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दिवाली या दीपावली रोशनी का पर्व है। यह त्योहार हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम 14 साल के बाद वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। एक अन्य मान्यता है कि दिवाली के दिन ही मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इस कारण इस दिन लक्ष्मी पूजन किया जाता है। जबकि वाल्मीकि रामायण में वर्णित है कि इस दिन भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी का विवाह हुआ था। दिवाली की शाम को उत्तम मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। जानें अन्य खास बातें-
अमावस्या तिथि कब से कब तक-
दिवाली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस साल अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगी, जो कि 25 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी।
दिवाली लक्ष्मी मुहूर्त 2022-
दीपावली 2022 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त शाम 06 बजकर 53 मिनट से रात 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन की अवधि 1 घंटा 23 मिनट की है। प्रदोष काल – 05:43 पी एम से 08:16 पी एम तक और वृषभ काल – 06:53 पी एम से 08:48 पी एम तक रहेगा।
इन घरों में होता है मां लक्ष्मी का वास-
मां लक्ष्मी दिवाली पर उन घरों में प्रवेश करती हैं जहां साफ-सफाई हो और प्रतिदिन पूजा-पाठ होता है।
दिवाली पूजन में इन चीजों को करें शामिल-
दिवाली पूजन में शंख, कमल का फूल, गोमती चक्र, धनिया के दाने, कच्चा सिंघाड़ा, मोती व कमलगट्टे का माला आदि शामिल करना चाहिए।
लक्ष्मी पूजन मंत्र-
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः॥
. ॐ श्रीं श्रीयै नम:
. ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥

 K.W.N.S.-हिंदू धर्म में दिवाली का बड़ा महत्व है. इस त्योहार की शुरूआत धनतेरस के दिन से होती है और भाई दूज के साथ यह खत्म होता है. धनतेरस के दिन सभी लोग धन के देवता कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. इस दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर घर परिवार में बरकत आती है और घर के सदस्यों पर धन वर्षा होती है. धनतेरस के दिन को लेकर लोगों के बीच कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. इस दिन कुछ लोग बर्तन खरीदते हैं तो कुछ लोग चांदी के सामान घर में लाने को शुभ मानते हैं. धनतेरस के दिन लोगों में झाड़ू खरीदने का खासा क्रेज देखा जाता है. आइए जानते हैं इस दिन झाड़ू क्यों खरीदी जाती है. धनतेरस में झाड़ू का महत्व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन जो भी चीज खरीदी जाती है, उसमें आगे चलकर तेरह गुना बढ़ोत्तरी हो जाती है. धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने को बेहद शुभ माना जाता है. आपको बता दें कि मत्स्य पुराण में झाड़ू को माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है. इस दिन झाड़ू को खरीदने को सुख-शांति और धन में बढ़ोत्तरी से जोड़कर देखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि झाड़ू घर की दरिद्रता को दूर करता है. ये भी हैं मान्यताएं धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने को लेकर एक और मान्यता यह है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी घर छोड़कर नहीं जाती हैं. इसके साथ कुछ लोग मानते हैं कि इस दिन झाड़ू घर लाने से पुराने कर्ज से मुक्ति मिल जाती है और घर में सकारात्मता का प्रसार होता है. इन चीजों की भी कर सकते हैं खरीदारी धनतेरस के दिन सोने और चांदी के सामान की खरीदारी को भी शुभ माना जाता है. कई लोग इस दिन नए कपड़े भी खरीदते हैं. अगर आप कोई गाड़ी लेने की सोच रहे हैं तो धनतेरस का दिन इसके लिए बिलकुल अच्छा है.
 

