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Author: admin
रायपुर । प्रदेश में 14580 पदों के लिए होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा में नवीन रोस्टर आरक्षण लागू करने की तैयारी की जा रही है। ई और टी संवर्ग में होने वाली भर्ती परीक्षा के लिए शुक्रवार को लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी विभागों से रोस्टर अनुसार पदों को आरक्षण देने की जानकारी मांगी है।
अब नवीन रोस्टर आरक्षण से पदों की भर्ती के संबंध में जारी किए गए आदेश से कयास लगाए जा रहे हैं कि गरीब परिवारों को इसका लाभ मिल सकता है। आदेश में लिखा गया है कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से शिक्षक भर्ती परीक्षा ली जा रही है।
गौरतलब है कि पूर्व में जारी किए गए विज्ञापन में किसी भी प्रकार के नवीन रोस्टर का उल्लेख नहीं किया गया है। शुक्रवार को जारी आदेश में नवीन रोस्टर लागू करने और कार्यालयों से जानकारी मांगने से स्पष्ट हो रहा है कि जल्द ही आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार की ओर से गरीब परिवारों को आरक्षण देने के लिए कमेटी का गठन किया गया है।
आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को मिल सकता है फायदा
हालांकि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आरक्षण लागू करने का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन नवीन रोस्टर के आदेश ने आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार को आरक्षण मिलने की संभावना प्रबल कर दी है।
केन्द्र सरकार ने सात जनवरी को की थी घोषणा
केन्द्र सरकार ने सात जनवरी को आर्थिक रूप से गरीब परिवार को सरकारी नौकरी, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में होने वाली प्रवेश परीक्षाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया था। 14 जनवरी को गुजरात ने आरक्षण लागू कर देश का पहला ईडब्ल्यूएस देने वाला राज्य बन गया। वहीं छत्तीसग़ढ़ में दो महीने बाद केवल आरक्षण के लिए कमेटी गठित की जा सकी है।
कांग्रेस दुराग्रह के कारण युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहीः उपासने
प्रदेश में आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए आरक्षण लागू नहीं करने पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश सरकार की तीखी आलोचना की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि केन्द्र के इस जनकल्याणकारी कदम को अमल में न लाकर प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के युवकों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस के सहयोग के इस निर्णय को पारित किया गया है। प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री संकीर्ण राजनीतिक मानसिकता और दुराग्रह के चलते इसे छत्तीसगढ़ में लागू नहीं कर रहे हैं।
बीजापुर । छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार पर वादे से मुकरने के आरोप लगाए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी के सचिव और माओवादी नेता विकास शनिवार को पर्चा जारी करके भूपेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
माओवादियों ने अपने पर्चे में कहा कि कांग्रेस ने सरकार बनने के बाद निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब कांग्रेस सरकार अपने वादे से मुकर गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भी रमन सरकार की तरह निर्दोष लोगों की हत्या करने करने और झूठे केस में आदिवासियों में फंसाने का काम कर रही है।
नक्सलियों ने प्रदेश सरकार के मंत्री कवासी लखना पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गोडेलगुड़ा मामले में कार्रवाई का आश्वासन देने के तीन महीने बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बस्तर में शांति के लिए साइकिल यात्रा को षडयंत्र बताया। साइकिल यात्रा के जरिए बस्तरवासियों को गुमराह किया जा रहै है।
रायपुर । लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के नाम आज फाइनल कर लेगी। दोपहर बाद दिल्ली में सीईसी की बैठक होगी। इस बैठक में सभी लोकसभा प्रत्याशियों का नाम तय हो जाएगा।
दिल्ली में होने वाली सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, चंदन यादव सहित कई नेता दिल्ली रवाना हो गए हैं।
