Close Menu
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot

गांधी-शास्त्री जयंती पर गूंजा सर्वधर्म सद्भाव का संदेश, राज्य स्तरीय प्रार्थना सभा में स्काउट्स-गाइड्स ने लिया सेवा का संकल्प

October 2, 2026

गांधी जयंती पर खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा, प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में शुरू हुई कई नई पहल

October 2, 2026

जशपुर में ‘एक तारीख, एक घंटा, एक साथ’ का संदेश, सेवा संकल्प अभियान में व्यापक स्वच्छता श्रमदान

October 2, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, October 2
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
  • Home
  • संपादकीय
    • रायपुर
    • दुर्ग
    • बस्तर
    • बिलासपुर
    • सरगुजा
  • राष्ट्रीय
    • दिल्ली
    • छत्तीसगढ़
    • मध्य प्रदेश
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • धर्म आध्यात्म
  • बिज़नेस
  • Contact Us
Panchayat Tantra 24
Home » ’चार हजार की नौकरी से 30 लाख के उद्यम तक पहुँची अंजना उरांव की प्रेरक कहानी, आज बना चुकी हैं करीब 20 लाख फ्लाईऐश ईंटें’
छत्तीसगढ़

’चार हजार की नौकरी से 30 लाख के उद्यम तक पहुँची अंजना उरांव की प्रेरक कहानी, आज बना चुकी हैं करीब 20 लाख फ्लाईऐश ईंटें’

Author AuthorBy Author AuthorOctober 1, 2026No Comments9 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Share
WhatsApp Telegram Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