K.W.N.S.-भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में गोवर्धन गिरधारी की परिक्रमा के मार्ग में एक चमत्कारी कुंड पड़ता है जिसे राधा कुंड के नाम से जाना जाता है। इस कुंड के बारे में मान्यता है कि नि:संतान दंपत्ति कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि को यहां दंपत्ति एक साथ स्नान करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है। अहोई अष्टमी का यह पर्व यहां पर प्राचीनकाल से मनाया जाता है। इस दिन पति और पत्नी दोनों ही निर्जला व्रत रखते हैं और मध्य रात्रि में राधाकुंड में डूबकी लगाते हैं तो ऐसा करने पर उस दंपत्ति के घर में बच्चे की किलकारियां शीघ्र ही गूंज उठती है। इतना ही नहीं जिन दंपत्तियों की संतान की मनोकामना पूर्ण हो जाती है वह भी अहोई अष्टमी के दिन अपनी संतान के साथ यहां राधा रानी की शरण में हाजरी लगाने आता है। माना जाता है कि यह प्रथा द्वापर युग से चली आ रही है। “राधा कुंड की कथा” इस प्रथा से जुड़ी एक कथा का पुराणों में भी वर्णन मिलता है जो इस प्रकार है – जिस समय कंस ने भगवान श्री कृष्ण का वध करने के लिए अरिष्टासुर नामक दैत्य को भेजा था उस समय अरिष्टासुर गाय के बछड़े का रूप लेकर श्री कृष्ण की गायों के बीच में शामिल हो गया और उन्हें मारने के लिए आया। भगवान श्री कृष्ण ने उस दैत्य को पहचान लिया। इसके बाद श्री कृष्ण ने उस दैत्य को पकड़कर जमीन पर फैंक दिया और उसका वध कर दिया। यह देखकर राधा जी ने श्री कृष्ण से कहा कि उन्हें गौ हत्या का पाप लग गया है। इस पाप से मुक्ति के लिए उन्हें सभी तीर्थों के दर्शन करने चाहिएं। राधा जी की बात सुनकर श्री कृष्ण ने नारद जी से इस समस्या के समाधान के लिए उपाय मांगा। देवर्षि नारद ने उन्हें उपाय बताया कि सभी तीर्थों का आह्वाहन करके उन्हें जल रूप में बुलाएं और उन सभी तीर्थों के जल को एक साथ मिलाकर स्नान करें जिससे उन्हें गौ हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। नारद जी के कहने पर श्री कृष्ण ने एक कुंड में सभी तीर्थों के जल को आमंत्रित किया और कुंड में स्नान करके पाप मुक्त हो गए। इस कुंड को कृष्णकुंड कहा जाता है जिसमें स्नान करके श्री कृष्ण गौ हत्या के पाप से मुक्त हुए थे। माना जाता है कि इस कुंड का निर्माण श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी से किया था। नारद जी के कहने पर ही श्री कृष्ण ने यह कुंड अपनी बांसुरी से खोदा था और सभी तीर्थों से उस कुंड में आने की प्रार्थना की जिसके बाद सभी तीर्थ उस कुंड में आ गए। इसके बाद श्री कृष्ण के कुंड को देखकर राधा जी ने भी अपने कंगन से एक कुंड खोदा । जब श्री कृष्ण ने उस कुंड को देखा तो उसमें प्रतिदिन स्नान करने और उनके द्वारा बनाए गए कुंड से भी अधिक प्रसिद्ध होने का वरदान दिया जिसके बाद यह कुंड राधाकुंड के नाम से प्रसिद्ध हो गया। पुराणों के अनुसार अहोई अष्टमी तिथि के दिन ही इन कुंडो का निर्माण हुआ था जिसके कारण अहोई अष्टमी पर इस कुंड में स्नान करने का विशेष महत्व है। कृष्णकुंड और राधाकुंड की अपनी-अपनी विशेषता है। कृष्णकुंड का जल दूर से देखने पर काला और राधाकुंड का जल दूर से देखने पर सफेद दिखता है।
 

