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रायपुर । छत्तीसगढ़ में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में भाजपा की सत्ता थी। देश भर में प्रचंड मोदी लहर। इसके बावजूद भी राज्य को क्लीन स्वीप करने का दांव दुर्ग सीट पर आकर ठिठक गया। 11 में 10 सीट जीतने वाली भाजपा को दुर्ग की सीट गंवाने की टीस पूरे पांच साल रही। नतीजन 2014 के नतीजे आने के बाद से यह सीट भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ गई।
राज्य में महज इस एक सीट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता व मंत्री मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को सौंपी गई। स्वतंत्रदेव ने एक-एक मुद्दों की पड़ताल की और जीत का फार्मूला सेट करने की कोशिश की। अब सीट पर भाजपा मजबूत उम्मीदवार देने के साथ ही अपने योद्धाओं को उतारने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के कद्दावर भी यहीं से
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कैबिनेट के तीन मंत्री ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे और रुद्र गुरु इसी क्षेत्र से हैं। कांग्रेस भी रणनीतिक रूप से इस सीट को सर्वाधिक प्रतिष्ठापरक मान रही है।
जातिगत समीकरण साधने की कवायद
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो दुर्ग लोकसभा सीट पर ओबीसी वोटर प्रभावी भूमिका में हैं। यहां से भाजपा लगातार साहू समाज का उम्मीदवार उतारती रही। पिछले दो चुनाव से भाजपा ने सरोज पांडेय को उम्मीदवार बनाया। सरोज भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री हैं, ऐसे में उनके प्रभाव वाली सीट हाईप्रोफाइल मानी जा रही है।
भाजपा में सरोज की पसंद के रूप में वीरेंद्र साहू और सांवलाराम डाहिरे हैं। वहीं, संगठन की ओर से पूर्व मंत्री रमशीला साहू का नाम बढ़ाया गया है। इस बीच, कोआपरेटिव सेक्टर में पहचान रखने वाले प्रीतपाल बेलचंदन भी दौड़ में शामिल हैं। यही नहीं, अमित शाह की टीम के सर्वे रिपोर्ट में भी ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का संकेत मिला है, जिसका पहले का चुनावी रिकार्ड न हो।
कांग्रेस से भी ओबीसी उम्मीदवार दौड़ में
दुर्ग लोकसभा सीट से कांग्रेस में भी ओबीसी उम्मीदवार दौड़ में हैं। मंत्री ताम्रध्वज साहू के बेटे सहित एक दर्जन ओबीसी नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गृह जिला होने के कारण यहां कांग्रेस भी बेहतर विकल्प के साथ मैदान में उतरने की कोशिश में है। भूपेश बघेल पर इस सीट को जीतने का दबाव इसलिए भी है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अपने गृह क्षेत्र और विधानसभा क्षेत्र में आने वाली राजनांदगांव लोकसभा को लगातार जीत रहे हैं। सिर्फ एक चुनाव में कांग्रेस के देवव्रत सिंह की जीत हुई थी।
वोटरों का मिक्स समीकरण
दुर्ग लोकसभा की तीन विधानसभा शहरी वोटरों वाली है। दुर्ग शहर, भिलाई नगर और वैशाली नगर के वोटर मिक्स कल्चर के हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा नजर ग्रामीण क्षेत्रों के वोटरों पर है। यहां किसान वोटर भी प्रभावी भूमिका में है। किसानों के कर्ज माफ के बाद यहां समीकरण बदलने की उम्मीद की जा रही है।
बताया जा रहा है कि सरकार बदलने के बाद यहां के राजनीतिक समीकरण में यूटर्न आया है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार के चयन के बाद ही असली मुकाबला शुरू होने की उम्मीद है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में पहले चरण में बस्तर संसदीय सीट पर मतदान होना है। यह इलाका आदिवासी बहुल है। बस्तर संभाग के सात में से छह जिले पहले चरण की बस्तर सीट में शामिल हैं। ये सारे जिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना महत्वाकांक्षी जिलों में शामिल हैं। महत्वाकांक्षी या एस्पिरेशनल जिले वे हैं जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए थे। इन जिलों में मानव विकास सूचकांक का स्तर भी नीचे थे।
