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रायपुर । प्रदेश की नई सरकार को प्रशासनिक कामों में गड़बड़ी के कारण दो-तीन बड़े झटके लगे, तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। इस कारण उन्होंने सरकारी कामकाज की निगहबानी के लिए संगठन को मैदान में उतार दिया है।
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ने आचार संहिता हटने से पहले ही पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव भी शुरू कर दिया है। आचार संहिता हटने के बाद न केवल मंत्रालय के कई अधिकारियों के विभाग बदले जाएंगे, बल्कि जिला स्तर पर कलेक्टर व एसपी से लेकर दूसरे विभागों के अधिकारियों को भी इधर से उधर किया जाएगा।
सरकारी कामकाज में दिक्कतों के कारण अक्सर देखा जाता है कि सत्ता और संगठन में टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में ऐसा कई बार हुआ, जब संगठन की नाराजगी अपनी ही सरकार के खिलाफ दिखी।
अभी कांग्रेस और उसकी सरकार के लिए एक बात यह अच्छी है कि संगठन का मुखिया और मुख्यमंत्री एक ही व्यक्ति है। इस कारण बघेल के लिए सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाकर चलना कोई कठिन काम नहीं है। सत्ता संभालने के बाद बघेल को प्रशासनिक कामकाज में कुछ ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है कि उनके लिए अब सत्ता के साथ संगठन को जोड़कर चलना जरूरी हो गया है।
मुख्यमंत्री बघेल ने पीसीसी अध्यक्ष होने के नाते संगठन को निर्देश दिया है कि अभी खरीफ फसल के मौसम में जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता गांवों का दौरा करें। किसानों से मिलें, यह जानकारी लें कि उन्हें अच्छे किस्म का खाद और बीज उपलब्ध कराया गया है या नहीं? कृषि ऋण को लेकर कोई दिक्कत तो नहीं है? पार्टी के पदाधिकारियों-कार्यकर्ताओं को यह निर्देश दिया गया है कि उन्हें कहीं भी किसानों के साथ कोई परेशानी दिखती है, तो उसकी सूचना तत्काल प्रदेश कार्यालय को दें। प्रदेश कमेटी सीधे मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री को रिपोर्ट देगी।
संगठन की सक्रियता से प्रशासन पर बनेगा दबाव
कांग्रेस संगठन की निगरानी से प्रशासन पर दबाव बनेगा, क्योंकि अधिकारियों को पता होगा कि सत्ताधारी दल के नेता किसानों से सीधे मिलकर उनको मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ले रहे हैं, तो प्रशासनिक अमले की कोशिश रहेगी कि कोई नकारात्मक रिपोर्ट ऊपर न जाए।
ऐसे झटके लगे सरकार को
– ट्रेजरी का सर्वर बंद होने के कारण सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन देने में देर हुई।
– चिप्स के सर्वर में तकनीकी खराबी आने के कारण पीईटी व पीपीएटी को स्थगित करना पड़ा।
– बिजली के मामले में सरप्लस स्टेट होने के बावजूद पॉवरकट होने के कारण विपक्ष ने घेरा।
सीएम सुनियोजित साजिश की जता चुके हैं आशंका
मुख्यमंत्री बघेल ने अब तक हुई प्रशासिनक कार्यों में हुई गड़बड़ियों के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका जता चुके हैं। उनका इशारा उन अधिकारियों की तरफ है, जो पूर्ववर्ती सरकार के करीबी माने जाते थे। सत्ता में आने से पहले बघेल ने कहा भी था कि कमल फूल छाप अधिकारी सुधर जाएं, वरना खुद तय कर लें, उन्हें कहां जाना है।

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दंतेवाड़ा । बस्‍तर में आतंक का जड़ जमा चुके नक्‍सलियों को उखाड़ फेंकने अब डीआरजी की महिला कमांडोज सुपर-30 उतर चुकी हैं। इन सभी महिला कमांडोज का अपना अलग- अलग गहरा दर्द है। समर्पित महिला नक्‍सली को संगठन में रहने का भी लाभ नहीं मिला। साथियों ने ही उनके परिवार का कत्‍लेआम किया।