K.W.N.S-धनतेरस  का त्योहार अब नजदीक आ चुका है. इस बार यह त्योहार 23 अक्टूबर रविवार को मनाया जाएगा. माना जाता है कि इस दिन जो लोग बर्तन या सोना-चांदी खरीदते हैं, उनका घर सालभर धन-दौलत से भरा रहता है. हालांकि शास्त्रों में इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि धनतेरस पर कुछ चीजें भूलकर भी नहीं खरीदनी चाहिए. ऐसा करना अपशकुन होता है और परिवार में अजीब-अजीब चीजें होने लगती हैं. आइए जानते हैं कि वे कौन सी 5 चीजें हैं, जिन्हें खरीदने से इंसान को बचना चाहिए. कांच के बर्तन खरीदना वर्जित धनतेरस 
के दिन कांच के बर्तन खरीदने की मनाही की गई है. इसकी वजह ये है कि कांच का संबंध राहु से होता है. ऐसे में अगर आप धनतेरस पर कांच के बर्तन खरीदकर लाते हैं तो आप राहु ग्रह को घर में आने का न्योता दे रहे होते हैं. इसके चलते परिवार के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो जाता है. नुकीली या धारदार चीजें न खरीदें चाकू, सुईं, पिन, कैंची या अन्य कोई भी धारदार चीज धनतेरस पर कभी नहीं खरीदनी चाहिए. इस दिन ऐसी चीजों की शॉपिंग सही नहीं मानी जाती. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है और परिवार दरिद्रता के भंवर में फंसने लगता है. लोहे की चीज खरीदना अशुभ शास्त्रों में कहा गया है कि हमें धनतेरस (Dhanteras Shopping) वाले दिन लोहे की चीज खरीदने से बचना चाहिए. इसका कारण ये है कि लोहे को शनि देव का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में अगर आप लोहे की कोई चीज खरीदकर लाते हैं तो आपके घर में शनि देव विराजमान हो जाएंगे, जिसके बाद अनिष्ट होने की आशंका बढ़ती जाएगी. प्लास्टिक के सामान से बचें आपको धनतेरस वाले दिन प्लास्टिक से बनी कोई चीज नहीं खरीदनी चाहिए. ऐसा करने घर में बरकत नहीं आती और मां लक्ष्मी रुष्ट होती हैं. इसके बजाय स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं. उनकी खरीद से कुंडली में दोष दूर हो जाते हैं. एल्यूमिनियम का सामान न लें ज्योतिष के मुताबिक धनतेरस (Dhanteras Shopping) पर एल्युमिनियम के सामान या बर्तन खरीदने वर्जित हैं. एल्युमिनियम पर राहु का काफी प्रभाव होता है. उसे दुर्भाग्य का सूचक भी माना जाता है. ऐसे में धनरेस पर अगर इसकी खरीद करते हैं तो आपके लिए दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
 

 
K.W.N.S.-रत्न शास्त्र में 9 रत्नों का वर्णन है ,और सभी रत्न किसी न किसी ग्रह से संबंध रखते हैं। किसी भी रत्न को धारण करने से पहले उसके फायदे और नुकसान के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है। आज हम आपको एक ऐसे ही रत्न के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसी व्यक्ति को आसमान की ऊंचाइयों तक उठा भी सकता है और ऊंचाई से अचानक जमीन पर लाकर पटक भी सकता है। नीलम शनि ग्रह को समर्पित रत्न है। नीलम बेहद शक्तिशाली रत्न है। यह राजा को भी रातों -रात कंगाल कर सकता है। 
कैसे धारण करें नीलम रत्न
 1. रत्न शास्त्र के अनुसार नीलम को पंचधातु में धारण किया जाना चाहिए।
 2. इसे शनिवार के दिन शाम के समय धारण करना चाहिए। 
3. नीलम धारण करने से पूर्व इसे दूध ,गंगाजल, केसर और शहद से शुद्ध करन चाहिए। 
4. नीलम रत्न धारण करने से पूर्व शनिदेव की आराधना करनी चाहिए और इस दिन शनिदेव की पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को शनिदेव से जुड़ी चीजें अवश्य दान अवश्य करें। 
किन राशि के लोगों के लिए नीलम धारण करना होगा बेहद शुभ-
 1. कुंभ, मकर, वृषभ और तुला राशि के जातकों को नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है।
 2. जिस कुंडली में शनि चौथे, 5वें 10वें और 11वें भाव में बैठा होता है ऐसे जातकों को नीलम रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। 
3. यदि किसी व्यक्ति पर शनि की महादशा या साढ़ेसाती चल रही है तो उसे ज्योतिष नीलम रत्न धारण करने की सलाह देते हैं।
 4. मेष ,वृश्चिक, कन्या, मीन और कर्क राशि के जातकों को नीलम रत्न धारण नहीं करना चाहिए।
 