मोदी ने अपने कार्यकाल के चौथे साल में महत्वाकांक्षी जिलों की योजना लागू की। 17 वीं लोकसभा के चुनाव से पहले इन जिलों को विकास के लिए सिर्फ एक साल का समय मिला। फिर भी बस्तर के कुछ जिलों ने विकास की दौड़ में बेहतर प्रदर्शन किया है। महत्वाकांक्षी जिलों का विकास चुनाव में क्या असर डालेगा यह देखा जाना बाकी है।
बस्तर के जंगलों में बसे गांवों तक इन एक सालों में बैंकों की शाखाएं पहुंची हैं। अंदरूनी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू की गई। प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों में दवा और डाक्टर का इंतजाम किया गया। दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर जिलों में भी काफी काम हुआ।
पीएमजीएसवाय योजना से सैकड़ों सड़कें मंजूर की गई। जिला मुख्यालयों में बाजार का विकास किया गया। बीजापुर जिले में जिला अस्पताल को आधुनिक बनाया गया। इस साल मार्च में जारी रैंकिंग में कोंडागांव जिले ने स्वास्थ्य और पोषण में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
सभी इंडिकेटर के लिहाज से देश के 115 महत्वाकांक्षी जिलों में कोंडागांव दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि के लिए कोंडागांव जिले को पांच करोड़ का पुरस्कार भी मिला। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस उपलब्धि के लिए कोंडागांव जिले को बधाई दी।
जहां मोदी गए थे वहां अब भी चल रहे बैंक और आंगनबाड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल 14 अप्रैल को बीजापुर जिले के धुर नक्सल प्रभावित जांगला गांव गए थे। यहां से उन्होंने आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान वे जांगला के उस केंद्र भी गए थे जहां एक ही परिसर में पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी, बैंक, पोस्ट ऑफिस, काल सेंटर आदि है।
मोदी ने इस केंद्र का अवलोकन किया था। जांगला में यह केंद्र अब भी चल रहा है। बीजापुर में मोदी के आगमन के बाद इस जिले ने सूचकांक में 45 अंक की छलांग लगाई थी।
कौन हैं महत्वाकांक्षी जिले-
देशभर में 115 जिलों को पिछड़ा माना गया है। इन्हें महत्वाकांक्षी जिले नाम दिया गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शामिल बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडांगांव, नारायणपुर और कांकेर के साथ ही राजनांदगांव, कोरबा और महासमुंद जिलों को इस सूची में शामिल किया गया है।
यहां बात होगी विकास की
लोकसभा चुनाव में दूसरी जगहों पर चाहे कुछ भी मुद्दा हो इन जिलों में विकास का मुद्दा सबसे ऊपर रहने वाला है। इन जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास, अधोसंरचना निर्माण, जल संसाधन, वित्तीय प्रबंधन, विद्युतीकरण आदि के सूचकांकों के आधार पर विकास का पैमाना तय किया गया है।
नीति आयोग ने इन जिलों के लिए केंद्र सरकार की ओर से ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी तैनात किए हैं। इन जिलों में केंद्र और राज्य की अटकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने का काम किया जा रहा है। ऐसे में यहां विकास की ही बात होनी है। यहां से चली विकास की बहस प्रदेश की दूसरी सीटों तक भी पहुंचेगी जरूर।
रायपुर । लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा कानून लाने का वादा राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम से किया। आचार संहिता लगने के बाद शुक्रवार को पहली बार रायपुर आए राहुल ने साफ कहा कि इस बार पार्टी का घोषणापत्र स्वास्थ्य सेवा पर फोकस रहेगा। उन्होंने यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम को आयुष्मान भारत योजना की काट बताते हुए स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए तीन बड़े वादे किए।
