Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
Author: admin
*मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया हवाई और जमीनी सर्वेक्षण*
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों दंतेवाड़ा और बस्तर का हवाई सर्वेक्षण एवं जमीनी निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर सहायता पहुँचना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर संवेदनशीलता और तत्परता आवश्यक है।
मुख्यमंत्री साय दंतेवाड़ा के चूड़ीटिकरा वार्ड में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर पहुँचे, जहाँ उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से भेंट कर उनकी समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि शिविरों में पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवास की व्यवस्था निरंतर बनी रहे।
मुख्यमंत्री साय ने यहां लगाए गए स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल टीम से दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की तैनाती और मरीजों को दी जा रही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करते हुए यह भी पूछा कि क्या वे प्रशासन की मदद से संतुष्ट हैं। प्रभावितों ने जिला प्रशासन के त्वरित सहयोग पर संतोष व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री साय ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए पुल का भी निरीक्षण किया और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था तथा पुनर्निर्माण कार्यों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने दंतेवाड़ा कलेक्टोरेट में जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति, पुनर्वास योजनाओं और प्रभावित परिवारों को दी जा रही तत्कालिक सहायता की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों में प्रशासनिक टीमों की निरंतर पहुँच बनी रहे और हर जरूरतमंद तक राहत सामग्री समय पर पहुँचे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ कठिनाई अवश्य लाती हैं, परंतु प्रशासनिक तत्परता और जनसहयोग से इन कठिनाइयों का समाधान संभव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की विशेष देखभाल की जाए तथा स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री साय के साथ वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री महेश कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, राजस्व सचिव और आपदा राहत आयुक्त श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, संभागायुक्त श्री डोमन सिंह सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवई का मिल रहा स्वाद
गैस चूल्हे की व्यवस्था से धुएं से मिली मुक्ति
रायपुर। आंगनबाड़ियों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब पहले से बहुत खुश हैं। समय पर स्कूल और आंगनबाड़ी खुल रहे हैं। वहां मिलने वाले नाश्ते खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया, सेवई तथा भोजन से उन्हें ऊर्जा भी मिल रही है। गैस सिलेण्डर की व्यवस्था से आंगनबाड़ियों और स्कूलों में भोजन पकाने के दौरान उत्पन्न होने वाले धुएं से भी मुक्ति मिल गई है। इससे रसोईयों के साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी राहत मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कोरबा जिले के सभी आंगनबाड़ियों तथा प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सुबह के नाश्ते की व्यवस्था डीएमएफ से की जा रही है। नाश्ते और सिलेण्डर की व्यवस्था ने आंगनबाड़ी तथा विद्यालय आने वाले बच्चों की रूचि बढ़ा दी है। अलग-अलग दिनों में निर्धारित मेनू के आधार पर उन्हें नाश्ता और भोजन परोसा जा रहा है। नाश्ते में खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा व भजिया दी जा रही है। विद्यार्थी नाश्ता खाने बहुत उत्सुक रहते हैं और समय पर विद्यालय भी पहुंच जाते हैं।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम धोबघाट प्राथमिक शाला में कक्षा पहली की छात्रा प्रियांशी, छात्र विनय, कक्षा दूसरी की नेहा, तीसरी की रोशनी और नर्मदा तथा कक्षा पांचवी के भूपेश ने बताया कि अब नाश्ते में अलग-अलग दिनों में उन्हें अलग-अलग खाने को मिलता है। खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवईयां मिलती है। विद्यालय में प्रधान पाठक चैनसिंह पुहुप ने बताया कि नाश्ते का प्रभाव बच्चों पर पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि सिलेण्डर की व्यवस्था होने से जल्दी खाना पक जाता है। नाश्ता हो या मध्यान्ह भोजन दोनों को पकाने में आसानी हो गई है।
