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जगदलपुर । बीजापुर के मोदकपाल में फैले जंगल में हाल ही में एक ममी पाई गई है। बाताया जा रहा है कि, ये कुदरत का करिश्मे से बनी हुई ममी है। इससे पहले भी एक दशक पहले ऐसा ही शव देखा गया था जो तांबे के रंग का था। जो कि, बाढ़ के साथ बहकर आया था।
इस ममी व अन्य सभ्यताओं के ममी में मोटा फर्क यह है कि इसे संरक्षित रखने किसी रसायन का उपयोग नहीं हुआ है। बल्कि कुदरत के करिश्मे ने एक शव को ममी में बदल दिया है।
पुलिस भी रह गई दंग : शव की स्थिति को देखते थाना ने इसकी जानकारी रीजनल फारेंसिक साइंस लेबोरेटरी को दी। यहां पहुंची टीम को आरंभिक जांच में चौंकाने वाली बात नजर आई कि यह शव ममी में परिवर्तित हो गया है।
शव को ससम्मान दफनाया गया : फॉरेन्सिक टीम द्वारा जांच पूरी हो जाने के बाद शव को पंचनामा कर इस शव को सम्मान सहित दफना दिया गया। शिनाख्ती व अन्य पहलुओं की जांच के लिए डीएनए सैपलिंग करने शव के एक हिस्से को रायपुर स्थित एफसीएल में भेजा गया है।
नहीं सड़ा था और शवों की तरह ये शव : ऐसा हुआ खुलासा सूखे नाले पर मिला यह शव पुराना होने के बाद भी अन्य शव की तरह सड़ा- गला नहीं था। बल्कि इसकी त्वचा मोटे चमड़े में बदल गई थी।
ममी मानकर दर्ज कर दिया रिकार्ड : करीब 6 फुट लंबाई वाले मृतक की उम्र 40 साल के आसपास आंकी गई। लक्षण के आधार पर इस शव को ममी मानकर रिकार्ड दर्ज किया गया है।
दशक भर पहले भी मिला है एक ममी : आरएफएसएल के वैज्ञानिक डा. बी सूरी बाबू ने एक अन्य वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि बारसूर इलाके में दशक भर पहले एक और ममी देखी गई थी।
बाढ़ के दौरान बहकर आया था शव : नदी के बीचों बीच एक अजीबो गरीब शव अटका हुआ है। इंद्रावती की छिछली धारा को पार कर जब वे उस जगह तक पहुंचे तो पाया कि यहां तांबई रंग का एक शव अटका हुआ था। शोध करने पर पता चला कि यह शव बाढ़ के दौरान दूर कहीं से बहकर आया होगा। इस टापूनुमा जगह पर रेत की तपिश व शुष्क हवाओं ने कालांतर में इसे ममी में बदल दिया।
कुदरत ने बना दिया ममी
ज्वाइंट डायरेक्टर, क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला के डा. बी सूरी बाबू ने बताया कि, तेज गर्मी व सूखी हवाओं की वजह से ऐसा हुआ है। गर्मी ने शव को सूखा दिया व तेज हवा ने उसके सडऩ की प्रक्रिया धीमी कर दी। शव कड़े चमड़े की तरह हो गया था। इसे ममीटाइजेशन कहते हैं।
दो दशक में दो घटनाएं
ममी में बदलने की ऐसी घटनाएं कम देखी गई हैं। बस्तर संभाग में दो दशक में ये दो घटनाएं विभाग ने दर्ज की है। आगे और शोध जारी है।

सुकमा । नक्सलियों ने मरईगुड़ा पंचायत सचिव को जान से मारने की धमकी दी है। नक्सलियों ने पंचायत सचिव पर यह आरोप लगाया है कि वे ग्रामीणों को बरगला रहे हैं और वूसली कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोंटा एरिया कमेटी के नक्सलियों ने पर्चा फेंककर धमकी दी है।
