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Author: admin
रायपुर | जोगी कांग्रेस और बसपा का गठबंधन टूटने के संकेत मिल रहे हैं. विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये गठबंधन लोकसभा चुनाव के पहले ही टूट सकता है. जनता कांग्रेस की समीक्षा बैठक में हार के पीछे एक वजह बसपा से गठबंधन करना भी माना जा रहा है.
समीक्षा बैठक में ये बात सामने आई है कि बसपा से गठबंधन की वजह से जोगी कांग्रेस पार्टी की छवि सतनामी और जनजाति वर्ग की पार्टी बनकर रह गई. जिसके चलते जनता कांग्रेस को सभी वर्गों का वोट नहीं मिल पाया. बीते दिनों जनता कांग्रेस ने 21 सूत्रीय श्वेत पत्र भी जारी किया था. श्वेत पत्र में भी हार की वजहों में बसपा से गठबंधन के वजह से जनता कांग्रेस को नुकसान की बात कही गई थी.
रायगढ़ । छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 फरवरी को रायगढ़ में सभा करेंगे। सभा राजनीतिक होगी और आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए प्रधानमंत्री कार्यकर्ता-नेताओं को रिचार्ज करने आ रहे हैं। लेकिन उस सभा में भाजपा के ज्यादातर दिग्गज नहीं होंगे। केवल पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह (Raman Singh) और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ही सभा में शिरकत करेंगे।
लेकिन न पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक होंगे न बृजमोहन अग्रवाल। यहां तक कि पार्टी के विधायक भी उस सभा में शामिल होने नहीं जाएंगे। दरअसल, उस दिन विधानसभा में छत्तीसगढ़ का बजट पेश होना है। सदन में भाजपा के कुल 15 ही विधायक हैं।
संयोग कहें या दुर्याग, बजट (Chhattisgarh Budget 2019) पेश होने और पीएम की सभा एक ही दिन निर्धारित हैं। ऐसे में भाजपा विधायकों के सामने संवैधानिक बाध्यता भी है कि वे सदन में मौजूद रहें। बताया जा रहा है कि पार्टी ने दो दिन पहले बैठक कर इस पर गंभीर मंथन भी किया। अंत में तय किया गया कि प्रधानमंत्री के सम्मान और स्वागत के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह रायगढ़ जाएंगे।
उनके साथ पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल भी रहेंगे। शेष दिग्गज विधानसभा में बजट सत्र में शामिल होंगे और विपक्षी होने के नाते अपना पक्ष रखेंगे। 15 में से 14 विधायक विधानसभा में मौजूद होने की वजह से प्रधानमंत्री की सभा में नहीं जा सकेंगे।
अनिल जैन भी नहीं होंगे
आमतौर पर ऐसा होता राष्ट्रीय अध्यक्ष या प्रधानमंत्री की सभाओं में प्रदेश प्रभारी मौजूद होते हैं। इतना ही नहीं वे तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक-दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ पहुंचते रहे हैं। लेकिन भाजपा के प्रदेश प्रभारी अनिल जैन का पहले से ही कार्यक्रम तय है। कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण और पार्टी के लिए उपयोगी है। ऐसे में अनिल जैन भी संभवत: 8 फरवरी को प्रधानमंत्री की सभा में मौजूद नहीं होंगे।
राष्ट्रीय महासचिव सरोज भी नहीं
ऐसा ही कुछ राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय के बारे में कहा जा रहा है। उनके भी पूर्व कार्यक्रम निर्धारित हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की सभा में उनकी मौजूदगी को लेकर अभी तक कुछ भी तय नहीं है। सूत्रों का कहना है कि शायद राष्ट्रीय महासचिव भी पीएम की सभा में शामिल नहीं होंगी। हालांकि ऐनवक्त पर हालात को देखते हुए कार्यक्रम में बदलाव कर वे सभा में जा सकती हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष धर्मलाल कौशिक का कहना है कि 8 फरवरी को छत्तीसगढ़ का बजट है। बतौर नेता प्रतिपक्ष सदन में रहना जरूरी भी है और मजबूरी भी। विपक्ष में हैं इसलिए पार्टी के सभी विधायक अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
रायपुर. विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद भाजपा में अंतर्कलह थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष के लिए सोशल मीडिया में लॉबिंग शुरू हो गई है. भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री संजू नारायण सिंह ठाकुर ने बृजमोहन अग्रवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की मांग रखी है. इस संबंध में उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर कई केंद्रीय मंत्री को ख़त लिखा है.
भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री संजू नारायण सिंह ठाकुर ने भाजपा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, भाजपा राष्ट्रीय महासचिव एंव छत्तीसगढ प्रभारी अनिल जैन, भाजपा राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री सौदान सिंह को भी इस संबंध में पत्र लिखकर अवगत कराया है. साथ ही यह पत्र अपने फेसबुक पेज पर भी वायरल किया है. उधर सच्चिदानंद उपासने के समर्थकों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के लिए सच्चिदानंद उपासने बेहतर साबित होंगे.
रायपुर | चर्चित अंतागढ़ टेपकांड की जांच करने गठित एसआईटी आक्रामक मोड पर आ गई है। अब टेपकांड से जुड़े लोगों से पूछताछ का सिलसिला शुरू हो गया है। एसआईटी ने बुधवार को फिरोज सिद्दीकी को बुलाया। गंज थाना परिसर स्थित क्राइम ब्रांच बिल्डिंग में उनसे करीब साढ़े 4 घंटे पूछताछ की गई। इस दौरान एसआईटी के अफसरों ने एक-एक कर करीब 60 सवाल दागे, जिसका उन्होंने जवाब दिया।
पूछताछ में फिरोज सिद्दीकी ने कहा, अंतागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मंतुराम पवार को चुनाव मैदान से हटने के लिए 7 करोड़ रुपए में सौदेबाजी हुई थी, जिसमें करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपए एक शख्स के माध्यम से मंतुराम पवार को भिजवाया गया था। इसमें कई राजनीतिक हस्तियां शामिल थीं। फिरोज से हुई पूछताछ के आधार पर अब एसआईटी मंतुराम पवार और संबंधित लोगों से पूछताछ करने की तैयारी में जुटी है। संभावना है, एक-दो दिन में पूछताछ की जाएगी।
इनकी बनी है एसआईटी
राज्य शासन ने रविवार को अंतागढ़ टेपकांड की जांच करने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाने आदेश जारी किया। इसमें एसपी रायपुर नीतू कमल स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की प्रभारी बनाई गई हैं। वहीं, डीएसपी अभिषेक माहेश्वरी, इंस्पेक्टर नरेश पटेल और एसआई विक्रम ध्रुव सदस्य हैं। बुधवार को फिरोज सिद्दीकी से पूछताछ के दौरान पूरी एसआईटी मौजूद थी।
अंतागढ़ उपचुनाव में फूटा था कांड
गौरतलब है, साल 2014 में राज्य के अंतागढ़ उपचुनाव में मंतुराम पवार कांग्रेस की तरफ से अधिकृत प्रत्याशी बनाए गए थे, लेकिन पवार ने नामांकन दाखिल करने के बाद नाटकीय तरीके से चुनाव मैदान छोड़ दिया था। पार्टी को सूचना दिए बगैर उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। इस मामले को लेकर बड़ा बवाल मचा। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इसके पीछे भाजपा और जोगी खेमे का हाथ है। इशारों में पार्टी ने कुछ नाम भी सामने रखे थे।
इन दिग्गजों के नाम आए थे सामने
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस प्रत्याशी मंतुराम पवार के नाम वापस लेने के बाद खरीद-फरोख्त के आरोप लगे और इसका एक टेप भी सामने आया था, जिसमें कतिपय लोगों की आवाज होने का दावा किया गया था। इस टेप के जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में सियासी घमासान मच गया था, जिसका सीधा असर कांग्रेस पार्टी में फूट के रूप में दिखा। इस टेपकांड विवाद को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस का गठन कर लिया था।
और भी लोगों से पूछताछ की जाएगी
एसपी नीतू कमल ने बताया कि फिरोज सिद्दीकी से अंतागढ़ टेपकांड में कई पहलुओं पर पूछताछ की गई है। उनसे ओरिजनल ऑडियो टेप मांगा गया है। जांच में और भी लोगों से पूछताछ की जाएगी।
बिलासपुर। शासकीय सेवा में मृत पति की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही महिलाओं को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने आज आदेश देते हुए कहा कि मृत शासकीय सेवक की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।
याचिकाकर्ता अन्नपूर्णा रात्रे की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा किसी शासकीय सेवक का निधन होने पर उसकी पत्नी को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की जरूरत नही हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि बिजली कंपनी ने पूर्व में याचिकाकर्ता के खाते में मृत कर्मचारी के देयक का 65 हजार जमा कराया है। इससे साबित होता है कि याचिकाकर्ता मृतक की पत्नी है।