इधर शहादत को सलाम करते पति के लक्ष्‍य को पूरा करने पत्‍नी ने नक्‍सलियों के खिलाफ बंदूक उठाई है। इसी तरह सुपर-30 की हर महिला कमांडोज के मन में नक्‍सलियों के खिलाफ आक्रोश भरा है। पुलिस अधिकारियों ने ऐसे ही 30 महिलाओं को एकत्र कर डीआरजी की सुपर-30 तैयार की है।
इस सुपर-30 की आधे फाइटर्स को अधिकारियों ने लाल लड़ाकों के सामने बुधवार को उतारा था। बस्‍तर में चल रहे अघोषित युद्ध में इनका पराक्रम देखने को मिला। पहली लड़ाई में ही अपनी काबिलियत दिखा दी।
दर्द-जुनून और नक्‍सलियों के खिलाफ आक्रोश का मिश्रण है सुपर-30
बस्‍तर में नक्‍सलियों के खिलाफ अब महिला कमांडोज को उतारा गया है। बुधवार को दंतेवाड़ा- सुकमा बार्डर के गोंडेरास मुठभेड़ में ये महिला फाइटर्स शामिल रही। इनका चयन अधिकारियों ने बड़ी सोच और दूरगामी परिणाम के लिए किया है। इन सुपर-30 कमांडोज में ऐसी युव‍ती और महिलाओं को रखा गया है। जो स्‍थानीय बोली-भाषा और भौगोलिक परिस्थितियों को समझती है। इतना ही नहीं ये लोग भी नक्‍सलियों के सताए हुए।
चाहे आम घरेलू महिला रही हो या नक्‍सलियों के संगठन पर जिम्‍मेदार पदों पर। उनका आक्रोश, दर्द और जुनून को देखते अधिकारियों ने 30 विशेष महिला फाइटर्स को लाल लड़ाको के खिलाफ मैदान में उतारा है। इनमें सलवा जुडूम में परिजनों को खोने वाली महिलाओं से लेकर नक्‍सली हिंसा में शहीद होने वाले जवानों की पत्नियां ही नहीं लाल गलियारे में एरिया कमेटी सचिव जैसे पर काबिज फाइटर्स भी हैं।
ऐसे तैयार हुई डीआरजी की सुपर-30 महिला कमांडोज
जिले के पुलिस अधिकारियों ने सलवा जुडूम के बाद बने सहायक आरक्षक, गोपनीय सैनिक, आत्‍म समर्पित नक्‍सली और उनकी पत्नियों के साथ शहीद जवानों की पत्नियों को शामिल किया है। जिन्‍हें जंगलवार कैंप की विशेष ट्रेनिंग के साथ नक्‍सलियों से सामना करने हर तरह दक्ष किया है।
आधुनिक और पारंपरिक हथियार के साथ बाइक चलाना में भी तैयार किया जा रहा है। टीम की आधी महिलाएं अभी बाइक में फरर्राटा भरने के साथ तैराकी भी जानती हैं। बेसिक कोर्स के साथ कांकेर में 45 दिन का गुरिल्‍लावार का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा प्रतिदिन सुबह पुलिस ग्राउंड में प्रैक्टिस कराया जा रहा है।
पति को शहादत करने वाले को चुन-चुनकर मारना
सुपर-30 की फाइटर्स मधु पोडियाम कभी घरेलू महिला थी। खेत और घर के काम के बाद परिवार में उलझी रही। आज हाथों में बंदूक थामे नक्‍स‍िलियों के खिलाफ खड़ी है। मधु कहती है तो नक्‍सलियों को चुन-चुनकर मारना है। उसने मेरा सुहाग ही नहीं कई परिवार को उजाड़ दिया है। अब नक्‍सलियों से जब भी सामना होगा, मैं नहीं मेरा बंदूक बात करेगा। मधु के पति नक्‍सली मुठभेड़ में शहीद हो गए तो वह बच्‍चे और बुजुर्ग सास-ससूर की देखभाल के लिए फोर्स में भर्ती हो गई।
कमेटी सचिव रही फि‍र भी मारा पिता को
करीब सात साल पहले आत्‍म समर्पित करने वाली नेशनल पार्क एरिया कमेटी की सचिव बसंती उरसा का दर्द भी जुदा नहीं है। वह नक्‍सली संगठन के जिम्‍मेदार पद पर रही लेकिन नक्‍सलियों ने उसकी बगैर जानकारी के पिता और चाचा की हत्‍या कर दी। सिर्फ इसलिए वह गांव पंच बनकर विकास करना चाहता था। नक्‍सलियों का यह क़त्‍य बसंती को भीतर तक झझकोर दिया कि वह2012 में सरेंडर कर पुलिस के लिए काम करने लगी। आज महिला फाइटर्स की सुपर-30 का हिस्‍सा है।
समझ में आते ही छोड़ आई पार्टी
भांसी इलाके की रहने आत्‍मसमर्पित नक्‍सली सुनीता कहती है कि मुझे डरा- धमकाकर नक्‍सली संगठन में शामिल कर लिए थे। तब मैं बच्‍ची थी लेकिन बड़े होने के बाद समझ में आया कि यह गलत है तो 2014 में छोड़ आई नक्‍सल संगठन। मैंने नक्‍सल पार्टी में रहकर अपना बहुत कुछ खोया है। अब उसकी भरपाई तो हो नहीं सकती लेकिन किसी और बच्‍ची को नक्‍सल संगठन में जाने से रोकने के लिए लीडरों को मार भगाने की बात कहती है।