मिली जानकारी के अनुसार सुकमा के मरईगुड़ा और आस-पास के इलाके के ग्रामीण 13 साल पहले काम करने के लिए तेलंगाना चले गए थे और कुछ दिनों पहले ही वे अपने घर वापस लौटे। उनके घर वापसी की जानकरी होने पर पंचायत सचिव ने उनसे मुलाकात की और कुछ जानकारी साझा की। पंचायत सचिव का ग्रामीणों से मुलाकात करना नक्सलियों को रास नहीं आया और उन्होंने पर्चा फेंककर सचिव को जान से मारने की धमकी दी है।
मगरलोड धमतरी। जिले के विकासखंड मगरलोड से 20 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत हसदा के खेत खलियानों में दो जंगली हाथियों ने ऐसा आतंक मचाया की किसानों की खड़ी धान की फशल पूरी तरह बरबाद हो गई. जंगली हाथियों ने जमकर तांडव मचाया है ।बता दें कि लीला राम अपने खेतों के दवाई छिड़काव का काम कर रहा था तभी तो जंगली हाथी तेजी से उसकी ओर दौड़ पड़े. किसान ने दवा ढिड़काव का काम छोड़कर जल्दी ही पेड़ पर चढकर अपनी जान बचाई है ।
अभी भी इन जंगली हाथियों का उत्पात जारी है ये हाथी धान की फसल को रौंध रहे हैं. जंगली हाथी को देखने आसपास के ग्रामीणों की भीड़ बढ़ रही है वन एवं पुलिस विभाग के कर्मचारी लोगों को हाथी से दूर रहने के लिए सतर्क करने में लगे हुए हैं ।
ग्रामीणों का कहना है कि हमने सुबह से ही वन विभाग के उच्च अधिकारियों का जंगली हाथियों के उत्पात की जानाकरी दी थी. लेकिन अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे, जिसकी वजह से उनकी धान की कई एकड़ों में लगी फसल बरबाद हो गई है ।

दंतेवाड़ा । बस्तर में आतंक का जड़ जमा चुके नक्सलियों को उखाड़ फेंकने अब डीआरजी की महिला कमांडोज सुपर-30 उतर चुकी हैं। इन सभी महिला कमांडोज का अपना अलग- अलग गहरा दर्द है। समर्पित महिला नक्सली को संगठन में रहने का भी लाभ नहीं मिला। साथियों ने ही उनके परिवार का कत्लेआम किया।
इधर शहादत को सलाम करते पति के लक्ष्य को पूरा करने पत्नी ने नक्सलियों के खिलाफ बंदूक उठाई है। इसी तरह सुपर-30 की हर महिला कमांडोज के मन में नक्सलियों के खिलाफ आक्रोश भरा है। पुलिस अधिकारियों ने ऐसे ही 30 महिलाओं को एकत्र कर डीआरजी की सुपर-30 तैयार की है।
इस सुपर-30 की आधे फाइटर्स को अधिकारियों ने लाल लड़ाकों के सामने बुधवार को उतारा था। बस्तर में चल रहे अघोषित युद्ध में इनका पराक्रम देखने को मिला। पहली लड़ाई में ही अपनी काबिलियत दिखा दी।
दर्द-जुनून और नक्सलियों के खिलाफ आक्रोश का मिश्रण है सुपर-30
बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ अब महिला कमांडोज को उतारा गया है। बुधवार को दंतेवाड़ा- सुकमा बार्डर के गोंडेरास मुठभेड़ में ये महिला फाइटर्स शामिल रही। इनका चयन अधिकारियों ने बड़ी सोच और दूरगामी परिणाम के लिए किया है। इन सुपर-30 कमांडोज में ऐसी युवती और महिलाओं को रखा गया है। जो स्थानीय बोली-भाषा और भौगोलिक परिस्थितियों को समझती है। इतना ही नहीं ये लोग भी नक्सलियों के सताए हुए।
