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रायपुर । लोकसभा चुनाव की तैयारी में उतरी भाजपा ने 48 घंटे के मंथन के बाद 11 लोकसभा सीट पर पैनल तैयार कर लिया है। प्रदेश चुनाव समिति की बैठक एकात्म परिसर में हुई, जिसमें सभी 11 सीट पर दावेदारों के नाम पर विचार किया गया। प्रदेश प्रभारी डॉ अनिल जैन ने बताया कि चुनाव समिति की बैठक में लोकसभा की सभी 11 सीटों में उम्मीदवारों के नामों का पैनल तय हो गया है।
सभी सीटों पर दो से सात नाम पैनल में हैं। तय नामों को लेकर दिल्ली जा रहा हूं, जहां केंद्रीय चुनाव समिति नाम फाइनल करेगी। एकात्म परिसर में गुस्र्वार को प्रदेश पदाधिकारियों, चुनाव समिति और कोर ग्रुप की बैठक हुई। भाजपा ने विधायकों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा के आधार पर पैनल तैयार किया है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने बताया कि राजनांदगांव लोकसभा के पैनल में उनका नाम नहीं है। कयास लगाई जा रही थी कि राजनांदगांव के पैनल में उनका नाम होगा। जब डॉ रमन से यह सवाल किया गया कि क्या जिनका नाम पैनल में नहीं है, केंद्रीय चुनाव समिति उसे भी टिकट दे सकती है।
इस पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति को सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि किसी भी सीट पर सिंगल नाम नहीं है। सबसे ज्यादा नाम जांजगीर-चांपा लोकसभा से आया है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो राजनांदगांव के पैनल में अभिषेक सिंह और मधुसूदन यादव का नाम है।
दुर्ग के पैनल को लेकर सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति थी। यहां लोकसभा पदाधिकारियों की ओर से पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के साथ रमशीला साहू, विजय बघेल, सांवलाराम डाहिरे और प्रीतपाल बेलचंदन का नाम सामने आया है। महासमुंद लोकसभा से पिछड़ा वर्ग के आधा दर्जन दावेदारों के नाम सामने आये थे।
इसमें सांसद चंदूलाल साहू, चंद्रशेखर साहू, निरंजन सिन्हा, प्रेमीन साहू का नाम था। अजय चंद्राकर ने अपनी दावेदारी से इनकार कर दिया, जिसके बाद यहां से चार दावेदारों का पैनल तय किया गया। जांजगीर-चांपा में कमलादेवी पाटले के साथ सात दावेदारों का पैनल तैयार किया गया है।
रायपुर से बैस को बदलने की चर्चा
बैठक के बाद भाजपा के आला नेताओं ने बताया कि रायपुर लोकसभा से वर्तमान सांसद रमेश बैस को बदलने की चर्चा हुई है। आला नेताओं ने बैस के स्थान पर नए स्थानीय उम्मीदवार के नाम पर विचार किया। साथ ही बैस को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने की स्थिति में समाज की नाराजगी पर भी मंथन किया।
बिलासपुर में उम्मीदवार बदलने लगे नारे
बिलासपुर में वर्तमान सांसद लखनलाल साहू की जगह नये उम्मीदवार को मैदान में उतारने के लिए पदाधिकारियों ने प्रभारी डॉ अनिल जैन के सामने नारेबाजी की। मुंगेली के एक पदाधिकारी ने कहा कि अगर बिलासपुर में जीत का रिकार्ड बरकरार रखना है, तो उम्मीदवार बदलना होगा। जब उन्होंने यह बात कही तो हाल में सन्न्ाटा पसर गया।

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सागर । जिले के बंडा थाना इलाके के बेरखेड़ी गांव में 13 वर्षीय मासूम छात्रा की सिरकटी लाश मिलने से सनसनी फैल गई है। छटवीं की यह छात्रा 2 दिन से लापता थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचाया। छात्रा के सिर और धड़ बहुत दूरी पर पड़े मिले हैं।
इस नृशंस हत्या के पीछे कौन है पुलिस इसकी जांच में लग गई है। लड़की का शव मिलने की सूचना के बाद उसके परिवार में शोक की लहर छा गई है। उधर बेरखेड़ी के ग्रामीण आक्रोशित हैं वे पुलिस से जल्द से जल्द बच्ची के हत्यारे को पकड़ने की मांग कर रहे हैं।

