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दिवाली या दीपावली रोशनी का पर्व है। यह त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम 14 साल के बाद वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। एक अन्य मान्यता है कि दिवाली के दिन ही मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इस कारण इस दिन लक्ष्मी पूजन किया जाता है। जबकि वाल्मीकि रामायण में वर्णित है कि इस दिन भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी का विवाह हुआ था। दिवाली की शाम को उत्तम मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। जानें अन्य खास बातें-
अमावस्या तिथि कब से कब तक-
दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस साल अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगी, जो कि 25 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी।
दिवाली लक्ष्मी मुहूर्त 2022-
दीपावली 2022 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त शाम 06 बजकर 53 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन की अवधि 1 घंटा 23 मिनट की है। प्रदोष काल – 05:43 पी एम से 08:16 पी एम तक और वृषभ काल – 06:53 पी एम से 08:48 पी एम तक रहेगा।
इन घरों में होता है मां लक्ष्मी का वास-
मां लक्ष्मी दिवाली पर उन घरों में प्रवेश करती हैं जहां साफ-सफाई हो और प्रतिदिन पूजा-पाठ होता है।
दिवाली पूजन में इन चीजों को करें शामिल-
दिवाली पूजन में शंख, कमल का फूल, गोमती चक्र, धनिया के दाने, कच्चा सिंघाड़ा, मोती व कमलगट्टे का माला आदि शामिल करना चाहिए।
लक्ष्मी पूजन मंत्र-
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥
. ॐ श्रीं श्रीयै नम:
. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥





हिंदू धर्म में दीपावली से पहले रूप चौदस मनाई जाती है, जिसे काली चौदस के रूप में भी जाना जाता है। रूप चतुर्दशी का पर्व यमराज के प्रति दीप प्रज्वलित कर यम के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। रूप चौदस का त्यौहार बंगाल में विशेष रूप से पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। बंगाल में मां काली के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है, जिसके कारण इस दिन को काली चौदस कहा जाता है। बंगाल में इस दिन मां काली की आराधना का विशेष महत्व होता है।
24 अक्टूबर को है काली चौदस
काली चौदस को देश में अलग-अलग नामों से भी मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर काली चौदस को नरक चौदस या रूप चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल नरक चतुर्दशी 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर काली चौदस भी मनाई जाती है। काली चौदस मुहूर्त पर इस साल पूजा का मुहूर्त 23 अक्टूबर 2022, रात 11.42 मिनट से 24 अक्टूबर को रात में 12.33 मिनट तक रहेगा।
काली चौदस पर शक्ति की पूजा का भी महत्व
बंगाल में काली चौदस पर महाकाली या शक्ति की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि काली चौदस के दिन ही माता काली ने नरकासुर का वध किया था, इसलिए नरक-चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है। काली चौदस आलस्य और बुराई को खत्म करने का दिन है जो हमारे जीवन में नरक पैदा करता है और जीवन पर प्रकाश डालता है।
करवा चौथ का पावन पर्व 13 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व होता है। करवा चौथ व्रत निर्जला रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु व अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दिन में करवा चौथ व्रत कथा सुनी जाती है और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही करवा चौथ व्रत तोड़ा जाता है। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र बनना काफी शुभ संयोग माना जा रहा है। रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
करवा चौथ व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना गया है। अगर आपसे भूलवश इस दिन कुछ खा लें तो परेशान नहीं हों। कई लोग भूलवश कुछ खाने को भी अपशगुन मानते हैं, लेकिन ये कोई अपशगुन नहीं माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गलती होने पर ईश्वर से माफी मांग लेनी चाहिए। प्रभु इंसान का भाव देखते हैं। अगर गलती होने पर हम सच्चे दिल से ईश्वर से माफी मांग लें तो ईश्वर हमें माफ कर देते हैं।
अगर आपने भी व्रत मे कुछ खा लें तो करें ये उपाय-
