panchayattantra24.-गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. धीगियामुडा गांव में 48 वर्षीय हीरा बाई नेताम पिछले करीब 20 वर्षों से हाथ और पैरों की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. लंबे समय तक इलाज कराने के बावजूद जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो गांव में इसे छूत की बीमारी मान लिया गया. अंधविश्वास इतना हावी हुआ कि परिवार ने भी सामाजिक दबाव में आकर महिला को गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर खेत में बनी झोपड़ी में रहने के लिए छोड़ दिया.
12 दिनों से झोपड़ी में काट रही थी जिंदगी
पीड़िता के पति नरसिंह नेताम ने बताया कि उनकी पत्नी लंबे समय से पैरों में सूजन और हाथों में घाव से पीड़ित हैं. कई बार इलाज कराने के बावजूद बीमारी ठीक नहीं हुई. आर्थिक और मानसिक परेशानियों के कारण करीब एक साल पहले इलाज भी बंद कर दिया गया. धीरे-धीरे हाथ-पैरों में सूजन बढ़ गई, फोड़े हो गए और असहनीय दर्द के कारण हीरा बाई लगातार कराहती रहती थी.
इसी बीच गांव के लोगों ने इसे संक्रामक बीमारी बताते हुए परिवार पर महिला को गांव से बाहर रखने का दबाव बनाया. सामाजिक तानों और दबाव से परेशान परिवार ने 2 जुलाई को गांव से लगभग आधा किलोमीटर दूर अपने खेत में एक छोटी झोपड़ी बनाकर उन्हें वहां अकेला छोड़ दिया. परिवार के सदस्य केवल दिन में दो बार भोजन पहुंचाकर लौट आते थे. वह सिर्फ दो बार खाना देने बस जाते हैं.
एंबुलेंस लेकर पहुंचे जिपं अध्यक्ष
संवेदनशील मामले की जानकारी गांव के एक जागरूक युवक ने इंस्टाग्राम के माध्यम से जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप को दी. सूचना मिलते ही उन्होंने देवभोग के बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू से संपर्क किया और एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे.
जब टीम वहां पहुंची, तो हीरा बाई झोपड़ी में दर्द से कराह रही थीं और मदद की गुहार लगा रही थीं. जिला पंचायत अध्यक्ष ने परिजनों को बुलाकर महिला को एंबुलेंस से देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां डॉक्टरों ने उनका प्रारंभिक उपचार शुरू कर दिया है.
इलाज के अभाव में गैंगरीन के लक्षण
बीएमओ प्रकाश साहू ने मामले को लेकर बताया कि प्राथमिक जांच के बाद पीड़िता को उचित उपचार के लिए रेफर किया जाएगा. उचित इलाज के अभाव में गैंगरीन जैसे लक्षण दिखाई दे रहा है.
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