादी के लिए एक शुभ तिथि चुनना और आगे की कार्रवाई तय करना होता है। अगर आप कोई नया प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं या अपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण शुरू कर रहे हैं तो सिर्फ शादियों में ही नहीं ये तारीखें भी महत्वपूर्ण हैं। 
शादियों या किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए 2023 के शुभ तेलुगु तिथियों को प्रस्तुत करना। जनवरी – 22,23,25,26,27,28 फरवरी- 1,5,6,8,9,10.12,22,24 मार्च- 1,5,9,10,11,13,17 अप्रैल – इस महीने कोई मुहूर्त नहीं दोस्तों! मई- 3,5,7,10,11,12,13,14,21,26,31 जून-1,3,5,7,8,9,10 जुलाई- इस माह में कोई शुभ तिथियां नहीं हैं अगस्त- 18,19,20,24,26,30 सितंबर- 1,2,3,7 अक्टूबर -25,26 नवंबर- 1,9,16,17,18,19,22,23,29 दिसंबर- 3,6,7,14,16,17 अस्वीकरण: पंचांग के आधार पर मुहूर्त की तिथियां भिन्न हो सकती हैं, इसलिए कृपया अपने ज्योतिषी से सत्यापित करें और तदनुसार योजना बनाना सुनिश्चित करें।
 

 
K.W.N.S.-पढ़ाई में और करियर बनाने की होड़ में आजकल शादी की उम्र पीछे छूटने लगी है। यही वजह है कि अपने बच्चों की शादी सही समय पर करना आजकल माता पिता की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। वहीं कभी-कभी ग्रह नक्षत्रों के अशुभ स्थिति की वजह से भी विवाह में देरी होती है या रिश्ते बनते बनते बिगड़ जाते हैं। ये बात जितनी माता-पिता को परेशान करती है, उतनी ही विवाह योग्य लड़के-लड़कियों को भी। हालांकि ज्योतिष और वास्तु में ऐसे कई उपाय भी बताए गए हैं, जिनके जरिए शादी में आ रही बाधा को कम किया जा सकता है। वास्तु शास्त्र में एक फूल के बारे में जिक्र किया गया है, जिसे घर की सही दिशा में लगाना शुभ होता है। इससे जल्द विवाह के योग बनते हैं। चलिए जानते हैं इस पौधे के बारे में…
 पियोनिया के फूल वास्तु शास्त्र में पियोनिया के फूलों को बेहद चमत्कारी माना गया है। पियोनिया के पौधे पर लगने वाले फूल को फूलों की रानी कहा जाता है। पियोनिया के फूल को सौंदर्य व रोमांस का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पियोनिया को घर पर लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इसके प्रभाव से शादी में आ रही बाधा दूर होती है। शीघ्र विवाह के लिए कारगर उपाय वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि विवाह योग्य किसी लड़के या लड़की के विवाह में समस्या आ रही है, तो घर पर पियोनिया का पौधा लगाना शुभ होता है। पौधे की जगह आप घर पर पियोनिया की पेंटिंग या फूल भी लगा सकते हैं। आपसी प्रेम के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि आपके भी घर में हर छोटी-छोटी बात पर विवाद होने लगता है, तो पियोनिया की पेंटिंग या इसका पौधा घर पर लगाएं। इस पौधे को दक्षिण पश्चिम दिशा की ओर लगाएं। इस दिशा का संबंध परिवार में रहने वाले लोगों के बीच के संबंध को दर्शाता है।
 