panchayattantra24.-कोरिया। ’ कभी-कभी जिंदगी बदलने के लिए बड़े अवसर दस्तक नहीं देते, बल्कि एक छोटी-सी सूचना भी पूरे जीवन की दिशा बदल देती है। कभी कोई किताब, कोई शब्द, किसी का हौसला बढ़ाने वाला वाक्य या फिर कागज का एक छोटा-सा टुकड़ा इंसान के भीतर छिपे सपनों को जगा देता है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम तोलगा की अंजना उरांव के जीवन में भी बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि कार्यालय के डस्टबिन में पड़े एक फटे हुए पन्ने से हुई।
‘डस्टबिन में पड़े उस पन्ने पर लिखा था ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ दूसरों के लिए वह कागज का टुकड़ा था, लेकिन अंजना के लिए वह उनके भविष्य का दरवाजा बन गया। उन्होंने उस पन्ने को उठाया, पढ़ा, योजना को समझने की कोशिश की और मन ही मन तय कर लिया कि अब जिंदगी केवल सीमित आय वाली नौकरी तक नहीं रहेगी। वे अपना काम शुरू करेंगी, आत्मनिर्भर बनेंगी और दूसरों के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार करेंगी।
आज वही अंजना उरांव अपनी ‘अंजना इंटरप्राइजेज’ फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई संचालित कर रही हैं। लगभग 30 लाख रुपये के बैंक ऋण से शुरू हुआ उनका यह उद्यम अब तक करीब 20 लाख फ्लाईऐश ईंटों का उत्पादन कर चुका है।
गांवों में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों के लिए इन ईंटों की आपूर्ति कर अंजना न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के आशियाने के निर्माण में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।
’चार हजार रुपये के मानदेय से शुरू हुआ सफर’
अंजना उरांव स्नातकोत्तर शिक्षित हैं। इसके बावजूद वे जनपद पंचायत खड़गवां में अंशकालिक डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में महज चार हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत थीं। परिवार, खेती-बाड़ी और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच सीमित आय में जीवन आगे बढ़ रहा था।
ऐसे ही एक दिन कार्यालय के डस्टबिन में पड़े कचरे को बाहर फेंकने गई तब उनकी नजर डस्टबिन में पड़े एक फटे हुए पन्ने पर पड़ी। उस पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी थी। अंजना ने उसे पढ़ा और योजना के बारे में जानकारी जुटाने का निर्णय लिया।
यही वह क्षण था, जब एक सामान्य गृहस्थ महिला के भीतर छिपी उद्यमी बनने की इच्छा ने आकार लेना शुरू किया।
’यह सब आसान नहीं है-कहा गया, लेकिन अंजना नहीं रुकीं’
योजना की जानकारी लेने के दौरान अंजना को प्रोत्साहन के साथ-साथ निराश करने वाली बातें भी सुनने को मिलीं। किसी ने जिला उद्योग केंद्र जाने की सलाह दी तो किसी ने बैंक और सरकारी योजनाओं की प्रक्रिया को कठिन बताते हुए पीछे हटने की सलाह दी।
परिवार और समाज की ओर से भी उन्हें कई तरह के सवालों का सामना करना पड़ा। मायके और ससुराल दोनों ओर से यही सुनने को मिला ‘यह लफड़ा मत पालो।’
लेकिन अंजना ने तय कर लिया था कि अगर रास्ता कठिन है, तो रास्ता छोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि उसे पार किया जाएगा।
इसी दौरान मोबाइल और अखबार में महिला अधिकारी का एक कथन उनकी नजर से गुजरा-‘महिलाएं किसी से कम नहीं हैं, वे अपने हौसले से आगे बढ़ सकती हैं।’ यह बात अंजना के मन में घर कर गई। उन्होंने इसे केवल पढ़ा नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारने का फैसला किया।
’फ्लाईऐश ईंट इकाई देखकर आया अपना उद्योग शुरू करने का विचार’
जिला उद्योग केंद्र से जानकारी लेने के बाद अंजना ने पोड़ी-बचरा क्षेत्र में संचालित फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई का अवलोकन किया। वहां उन्होंने देखा कि सीमित संसाधनों से भी उद्योग खड़ा किया जा सकता है और स्थानीय स्तर पर इसकी अच्छी मांग है।
बस फिर क्या था। उन्होंने तय कर लिया कि वे भी फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई स्थापित करेंगी। इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष-दस्तावेज तैयार करना, विभागीय प्रक्रिया पूरी करना, बैंक के चक्कर लगाना, ऋण के लिए प्रयास करना और बार-बार आने वाली अड़चनों का सामना करना। कई बार ऋण स्वीकृत नहीं हुआ। कई बार उम्मीद टूटी। लेकिन अंजना के इरादे नहीं टूटे।
’पति ने कहा -तुम आगे बढ़ो, मैं तुम्हारे साथ हूं’
इस पूरे संघर्ष में अंजना को सबसे बड़ा सहारा मिला उनके पति अनिल कुमार का। अनिल कुमार दसवीं तक पढ़े हैं। उद्योग का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। खेती और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पत्नी के सपने को अपना सपना बना लिया। जब समाज और परिचितों की ओर से हतोत्साहित करने वाली बातें सामने आईं, तब पति ने अंजना का हौसला बढ़ाया।
आखिरकार बैकुंठपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। कटघोरा से मशीनें मंगाई गईं। शेड का निर्माण कराया गया। कोरबा से फ्लाईऐश तथा स्थानीय स्तर पर रेत और सीमेंट की व्यवस्था की गई। धीरे-धीरे वह सपना, जिसे कभी एक फटे हुए कागज के टुकड़े ने जन्म दिया था, जमीन पर आकार लेने लगा।
’अगस्त 2025 में लोकार्पण, अक्टूबर से शुरू हुआ उत्पादन’
अंजना की फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई का अगस्त 2025 में लोकार्पण हुआ और अक्टूबर 2025 से उत्पादन प्रारंभ किया गया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार मेहनत और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन बढ़ता गया। अब तक उनकी इकाई में लगभग 20 लाख ईंटों का निर्माण हो चुका है।