कोरबा विकासखण्ड के दूरस्थ गांव लामपहाड़ में पहाड़ी कोरवा बच्चों में भी नाश्ते का प्रभाव पड़ा है। आंगनबाड़ी केंद्र हो या स्कूल दोनों जगह उनकी उपस्थिति नजर आती है। पहले सुबह से ही अपने परिजनों के साथ जंगल की ओर प्रस्थान कर जाने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चे अब समय से पहले स्कूल पहुंचते हैं। लामपहाड़ आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता सुशीला तिर्की और सहायिका सुलोचनी यादव बताती है कि केंद्र में ज्यादातर बच्चे पहाड़ी कोरवा जनजाति के हैं। कई बच्चों को घर पर पर्याप्त आहार उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में नाश्ता और भोजन उनके शारीरिक विकास के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह दस बजे के आसपास नाश्ता देने के साथ ही दोपहर को एक बजे भोजन दिया जाता है।
आंगनबाड़ी में आने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चों सम्पति, रवीना, सुखमनिया, सुशील और कविता ने बताया कि उन्होंने सुबह नाश्ते में दलिया खाया और दोपहर को दाल, भात और सब्जी खाई है। हर दिन गरम भजिया, पोहा, खीर, पूड़ी, उपमा का नाश्ता मिलता है और इसे खाना भी अच्छा लगता है। यहां भोजन पकाने वाली सहायिका सुलोचनी यादव का कहना था कि पहले बारिश के दिनों में चूल्हा जलाना बहुत मुश्किल हो जाता था। सूखी लकड़ियों की व्यवस्था करना, फिर चूल्हा जलाकर धुएं के बीच खाना पकाना बहुत परेशानी वाला काम था। अब तो गैस से मिनटों में बिना परेशानी के खाना बनने लगा है।
लामपहाड़ के प्राथमिक और माध्यमिक शाला में भी विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की उपस्थिति तथा नाश्ते व मध्याह्न भोजन में रूचि नजर आने लगी है। कक्षा चौथी की देवशीला एवं फूलमनिया ने बताया कि स्कूल में मिलने वाला नाश्ता उन्हें अच्छा लगता है। पाली विकासखंड के दूरस्थ गांव पण्डोपारा में प्राथमिक शाला में लगभग 25 बच्चे हैं। नये भवन में आंगनबाड़ी संचालित है। दोनों जगह बच्चों को समय पर नाश्ता और भोजन मिलता है। गांव में रहने वाली पूजा पण्डो ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। एक आंगनबाड़ी में और दो स्कूल में पढ़ाई करते हैं। तीनों को सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना मिलता है। पहले वे बहाना बनाकर स्कूल जाने में आनाकानी करते थे, पर अब नियमित जाते हैं। स्थानीय प्रशासन ने सभी स्कूलों में नाश्ते का मीनू लिखाने तथा स्थानीय उपलब्धता और विद्यार्थियों की पसंद के अनुरूप नाश्ता परोसने के निर्देश दिए हैं।
सवा दो लाख बच्चे हो रहे लाभान्वित
करीब एक साल पहले 14 अगस्त 2024 को कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा और कोरबा विकासखंड के शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की थाली में गरम नाश्ता परोसने का सिलसिला प्रारंभ किया गया है। ढाई माह तक नाश्ता परोसने और इससे हुए सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए इसे जिले के सभी विकासखण्डों में प्रारंभ करने के निर्देश दिए। पिछले साल दीपावली अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही कोरबा, पाली, करतला और कटघोरा के शेष स्कूलों में भी नाश्ता देना प्रारंभ किया गया। जिले के सभी आंगनबाड़ियों, स्कूलों और छात्रावासों में सिलेण्डर की व्यवस्था कर प्रतिमाह गैस रिफलिंग की सुविधा भी प्रदान की गई है।
कोरबा जिले के 2602 आंगनबाड़ियों में छह माह से लेकर तीन वर्ष तक के 48 हजार 217 और तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 56 हजार 477 बच्चे दर्ज हैं। इसी तरह 1502 प्राइमरी स्कूलों में 73 हजार 810 और 537 मिडिल स्कूलों में 47 हजार 122 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ये सभी बच्चे नाश्ते और मध्यान्ह भोजन से लाभान्वित हो रहे हैं। नाश्ता और भोजन पकाने के लिए डीएमएफ से गैस सिलेण्डर की व्यवस्था की गई है।
अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा करेंगे
रायपुर। एक विशेष पर्वतारोहण दल हिमालयी अभियान के लिए रवाना हुआ है। दल में शामिल जशपुर के युवा पर्वतारोही हैं रवि सिंह, तेजल भगत, रूसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल हैं। इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू है कि आदिवासी संस्कृति और उसकी जड़ों से जुड़ाव है। जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय परंपराओं, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और सामुहिकता की भावना से है। हिमालय की ऊँचाइयों पर इन युवाओं का पहुँचना केवल एक खेल उपलब्धि नहीं बल्कि इस बात का प्रतीक है कि कैसे आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक ताकत और प्रकृति से गहरे रिश्ते को लेकर दुनिया के सामने खड़ा हो रहा है। दल के सदस्य अपनी संस्कृति और साहस अपने साथ लिए हिमालय की ओर बढ़ रहे हैं। इस अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं।
यह अभियान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन ओर आशीर्वाद से संचालित हो रहा है। दल जशपुर से रांची के लिए रवाना हुआ, जहां से वे ट्रेन द्वारा दिल्ली पहुँचेंगे। दिल्ली से आगे टीम जगतसुख पहुँचेगी, जहाँ वे पर्वतारोहण की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद 5 सितम्बर को टीम आधार शिविर ( Base Camp ) की ओर प्रस्थान करेगी।
दल को विदा करने के लिए जशपुर जिला प्रशासन एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जशपुर कलेक्टर, डीएफओ, जिला पंचायत सीईओ ने टीम को शुभकामनाएँ दीं और उनके सुरक्षित एवं सफल अभियान की कामना की। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि जशपुर की युवा प्रतिभाएँ इस अभियान के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने में योगदान प्रदान करेंगे। वहीं इसे जिले की उभरती खेल एवं साहसिक गतिविधियों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। जिला पंचायत सीईओ जो स्वयं एक अनुभवी पर्वतारोही हैं, ने दल के युवाओं को पर्वतारोहण और ट्रेकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षा उपायों, ऊँचाई पर स्वास्थ्य प्रबंधन और टीम भावना की अहमियत पर बल देते हुए युवाओं को प्रेरित और प्रोत्साहित किया।
इस अभियान को लेकर प्रदेश के लोग उत्साहित और गर्वित हैं। साथ ही स्थानीय जय जंगल कंपनी जो इस एक्सपीडिशन के स्पान्सर में से एक है, के संस्थापक समर्थ जैन का कहना है कि यह दल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को पर्वतारोहण तथा साहसिक खेलों की ओर अग्रसर करेगा। जगह-जगह लोग बच्चों के हौसले और साहस की चर्चा कर रहे हैं और सभी को उम्मीद है कि वे हिमालय से सफलता और गौरव की नई कहानियाँ लेकर लौटेंगे।
इस अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं
इस पर्वतारोही दल का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं साथ ही इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण संदेश है- पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति की दिशा में जागरूकता। यह पहल न केवल युवाओं को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करेगी, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। हिमालय अभियान से यह संदेश भी जाएगा कि साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है। इससे न केवल जशपुर बल्कि पूरे राज्य में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सूदखोरी, मारपीट, ब्लैकमेलिंग और वसूली के कुख्यात आरोपी तोमर ब्रदर्स—वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर—अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। जून 2025 में इनके खिलाफ कुल 7 मामले दर्ज होने के बाद से 90 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों भाई फरार हैं और संभवतः मध्य प्रदेश में छिपे हुए हैं, जहां से वे अपने परिजनों के संपर्क में बने हुए हैं। इस बीच, पुलिस ने इनके लगभग 150 से ज्यादा फोन नंबरों की जांच की है, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। शहर की पुलिस, जो खुद को सबसे हाईटेक और स्मार्ट मानती है, इनकी फरारी के सामने बेबस नजर आ रही है, जबकि हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस ने पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र से ड्रग तस्करों, साइबर ठगों और अन्य अपराधियों को गिरफ्तार कर 380 से ज्यादा आरोपियों को जेल भेजा है।