पहला तो यही कि हर नागरिक को सुलभ और मुफ्त स्वास्थ्य सेवा दिलाने के लिए कानून लाया जाएगा। दूसरा, कुल जीडीपी की तीन फीसद राशि स्वास्थ्य सेवा में खर्च करके स्वास्थ्य का बजट बढ़ाया जाएगा। तीसरा, सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की कमी दूर की जाएगी।
वीआइपी रोड स्थित होटल में एक संस्था के बैनर तले सर्व जन स्वास्थ्य का अधिकार परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें राहुल ने देशभर से आए स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों से यूनिवर्सल हेल्थ केयर स्कीम पर सुझाव लिए।
राहुल ने छत्तीसगढ़ से लोकसभा चुनाव के पहले जनता से दूसरा बड़ा वादा किया है। इसके पहले उन्होंने न्यूनतम आय का अधिकार कानून लाने की बात कही थी। राहुल ने सुझाव लेने के दौरान अपनी बातों से यह साफ कर दिया कि कांग्रेस सरकारी अस्पतालों के निजीकरण के पक्ष में नहीं है।
दूसरी तरफ, उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों के बिना स्वास्थ्य सेवा बेहतर हो सकती है, वे ऐसा भी नहीं कह रहे। उन्होंने कहा कांग्रेस सरकार बनने पर पहले सरकारी स्वास्थ्य सेवा को बेहतर किया जाएगा। राहुल ने मोदी सरकार की आयुष्मान योजना पर फिर से हमला बोलते हुए कहा कि यह योजना सिर्फ और सिर्फ बड़ी बीमा कंपनियों के लिए बनाई गई।
उन्होंने बीमा कंपनियों का भी विरोध किया, कहा-बीमा कंपनियां स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभ कमाने वाले बिग प्लेयर हैं। इस कारण कांग्रेस सरकार ऐसा कानून ला रही है, जिसमें बीमा कराने की जस्र्रत नहीं होगी। परिचर्चा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव समेत अन्य मंत्री भी शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ व राजस्थान की स्कीम देश में लागू होगी
राहुल ने कहा है कि राजस्थान की हेल्थ केयर स्कीम को केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर देश भर में लागू किया जाएगा। राहुल ने राजस्थान की ड्रग पॉलिसी की सराहना की। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा कि इस स्कीम को छत्तीसगढ़ में लागू करने पर तेजी से काम चल रहा है। प्रदेश में जल्द लागू करने की कोशिश है।
बोले-मुझसे सवाल न पूछें, अपना सुझाव दें
परिचर्चा के दौरान हेल्थ एक्सपर्ट्स राहुल से सवाल और उनका विजन पूछने लगे। इस पर राहुल ने कहा कि उनसे सवाल न पूछें, अपना सुझाव दें। उनके पास विजन है और सब सवालों का जवाब भी है, लेकिन वो हेल्थ एक्सपर्ट्स से पूछने आए हैं, क्योंकि उनसे बेहतर सुझाव मिलेंगे। जैसे उनसे राजनीति पर सवाल पूछें, तो वे ज्यादा अच्छा बता सकते हैं। राहुल यह भी बोले, भाजपा और कांग्रेस में फर्क है। कांग्रेस जनता की आवाज और उनसे सुझाव लेकर काम करना चाहती है।
रायपुर । प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही रमन सरकार और केंद्र सरकार की नीतियों में खामियों खोजी जा रही है। अब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस देव ने कहा कि आयुष्मान भारत को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत बीमा आधारित मॉडल है जिसमें करदाताओं का पैसा बीमा कंपनियों को दिया जाता है।
बीमा कंपनियों के बजाय जहां कुछ अनियमितताओं की रिपोर्ट मिलती है, हमें अपने बुनियादी ढांचे के आधार पर लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करनी चाहिए। टीएस देव ने कहा कि हम इससे बेहतर सर्विस देंगे। छत्तीसगढ़ में अभी ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की जरूरत नहीं है।