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रायपुर । कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आज एक दिवसीय दौरे पर राजधानी रायपुर आ रहे हैं। श्री गांधी ओडिशा जाते हुए यहां दो घंटे रहेंगे। वे सुबह 10 बजे विमान से माना विमानतल पहुंचेंगे। वे यहां मायाराम सरजन फाउंडेशन द्वारा वीआईपी रोड स्थित बेबीलॉन होटल में यूनिवर्सल हेल्थ केयर की ‘सबके लिए स्वास्थ्य का अधिकार विषय’ पर आयोजित कार्यशाला में शामिल होंगे।
राहुल गांधी एक घंटे रायपुर रहेंगे और इस दौरान एक्सपर्ट व डॉक्टरों से मुलाकात कर यूनीवर्सल हेल्थ केयर के बारे में जानेंगे। बता दें श्री गांधी का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में वे यूनीवर्सल हेल्थ केयर को शामिल करने वाले हैं।
कार्यशाला के बाद दोपहर 12 बजे वे ओडिशा में एक चुनावी सभा के लिए रवाना हो जाएंगे। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और प्रदेश प्रभारी पी एल पुनिया भी शामिल होंगे।

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बलौदाबाजार । कसडोल के पाठियापाली जंगल मे प्रेमी जोड़े की पेड़ से लटकी सड़ी गली लाश मिली है। घटना की सूचना मिलते ही कसडोल पुलिस ने जांच के लिए दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए रायपुर भेज दिया है।
मृतक प्रेमी जोड़ा कसडोल थाना क्षेत्र के छरछेद गांव के रहने वाले हैं। मृतक युवक्ती का नाम गायत्री और युवक का नाम खेलाराम बताया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार 13 मार्च से दोनों लापता ​थे। कसडोल पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद जांच के लिए रायपुर रवाना कर दिया है वहीं मौत के कारणों का पता लगाने में जुट गई है। 

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रायपुर।  लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) वोटबैंक को एकजुट करने की तैयारी में जुटी है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले जिस तरह से ओबीसी आरक्षण पर निर्णय लिए गए उससे यही संकेत मिलता है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में ओबीसी को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने का वादा करने जा रही है।
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का तो दावा है कि कांग्रेस ओबीसी आबादी के अनुपात में 27 फीसद आरक्षण का वादा करेगी और चुनाव जीतने के बाद उसे पूरा भी करेगी। इसका संकेत इसी बात से मिलता है कि छत्तीसगढ़ में सरकार ने चुनाव में जाने से पहले ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने की संभावना तलाशने के लिए कमेटी बनाई है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने के लिए अध्यादेश पारित किया है।