मामलों का विस्तृत ब्योरा: जून 2025 से शुरू हुई कार्रवाई
तोमर ब्रदर्स का काला कारोबार जून 2025 की शुरुआत में उजागर हुआ, जब रायपुर के एक प्रॉपर्टी डीलर ने रोहित तोमर पर मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने इनके भाठागांव स्थित साईं विला आवास पर छापेमारी की, जहां से करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई। जब्त सामान में शामिल हैं:
नकद राशि: 37 लाख रुपये
सोना: 734 ग्राम (मूल्य लगभग 50 लाख रुपये से ज्यादा)
चांदी: 125 ग्राम
लग्जरी वाहन: बीएमडब्ल्यू, फॉर्च्यूनर, थार और ब्रेजा (कुल मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये)
अवैध हथियार: पिस्टल और चाकू
अन्य सामान: नकली दस्तावेज, नोट गिनने की मशीनें, और संपत्ति के कागजात जो जबरन रजिस्ट्री कराए गए थे
पुलिस के अनुसार, तोमर ब्रदर्स ने 10% तक की ब्याज दर पर कर्ज देकर लोगों से करोड़ों रुपये वसूले। एक पीड़ित करन सोनी ने बताया कि उन्होंने 10 लाख रुपये उधार लिए थे, लेकिन ब्रदर्स ने उनसे 1 करोड़ 30 लाख रुपये वसूल लिए और फिर भी धमकियां दीं। पीड़ितों ने पुलिस को धमकी भरे ऑडियो टेप भी सौंपे हैं। कुल 7 मामलों में शामिल हैं: 3 मारपीट, 2 वसूली, 1 ब्लैकमेलिंग और 1 सूदखोरी। इनमें से कुछ मामलों में पीड़ितों ने बताया कि ब्रदर्स ने चेक, ब्लैंक स्टैंप पेपर और धमकी से जमीनें औने-पौने दामों में रजिस्ट्री कराईं।
पुलिस की कार्रवाई: इनाम, वारंट और कुर्की, लेकिन गिरफ्तारी शून्य
रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के लिए 5-5 हजार रुपये (कुल 10 हजार) का इनाम घोषित किया है। कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं, जबकि लोअर कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। वर्तमान में हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका विचाराधीन है। अगस्त 2025 में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इनकी संपत्ति कुर्क की, जिसमें भाठागांव स्थित साईं विला के 1500-1500 वर्ग फुट हिस्से शामिल हैं। पुलिस की टीम ने भारी बल के साथ यह कार्रवाई की, और अब अन्य संपत्तियों पर भी कुर्की की तैयारी है। इसके अलावा, आयकर विभाग और रायपुर नगर निगम ने इनकी संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है, जहां निर्माण अनुमतियां और कर संबंधी अनियमितताएं पाई गई हैं।
राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं और पुलिस की नाकामी
शहर में चर्चा है कि तोमर ब्रदर्स को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस की कार्रवाई कमजोर पड़ रही है। एक बार सब्जी बेचने और ऑटो चलाने वाले ये भाई अब करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, जो उनके काले कारोबार की गहराई दर्शाता है। पुलिस ने रेड के दौरान पाया कि इनका सिंडिकेट 30-40 युवकों का था, जो हथियारों से लैस रहते थे। फिर भी, छत्तीसगढ़ पुलिस की हालिया सफलताओं—जैसे 380 से ज्यादा अपराधियों की गिरफ्तारी अन्य राज्यों से—के बावजूद ये दोनों हाईटेक तरीकों से फरार हैं। पुलिस को आशंका है कि वे बड़े अपराध की योजना बना सकते हैं।
सनातन धर्म में पूजा-पाठ में उपयोग हुई चीजों का खास महत्व बताया है। जैसे रोली, अक्षत, फल, फूल और नारियल के बिना पूजी अधूरी होती है। इन समाग्रियों का पूजा में खास इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के वक्त हमारे द्वारा जो भी धूपबत्ती या दीया जलाया जाता है।
उसके बाद इसके बचे राख को हम फालतू समझ कर फेंक देते हैं। यह करना अशुभ साबित हो सकता है। अगर आप लोग भी ऐसा करते हैं तो यह करने से बचे। अब आप लोगों के मन में सवाल उठ रहा होगा की जली हुई बत्ती का क्या करना चाहिए? इसे फेंक देना चाहिए या नहीं? चलिए जानते हैं कि पूजा के बाद बची राख का क्या करें।
पूजा के बाद बची राख का क्या उपाय करें?