इसके साथ ही कोर्ट ने बिजली कंपनी को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता को 90 दिन के अंदर अनुकंपा नियुक्ति दे। वहीं कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हिन्दु उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 372 में यह कहीं भी उल्लेख नहीं है कि वैध विवाहित पत्नी व उसके बच्चों को दिवंगत शासकीय कर्मी के किसी भी हित या अधिकार को प्राप्त करने के लिए संबंधित न्यायालय से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पेश करना होगा।
गौरतलब है याचिकाकर्ता अन्नपूर्णा रात्रे के पति सत्यम रात्रे छत्तीसगगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के पेंड्रा कार्यालय में पदस्थ थे। 11 अगस्त 2016 को सत्यम की मौत हो गई। पति के मौत के चार महीने बाद याचिकाकर्ता अन्नपूर्णा रात्रे ने 5 दिसंबर 201़6 को एक पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद अन्नपूर्णा ने शासन का निर्धारित प्रपत्र भर कर पति की जगह पर अनुकंपा नियुक्ति देने पेंड्रा कार्यालय में आवेदन दिया।
लेकिन विभाग ने उसके आवेदन को लंबित रखा दिया। इसके बाद 3 मार्च को 2018 को विभाग ने उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र नहीं दिए जाने के कारण आवेदन निरस्त कर दिया। जिसके बाद अन्नपूर्णा ने अधिवक्ता बृजेश सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता ने कहा, अनुकंपा नियुक्ति के मामले में शासन के विभिन्न सर्कुलर का पालन नहीं कर अनावश्यक रूप से आवेदन को तीन वर्ष तक लंबित रखने के बाद निरस्त किया गया।
रायपुर | प्रदेश की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि ईओडब्लू की टीम ने गुरुवार को पीडब्लूडी और चिप्स के ऑफिस में दबिश दी है। बताया जा रहा है कि रेड टीम में कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। फिलहाल पीडब्लूडी और चिप्स के दफ्तर में कार्रवाई चल रही है। वहीं, बताया जा रहा है कि कई बड़ी गढ़बड़ियों का खुलासा हो सकता है।
रायपुर। पूरे साल में चार से पांच बार चंद्रमा पृथ्वी के करीब आता है, लेकिन इस बार पहले चक्र में 21 जनवरी को पृथ्वी के करीब नहीं आया। अब 19 फरवरी और 21 मार्च पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के करीब दिखेगा। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि एक दशक के बाद ऐसा अवसर आएगा। चंद्रमा करीब होने के कारण बड़ा दिखाई देगा।
खगोली शास्त्री का कहना है कि पृथ्वी की परिक्रमा करता हुआ चंद्रमा पृथ्वी से 3 लाख 61 हजार 740 किलोमीटर या इससे कम दूरी पर आ जाएगा। इसे अंग्रेजी में सुपरमून कहा जाता है। 19 फरवरी का सुपरमून साल का सबसे नजदीक होगा। इस रात को चंद्रमा करीब 14% बड़ा और 30% ज्यादा चमकीला होगा और 27 हजार 554 किलोमीटर करीब होगा।
खगोलशास्त्र के अनुसार
384400 किमी पृथ्वी और चांद की औसत दूरी
27554 किमी करीब होगा 19 फरवरी को सुपरमून
नजदीक 356500 किमी स्थिति को पेरिजी व दूर 406700 किमी वाली स्थिति को ओपीजी कहते हैं।
समानता पूर्णिमा के चंद्रमा से सुपरमून 7% बड़ा और 16% चमकीला होगा
फैक्ट फाइल
दोनों पूर्णिमा पर धरती से दूरी
19 फरवरी – 356846 किलोमीटर
21 मार्च – 360772 किलोमीटर
भविष्य में कब बनेगी ये स्थिति
2034 और 2052 में भी सबसे करीब होगा चंद्रमा। रविशंकर विवि के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सदी में 356500 किलोमीटर से कम दूरी का सुपरमून देखने के लिए 25 नवंबर 2034 का इंतजार करना होगा। इस दौरान चंद्रमा की दूरी 356446 किमी होगी। इस सदी का सबसे नजदीक 6 दिसंबर 2052 को होगा। चंद्रमा की दूरी 300425 किमी होगी।
इनका कहना है
एक संयोग बस है जो पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के करीब आ रहा है। इसके अलावा साल में पांच से छह बार पृथ्वी के करीब आएगा- डॉ. नंद कुमार चक्रधारी, एस्ट्रोलॉजिस्ट, रविवि