जंगल में छिपते फिर रहा था अब नक्‍सलियों को खोजता हूं
कभी फोर्स की डर से जंगल में छिपते ग्रामीणों को डराते- धमकाते रहे, लेकिन अब उन्‍हीं ग्रामीणों के बीच सुकून मिल रहा है। परिवार के साथ रहने से जिंदगी बढ़़ रही है। यह बात दो साल पहले अपनी प्रेमिका के साथ आत्‍मसमर्पण करने वाले नक्‍सली सन्‍नु तारम का है। सन्‍नु आज पुलिस लाइन में रहकर फोर्स के लिए काम कर रहा है। उसके साथ उसकी पत्‍नी और प्रेमिका भी रहती है। ये भी कभी नक्‍सली लीडर हुआ करती थी।
सन्‍नु अपनी प्रेमिका आयती के साथ 2017 में पुलिस के समक्ष हथियार डाला था। तब वह सेक्‍शन प्‍लाटून नंबर 2 का कमांडर था। उसकी प्रेमिका आयती भी एलजीएस की डिप्‍टी कमांडर थी। सन्‍नु के सरेंडर के बाद उसकी पत्‍नी सुशीला तारम भी सितंबर 2018 में नक्‍सली संगठन छोड़कर पुलिस के पास आ गई। अब दोनों महिलाएं डीआरजी का हिस्‍सा बनकर लाल लड़ाकों को मात देना चाहती हैं।
उनका कहना है कि नक्‍सल संगठन में आजादी नहीं है। न परिवार के साथ रह सकते हैं और मिलने दिया जाता है। विवाह के बाद भी पति के साथ रहने नहीं देते हैं। पति का नसबंदी करा दिया था। जबकि हम मात़त्‍व सुख लेना चाहती थी। अपनी बात रखने पर लीडर मारपीट भी करते थे। समाज के ऐसे दुश्‍मनों को मार भगाना ही समाज सेवा है।
इनका कहना है
दंतेवाड़ा में नक्‍सलियों से सामना करने के लिए डीआरजी में बेहतरीन कमांडो हैं। डीआरजी से नक्‍सली खौफ खाते है। इस टीम स्‍थानीय लोग और जानकार रखे गए हैं। अब डीआरजी की नई टुकड़ी महिलाओं की बनाई गई है। जिसमें चुनिंदा 30 कमांडोज को शामिल किया है। इनका चयन करने में काफी दिक्‍कत हुई लेकिन डीएसपी दिनेश्‍वरी नंद के नेत़त्‍व में ये सुपर-30 महिला फाइटर्स बेहतर परिणाम देने तैयार हैं। इस टीम में आत्‍मसमर्पित नक्‍सली और शहीद जवानों के साथ स्‍थानीय बोली-भाषा और भौगोलिक परिस्थिति के जानकारों का शामिल किया गया है। ये सभी तरह के हथियार चलाने के साथ तैराकी और बाइक चलाने में भी दक्ष हैं। महिला कमांडोज को नक्‍सल मोर्च पर भेजने के कई लाभ मिलेंगे। महिला नक्‍सलियों की गिरफ्तारी से लेकर उनके सामने फायर खोलने में ये सुपर-30 फाइटर्स नहीं हिचकिचाएंगे।
-डॉ अभिषेक पल्‍लव, एसपी दंतेवाड़ा
”नारी अब अबला और कमजोर नहीं है, हर क्षेत्र में अपनी मौजूगदगी दर्शा रहीं है। चाहे वह नक्‍सल मोर्चा ही क्‍यों न हो। हमारी टीम बुधवार को पुरूष जवानों के साथ गोंडेरास के जंगल में पहुंची थी। जहां दो नक्‍सलियों का मार गिराया और एक महिला नक्‍सली का शव भी बरामद किया। यहां तक तक उस शव का पोस्‍टमार्टम की कार्रवाई भी सुपर-30 की महिला फाइटर्स ने पूरी करवाई है। सुपर-30 की युवतियों में अदम्‍य साहस और हौसला है।
-दिनेश्‍वरी नंद, डीएसपी एवं प्रभारी डीआरजी महिला कमांडोज

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रायपुर । छत्तीगसढ़ में विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा अब जमीन स्तर पर संगठन में कसावट की तैयारी में उतर गई है। नगरीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव को देखते हुए संगठन ने शक्ति केंद्र बनाने शुरू किए हैं। बताया जा रहा है कि इसमें पंचायत चुनाव से लेकर नगरीय निकाय के उम्मीदवारों की भी खोज होगी। प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव नवंबर और जनवरी में पंचायत के चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी ने शक्ति केंद्र को मजबूत करने के बहाने नये सिरे से संगठन को एक्टिव करने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सभी सांसदों का टिकट काटकर नये चेहरों को मैदान में उतारा है। 23 मई को आने वाले परिणाम में यह फार्मूला सफल हो जाता है तो पार्टी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में भी नए और फ्रेश चेहरे पर दांव लगा सकती है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव में पार्टी का ग्रामीण वोटबैंक पूरी तरह से खिसक गया।