हम अभी 170 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चला रहे हैं। हम इसे जरूरत के हिसाब से बढ़ा सकते हैं। सभी राज्य हेल्थ वकर्स से कवर हो रहे हैं। हमारे मुख्यमंत्री ने जरूरत के मुताबिक मदद की बात कही है। बता दें कि आयुष्मान भारत योजना मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। मोदी सरकार ने इसे बेहद बृहत पैमाने पर देश में इसे लांच किया था।
आयुष्मान भारत योजना देश के गरीब तबके के लोगों के लिए लाया गया था। यह एक हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है। इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है। पीएम ने इसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर से देशभर में लागू किया था।
सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के मुताबिक, एक अनुमान लगाया गया है कि ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ गरीब परिवारों को इससे लाभ होगा। लगभग 50 करोड़ लोग इस योजना के दायरे में आएंगे। इसके लिए नेशनल हेल्थ एजेंसी ने नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस के तहत आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना की वेबसाइट और हेल्पलाइन को लांच किया गया है।इसमें मदद के हेल्पलाइन पर बात करने के अलावा अस्पतालों में आयुष्मान मित्र से भी मदद ले सकते हैं।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में राजधानी समेत प्रदेश के उत्तरी इलाकों में हवा का रुख बदल गया है। इसके चलते मौसम का मिजाज भी बदलता नजर आ रहा है। आलम यह है कि मार्च के तीसरे सप्ताह में हमेशा गर्मी बढ़ने लगती थी, जो इस सप्ताह ठंडक के साथ बीतने वाला है। दरअसल, मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के उत्तरी भाग में एक या दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने की चेतावनी दी है।
कहा गया है कि हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार उत्तरी छत्तीसगढ़ में बारिश हो सकती है। यहां तेज हवा चलने की अति संभावना है। मौसम विज्ञान ने यलो अलर्ट जारी किया है। मौसम का मिजाज बदलने से रायपुर के अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज हुई है।
बुधवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री रिकार्ड हुआ था वह चौबीस घंटे के भीतर एक डिग्री कम 35 डिग्री दर्ज हुआ है। न्यूनतम तापमान में कोई बदलाव नहीं है। यह 23.8 डिग्री रहा, जो कि सामान्य से तीन डिग्री अधिक है।
राज्य के ये क्षेत्र होंगे अत्यधिक प्रभावित
मौसम विभाग के त्वरित पूर्वानुमान बुलेटिन के मुताबिक प्रदेश के मुंगेली, बिलासपुर, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में कहीं- कहीं गरज-चमक के साथ 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी। यहां हुई हल्की बारिश: गुस्र्वार को प्रदेश के बिलासपुर और सरगुजा संभागों में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश भी रिकार्ड हुई। पेंड्रारोड में 0.4 और अंबिकापुर में 0.2 मिमी बारिश हुई।
न्यूनतम तापमान में प्रदेश के सभी संभागों में मामूली परिवर्तन हुआ। रायपुर और सरगुजा संभागों में सामान्य से उल्लेखनीय अधिक और शेष संभागों में सामान्य से अधिक बारिश रिकार्ड हुई। अधिकतम तापमान में प्रदेश के बिलासपुर और सरगुजा संभागों में उल्लेखनीय गिरावट और बस्तर संभाग में सामान्य से अधिक और शेष संभागों में सामान्य तापमान रहा। ओड़गी और मनेंद्रगढ़ में एक सेमी बारिश रिकार्ड हुई है।
मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा के मुताबिक ओडिशा मध्य में 0.9 किमी ऊंचाई पर एक घेरा बना हुआ है। दूसरा कारण यह है कि राजस्थान, गुजरात और पश्चिम मध्यप्रदेश के पास ऊपरी हवा का चक्रवात है जिसकी ऊंचाई 0.9 किमी है, वहां पर द्रोणिका निर्मित हो गई है जो उत्तरी कर्नाटक तक गई है। इन दोनों के प्रभाव से उत्तरी छत्तीसगढ़ में बारिश होगी। कहीं-कहीं तेज हवा चल सकती है। हालांकि रायपुर संभाग में ज्यादा असर नहीं होगा। सिर्फ बदली छाई रहेगी।