स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सीईसी की बैठक सेकेंड हाफ में होगी जिसमें पूरे नाम तय हो जाऐंगे, ऐसा मैं मानता हूं। लिस्ट जारी होने के संबंध में उन्होंने कहा कि ये हाईकमना तय करेंगा कि सूची कब जारी करनी है। नामों को लेकर उत्सुकता सभी में है।
रायपुर । अंतर्राष्ट्रीय पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई को आज देश का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजभवन में पंडवानी गायिका को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। बता दें तीजन बाई यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली प्रदेश से पहली छत्तीसगढ़ियां कलाकार है।
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकगायिका तीजनबाई के अलावा लेखत बलवंत मोरेश्वर पुरंधरे, एल एंड टी के चेयरमेन अनिलकुमार मणिभाई और जिबूती के राष्ट्रपति इस्माइल उमर को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
रायपुर । आइएएस भुवनेश यादव को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, बिना विभाग के मंत्रालय में बैठे सत्यानारायण राठौर को राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कमान सौंपी गई है। शुक्रवार को सरकार ने राज्य के चार आइएएस अफसरों के प्रभार में फेरबदल का आदेश जारी किया है।
आदेश के अनुसार निरंजन दास को प्रबंध संचालक मेडिकल सर्विसेस कापार्रेशन की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए यादव को यह काम सौंपा है। इसी तरह दास के जिम्मे रहे खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को मंत्रालय में बिना विभाग के पदस्थ आइएएस सत्यनारायण शर्मा को सौंपा गया है।
इस फेरबदल के बाद निरंजन दास अब केवल प्रबंध संचालक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम रह गए हैं। यादव को विशेष सचिव स्वास्थ्य अतिरिक्त प्रभार आयुक्त स्वास्थ्य सेवायें व प्रबंध संचालक मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
भीम सिंह संचालक कृषि व अतिरिक्त प्रभार अपर आयुक्त महात्मा गांधी नरेगा, संचालक ग्रामीण आवास एवं गन्ना आयुक्ता को आयुक्त मनरेगा के पद पर पदस्थ करते हुए संचालक कृषि संचालक ग्रामीण आवास एवं गन्ना आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार। मनरेगा आयुक्त की जिम्मेदारी अभी तक जीएडी सचिव रीता शांडिल्य देख रही थीं। इसी तरह राठौर उप सचिव मंत्रालय को नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पद पर पदस्थ किया गया है।
रायपुर । प्रदेश की 11 में से पांच लोकसभा सीटों से अब तक भाजपा और कांग्रेस ने महिला प्रत्याशियों को मैदान में नहीं उतारा है। वो पांच सीट रायपुर, महासमुंद, सरगुजा, राजनांदगांव और बस्तर है। बाकी आधा दर्जन लोकसभा सीटों की बात की जाए, तो महिला को टिकट देने में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस आगे रही है।
यह बात अलग है कि कांग्रेस की टिकट से अब तक एक भी महिला सांसद नहीं बन पाई है। भाजपा ने महिला प्रत्याशी कम उतारे, लेकिन उसकी टिकट ने दो महिलाओं को संसद पहुंचाया। लोकसभा चुनाव को इतिहास जो भी रहा हो, लेकिन 2018 के लोकसभा चुनाव में दोनों राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी करने वालों में महिलाएं पीछे नहीं हैं।
भाजपा और कांग्रेस की अलग-अलग बात की जाए, तो भाजपा ने रायपुर, महासमुंद, सरगुजा, राजनांदगांव, बस्तर के अलावा कांकेर और रायगढ़ लोकसभा सीट से भी अब तक महिला को प्रत्याशी नहीं बनाया है। वर्ष 1998 से 2014 तक हुए पांच लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तीन महिलाओं को दो-दो बार टिकिट दिया।
इसमें कमला देवी पाटले, सरोज पांडेय और कस्र्णा शुक्ला शामिल हैं। पाटले जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट से 2009 व 2014 में सांसद चुनी गईं। वहीं, पांडेय 2009 में दुर्ग से सांसद बनीं, लेकिन 2014 में उसी सीट से हार गई थीं। शुक्ला 2004 में जांजगीर-चांपा सीट से चुनाव जीती थीं।
2009 में भाजपा ने उन्हें कोरबा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाया था, जिसमें वो हार गई थीं। कांग्रेस ने वर्ष 1998 से 2014 तक हुए लोकसभा चुनाव में आठ महिलाओं को प्रत्याशी बनाया। इसमें केवल एक नेत्री फूलोदेवी नेताम ऐसी हैं, जिन्हें दो बार टिकट मिली। कांकेर लोकसभा सीट फूलोदेवी नेताम को 2009 और 2014 में चुनाव लड़ाया, दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