एक दर्जन विधानसभा में पार्टी उम्मीदवारों की 40 हजार से ज्यादा वोट से हार हुई। इसमें अधिकांश विधानसभा ग्रामीण क्षेत्र की हैं और जातिगत समीकरण के आधार पर नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी के आंतरिक आंकलन में सामने आया कि अगर इन सीटों पर नये चेहरों को मौका दिया गया होता तो परिणाम इतने बुरे नहीं आते। अब पार्टी ने 19 हजार पंचायतों में शक्ति केंद्र बनाने की कवायद शुरू की है।
गैरदलीय होता है प्रदेश में पंचायत चुनाव
प्रदेश में पंचायत चुनाव गैरदलीय आधार पर होता है। ऐसे में पार्टी ने पंचायत के कद्दावर नेताओं को एक बार फिर पंचायत स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो दिग्गज नेता भले ही अलग-अलग प्रदेश की लोकसभा सीटों पर प्रचार में जुटे हैं, लेकिन प्रदेश संगठन अब त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में भिड़ गया है।
पांच बूथ को मिलकार बनता है शक्ति केंद्र
भाजपा संगठन में पांच बूथ को मिलाकर शक्ति केंद्र बनाया जाता है। प्रदेश में करीब 24 हजार बूथ है। भाजपा के प्रदेश में 488 मंडल हैं। ऐसे में बूथ और मंडल के बीच कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में शक्ति केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी श्ाक्ति केंद्र को महत्वपूर्ण इकाइ मानते हैं। यही कारण है कि वे अपनी हर सभा में शक्ति केंद्र प्रभारियों से संवाद करते हैं और उनको चुनावी टिप्स देते हैं।

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रायपुर । प्रदेश के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खपत की गई चार सौ यूनिट पर हाफ बिजली बिल स्कीम का लाभ देने का निर्णय छत्तीसगढ़ शासन ने लिया था। इसे छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी ने एक मार्च से प्रभावशील कर दिया है, जिसका लाभ प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने लगा है।
पॉवर कंपनी अध्यक्ष शैलेन्द्र शुक्ला ने बताया कि अप्रैल तक राज्य के लगभग 26.50 लाख उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो रहे है। योजना से राज्य के समस्त बीपीएल एवं फ्लैट रेट योजना के अंतर्गत शामिल अन्य घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में 19 लाख 93 हजार से अधिक बीपीएल कनेक्शन देकर गरीब तबके के लोगों को बिजली की मूलभुत सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। एकलबत्ती निशुल्क विद्युत प्रदाय योजना के हितग्राहियों को प्रतिमाह तीस यूनिट तक दी जा रही निशुल्क विद्युत प्रदाय की सुविधा को यथावत रखा गया है। इन उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 30 यूनिट से अधिक की खपत पर बिल की राशि को आधा करके जारी किये जा रहे है।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अनेक दृष्टि से फायदेमंद हाफ बिजली बिल स्कीम योजना के अंतर्गत ऐसे उपभोक्ता जिन्होंने फ्लैट रेट का विकल्प दिया था, उन्हे प्रतिमाह पचास स्र्पये की दर से बिल जारी किये जा रहे है। हाफ बिजली बिल स्कीम योजना लागू होने के पूर्व एक किलोवाट तक अनुबंध भार वाले बीपीएल. एवं फ्लैट रेट योजना के अंतर्गत शामिल अन्य घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को सौ स्र्पये प्रतिमाह की दर से बिल जारी किये जाते थे।
बकाया जमा करने के दिन से मिलेगा लाभ