इसके साथ ही मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जहां 27 फीसद आरक्षण दिया गया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में वर्तमान में ओबीसी को 14 फीसद आरक्षण दिया जा रहा है। ओबीसी वोटबैंक को लेकर कांग्रेस और भाजपा में खींचतान पुरानी है।
पिछले साल ही भाजपा ओबीसी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने के लिए देशभर में प्रदर्शन कर चुकी है। भाजपा नीत एनडीए सरकार ने पिछले ही साल ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने का कानून पास किया। इसी विधेयक को अटकाने का आरोप भाजपा तब कांग्रेस पर लगाती रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को ओबीसी बताने से नहीं चूकते। इसकी वजह यही है कि देशभर में बहुसंख्यक 52 फीसद आबादी ओबीसी वर्ग की ही है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के बाद ओबीसी वर्ग के नेता भूपेश बघेल सीएम बन गए तब भी उन्हें अध्यक्ष के पद से हटाया नहीं गया। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के पहले तक भाजपा में भी प्रदेश की बागडोर ओबीसी वर्ग के नेता धरमलाल कौशिक के हाथ थी।
बिखरी हुई हैं ओबीसी जातियां
छत्तीसगढ़ में करीब 47 फीसद ओबीसी हैं। इनमें साहू, पटेल, मरार, कुर्मी, निषाद आदि वर्गों की अलग-अलग आबादी है। प्रदेश में ओबीसी वर्ग में 95 से अधिक जातियां शामिल हैं। साहू समाज के पास 11 से 12 फीसद वोट हैं। पटेल, मरार, कुर्मी आदि का वोट प्रतिशत चार से पांच फीसद तक है। इन जातियों के अलग-अलग मुद्दे हैं। कोई भी ओबीसी वर्ग किसी एक राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है। प्रदेश में 27 फीसद ओबीसी आरक्षण्ा की मांग पुरानी है।
ओबीसी वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयास
कांग्रेस ओबीसी आरक्षण पर बड़ा दांव खेलकर ओबीसी वोटबैंक के ध्रुवीकरण का प्रयास कर सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी ओबीसी आबादी के अनुपात में 52 फीसद आरक्षण की घोषणा भी कर सकती है।
आदिवासी आरक्षण बढ़ाया, ओबीसी का नहीं
छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने आदिवासियों का आरक्षण बढ़ाकर 20 से 32 फीसद कर दिया था। पिछली सरकार ने अनुसूचित जाति का आरक्षण भी दो फीसद कम करके 12 कर दिया था। ओबीसी को 14 फीसद ही रहने दिया गया था।
कमेटी करेगी सभी वर्गों के आरक्षण की समीक्षा
राज्य सरकार ने आचार संहिता लगने से ठीक पहले जो कमेटी बनाई है वह सभी वर्गों के आरक्षण की समीक्षा कर रिपोर्ट देगी। आदेश में कहा गया है कि दस फीसद सवर्ण आरक्षण लागू करने का फार्मूला तो तलाश ही जाए, ओबीसी को 27 फीसद आरक्षण देने के लिए भी अध्ययन दिया जाए। इस कमेटी से अनुसूचित जाति, जनजाति को मिल रहे आरक्षण की समीक्षा करने को भी कहा गया है।