फूलोदेवी के पहले कांकेर लोकसभा सीट से 1999 में झबीला नेताम, 2004 में गंगा पोटाई ने चुनाव लड़ा था। रायगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस ने 1999 में पुष्पादेवी सिंह और 2014 में आरती सिंह को प्रत्याशी बनाया था। बिलासपुर लोकसभा सीट से 1998 में कन्या कुमारी एलियस तन्या अनुरागी, 2009 में डॉ. रेणु जोगी ने कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ा था। इसी सीट से भाजपा छोड़ने वाली पूर्व सांसद कस्र्णा शुक्ला को कांग्रेस ने 2014 में टिकट दिया था।
दोनों दलों की नेत्रियों में टिकट की आस
भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों के आला नेता चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर, लोकसभा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव, सभी में महिलाओं को प्राथमिकता के साथ टिकट देने की बात कहते हैं। अभी विधानसभा चुनाव हुआ, तो भाजपा ने 10, तो कांग्रेस ने 12 महिलाओं को टिकट दिया था।
दोनों राजनीतिक दलों की जिन वरिष्ठ नेत्रियों या पूर्व विधायकों को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला, अब वो लोकसभा चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठीं हैं। दोनों दलों से दावेदारी कर रही नेत्रियों को उम्मीद है कि दो से तीन सीटों पर महिला प्रत्याशी उतारे जा सकते हैं।
कांकेर सीट से लगातार चार बार महिला प्रत्याशी
एकमात्र कांकेर लोकसभा सीट ऐसी है, जहां से कांग्रेस पिछले चार चुनाव में महिला प्रत्याशी उतार रही है। हालांकि, हर बार पार्टी को यह सीट गंवानी भी पड़ी है।
कांग्रेस ने हर चुनाव में महिलाओं को दिया टिकट
चुनाव-भाजपा-कांग्रेस
1998-0-1
1999-0-2
2004-1-1
2009-3-2
2014-2-3
भाजपा ने छह, कांग्रेस ने पांच सीटों से रखा दूर
सीट-भाजपा-कांग्रेस
सरगुजा-0-0
रायगढ़-0-2
जांजगीर-3-0
कोरबा-1-0
बिलासपुर-0-3
राजनांदगांव-0-0
दुर्ग-2-0
रायपुर-0-0
महासमुंद-0-0
बस्तर-0-0
कांकेर-0-4
रायपुर । छत्तीसगढ़ में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में भाजपा की सत्ता थी। देश भर में प्रचंड मोदी लहर। इसके बावजूद भी राज्य को क्लीन स्वीप करने का दांव दुर्ग सीट पर आकर ठिठक गया। 11 में 10 सीट जीतने वाली भाजपा को दुर्ग की सीट गंवाने की टीस पूरे पांच साल रही। नतीजन 2014 के नतीजे आने के बाद से यह सीट भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ गई।
राज्य में महज इस एक सीट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता व मंत्री मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को सौंपी गई। स्वतंत्रदेव ने एक-एक मुद्दों की पड़ताल की और जीत का फार्मूला सेट करने की कोशिश की। अब सीट पर भाजपा मजबूत उम्मीदवार देने के साथ ही अपने योद्धाओं को उतारने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के कद्दावर भी यहीं से
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कैबिनेट के तीन मंत्री ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे और रुद्र गुरु इसी क्षेत्र से हैं। कांग्रेस भी रणनीतिक रूप से इस सीट को सर्वाधिक प्रतिष्ठापरक मान रही है।
जातिगत समीकरण साधने की कवायद
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो दुर्ग लोकसभा सीट पर ओबीसी वोटर प्रभावी भूमिका में हैं। यहां से भाजपा लगातार साहू समाज का उम्मीदवार उतारती रही। पिछले दो चुनाव से भाजपा ने सरोज पांडेय को उम्मीदवार बनाया। सरोज भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री हैं, ऐसे में उनके प्रभाव वाली सीट हाईप्रोफाइल मानी जा रही है।
भाजपा में सरोज की पसंद के रूप में वीरेंद्र साहू और सांवलाराम डाहिरे हैं। वहीं, संगठन की ओर से पूर्व मंत्री रमशीला साहू का नाम बढ़ाया गया है। इस बीच, कोआपरेटिव सेक्टर में पहचान रखने वाले प्रीतपाल बेलचंदन भी दौड़ में शामिल हैं। यही नहीं, अमित शाह की टीम के सर्वे रिपोर्ट में भी ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का संकेत मिला है, जिसका पहले का चुनावी रिकार्ड न हो।
कांग्रेस से भी ओबीसी उम्मीदवार दौड़ में