हाफ बिजली बिल स्कीम योजना की सुविधा का लाभ ऐसे उपभोक्ताओं को नहीं दिया जा रहा है, जिनके विरूद्ध बकाया राशि शेष है अथवा अन्य किसी कारणों से वे डिफाल्टर घोषित है। ऐसे उपभोक्ता भी राज्य शासन की इस जनहितैशी योजना का लाभ प्राप्त कर सकते है। बकायादार उपभोक्ता जिस तारिख को भुगतान करता है, उसी तारिख से उसे हाफ बिजली बिल स्कीम का लाभ लेने की पात्रता होगी।

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मुंगेली। जिले के जिला अस्पताल रोड के पास चलती जायलो कार में आग लग गई. समय रहते ड्राइवर ने कार से कूद कर अपनी जान बचाई. जिससे कोई अनहोनी होने से टल गया। 
जायलो कार चालक दाउपारा से बाईपास होते हुए जिला अस्पताल की रोड़ पर चल रहा था, तभी कार में अचानक आग लग गई. कार धूं-धूंकर जलने लगी, ड्राइवर रहते कार से कूदकर अपनी जान बचाई. कार में आग देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया. घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पा लिया है. बहरहाल भीषण गर्मी के कारण कार में आग लगने की आशंका जताई जा रही है। 

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रायपुर । राजधानी के अधिवक्ता संघ के चुनाव की तारीख तय होने के बाद चुनावी प्रक्रिया औऱ तैयारी तेज कर दी गई है. अध्यक्ष पद के लिए पांच प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल किया है. इसके अलावा अधिवक्ता संघ चुनाव के 10 पदों के लिए 32 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है. कुल 64 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र खरीदा था. अधिवक्ता संघ के निर्वाचन अधिकारी भी चुन लिए गए है। 
संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र महापात्र मैदान से हटते हुए इस बार नए लोगों को चुनाव मैदान में उतार रहे है. कारण यह है कि नई विचार व युवा चेहरा सामने आएगा, तब विचार भी एक कदम आगे बढ़ने की बात कही है. इसके साथ ही उम्मीदवार अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं। 
17 को मतदान, 18 मई को नतीजे
इस बार अधिवक्ता संघ के लिए 1860 वकील मतदान करेंगे. जिला कोर्ट में 3052 वकील हैं, जिनमें से मासिक शुल्क पटाने के आधार पर मतदाता वकीलों के नामों का प्रकाशन किया गया है. नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 9 मई को रखा गया है. दावा आपत्ति के लिए 10 मई व नाम वापसी को लेकर 13 मई निर्धारित किया गया है. 17 मई को सुबह 5 बजे से 11 बजे तक वोट डाल सकते है. परिणाम 18 मई को घोषित कर दिया जाएगा। 
अधिवक्ता कल्याण कोष सबसे बड़ा मुद्दा
अधिवक्ता संघ में कल्याण कोष को लेकर चुनावी गर्मी देखने को खूब मिल रहा है. इस कोष के बारे में बताया जाता है कि जब कोई अधिवक्ता बीमारी से ग्रसित हो जाता है तब उसके इलाज के लिए कोष से पैसे दिए जाते है. इस तरह कोष का उपयोग किया जाता है. साथ ही अगर किसी की मृत्यु हो जाता है तब उसकी सहायता एक लाख रुपए दिया जाता है। 

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भोपाल ।  छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेता इन दिनों लोकसभा चुनाव में दूसरे प्रदेशों में जमकर प्रचार-प्रसार की गतिविधियों में व्यस्त दिख रहे हैं. आज विधयाक सत्यनारायण शर्मा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे. जहां पर उन्होंने  दिग्विजय सिंह की बेटी और बहन ने साथ मिलकर लोगों से जनसम्पर्क किया। 
विधायक सत्यनारायण शर्मा ने भोपाल में नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी के भाषणों में झूठ का बोलबाला रहता है. अब जनता ही उन्हें सच्चाई से अवगत कराएगी. चुनाव-प्रचार के दौरान सत्यनारायण शर्मा ने जनता से कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की अपील की है। 