17 और 18 को एक बार फिर बारिश
द्रोणिका के इस सिस्टम के खत्म होते ही मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि एक और सिस्टम 17 और 18 मार्च को बनेगा। लिहाजा एक बार फिर बारिश होगी। सिस्टम बनने से अंबिकापुर इलाके में ज्यादा बारिश होगी।
आज ऐसा रहेगा मौसम
प्रदेश के उत्तरी इलाकों में गरजचमक के साथ बारिश और हवा के साथ अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश:35 डिग्री और 23 डिग्री के आसपास रहेगा।
रायपुर । राजधानी रायपुर से लगे धरसीवां थाना क्षेत्र में खारुन नदी किनारे नाले में गुरुवार की सुबह एक युवक की अधजली लाश मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश को नाले से निकलवाकर उसे अस्पताल भिजवाया।
मृतक की शिनाख्त ग्राम सांकरा निवासी प्रदीप कुमार निर्मलकर (35) के रूप में हुई है। वह प्रापर्टी डीलिंग के साथ खेती-किसानी का काम करता था। शादी-शुदा व तीन बच्चों का पिता था। लाश पर चोट के निशान पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में युवक की हत्या कर सुबूत मिटाने के उद्देश्य से लाश को जलाकर नाले में फेंकने की आशंका है। लाश के नजदीक ही शराब की बोतल और एक केमिकल की बोतल पड़ी मिली। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
धरसीवां पुलिस के मुताबिक गुरुवार सुबह बेरला के पास देवसरा रोड पर खारून नदी के किनारे पस्तरिया नाले में अधजली लाश को देखकर राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। इसके पाद पुलिस के साथ जांच के लिए फॉरेंसिक टीम पहुंची। जांच अधिकारी ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला हत्या का है। हत्या किसने और किस वजह से की इसकी तफ्तीश की जा रही है।
साथियों के साथ बैठकर पी थी शराब, विवाद होने पर की हत्या
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि मंगलवार की देर शाम घटनास्थल के पास मृतक के साथ चार-पांच लोग देखे गए थे, जिन्होंने साथ में शराब पी और सुनियोजित तरीके से हत्या कर दी। माना जा रहा है कि आपसी रंजिश की वजह से प्रदीप की हत्या की गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर लाश परिजनों को सौंप दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसके आधार पर हत्या व साक्ष्य मिटाने का अपराध कायम किया जाएगा।
हिरासत में संदेही
धरसीवां पुलिस ने संदेह के आधार कुछ युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में हत्या का क्लू मिला है। इसके आधार पर वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों की तलाश की जा रही है।
रायपुर । लोकसभा चुनाव की तैयारी में उतरी भाजपा ने 48 घंटे के मंथन के बाद 11 लोकसभा सीट पर पैनल तैयार कर लिया है। प्रदेश चुनाव समिति की बैठक एकात्म परिसर में हुई, जिसमें सभी 11 सीट पर दावेदारों के नाम पर विचार किया गया। प्रदेश प्रभारी डॉ अनिल जैन ने बताया कि चुनाव समिति की बैठक में लोकसभा की सभी 11 सीटों में उम्मीदवारों के नामों का पैनल तय हो गया है।
सभी सीटों पर दो से सात नाम पैनल में हैं। तय नामों को लेकर दिल्ली जा रहा हूं, जहां केंद्रीय चुनाव समिति नाम फाइनल करेगी। एकात्म परिसर में गुस्र्वार को प्रदेश पदाधिकारियों, चुनाव समिति और कोर ग्रुप की बैठक हुई। भाजपा ने विधायकों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा के आधार पर पैनल तैयार किया है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने बताया कि राजनांदगांव लोकसभा के पैनल में उनका नाम नहीं है। कयास लगाई जा रही थी कि राजनांदगांव के पैनल में उनका नाम होगा। जब डॉ रमन से यह सवाल किया गया कि क्या जिनका नाम पैनल में नहीं है, केंद्रीय चुनाव समिति उसे भी टिकट दे सकती है।