अंजना बताती हैं कि गांव-गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे आवासों के लिए उनकी इकाई से बड़ी संख्या में ईंटों की बिक्री हुई है। इससे उन्हें व्यवसाय में आगे बढ़ने का अवसर मिला और साथ ही उन्हें इस बात की संतुष्टि भी है कि उनके द्वारा बनाई गई ईंटें किसी जरूरतमंद परिवार के पक्के घर की नींव का हिस्सा बन रही हैं।
’प्रतिदिन 15 हजार ईंटों की उत्पादन क्षमता, लाखों का कारोबार’
ईंटों की बढ़ती मांग को देखते हुए अंजना ने ईंट रखने के लिए बड़ी संख्या में लकड़ी की ट्रॉली (पीढ़ा) भी खरीदी है। उनकी इकाई में प्रतिदिन करीब 15 हजार ईंटों के उत्पादन की क्षमता है। उन्होंने बताया कि उत्पादन के दौरान प्रतिमाह लगभग 6 से 7 लाख रुपये का कारोबार हुआ है।
बारिश के कारण जुलाई माह से फिलहाल ईंट निर्माण का काम बंद है। बारिश में उत्पादन प्रभावित होने के साथ मजदूरों की उपलब्धता में भी परेशानी होती है। अंजना का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही वे पुनः पूरी गति से उत्पादन शुरू करेंगी।
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि उद्योग के लिए लिया गया बैंक ऋण भी वे पूरी जिम्मेदारी से चुका रही हैं। अंजना बताती हैं कि वे हर माह करीब 60 हजार रुपये की बैंक किश्त नियमित रूप से जमा कर रही हैं और अब तक किसी तरह की चूक नहीं हुई है।
’उद्योग के साथ खेती और परिवार की जिम्मेदारी भी’
अंजना की सफलता केवल उद्योग तक सीमित नहीं है। संयुक्त परिवार, बच्चों की परवरिश, खेती और उद्योग इन सभी जिम्मेदारियों को वे संतुलित ढंग से निभा रही हैं।उनके पास करीब चार एकड़ भूमि है, जहां वे अभी धान की खेती भी कर रही हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उद्योग को संभालना आसान नहीं है, लेकिन अंजना इसे चुनौती नहीं बल्कि अपने जीवन का हिस्सा मानती हैं।
’जिस समाज ने रोका, वही आज कर रहा है सम्मान’’
अंजना बताती हैं कि जब उन्होंने उद्योग शुरू करने का निर्णय लिया था, तब परिवार, समाज और गांव के कुछ लोगों ने उनका मजाक भी बनाया। महिला होने के कारण उन्हें कई तरह की बातें सुननी पड़ीं। कई लोगों ने उन्हें इस काम से पीछे हटने की सलाह दी। लेकिन आज परिस्थितियां बदल गई हैं, जो लोग कभी कहते थे कि यह काम उनके लिए मुश्किल है, वही लोग आज उनकी मेहनत और सफलता की सराहना करते हैं।
अंजना भावुक होकर कहती हैं ‘लोग जिस डस्टबिन को कचरा समझते हैं, उसी डस्टबिन ने मुझे मेरी पहचान दी। इसलिए जहां से भी ज्ञान मिले, उसे अपनाना चाहिए। मेहनत, जुनून और लगन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।‘
’मेरे जैसी अन्य बेटियां भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं’
अंजना का कहना है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, ग्रामीण और आदिवासी समाज की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उनका मानना है कि इन योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज और प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
वे जिले की महिलाओं से आह्वान करती हैं कि वे केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ें।
उनका कहना है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव की महिलाएं, किसान, युवा और गरीब परिवार भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
’कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कहा-साधनों की कमी नहीं, हौसले की जरूरत’
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने अंजना उरांव की सफलता को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ‘अंजना उरांव निश्चित ही उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो साधनों और संसाधनों के अभाव का हवाला देकर आगे बढ़ने से रुक जाती हैं। सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लेकर एक सफल उद्यमी बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही अंजना पर गर्व किया जाना चाहिए।‘
’डस्टबिन से शुरू हुई कहानी, अब कई घरों की नींव बन रही’
अंजना उरांव की कहानी केवल एक महिला के उद्यमी बनने की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जो अवसर को पहचानती है। यह उस साहस की कहानी है, जो विरोध के बावजूद आगे बढ़ता है। यह उस परिवार की कहानी है, जहां पति ने पत्नी के सपने को अपना सपना बनाया और यह सरकारी योजना की उस ताकत की कहानी है, जिसने एक सीमित आय वाले परिवार को अपना उद्यम खड़ा करने का अवसर दिया।
सबसे खूबसूरत बात यह है कि जिस डस्टबिन से अंजना को अपने लिए अवसर मिला, उसी अवसर से आज वे दूसरे परिवारों के सपनों का घर बनाने में योगदान दे रही हैं।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से शुरू हुआ यह सफर प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। अंजना की बनाई ईंटें उन घरों की दीवारों में लग रही हैं, जहां किसी परिवार का वर्षों पुराना ‘अपने पक्के घर’ का सपना पूरा हो रहा है।
इसलिए अंजना उरांव की संघर्ष को सिर्फ सफलता की कहानी कहना शायद कम होगा। यह उस फटे हुए पन्ने की कहानी है, जिसने एक जिंदगी बदल दी। यह एक महिला के हौसले की कहानी है, जिसने पूरे परिवार की दिशा बदल दी और यह उस विश्वास की कहानी है कि अवसर छोटा हो सकता है, लेकिन हौसला बड़ा हो तो मंजिल बड़ी बनाई जा सकती है।
डस्टबिन में पड़ा वह फटा पन्ना आज अंजना की पहचान बन चुका है और उनकी ईंटों से किसी और के सपनों का घर आकार ले रहा है। सेवा संकल्प अभियान के उद्देश्य सेवा, जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और जनकल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव की जमीनी मिसाल के रूप में अंजना उरांव की यह कहानी निश्चित ही अनेक महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देती है।