 
 K.W.N.S.-आजकल घरों में कुत्ता पालना एक ट्रेंड बन गया है और लोग अपना अकेलापन दूर करने के लिए कुत्ता पालते हैं. कुत्ता घर की सुरक्षा करने के साथ ही माहौल को भी खुशनुमा बनाए रखते हैं. इतना ही नहीं, वास्तु शास्त्र में भी घरों में कुत्ता पालना बेहद शुभ माना जाता है. कहते हैं कि घर में कुत्ता पालने से कई परेशानियां दूर होती हैं और लाभ मिलते हैं. आइए जानते हैं घर में कुत्ता पालना क्यों माना जाता है शुभ? वास्तु टिप्स: पर्स में रखी ये चीजें आपको बना सकती हैं धनवान, आर्थिक संकट से मिलेगा छुटकारा
 घर में भूलकर भी न छोड़ें उल्टी चप्पल और जूते, दुर्भाग्य में बदल जाएगा आपका सौभाग्य सुबह-सुबह घर की बालकनी या दरवाजे पर दिखाई दें ये चीजें तो समझ जाइए आने वाले हैं अच्छे दिन क्यों पालना चाहिए कुत्ता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुत्ते को भगवान भैरव का दूत माना जाता है और मान्यता है कि कुत्ते को खाना खिलाने से लोगों को यमदूतों का डर बिल्कुल नहीं सताता. क्योंकि कुत्ते में भूत, प्रेत और आत्माओं को देखने की क्षमता होती है. कुत्तों के आस—पास बुरी आत्माएं नहीं फटकती. 
 कुत्ता पालने के फायदे वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कुत्ता पालन बेहद ही शुभ माना गया है. कहते हैं सुबह उठते ही कुत्ते को देखने से घर में सकारात्मकता आती है और जिस घर में सकारात्मकता होती है वहां मां लक्ष्मी प्रवेश करती हैं. ऐसे में आपको धन से जुड़ी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. इसके अलावा वास्तु शास्त्र के मुताबिक कुत्ते को रोजाना खाना खिलाना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से भगवान शनिदेव प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं. इतना ही नहीं, शनिवार के दिन कुत्ते को तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलानी चाहिए. इससे कुंडली में मौजूद राहु-केतु के दोष समाप्त होते हैं. अगर कोई दंपति काफी समय से संतान प्राप्ति की कामना कर रहे हैं तो उन्हें अपने घर में कुत्ता जरूर पालना चाहिए. निसंतान दंपत्तियों के लिए कुत्ता पालना शुभ होता है और इससे घर में जल्द ही बच्चे की किलकारियां गूंजती हैं.
 

 
 K.W.N.S.-हमारे जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं, कभी परेशानियां इतनी बढ़ जाती है कि उसका निवारण करना मुश्किल हो जाता है. किसी को कभी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है, तो कभी वास्तु दोष का सामना करना पड़ता है, तो ऐसे में आइए जानते हैं घर में ऐसी कौन सी चार मूर्ति रखें, जिससे घर की सुख- शांति बनी रहे और आपके जीवन में कभी कोई परेशानी ना आए. घर में रखें ये मूर्ति 
 1- घर में रखें भगवान गणेश की मूर्ति वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको बता दें, घर में भगवान गणेश की मूर्ति रखने से घर में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आती है और घर का वातावरण सकाकात्मक बना रहता है, आपका जीवन सुखमय बना रहता है. 2-घर में रखें भागते हुए घोड़े की मूर्ति अगर आप घर में भागते हुए घोड़े की मूर्ति रखते हैं, तो इससे आपके घर में कभी किसी चीज की नहीं होगी और आपको हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी.
3-घर में रखें तोते की मूर्ति अगर आपके बच्चे को मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, इसके अलावा अगर आपके बच्चे को पढ़ाई में मन नहीं लगता है, तो आपको अपने घर के उत्तर-पूर्व दिशा में तोते की मूर्ति जरूर रखनी चाहिए. 4-गाय-बछड़े की रखें मूर्ति अगर आपके घर का वातावरण तनाव से घिरा रहता है और घर में बेवजह समस्याएं उत्पन्न होती रहती है, तो आपको अपने घर में बछड़े को दूध पिलाती हुई गाय की मूर्ति अवश्य रखनी चाहिए. 5-हाथी की रखें मूर्ति हाथी की मूर्ति में माता लक्ष्मी का वास होता है, इन्हें घर में रखने से आपको कभी धन की कमी नहीं होगी. 6-मछली की मूर्ति घर में मछली की मूर्ति रखने से हमेशा घर की सुख-समृद्धि बनीं रहती है और आपको कभी किसी चीज की परेशानी नहीं होगी. इसके अलावा आप फिश एक्वेरियम भी रख सकते हैं.