इस पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति को सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि किसी भी सीट पर सिंगल नाम नहीं है। सबसे ज्यादा नाम जांजगीर-चांपा लोकसभा से आया है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो राजनांदगांव के पैनल में अभिषेक सिंह और मधुसूदन यादव का नाम है।
दुर्ग के पैनल को लेकर सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति थी। यहां लोकसभा पदाधिकारियों की ओर से पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के साथ रमशीला साहू, विजय बघेल, सांवलाराम डाहिरे और प्रीतपाल बेलचंदन का नाम सामने आया है। महासमुंद लोकसभा से पिछड़ा वर्ग के आधा दर्जन दावेदारों के नाम सामने आये थे।
इसमें सांसद चंदूलाल साहू, चंद्रशेखर साहू, निरंजन सिन्हा, प्रेमीन साहू का नाम था। अजय चंद्राकर ने अपनी दावेदारी से इनकार कर दिया, जिसके बाद यहां से चार दावेदारों का पैनल तय किया गया। जांजगीर-चांपा में कमलादेवी पाटले के साथ सात दावेदारों का पैनल तैयार किया गया है।
रायपुर से बैस को बदलने की चर्चा
बैठक के बाद भाजपा के आला नेताओं ने बताया कि रायपुर लोकसभा से वर्तमान सांसद रमेश बैस को बदलने की चर्चा हुई है। आला नेताओं ने बैस के स्थान पर नए स्थानीय उम्मीदवार के नाम पर विचार किया। साथ ही बैस को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने की स्थिति में समाज की नाराजगी पर भी मंथन किया।
बिलासपुर में उम्मीदवार बदलने लगे नारे
बिलासपुर में वर्तमान सांसद लखनलाल साहू की जगह नये उम्मीदवार को मैदान में उतारने के लिए पदाधिकारियों ने प्रभारी डॉ अनिल जैन के सामने नारेबाजी की। मुंगेली के एक पदाधिकारी ने कहा कि अगर बिलासपुर में जीत का रिकार्ड बरकरार रखना है, तो उम्मीदवार बदलना होगा। जब उन्होंने यह बात कही तो हाल में सन्न्ाटा पसर गया।
रायपुर । कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आज एक दिवसीय दौरे पर राजधानी रायपुर आ रहे हैं। श्री गांधी ओडिशा जाते हुए यहां दो घंटे रहेंगे। वे सुबह 10 बजे विमान से माना विमानतल पहुंचेंगे। वे यहां मायाराम सरजन फाउंडेशन द्वारा वीआईपी रोड स्थित बेबीलॉन होटल में यूनिवर्सल हेल्थ केयर की ‘सबके लिए स्वास्थ्य का अधिकार विषय’ पर आयोजित कार्यशाला में शामिल होंगे।
राहुल गांधी एक घंटे रायपुर रहेंगे और इस दौरान एक्सपर्ट व डॉक्टरों से मुलाकात कर यूनीवर्सल हेल्थ केयर के बारे में जानेंगे। बता दें श्री गांधी का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में वे यूनीवर्सल हेल्थ केयर को शामिल करने वाले हैं।
कार्यशाला के बाद दोपहर 12 बजे वे ओडिशा में एक चुनावी सभा के लिए रवाना हो जाएंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और प्रदेश प्रभारी पी एल पुनिया भी शामिल होंगे।
रायपुर। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वोटबैंक को एकजुट करने की तैयारी में जुटी है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले जिस तरह से ओबीसी आरक्षण पर निर्णय लिए गए उससे यही संकेत मिलता है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने का वादा करने जा रही है।
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का तो दावा है कि कांग्रेस ओबीसी आबादी के अनुपात में 27 फीसद आरक्षण का वादा करेगी और चुनाव जीतने के बाद उसे पूरा भी करेगी। इसका संकेत इसी बात से मिलता है कि छत्तीसगढ़ में सरकार ने चुनाव में जाने से पहले ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने की संभावना तलाशने के लिए कमेटी बनाई है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने के लिए अध्यादेश पारित किया है।
इसके साथ ही मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जहां 27 फीसद आरक्षण दिया गया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में वर्तमान में ओबीसी को 14 फीसद आरक्षण दिया जा रहा है। ओबीसी वोटबैंक को लेकर कांग्रेस और भाजपा में खींचतान पुरानी है।