Share. WhatsApp Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Copy Link Telegram Email
Author Author
  • Website

Related Posts

सेवा की कहानी : वर्षों की जिम्मेदारी को सम्मान, पौधे के साथ मिली नई शुरुआत

October 1, 2026

जब किसान बने अपने कारोबार के मालिक, महिला नेतृत्व ने दिखाई नई राह

October 1, 2026

सेवा संकल्प अभियान में दिखी जनभागीदारी, मांदरी की थाप पर ग्रामीणों संग थिरके कलेक्टर

October 1, 2026
Advertisement
× Popup Image


RO No. 13728/1

Recent Posts

  • गांधी-शास्त्री जयंती पर गूंजा सर्वधर्म सद्भाव का संदेश, राज्य स्तरीय प्रार्थना सभा में स्काउट्स-गाइड्स ने लिया सेवा का संकल्प
  • गांधी जयंती पर खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा, प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में शुरू हुई कई नई पहल
  • जशपुर में ‘एक तारीख, एक घंटा, एक साथ’ का संदेश, सेवा संकल्प अभियान में व्यापक स्वच्छता श्रमदान
  • प्रसव के बाद काम से दूर रहीं नंदरानी, मिनीमाता महतारी जतन योजना ने थामा परिवार का हाथ, 20 हजार रुपये की सहायता से दवा, पोषण आहार और नवजात की जरूरतें हुईं पूरी
  • कोहकामेटा में शिक्षकों का अनूठा नवाचार, नुक्कड़ नाटक से ग्रामीणों तक पहुंचा जनकल्याणकारी योजनाओं का संदेश

Recent Comments

No comments to show.

 

Panchayat Tantra 24

panchayattantra24.com एक ऐसा न्यूज बेबसाईट है, जिसके माध्यम से विभिन्न दैनिक समाचार पत्र एवं अन्य पत्रिका को समाचार एवं फोटो फीचर की सेवायें न्यूनतम शुल्क में प्रदान किया जाता है। साथ ही लिंक के द्वारा भी अन्य पाठकों को फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब व अन्य संचार माध्यम से प्रतिदिन समय-समय पर न्यूज भेजा जाता है।

Email Us: panchayattantra24@gmail.com
Contact: +91 7000291426

Categories

  • Uncategorized
  • अंतरराष्ट्रीय
  • एंटरटेनमेंट
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • दिल्ली
  • दुर्ग
  • धर्म आध्यात्म
  • बस्तर
  • बिज़नेस
  • बिलासपुर
  • मध्य प्रदेश
  • रायपुर
  • राष्ट्रीय
  • संपादकीय
  • सरगुजा

Contact Details

Owner and Editor
Kanya Kumari pandey

Mobile No.
7000291426

Address
Subhas Nagar Near Jal Vihar Colony Raipur Chhatisgarh

© 2026 Designed by RT Internet Services.
  • Home
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.