K.W.N.S.-सफाई करते समय पुराने सिक्के मिल जाए तो इन्हें घर से बाहर न करें. इनके घर में होने से मां लक्ष्मी का वास होता है. दिवाली पर देवी लक्ष्मी की पूजा में सिक्कों की पूजा भी की जाती है. ऐसे में इन्हें संभालकर रखें. दिवाली की सफाई के दौरान पूजा के सामान में पुराना शंख या कौड़ी मिल जाए तो इन्हें संभालकर किसी पवित्र जगह पर रख दें. इनको भूलकर भी घर से बाहर न करें. ऐसा करने से मां लक्ष्मी रुष्ठ हो जाती हैं. दिवाली की सफाई में अगर मोर पंख मिल जाए तो इसे शुभ माना जाता है. मोर पंख भगवान श्रीकृष्ण को काफी प्रिय होता है. ऐसे में यह अगर मिल जाए तो इसे फेंकने की बजाय संभालकर रखें. इससे घर में रखने से बरकत आती है. मां लक्ष्मी को झाड़ू अत्यंत प्रिय है. ऐसे में घर में सफाई के दौरान अगर पुरानी झाड़ू मिल जाए तो उसे फेंके नहीं. ऐसा करने से घर से सुख-समृद्धि चले जाती है. हालांकि, टूटी झाड़ू घर में रखने से निगेटिव एनर्जी का संचार होता है. ऐसे में अगर इसे घर से बाहर करना ही है तो बृहस्पतिवार या शुक्रवार के दिन ऐसा न करें. दिवाली की सफाई के दौरान अगर कोई पुराना लाल कपड़ा मिल जाए, जो बेकार पड़ा हो तो उसे फेंके नहीं, बल्कि घर पर संभालकर रखें. लाल कपड़े को घर में रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और घर में बरकत बनी रहती है.
 

हिंदू धर्म में दीपावली से पहले रूप चौदस मनाई जाती है, जिसे काली चौदस के रूप में भी जाना जाता है। रूप चतुर्दशी का पर्व यमराज के प्रति दीप प्रज्वलित कर यम के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। रूप चौदस का त्यौहार बंगाल में विशेष रूप से पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। बंगाल में मां काली के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है, जिसके कारण इस दिन को काली चौदस कहा जाता है। बंगाल में इस दिन मां काली की आराधना का विशेष महत्व होता है।
24 अक्टूबर को है काली चौदस
काली चौदस को देश में अलग-अलग नामों से भी मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर काली चौदस को नरक चौदस या रूप चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल नरक चतुर्दशी 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर काली चौदस भी मनाई जाती है। काली चौदस मुहूर्त पर इस साल पूजा का मुहूर्त 23 अक्टूबर 2022, रात 11.42 मिनट से 24 अक्टूबर को रात में 12.33 मिनट तक रहेगा।
काली चौदस पर शक्ति की पूजा का भी महत्व
बंगाल में काली चौदस पर महाकाली या शक्ति की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि काली चौदस के दिन ही माता काली ने नरकासुर का वध किया था, इसलिए नरक-चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है। काली चौदस आलस्य और बुराई को खत्म करने का दिन है जो हमारे जीवन में नरक पैदा करता है और जीवन पर प्रकाश डालता है।

करवा चौथ का पावन पर्व 13 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व होता है। करवा चौथ व्रत निर्जला रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति को लंबी आयु व अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दिन में करवा चौथ व्रत कथा सुनी जाती है और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही करवा चौथ व्रत तोड़ा जाता है। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र बनना काफी शुभ संयोग माना जा रहा है। रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
करवा चौथ व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना गया है। अगर आपसे भूलवश इस दिन कुछ खा लें तो परेशान नहीं हों। कई लोग भूलवश कुछ खाने को भी अपशगुन मानते हैं, लेकिन ये कोई अपशगुन नहीं माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गलती होने पर ईश्वर से माफी मांग लेनी चाहिए। प्रभु इंसान का भाव देखते हैं। अगर गलती होने पर हम सच्चे दिल से ईश्वर से माफी मांग लें तो ईश्वर हमें माफ कर देते हैं।
अगर आपने भी व्रत मे कुछ खा लें तो करें ये उपाय-
सबसे पहले स्नान कर लें और फिर सभी देवी-देवताओं से क्षमा मांग लें। इस व्रत में माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष महत्व होता है। सभी देवी- देवताओं से अपनी गलती के लिए माफी मांग लें।
भगवान से माफी मांगने के बाद विधि- विधान से पूजा- अर्चना कर लें।
चंद्रमा को अर्घ्य देने से पहले चंद्रमा से माफी मांग लें और फिर पूजा- अर्चना करें।
आप अपनी क्षमता के अनुसार किसी सुहागिन स्त्री को कुछ दान मे भी दे सकते हैं। इस व्रत में दान का विशेष महत्व माना गया है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