पिछले साल ही भाजपा ओबीसी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने के लिए देशभर में प्रदर्शन कर चुकी है। भाजपा नीत एनडीए सरकार ने पिछले ही साल ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने का कानून पास किया। इसी विधेयक को अटकाने का आरोप भाजपा तब कांग्रेस पर लगाती रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को ओबीसी बताने से नहीं चूकते। इसकी वजह यही है कि देशभर में बहुसंख्यक 52 फीसद आबादी ओबीसी वर्ग की ही है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के बाद ओबीसी वर्ग के नेता भूपेश बघेल सीएम बन गए तब भी उन्हें अध्यक्ष के पद से हटाया नहीं गया। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के पहले तक भाजपा में भी प्रदेश की बागडोर ओबीसी वर्ग के नेता धरमलाल कौशिक के हाथ थी।
बिखरी हुई हैं ओबीसी जातियां
छत्तीसगढ़ में करीब 47 फीसद ओबीसी हैं। इनमें साहू, पटेल, मरार, कुर्मी, निषाद आदि वर्गों की अलग-अलग आबादी है। प्रदेश में ओबीसी वर्ग में 95 से अधिक जातियां शामिल हैं। साहू समाज के पास 11 से 12 फीसद वोट हैं। पटेल, मरार, कुर्मी आदि का वोट प्रतिशत चार से पांच फीसद तक है। इन जातियों के अलग-अलग मुद्दे हैं। कोई भी ओबीसी वर्ग किसी एक राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है। प्रदेश में 27 फीसद ओबीसी आरक्षण्ा की मांग पुरानी है।
ओबीसी वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयास
कांग्रेस ओबीसी आरक्षण पर बड़ा दांव खेलकर ओबीसी वोटबैंक के ध्रुवीकरण का प्रयास कर सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी ओबीसी आबादी के अनुपात में 52 फीसद आरक्षण की घोषणा भी कर सकती है।
आदिवासी आरक्षण बढ़ाया, ओबीसी का नहीं
छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने आदिवासियों का आरक्षण बढ़ाकर 20 से 32 फीसद कर दिया था। पिछली सरकार ने अनुसूचित जाति का आरक्षण भी दो फीसद कम करके 12 कर दिया था। ओबीसी को 14 फीसद ही रहने दिया गया था।
कमेटी करेगी सभी वर्गों के आरक्षण की समीक्षा
राज्य सरकार ने आचार संहिता लगने से ठीक पहले जो कमेटी बनाई है वह सभी वर्गों के आरक्षण की समीक्षा कर रिपोर्ट देगी। आदेश में कहा गया है कि दस फीसद सवर्ण आरक्षण लागू करने का फार्मूला तो तलाश ही जाए, ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने के लिए भी अध्ययन दिया जाए। इस कमेटी से अनुसूचित जाति, जनजाति को मिल रहे आरक्षण की समीक्षा करने को भी कहा गया है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय में सहायक ग्रेड 3 के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगा गया है। इसके लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है। जारी विज्ञापन के मुताबिक कुल 48 पदों पर भर्ती होनी है। अधिक जानकारी छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय की वेबसाइट पर प्राप्त की जा सकती हैं। अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। साथ ही टाइपिंग कौशल की परीक्षा भी अलग से आयोजित की जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता- 12वीं पास व कंप्यूटर में एक वर्षीय डिप्लोमा के साथ हिन्दी व अंग्रेजी टाइपिंग का अनुभव।
वेतनमान- 19500- 62000 (लेवल-4)
आयु सीमा- 1 अप्रैल 2019 को 18 वर्ष से अधिक और 40 वर्ष से कम हो। (सिर्फ छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए) (विभिन्न वर्गों को शासन के नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का प्रावधान)
आवेदन की प्रारंभिक व अंतिम तिथि- 20 मार्च 2019 से 31 मार्च 2019 तक
आवेदन शुल्क-
अजा/अजजा/निःशक्तजन- 200 रुपये
अन्य पिछड़ा वर्ग- 250 रुपये
सामान्य वर्ग- 300 रुपये