दुर्ग लोकसभा सीट से कांग्रेस में भी ओबीसी उम्मीदवार दौड़ में हैं। मंत्री ताम्रध्वज साहू के बेटे सहित एक दर्जन ओबीसी नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गृह जिला होने के कारण यहां कांग्रेस भी बेहतर विकल्प के साथ मैदान में उतरने की कोशिश में है। भूपेश बघेल पर इस सीट को जीतने का दबाव इसलिए भी है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अपने गृह क्षेत्र और विधानसभा क्षेत्र में आने वाली राजनांदगांव लोकसभा को लगातार जीत रहे हैं। सिर्फ एक चुनाव में कांग्रेस के देवव्रत सिंह की जीत हुई थी।
वोटरों का मिक्स समीकरण
दुर्ग लोकसभा की तीन विधानसभा शहरी वोटरों वाली है। दुर्ग शहर, भिलाई नगर और वैशाली नगर के वोटर मिक्स कल्चर के हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा नजर ग्रामीण क्षेत्रों के वोटरों पर है। यहां किसान वोटर भी प्रभावी भूमिका में है। किसानों के कर्ज माफ के बाद यहां समीकरण बदलने की उम्मीद की जा रही है।
बताया जा रहा है कि सरकार बदलने के बाद यहां के राजनीतिक समीकरण में यूटर्न आया है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार के चयन के बाद ही असली मुकाबला शुरू होने की उम्मीद है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में पहले चरण में बस्तर संसदीय सीट पर मतदान होना है। यह इलाका आदिवासी बहुल है। बस्तर संभाग के सात में से छह जिले पहले चरण की बस्तर सीट में शामिल हैं। ये सारे जिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना महत्वाकांक्षी जिलों में शामिल हैं। महत्वाकांक्षी या एस्पिरेशनल जिले वे हैं जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गए थे। इन जिलों में मानव विकास सूचकांक का स्तर भी नीचे थे।
मोदी ने अपने कार्यकाल के चौथे साल में महत्वाकांक्षी जिलों की योजना लागू की। 17 वीं लोकसभा के चुनाव से पहले इन जिलों को विकास के लिए सिर्फ एक साल का समय मिला। फिर भी बस्तर के कुछ जिलों ने विकास की दौड़ में बेहतर प्रदर्शन किया है। महत्वाकांक्षी जिलों का विकास चुनाव में क्या असर डालेगा यह देखा जाना बाकी है।
बस्तर के जंगलों में बसे गांवों तक इन एक सालों में बैंकों की शाखाएं पहुंची हैं। अंदरूनी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू की गई। प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों में दवा और डाक्टर का इंतजाम किया गया। दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर जिलों में भी काफी काम हुआ।
पीएमजीएसवाय योजना से सैकड़ों सड़कें मंजूर की गई। जिला मुख्यालयों में बाजार का विकास किया गया। बीजापुर जिले में जिला अस्पताल को आधुनिक बनाया गया। इस साल मार्च में जारी रैंकिंग में कोंडागांव जिले ने स्वास्थ्य और पोषण में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
सभी इंडिकेटर के लिहाज से देश के 115 महत्वाकांक्षी जिलों में कोंडागांव दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि के लिए कोंडागांव जिले को पांच करोड़ का पुरस्कार भी मिला। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस उपलब्धि के लिए कोंडागांव जिले को बधाई दी।
जहां मोदी गए थे वहां अब भी चल रहे बैंक और आंगनबाड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल 14 अप्रैल को बीजापुर जिले के धुर नक्सल प्रभावित जांगला गांव गए थे। यहां से उन्होंने आयुष्मान योजना का शुभारंभ किया। इस दौरान वे जांगला के उस केंद्र भी गए थे जहां एक ही परिसर में पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी, बैंक, पोस्ट ऑफिस, काल सेंटर आदि है।
मोदी ने इस केंद्र का अवलोकन किया था। जांगला में यह केंद्र अब भी चल रहा है। बीजापुर में मोदी के आगमन के बाद इस जिले ने सूचकांक में 45 अंक की छलांग लगाई थी।
कौन हैं महत्वाकांक्षी जिले-
देशभर में 115 जिलों को पिछड़ा माना गया है। इन्हें महत्वाकांक्षी जिले नाम दिया गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शामिल बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडांगांव, नारायणपुर और कांकेर के साथ ही राजनांदगांव, कोरबा और महासमुंद जिलों को इस सूची में शामिल किया गया है।
यहां बात होगी विकास की