सबसे पहले स्नान कर लें और फिर सभी देवी-देवताओं से क्षमा मांग लें। इस व्रत में माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष महत्व होता है। सभी देवी- देवताओं से अपनी गलती के लिए माफी मांग लें।
भगवान से माफी मांगने के बाद विधि- विधान से पूजा- अर्चना कर लें।
चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले चंद्रमा से माफी मांग लें और फिर पूजा- अर्चना करें।
आप अपनी क्षमता के अनुसार किसी सुहागिन स्त्री को कुछ दान मे भी दे सकते हैं। इस व्रत में दान का विशेष महत्व माना गया है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
इस साल शरद पूर्णिमा के दिन कई शुभ योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। इस दिन को लक्ष्मी, इंद्र पूजा और कोजागिरी व्रत भी कहा जाता है। इसी दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती और महर्षि पाराशर ऋषि जयंती भी मनाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह रात चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होती है। मान्यता है कि चंद्रमा से निकलने वाली किरणें अमृत समान होती हैं। शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का खास दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात में भम्रण पर निकलती है। इस साल शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर 2022, रविवार को है।
शरद पूर्णिमा का दिन खास-
शरद पूर्णिमा के दिन बुध व शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण योग, सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य योग, चंद्र और गुरु की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इसके अलावा बुध, शनि व गुरु तीनों के स्वराशि होने से भद्र, शश और हंस नामक पंचमहापुरुष योग बन रहे हैं। ऐसे में यह दिन खरीदारी के लिए काफी शुभ माना जा रहा है।
शरद पूर्णिमा पर क्या करें
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद अपने ईष्टदेव की अराधना करें। पूजा के दौरान भगवान को गंध, अक्षत, तांबूल, दीप, पुष्प, धूप, सुपारी और दक्षिणा अर्पित करें। रात्रि के समय गाय के दूध से खीर बनाएं और आधी रात को भगवान को भोग लगाएं। रात को खीर से भरा बर्तन चांद की रोशनी में रखकर उसे दूसरे दिन ग्रहण करें। यह खीर प्रसाद के रूप में सभी को वितरित करें।
शरद पूर्णिमा 2022 शुभ मुहूर्त-
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 09, 2022 को 03:41 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अक्टूबर 10, 2022 को 02:24 ए एम बजे
शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय – 05:51 पी एम
शरद पूर्णिमा के दिन इन बातों का रखें ध्यान-
शरद पूर्णिमा के दिन फल और जल का सेवन करके व्रत रखा जा सकता है। इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए।
करवा चौथ का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत महत्व रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं चंद्रदेव को अर्घ्य देती हैं। इससे पहले शाम को भगवान शंकर व माता पार्वती की विधिवत पूजा करने के साथ ही सामूहिक रूप से कथा सुनती हैं। इस साल करवा चौथ की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा कंफ्यूजन है। अगर आप भी रखने वाली हैं करवा चौथ व्रत तो जानें यहां करवा चौथ की सही तारीख-
कब है करवा चौथ व्रत-
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ व्रत रखा जाता है। इस साल चतुर्थी तिथि 13 अक्टूबर को रात 01 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो कि 14 अक्टूबर को देर रात 03 बजकर 08 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, करवा चौथ व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा।
करवा चौथ शुभ मुहूर्त 2022-
इस साल करवा चौथ पर पूजन के कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमृत काल शाम 04 बजकर 08 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 01 घंटा 42 मिनट की है। इसके अलावा सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है। इस साल करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 08 बजकर 09 मिनट पर है।
पूजा- विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
स्नान करने के बाद मंदिर की साफ- सफाई कर ज्योत जलाएं।
देवी- देवताओं की पूजा- अर्चना करें।
निर्जला व्रत का संकल्प लें।
इस पावन दिन शिव परिवार की पूजा- अर्चना की जाती है।
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है।
चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखें।
इसके बाद पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तोड़ा जाता है।