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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐतिहासिक फिल्म छावा को बढ़ावा देने के लिए अहम फैसला किया है।सरकार ने 27 फरवरी 2025 से अगले छह माह तक इस फिल्म के टिकट पर लगने वाले राज्य माल और सेवा कर की पूरी राशि की प्रतिपूर्ति करने का आदेश दिया है।
सरकार के इस फैसले से सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने वाले दर्शकों को टिकट पर SGST में पूरी छूट दी जाएगी।दर्शकों को टिकट खरीदते समय टैक्स नहीं देना होगा, जिससे वे रियायती दर पर फिल्म देख सकेंगे। फिल्म छावा में छत्रपति संभाजी महाराज की वीर गाथा को दर्शाया गया है। इस फिल्म से युवाओं को प्रेरणा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने यह फैसला किया है।
जारी आदेश में मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों के लिए नियम तय किए गए हैं। जिसके मुताबिक टिकट में से SGST की राशि घटाकर बेची जाएगी। साथ ही सामान्य टिकट मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की जा सकेगी। वहीं पहले सिनेमाघर खुद SGST वहन करेंगे, जिसे बाद में सरकार वापस करेगी.
बता दें कि राजिम कुंभ कल्प मेला के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फिल्म छावा को टैक्स फ्री करने की घोषणा की थी। जिसके बाद आज इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के खम्हारडीह स्थित शासकीय बालिका गृह पहुंचकर अपना जन्मदिन नन्ही मुस्कानों के साथ सादगीपूर्वक मनाया। मुख्यमंत्री साय ने अपने विशेष दिन को इन नन्हीं मुस्कानों के साथ साझा कर यह संदेश दिया कि समाज के हर वर्ग की खुशियों में भागीदार बनना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
मुख्यमंत्री साय ने बालिका गृह में बच्चियों के संग केक काटा, उनके साथ समय बिताया और उनकी मासूम हँसी और बातों को आत्मीयता से सुना। इस दौरान बच्चियों ने अपनी छोटी-छोटी इच्छाएँ उनके सामने रखीं, जिनमें एक साउंड बॉक्स की माँग भी थी। मुख्यमंत्री ने इसे तत्काल पूरा करते हुए बालिका गृह को यह उपहार भेंट किया।इसके अलावा, उन्होंने बालिका गृह में कंप्यूटर, वॉटर कूलर एवं अन्य व्यवस्थाओं के लिए 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की, जिससे यहाँ रह रही बच्चियों की शिक्षा में कोई असुविधा न हो।
*मुख्यमंत्री साय ने स्कूली जीवन की यादें की साझा*
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने स्कूली जीवन की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके गाँव का प्राथमिक स्कूल खपरेल वाला था, और बारिश के दिनों में पानी टपकता था। उन्होंने बच्चियों को बताया कि वे भाग्यशाली हैं कि उन्हें एक बेहतर छात्रावास और पढ़ाई के लिए अच्छा वातावरण मिला है। उन्होंने बच्चियों को लगन और मेहनत से पढ़ाई करने की प्रेरणा दी और समझाया कि शिक्षा ही सफलता की कुंजी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने देश-दुनिया के महान व्यक्तित्वों के जीवन संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि संघर्षों से घबराने के बजाय, उन्हें अपनी ताकत बनाना चाहिए। उन्होंने बच्चियों को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव सहायता देगी।
उल्लेखनीय है कि बालिका गृह में फिलहाल 57 बच्चियाँ रह रही हैं, जहाँ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा उन्हें निशुल्क आवास, भोजन, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश के सागर जिले में इनकम टैक्स विभाग की एक बड़ी कार्रवाई ने सभी को चौंका दिया है। विभाग द्वारा एक पूर्व विधायक के घर पर छापेमारी के दौरान दो जीवित मगरमच्छ, भारी मात्रा में सोना, नकदी, और बेनामी संपत्ति का पता चला। इस घटना ने न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता को भी हिला कर रख दिया है।
क्या है मामला?
यह मामला तब सामने आया जब आयकर विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर पूर्व विधायक के घर और उससे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। यह रेड पिछले 48 घंटों से चल रही थी।
मगरमच्छ कैसे बरामद हुए?
रेड के दौरान अधिकारियों को घर के पिछले हिस्से में एक विशेष संरचना दिखाई दी, जो एक छोटे तालाब की तरह थी। जब इसे जांचा गया, तो उसमें से दो मगरमच्छ जीवित पाए गए। इन मगरमच्छों को तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया।
बेनामी संपत्ति और सोना
रेड के दौरान विभाग को:
- 50 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति के दस्तावेज़ मिले।
- करीब 10 किलो सोना बरामद किया गया।
- 5 करोड़ रुपये की नकदी भी जब्त की गई।
पूर्व विधायक पर लगे आरोप
पूर्व विधायक पर पहले से ही भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप थे। इस रेड ने उन पर लगे आरोपों को और गंभीर बना दिया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस पूरी घटना पर प्रशासन ने कहा कि:
“यह मामला न केवल आयकर चोरी बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन से भी जुड़ा है। पूर्व विधायक के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और आयकर अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
वन विभाग का बयान
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मगरमच्छों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, और इस मामले में अलग से जांच शुरू की जाएगी।
आगे की कार्रवाई
पूर्व विधायक और उनके सहयोगियों पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आयकर विभाग अब यह जांच कर रहा है कि उनके पास मौजूद संपत्ति और नकदी का स्रोत क्या है।
यह क्यों है हैरान करने वाला मामला?
मध्य प्रदेश में इस तरह का यह पहला मामला है, जहां एक राजनेता के पास वन्यजीवों की अवैध रूप से मौजूदगी पाई गई है। यह घटना न केवल भ्रष्टाचार बल्कि वन्यजीवों के अवैध व्यापार और तस्करी की ओर भी इशारा करती है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया और स्थानीय समुदाय में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि कैसे इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियां लंबे समय तक छिपी रहीं।
यह मामला भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रशासनिक सख्ती की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इससे यह भी साबित होता है कि कानून के हाथ लंबे हैं और गलत काम करने वालों को देर-सवेर जवाब देना ही पड़ेगा।