इस साल शरद पूर्णिमा के दिन कई शुभ योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। इस दिन को लक्ष्मी, इंद्र पूजा और कोजागिरी व्रत भी कहा जाता है। इसी दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती और महर्षि पाराशर ऋषि जयंती भी मनाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह रात चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होती है। मान्यता है कि चंद्रमा से निकलने वाली किरणें अमृत समान होती हैं। शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का खास दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात में भम्रण पर निकलती है। इस साल शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर 2022, रविवार को है।
शरद पूर्णिमा का दिन खास-
शरद पूर्णिमा के दिन बुध व शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण योग, सूर्य व बुध की युति से बुधादित्य योग, चंद्र और गुरु की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इसके अलावा बुध, शनि व गुरु तीनों के स्वराशि होने से भद्र, शश और हंस नामक पंचमहापुरुष योग बन रहे हैं। ऐसे में यह दिन खरीदारी के लिए काफी शुभ माना जा रहा है।
शरद पूर्णिमा पर क्या करें
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद अपने ईष्टदेव की अराधना करें। पूजा के दौरान भगवान को गंध, अक्षत, तांबूल, दीप, पुष्प, धूप, सुपारी और दक्षिणा अर्पित करें। रात्रि के समय गाय के दूध से खीर बनाएं और आधी रात को भगवान को भोग लगाएं। रात को खीर से भरा बर्तन चांद की रोशनी में रखकर उसे दूसरे दिन ग्रहण करें। यह खीर प्रसाद के रूप में सभी को वितरित करें।
शरद पूर्णिमा 2022 शुभ मुहूर्त-
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 09, 2022 को 03:41 ए एम बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अक्टूबर 10, 2022 को 02:24 ए एम बजे
शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय – 05:51 पी एम
शरद पूर्णिमा के दिन इन बातों का रखें ध्यान-
शरद पूर्णिमा के दिन फल और जल का सेवन करके व्रत रखा जा सकता है। इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए।

करवा चौथ का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत महत्व रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं चंद्रदेव को अर्घ्य देती हैं। इससे पहले शाम को भगवान शंकर व माता पार्वती की विधिवत पूजा करने के साथ ही सामूहिक रूप से कथा सुनती हैं। इस साल करवा चौथ की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा कंफ्यूजन है। अगर आप भी रखने वाली हैं करवा चौथ व्रत तो जानें यहां करवा चौथ की सही तारीख-
कब है करवा चौथ व्रत-
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ व्रत रखा जाता है। इस साल चतुर्थी तिथि 13 अक्टूबर को रात 01 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ होगी, जो कि 14 अक्टूबर को देर रात 03 बजकर 08 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, करवा चौथ व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा।
करवा चौथ शुभ मुहूर्त 2022-
इस साल करवा चौथ पर पूजन के कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमृत काल शाम 04 बजकर 08 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 01 घंटा 42 मिनट की है। इसके अलावा सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है। इस साल करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 08 बजकर 09 मिनट पर है।
पूजा- विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
स्नान करने के बाद मंदिर की साफ- सफाई कर ज्योत जलाएं।
देवी- देवताओं की पूजा- अर्चना करें।
निर्जला व्रत का संकल्प लें।
इस पावन दिन शिव परिवार की पूजा- अर्चना की जाती है।
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है।
चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखें।
इसके बाद पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तोड़ा जाता है।