गौरतलब हो कि भोपाल में छठवें चरण में 12 मई को मतदान होने हैं यहां पर कांग्रेस से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह मैदान में हैं तो वहीं उनके खिलाफ बीजेपी से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ताल ठोक रही है. भोपाल का चुनावी रण सियासत के रंग पूरी तरह रंग चुका है। 

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रायपुर । डीकेएस अस्पताल मामले में डॉ. पुनीत गुप्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वकील महेश जेठमलानी पैरवी करेंगे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 मई को सुनवाई होगी। बता दें कि  महेश जेठमलानी मशहूर वकील रामजेठमलानी के बेटे हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में पुनीत गुप्ता की जमानत खारिज करने के लिए याचिका लगाई है। इस याचिका के खिलाफ महेश जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट में पुनीत गुप्ता की पैरवी करेंगे। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए डॉ. पुनीत गुप्ता को अग्रिम जमानत दे दी थी ।

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रायपुर । राजधानी रायपुर में बलात्कार का एक मामला सामने आया है. आरोपी ने एक नाबालिग लड़की को अपना शिकार बनाया. बताया जा रहा है कि युवक लड़की को कोई पहचना का ही शख्स है. आरोपी युवक ने नाबालिग को बहला फुसला कर जंगल की तरफ ले गया और घटना को अंजाम दिया. जब पीड़िता घर पहुंची तक उसने परिजनों से आपबीती सुनाई. फिर परिजनों ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की. आरोपी फरार बताया जा रहा है. फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई में लग गई है।
ये है पूरा मामला
घटना विधानसभा थाना क्षेत्र की बताई जा रही है. दोन्देखुर्द गांव की एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म किया गया है. बताया जा रहा है कि पीड़ित नाबालिग लड़की के पिता दुकानदार है. गांव में उनकी एक छोटी सी दुकान है जहां कई लोगों का आना जाना रहता था. लड़की के पिता की दुकान में एक शख्स अक्सर आता-जाता रहता था. बुधवार को भी यही व्यक्ति लड़की के पिता की दुकान में पहुंचा. उस वक्त लड़की के पिता दुकान में नहीं थे बस बच्ची ही थी।
आरोपी ने पहले दुकान से कुछ खरीदा. फिर बच्चे से मेडिकल स्टोर से दवाई लाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया. आरोपी फिर बच्ची को गांव के पास लगे जंगल ले गया और उसके साथ बलात्कार किया. पीड़ित बच्ची ने फिर इस घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. लड़की के नालाबिग होने के कारण पुलिस ने अपहरण का भी मामला दर्ज किया है. आरोपी फिलहाल फरार है जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

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दुर्ग। विभागीय कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में जिला पुलिस अधीक्षक प्रखर पाण्डेय ने गुरुवार को सुपेला थाना प्रभारी भावेश साव को निलंबित कर दिया है। भावेश साव के खिलाफ पुलिस अधिकारियों को लगातार कार्य के प्रति लापरवाही बरतने, रिपोर्ट दर्ज करने में विलंब करने की शिकायत मिल रही थी। मिली जानकारी के अनुसार अधिकारियों की चेतावनी के बावजूद निरीक्षक भावेश साव अपनी आदतों में सुधार नहीं कर रहे थे। शिकायत की जांच में भी उनके द्वारा लापरवाही बरतने की लगातार मिल रही शिकायत के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर भावेश साव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया 

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