एक दशक के बाद चंद्रमा पूर्णिमा के दिन पृथ्वी के करीब आएगा। संयोग प्राकृति आपदा के बन रहे हैं। अविस्मरणीय घटनाएं हो सकती हैं। चंद्र दान करना होगा- पंडित संजय शर्मा, ज्योतिषाचार्य
रायपुर। महात्मा गांधी के सुविचारों की देन है कि हम आजाद हैं। उनके निश्चय का परिणाम है कि देश विकास की गाथा रच रहा है। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय में गांधी की पुस्तक की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। यहां युवा, प्राध्यापक और छात्र उनकी कही बातों से रू-ब-रू हुए।
प्रदर्शनी में आजादी के पूर्व छपी पुस्तकों को प्रदर्शित की गई है। सबसे खास पुस्तक थी ‘आज के विचार’। आजादी के पूर्व लिखी इस पुस्तक का चौथा संस्करण महाविद्यालय परिसर में देखने को मिला। पुस्तक में एक जनवरी से लेकर 31 दिसंबर तक के सुविचार हैं। साल की शुरुआत को ध्यान में रखकर विचार दिया गया कि हम सबको शांति देने वाला होना चाहिए।
साल के आखिरी दिन 31 दिसंबर के लिए लिखा है- रोज बोलता हूं.. वह भी प्रार्थना ही है, उसी का हिस्सा है, मेरा यह सब भी भगवान के लिए है। मौके पर छात्र-छात्राओं की रंगोली, मेहंदी और फल सजाओं प्रतियोगिता हुई। कार्यक्रम के आयोजक डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि राजधानी में गांधी की पुस्तकों का सबसे बड़ा संग्रह महाविद्यालय में है। सबसे ज्यादा किताबें नागपुर विश्वविद्यालय से लाई गई हैं। अब इनके संरक्षण के लिए स्कैन करने का कार्य जल्द प्रारंभ किया जाएगा।
मौसम के मिजाज के अनुसार भी विचार
मत्मा गांधी ने सुविचार तो किताब में लिख दिए, लेकिन खास बात ये है कि उन्हें मौसम के मिजाज के अनुसार लिखा। ताकि पाठक सुविचारों का आनंद उठा सके। विचारों में तीज-त्योहारों के महत्व, स्थानीय त्योहारों को भी पिरोया गया है।
‘अगर मैं डिक्टेटर होता’ छात्रों को आई पसंद
प्रदर्शनी में गांधी की लिखी किताब ‘अगर मैं डिक्टेटर होता’ युवाओं को खूब पसंद आई। महात्मा गांधी ने किताब में लिखा है कि मैं अहिंसा को नहीं अपनाता तो सच में डिक्टेटर होता। देश के उत्थान के लिए मेरे कदम उठते ही नहीं, केवल अर्थ के पीछे मैं भागता दिखाई देता।
मल्टीमीडिया डेस्क। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियां होती हैं। अधिकमास में इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। पद्मपुराण में एकादशी का बहुत ही महात्मय बताया गया है एवं उसकी विधि विधान का भी उल्लेख किया गया है।
इसी में से एक है माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिस दिन को षटतिला एकादशी मनाई जाती है और व्रत किया जाता है। इस बार 31 जनवरी को गुरुवार के दिन यह एकादशी मनाई जाएगी।
षटतिला एकादशी पर तिल के द्वारा भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। षटतिला एकादशी पर तिल का इस्तेमाल स्नान, प्रसाद, भोजन, दान, तर्पण आदि सभी चीजों में किया जाता है। इस दिन व्यक्ति को सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की तिलों से पूजा करनी चाहिए।
भगवान विष्णु को पीले फल, फूल, वस्त्र अर्पण करने चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तिल का प्रयोग करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और मन की इच्छा भी पूरी होती हैं। कहा जाता है तिल में महा लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई, ज्ञान और धन में लाभ होता है।
षठतिला एकादशी की कथा
नारद मुनि त्रिलोक भ्रमण करते हुए भगवान विष्णु के धाम वैकुण्ठ पहुंचे। वहां पहुंच कर उन्होंने विष्णु भगवान को प्रणाम करके उनसे प्रश्न किया कि प्रभु षट्तिला एकादशी की क्या कथा है और इस एकादशी को करने से कैसा पुण्य मिलता है। तब लक्ष्मीपति भगवान विष्णु ने कहा प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ब्राह्मणी रहती थी। वह मुझमें बहुत ही श्रद्धा एवं भक्ति रखती थी। यह स्त्री मेरे निमित्त सभी व्रत रखती थी।