पूजा करने के बाद धूपबत्ती की राख और दीपक की जली बत्ती को किसी भी पेड़ के नीचे छुपाकर रख दें। यह उपाय करने से कर्जे से मुक्ति मिल जाएगी और शुभ चीजों का आगमन होगा।
शास्त्रों में पूजा से बची राख का एक उपाय यह भी बताया गया है कि अगर किसी व्यक्ति को नजर लगी हो तो राख को इकट्ठा कर उसके ऊपर से 11 बार नजर उतारे और उत्तर-पूर्व दिशा की तरफ फेंक दें। यह करने से नजर दोष समाप्त हो जाएगा और जीवन में खुशियों का प्रारंभ होगा।
शत्रु भय दूर करने के लिए करें उपाय
आपको लगता है कि आप के ऊपर शत्रु भय है, तो पूजा के बाद बची राख और बत्ती को अपने हाथ में लेकर शत्रु का नाम लेते हुए उसे दक्षिण दिशा की तरफ फेंक दें। यह उपाय करने से जीवन में लाभ हो सकता है और शत्रु की हार होगी।
धन के लाभ के लिए करें यह काम
अगर आप को धन से जुड़ी तकलीफें हो रही हैं तो पूजा के बाद जली हुई दीपक की बत्ती और धूपबत्ती की राख को इकट्ठा करके उसे जमीन के नीचे रख दें और शनिदेव के मंत्रों का जाप भी करें।
कपड़े में बांधकर नदी में करें प्रवाहित
अगर जीवन में ग्रहदोष चल रहा है तो पूजा से बची धूपबत्ती की राख और दिपक की बत्ती को कहीं पर भी न फेंके। यह करना अशुभ माना जाता है। इन दोनों को एक लाल कपड़े में रख दें और एक हफ्ते बाद इन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।
मन की बात’ की 125वीं कड़ी का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित मंत्रियों और नागरिकों ने किया श्रवण
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 125वीं कड़ी का सीधा प्रसारण आज नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद उद्योग एवं व्यापार परिसर के कन्वेंशन सेंटर में हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक इंद्र कुमार साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण और नागरिक उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की घड़ी में देशवासियों द्वारा एक-दूसरे की सहायता करना भारत की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय जो सहयोग और एकजुटता दिखाई देती है, वही भारत की संस्कृति और सामूहिक चेतना को परिभाषित करती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में खेलों को न केवल स्वास्थ्य बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी आधार बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि खेलकूद में सक्रिय भागीदारी कर अपने जीवन और देश दोनों को ऊर्जावान बनाएं.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि ‘मन की बात’ हर माह प्रदेशवासियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक सोच और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करता है।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि कौशल विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े क्षेत्रों में हुए सहयोग और निवेश से राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ में कौशल विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू होगा।
राज्य की रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाए। उन्होंने कहा कि सरकार और जनता के साझा प्रयासों से राज्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संदेश हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। हमें सामूहिक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर एक समृद्ध और स्वच्छ छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
नई दिल्ली। अंजीर एक ऐसा प्राकृतिक सुपरफूड है जो सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। खासकर सुबह खाली पेट भीगे अंजीर का सेवन पाचन सुधारने, कब्ज दूर करने, हड्डियों को मजबूत करने, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, और त्वचा को ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर अंजीर एनीमिया और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए भी लाभदायक है। नियमित सेवन से वजन घटाने में भी सहायता मिलती है।
बदलती जीवनशैली और खराब खानपान के बीच अगर कोई छोटा-सा फल बड़े-बड़े फायदे दे रहा है तो वह है अंजीर। सूखा या भीगा हुआ अंजीर सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर में एनर्जी बनाए रखने में मददगार है।
खासतौर पर सुबह खाली पेट 2 से 3 अंजीर भिगोकर खाने से शरीर को कई प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं, जो दिनभर एनर्जी बनाए रखते हैं और लंबे समय तक बीमारियों से बचाते हैं।
डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, भीगे अंजीर में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट की सफाई में मदद करता है। खासकर जिन लोगों को रोज़ कब्ज की समस्या रहती है, उनके लिए यह रामबाण उपाय है। भीगा अंजीर आंतों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और पेट को हल्का बनाए रखता है।
अंजीर में मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। साथ ही इसमें पोटेशियम भी होता है जो हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है। नियमित सेवन से हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी घटता है।