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रायपुर । छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय में सहायक ग्रेड 3 के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगा गया है। इसके लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया गया है। जारी विज्ञापन के मुताबिक कुल 48 पदों पर भर्ती होनी है। अधिक जानकारी छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिवालय की वेबसाइट पर प्राप्त की जा सकती हैं। अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। साथ ही टाइपिंग कौशल की परीक्षा भी अलग से आयोजित की जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता- 12वीं पास व कंप्यूटर में एक वर्षीय डिप्लोमा के साथ हिन्दी व अंग्रेजी टाइपिंग का अनुभव।
वेतनमान- 19500- 62000 (लेवल-4)
आयु सीमा- 1 अप्रैल 2019 को 18 वर्ष से अधिक और 40 वर्ष से कम हो। (सिर्फ छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए) (विभिन्न वर्गों को शासन के नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का प्रावधान)
आवेदन की प्रारंभिक व अंतिम तिथि- 20 मार्च 2019 से 31 मार्च 2019 तक
आवेदन शुल्क-
अजा/अजजा/निःशक्तजन- 200 रुपये
अन्य पिछड़ा वर्ग- 250 रुपये
सामान्य वर्ग- 300 रुपये

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भिलाई।  लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश का सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। सियासतदार राजनीतिक गोटी बिठाने में लग गए हैं। वहीं दिग्गज नेताओं को मिशन-2019 की सफलता के लिए जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
पंद्रह वर्षों के वनवास के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस इस बार ज्यादा उत्साहित है। वहीं भाजपा भी अपनी सीटों को बरकरार रखने के लिए कमर कस चुकी है। सबसे ज्यादा दिलचस्प मुकाबला दुर्ग संभाग अंतर्गत आने वाले दुर्ग व राजनांदगांव संसदीय सीट को लेकर देखने को मिल सकता है।
प्रदेश की राजनीति में दुर्ग व राजनांदगांव का बड़ा दखल है। वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग संसदीय सीट से ताल्लुक रखते हैं जबकि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव लोकसभा सीट के रहवासी हैं।
दोनों ही सीटों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा व कांग्रेस इस सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर काफी तनाव में है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में 20 सीटों में से मात्र दो सीटें ही भाजपा की झोली में गई है, जबकि 18 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है।
राजनांदगांव संसदीय सीट से भाजपा के एकमात्र प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जीत हासिल की है, जबकि दुर्ग लोकसभा सीट व संभाग से कांग्रेस के भूपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबार, गुरु रूद्र कुमार, देवेंद्र यादव चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचे। वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार में दुर्ग संसदीय सीट के विधायक बतौर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, कृषि मंत्री, पीएचई मंत्री हैं। वहीं राजनांदगांव सीट से दिग्गज नेता मोहम्मद अकबार पर्यावरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
कुल मिलाकर दुर्ग संभाग से पांच मंत्री वर्तमान प्रदेश सरकार का चेहरा है। इन नेताओं के कंधों पर दुर्ग सीट को बचाने के साथ ही दूसरे सीटों को कांग्रेस की झोली में डालने की जवाबदेही सौंपी गई है। यह सभी दिग्गज नेता वरिष्ठता और जातिगत समीकरणों के हिसाब से प्रदेश के स्टार प्रचार होंगे।
वहीं दूसरी ओर 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बाद भी प्रदेश की कुल 10 सीटें जीत कर भी दुर्ग फतह नहीं कर पाने का मलाल भाजपाइयों को अब भी है, लिहाजा इस सीट पर कमल कैसे खिलेगा इस पर मंथन और मंत्रणा का दौर जारी है।
राजनीति में दुर्ग का दबदबा
देश व प्रदेश की राजनीति में दुर्ग का काफी दबदबा है। यह पूरे प्रदेश की एकमात्र संसदीय सीट है, जहां एक ही समय में तीन सांसद रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार के समय मुख्यमंत्री रहे मोतीलाल वोरा वर्तमान में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के सांसद हैं।
उनकी गिनती कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं में होती है। 2014 में भाजपा की सुश्री सरोज पांडेय को हराकर जीत हासिल करने वाले ताम्रध्वज साहू ने गृहमंत्री बनने के बाद सांसद के पद से इस्तीफा दिया। वहीं भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सुश्री सरोज पांडेय छत्तीसगढ़ से राज्य सभा की वर्तमान में सांसद है।
देवेंद्र पर रहेगी प्रचार की बड़ी जिम्मेदारी
युवा कांग्रेस और एनएसयूआइ के शीर्ष पदों पर रहे देवेंद्र यादव पर चुनाव प्रचार की बड़ी जिम्मेदारी होगी। सबसे कम उम्र में रिकॉर्ड मतों से जीत कर पहले महापौर चुने गए उसके बाद प्रदेश के कद्दावर नेता प्रेमप्रकाश पांडेय को हराकर विधायक बने।
युवा वोटरों को साधने के लिए देवेंद्र को प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में स्टार प्रचारक उपयोग करने की योजना कांग्रेस ने बनाई है। वहीं एक ही समय में महापौर, विधायक व सांसद रहने का रिकॉर्ड दुर्ग संसदीय सीट के नाम पर दर्ज है। भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री सुश्री सरोज पांडेय ने एक साथ तीनों पदों पर जीत हासिल की थी।