परंतु यह स्त्री कभी ब्राह्मण एवं देवताओं के निमित्त अन्न दान नहीं करती थी। अत: मैंने सोचा कि यह स्त्री बैकुण्ड में रहकर भी अतृप्त रहेगी अत: मैं स्वयं एक दिन भिक्षा लेने पहुंच गया। उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर मेरे हाथों पर रख दिया। मैं वह पिण्ड लेकर अपने धाम लौट आया। कुछ दिनों पश्चात वह स्त्री भी देह त्याग कर मेरे लोक में आ गई।
यहां उसे एक कुटिया और आम का पेड़ मिला। खाली कुटिया को देखकर वह स्त्री घबराकर मेरे समीप आई और बोली मैं तो धर्मपरायण हूं फिर मुझे खाली कुटिया क्यों मिली? तब मैंने उसे बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने से हुआ है। मैंने फिर उस स्त्री से बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं तब आप अपना द्वार तभी खोलना जब वे आपको षट्तिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं।
स्त्री ने ऐसा ही किया और जिन विधियों को देवकन्या ने कहा था उस विधि से ब्रह्मणी ने षट्तिला एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया अन्न धन से भर गई। इसलिए हे नारद जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है और तिल एवं अन्न दान करता है उसे मुक्ति और वैभव की प्राप्ति होती है।
षठतिला एकादशी का फल
इस व्रत में तिल का छ: रूप में दान करना उत्तम फलदायी होता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का दान करता है उसे उतने हजार वर्ष स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। ऋषिवर ने जिन 6 प्रकार के तिल दान की बात कही है वह इस प्रकार हैं 1. तिल मिश्रित जल से स्नान 2. तिल का उबटन 3. तिल का तिलक 4. तिल मिश्रित जल का सेवन 5. तिल का भोजन 6. तिल से हवन।
इन चीजों का स्वयं भी प्रयोग करें और किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को बुलाकर उन्हें भी इन चीजों का दान दें। इस प्रकार जो षट्तिला एकादशी का व्रत रखते हैं, भगवान उनको अज्ञानता पूर्वक किए गए सभी अपराधों से मुक्त कर देते हैं और पुण्य दान देकर स्वर्ग में स्थान प्रदान करते हैं।
इंदौर । लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी किए जाने वाले वार्षिक कैलेंडर में इस बार इंदौर के कलाकार की रचनात्मकता नजर आ रही है। महात्मा गांधी के संदेशों, विचारों और कार्यों को आत्मसात करने के लिए इस बार उन्हीं पर आधारित कैलेंडर प्रकाशित किया गया है। 12 पन्नों वाले इस कैलेंडर को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कुछ अलग रूप से लाने का सोचा था, जिसे शहर के युवा चित्रकार सारंग क्षीरसागर की कलाकृतियों से सजाया गया है।
इस कैलेंडर में न केवल गांधीजी के संदेशों को अंकित किया गया है, बल्कि चित्रकारी के जरिए उनकी उस विचारधारा को भी दर्शाने का प्रयास किया है, जो हर दौर की आवश्यकता और समसामयिकता है। गांधीजी की घड़ी, चश्मा, चरखा, छड़ी, चप्पल, नमक, तीन बंदर आदि के जरिए विचारों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
कलाकार सारंग बताते हैं हर पन्नों की डिजाइन में इस बात का ध्यान रखा गया कि कैलेंडर देखने वाले का ध्यान केवल गांधीजी पर ही केंद्रित होकर न रह जाए, बल्कि उनके उस संदेश को समझ सके, जिसे वे देना चाहते थे। इसलिए चरखे के बैकग्राउंड में लूम पर तिरंगा बुनते कारीगरों के साथ सभी मजहब के लोगों को लिया जोकि स्वावलंबन, एकता की बात कहता है। उनकी घड़ी का चित्र बनाकर बैकग्राउंड में बापू की प्रार्थना सभा बनाई गई है। उनका चश्मा बनाकर उसके रिफ्लेक्शन में तिरंगे को बताया गया, जो यह बात कहता है कि वे केवल देश की आजादी पर ही ध्यान दे रहे थे।
सारंग के अनुसार यह कैलेंडर डिजाइन करना इसलिए चुनौती भरा था क्योंकि इसमें केवल रेखांकन और रंग तक ही बात सीमित नहीं थी बल्कि विचारों को अप्रत्यक्ष रूप से मूर्त रूप में भी लाना था। 12 अलग-अलग विषयों को एक तानेबाने में रखते हुए ये कैलेंडर डिजाइन किया गया। कैलेंडर का विमोचन सुमित्रा महाजन ने किया