आयरन से भरपूर अंजीर शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाता है और एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को निखारते हैं और मुंहासे, झुर्रियों से भी बचाते हैं। अंजीर के सेवन से त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग दिखती है।
अंजीर में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जो भूख को कंट्रोल करता है।इससे ओवरईटिंग की समस्या नहीं होती और वजन धीरे-धीरे घटने लगता है। यह एक नेचुरल तरीका है जो बिना किसी साइड इफेक्ट के।वजन कम करने में मददगार है।
भीगे अंजीर का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। ज्यादा खाने से पेट में गैस या लूज मोशन की समस्या हो सकती है। रोज़ाना 2 से 3 अंजीर पर्याप्त हैं। भीगा अंजीर एक ऐसा घरेलू सुपरफूड है, जो न सिर्फ पेट को साफ रखता है बल्कि हड्डियों, त्वचा, दिल और खून की सेहत को भी बेहतर बनाता है। रोज़ की दिनचर्या में इसे शामिल करके लंबे समय तक स्वस्थ रहा जा सकता है।
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों का पर्व कहा जाता है। पितृ पक्ष के 15 दिनों की अवधि में पितरों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत परिजनों की आत्मा अपने परिवार वालों से मिलने के लिए आती है। इसलिए इस दौरान घर को साफ-सुथरा और पवित्र रखना चाहिए। साथ ही ऐसी नकारात्मक चीजों को भी घर से हटा देना चाहिए, जो पितरों को पसंद नहीं।
टूटे-फूटे बर्तन- जिन बर्तनों का इस्तेमाल आप नहीं करते या जो बर्तन टूट गए हैं। उन्हें पितृ पक्ष शुरू होने से पहले ही घर से हटा देना चाहिए। इन बर्तनों से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पितरों की कृपा भी प्राप्त नहीं होती।
खंडित मूर्ति- देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां या टूटी हुई तस्वीर को कभी भी घर पर न रखें। ऐसी मूर्ति घर पर रखना या इसमें पूजा करना बहुत अशुभ माना जाता है। आप पितृ पक्ष शुरू होने से पहले ही इन्हें किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें।
बेकार की वस्तुएं- घर पर बेकार का जंग जगा सामान, कबाड़ का सामान या रद्दी-पुराने कपड़े रखना भी अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसी चीजें घर की पवित्रता को भंग करती हैं। इसलिए इन वस्तुओं को भी पितृ पक्ष के पहले ही हटा लें।
बंद पड़ी घड़ियां- बंद या खराब घड़ियों से जीवन की गति और तरक्की बाधित होती है। अगर आपके घर पर भी ऐसी घड़ियां हैं तो इन्हें पितृ पक्ष से पहले ठीक करवा लें या फिर हटा दें। लेकिन बंद घड़ियों को कभी भी दीवार पर न लटकाएं।
रायपुर। अगर आप भी रायपुर जिले में दो पहिया वाहन का इस्तेमाल करते हैं, तो खबर आपके काम की साबित हो सकती है। लगातार बढ़ते सड़क दुर्घटनाओं के बीच पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है। अब पंप पर बिना हेलमेट के पहुंचने वाले दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को ज्ञापन सौंपकर जानकारी भी दी है।
राजधानी रायपुर में 1 सितंबर से ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ अभियान जिले में सख्ती से लागू किया जाएगा। सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भरवाने के लिए हेलमेट के साथ पहनना अनिवार्य होगा। एसोसिएशन का मानना है कि रायपुर में पिछले कई दिनों से सड़क दुर्घटनाओं में लोगों के गंभीर रूप से घायल और कुछ मामलों में मौत की अत्यंत दुखद खबरें सामने आई। इन घटनाओं में अधिकतर दो-पहिया वाहन चालकों ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण दुर्घटना होने पर उन्हें सर में चोट लगी।
जगदलपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को साझा करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय रेडियो कार्यक्रम दीदी के गोठ का कल रविवार 31 अगस्त को शुभारंभ किया जा रहा है। इस विशेष श्रृंखला का पहला प्रसारण 31 अगस्त को दोपहर 12.15 बजे आकाशवाणी के सभी केंद्रों से होगा। कार्यक्रम के पहले प्रसारण में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा उप मुख्यमंत्री सह विभागीय मंत्री विजय शर्मा प्रदेश भर की बिहान दीदियों को संबोधित करेंगे।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपनी प्रेरणादायी सफलता की कहानियां साझा करेंगी, जो अन्य समूहों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगी। दीदी के गोठ के माध्यम से बिहान से जुड़ी महिलाओं के कार्यों, उनकी उपलब्धियों तथा आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे नवोन्मेषी गतिविधियों की जानकारी प्रदेशभर में पहुंचाई जाएगी। यह पहल न केवल स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक सशक्त बनाने का माध्यम भी बनेगी। जिले में यह कार्यक्रम जिला पंचायत और समस्त जनपद पंचायतों सहित सभी 28 संकुलों में प्रसारित होगा, जहां समूह की महिलाएं एकत्र होकर इस प्रसारण को सुनेंगी और प्रेरणा प्राप्त करेंगी।
सीईओ जिला पंचायत एवं प्रभारी कलेक्टर प्रतीक जैन द्वारा दीदी के गोठ रेडियो कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार कर उक्त कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों की दीदियों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं । वहीं उक्त कार्यक्रम में जिले के स्व-सहायता समूहों की ज्यादा से ज्यादा दीदियों को उपस्थित होने का आग्रह किया गया है।