लोकसभा चुनाव में दूसरी जगहों पर चाहे कुछ भी मुद्दा हो इन जिलों में विकास का मुद्दा सबसे ऊपर रहने वाला है। इन जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, शिक्षा, कौशल विकास, अधोसंरचना निर्माण, जल संसाधन, वित्तीय प्रबंधन, विद्युतीकरण आदि के सूचकांकों के आधार पर विकास का पैमाना तय किया गया है।
नीति आयोग ने इन जिलों के लिए केंद्र सरकार की ओर से ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी तैनात किए हैं। इन जिलों में केंद्र और राज्य की अटकी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा करने का काम किया जा रहा है। ऐसे में यहां विकास की ही बात होनी है। यहां से चली विकास की बहस प्रदेश की दूसरी सीटों तक भी पहुंचेगी जरूर।
नैला/जांजगीर। गुम इंसान क्रं 06/19 चैकी नैला नाम कुमारी पूनम अग्रवाल 24 साल साकिन वार्ड नं 5 पुरानी बस्ती नैला उक्त युवती दिनांक 14/03/19/के सुबह 7 बजे बैकिंग का कोर्स करने बिलासपुर जा रही हूं बोलकर अपने घर से निकली है जो अभी तक घर नही आयी है। हुलिया रंग गोरी चेहरा गोल उंचाई 5 फीट कान मे साने की बाली पहनी है कपडे भूरे रंग की टाॅप व जिंन्स पहनी है हिन्दी छत्तीसगढी भाषा जानती है। कृपया आपके क्षेत्र में पता चलने पर चैकी नैला कीे सूचित करने का कृपा करें। चैकी नैला. 9479193123
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि देश में दंगे फैलाने का बयान देकर मुख्यमंत्री बघेल किसी गैंगवार की तैयारी तो नहीं कर रहे
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीमा से लेकर सीमापार तक लगातार हमारा पराक्रम बढ़ता जा रहा है। आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ कांग्रेस की नीति कभी स्पष्ट नहीं रही है, इस वजह से हमेशा कांग्रेस आतंकवाद को मजबूत करने वाले बयानों को बल देती रही है।
उन्होंने कहा कांग्रेस को 26/11 की घटना को नहीं भूलना चाहिए, जब आतंकी देश के भीतर घुसकर एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। जब आज पुलवामा में सीआरपीएफ पर बड़ा आतंकी हमला होता है, उसे भी लेकर कांग्रेस शहादत को सलाम करने के बजाय सवाल खड़े कर रही है।
कौशिक ने कहा कि किस मंशा से भूपेश जी ऐसी गलतबयानी कर रहे हैं, यह समझ से परे है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के विरोधी गुट के मंत्रियों को निपटाने के लिए गैंगवार कर उसे विपक्ष के सर मढ़ देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार भड़काऊ बयान से इस आशंका को बल मिला है कि कहीं ताकत के नशे में खुद ही कोई रक्तपात कर अपने ही लोगों को नुकसान पहुंचा न दें भूपेश।
कौशिक ने कहा कि ऐसा किए जाने का इतिहास रहा है कांग्रेस का। छत्तीसगढ़ में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या तब भूपेश की पार्टी के लोगों ने ही की, जिसमें दर्जनों लोगों को कोर्ट ने दोषी भी पाया।
उन्होंने कहा कि सिक्खों का नरसंहार करने वाली पार्टी, जिसके सज्जन कुमार जैसे नेता को सजा भी मिली है। उनके मुखिया राजीव गांधी ने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है। पार्टी कब सत्ता के लिए नरसंहार करा दे भरोसा नहीं।
उन्होंने कांग्रेस नेता ललित नारायण सिंह, संजय गांधी, राजेश पायलट, जितेन्द्र प्रसाद, माधवराव सिंधिया समेत कांग्रेस के अनेक नेताओं की संदेहास्पद मृत्यु की चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास काफी संदिग्ध रहा है। इन्हीं सब संदर्भों को जब हम सीएम भूपेश के बयानों से जोड़ते हैं तो इस आशंका को बल मिलता है कि भूपेश किसी गंभीर अपराधों को करने की पृष्ठभूमि अपने भाषणों से तैयार तो नहीं कर रहे?
नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि इन दो माह में प्रदेश सरकार के कामकाज को लेकर जनता में नाराजगी है। कर्जमाफी, संविलियन से लेकर शराबबंदी तक की मामले में सरकार घुटने टेके हुए है।
उन्होंने कहा लोकसभा चुनाव में हम 1996 से लेकर अब तक लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और हमारा प्रदर्शन फिर से दोहराया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश और दुनिया में हमारी शक्ति बढ़ी है और वही विकास का मॉडल हमने समाज के बीच पेश किया है। समृध्दि, सुरक्षा, सीमा और नवीन संकल्प ही हमारा चुनावी मुद्दा होगा। इसी से डर कर कहीं सीएम कुछ गलत न कर बैठें, इसका ध्यान रखना होगा।