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भिलाई । दिनदहाड़े गोली चलाकर 9 लाख रुपए की लूट कांड को अंजाम देने वाले 3 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस टीम ने 10 दिनों के भीतर ही इस लूटकांड का पर्दाफाश करने में सफलता हासिल की है ।
पुलिस टीम को प्रोत्साहित करने 2 लाख रुपए इनाम देने की भी घोषणा की गई है. गिरफ्तार तीनों शातिर बदमाश लूट की कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं. आरोपियों से सघन पूछताछ में कई लूटकांड का खुलासा होने के दावे किये जा रहे हैं. रायपुर में हुए सराफा व्यापारी से लूट मामले में भी इन आरोपियों की संलिप्तता होने की जानकारी मिल रही है।
बता दें कि विगत 5 मार्च को दोपहर 2 बजे कृष्णा कॉमर्शियल कम्पनी के कैशियर आशीष वर्मा को पीछे से धक्का देकर मोटर साइकिल से गिराकर तीन अज्ञात व्यक्तियों ने पिस्टल से धमकाते हुए तीन राउंड फायर कर उसके पास रखे बैग को लूटकर भाग गए. बैग में 9 लाख 19 हजार रुपए, चेक बुक तथा अन्य कागजात थे. मामले में थाना छावनी में धारा 394 भादवि, 25-27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था ।
घटना की गंभीरता को देखते हुए आईजी हिमांशु गुप्ता और डीआईजी रतनलाल डांगी के निर्देशन में उप पुलिस अधीक्षक (क्राइम) प्रवीर चंद्र तिवारी, सीएसपी छावनी विश्वास चन्द्रकार, सीएसपी भिलाई नगर अजीत यादव, एसडीओपी राजीव शर्मा के साथ पाटन, छावनी, सुपेला, नेवई, वैशाली नगर थाना प्रभारियों के साथ अन्य 50 पुलिस कर्मियों की टीम बनाकर जांच शुरू की गई ।
जांच के दौरान घटना में प्रयुक्त वाहन को केंद्र बिंदु बनाकर शहर में लगे विभिन्न सीसीटीवी के जरिए ट्रेक किया गया. इसके बाद मुखबिर से मिली सूचना पर घटना से जुड़े लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई ।
घटना में आरोपी देवी प्रसाद बसोर और मनीष बसोर की घटना में संलिप्तता पाई गई. साथ ही उत्तरप्रदेश के संजय वर्मा को भी हिरासत में लिया गया है. जिनके पास से घटना में प्रयुक्त दुपहिया वाहन, एक पिस्टल, 4 जिन्दा कारतूस, 7 देशी कट्टा, 5 जिन्दा कारतूस तथा लूटे गये राशि में से 2 लाख 20 हजार रुपए नगद राशि जब्त किया गया ।

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रायपुर ।  सरकारी नीतियों की मीडिया में आलोचना करने वालों की अब खैर नहीं। डीजीपी डीएम अवस्थी ने अपने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए इस संबंध में आदेश जारी किया है। बता दें यह आदेश सुकमा एसपी जितेंद्र शुक्ला और मंत्री विवाद के बाद जारी किया गया है।
डीजीपी अवस्थी ने विभाग के तमाम अधिकारियों और इकाई प्रमुखों को आदेश जारी करते हुए कहा कि मीडिया-सोशल मीडिया में किसी प्रकार का प्रशासनिक पत्राचार व जनप्रतिनिधियों से कोई भी पत्राचार करते समये निर्धारित प्रशासनिक व्यवस्था का खास ध्यान रखें।
परिपत्र जारी करते हुए डीजीपी ने अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते किसी भी प्रकार का दस्तावेज प्रस्तुत करना प्रतिबंधित है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से वर्ष 2017 में जारी किेए गए पत्र का हवाला देते हुए प्रावधान का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक के साथ-साथ दंडात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

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जशपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने कहा है कि अंतर्जातीय विवाह करने वाले युवकों को जेल में डाल देना चाहिए। साय ने कहा है कि दलित और आदिवासी से विवाह करने वाले युवक पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। नंदकुमार साय ने एक धर्म विशेष को लेकर यह टिप्पणी की है। बता दें कि भारत सरकार सामाजिक एकीकरण में आने वाले जाति प्रथा के उन्मूलन के लिए अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन देती है।
इसके तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ऐसे लोगों को जिनमें एक अनुसूचित जाति या जनजाति से और दूसरा युवक या युवती ओबीसी या सामान्य वर्ग से आता है, तो उसे आर्थिक रूप से प्रोत्साहन के साथ सरकारी सेवाओं में उम्र सीमा में छूट देती है। साय ने कहा है कि इसको बढ़ावा देने का फायदा धर्म विशेष के लोग उठा रहे हैं। वे जनजाति महिलाओं से विवाह कर उनकी संपत्ति हड़पना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना का लाभ सिर्फ हिन्दू समाज में आपसी विवाहों में दिया जाता है। अन्तर्धार्मिक विवाहों से इसका कोई सरोकार नहीं है।

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