चाहे आम घरेलू महिला रही हो या नक्सलियों के संगठन पर जिम्मेदार पदों पर। उनका आक्रोश, दर्द और जुनून को देखते अधिकारियों ने 30 विशेष महिला फाइटर्स को लाल लड़ाको के खिलाफ मैदान में उतारा है। इनमें सलवा जुडूम में परिजनों को खोने वाली महिलाओं से लेकर नक्सली हिंसा में शहीद होने वाले जवानों की पत्नियां ही नहीं लाल गलियारे में एरिया कमेटी सचिव जैसे पर काबिज फाइटर्स भी हैं।
ऐसे तैयार हुई डीआरजी की सुपर-30 महिला कमांडोज
जिले के पुलिस अधिकारियों ने सलवा जुडूम के बाद बने सहायक आरक्षक, गोपनीय सैनिक, आत्म समर्पित नक्सली और उनकी पत्नियों के साथ शहीद जवानों की पत्नियों को शामिल किया है। जिन्हें जंगलवार कैंप की विशेष ट्रेनिंग के साथ नक्सलियों से सामना करने हर तरह दक्ष किया है।
आधुनिक और पारंपरिक हथियार के साथ बाइक चलाना में भी तैयार किया जा रहा है। टीम की आधी महिलाएं अभी बाइक में फरर्राटा भरने के साथ तैराकी भी जानती हैं। बेसिक कोर्स के साथ कांकेर में 45 दिन का गुरिल्लावार का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा प्रतिदिन सुबह पुलिस ग्राउंड में प्रैक्टिस कराया जा रहा है।
पति को शहादत करने वाले को चुन-चुनकर मारना
सुपर-30 की फाइटर्स मधु पोडियाम कभी घरेलू महिला थी। खेत और घर के काम के बाद परिवार में उलझी रही। आज हाथों में बंदूक थामे नक्सिलियों के खिलाफ खड़ी है। मधु कहती है तो नक्सलियों को चुन-चुनकर मारना है। उसने मेरा सुहाग ही नहीं कई परिवार को उजाड़ दिया है। अब नक्सलियों से जब भी सामना होगा, मैं नहीं मेरा बंदूक बात करेगा। मधु के पति नक्सली मुठभेड़ में शहीद हो गए तो वह बच्चे और बुजुर्ग सास-ससूर की देखभाल के लिए फोर्स में भर्ती हो गई।
कमेटी सचिव रही फिर भी मारा पिता को
करीब सात साल पहले आत्म समर्पित करने वाली नेशनल पार्क एरिया कमेटी की सचिव बसंती उरसा का दर्द भी जुदा नहीं है। वह नक्सली संगठन के जिम्मेदार पद पर रही लेकिन नक्सलियों ने उसकी बगैर जानकारी के पिता और चाचा की हत्या कर दी। सिर्फ इसलिए वह गांव पंच बनकर विकास करना चाहता था। नक्सलियों का यह क़त्य बसंती को भीतर तक झझकोर दिया कि वह2012 में सरेंडर कर पुलिस के लिए काम करने लगी। आज महिला फाइटर्स की सुपर-30 का हिस्सा है।
समझ में आते ही छोड़ आई पार्टी
भांसी इलाके की रहने आत्मसमर्पित नक्सली सुनीता कहती है कि मुझे डरा- धमकाकर नक्सली संगठन में शामिल कर लिए थे। तब मैं बच्ची थी लेकिन बड़े होने के बाद समझ में आया कि यह गलत है तो 2014 में छोड़ आई नक्सल संगठन। मैंने नक्सल पार्टी में रहकर अपना बहुत कुछ खोया है। अब उसकी भरपाई तो हो नहीं सकती लेकिन किसी और बच्ची को नक्सल संगठन में जाने से रोकने के लिए लीडरों को मार भगाने की बात कहती है।
जंगल में छिपते फिर रहा था अब नक्सलियों को खोजता हूं
कभी फोर्स की डर से जंगल में छिपते ग्रामीणों को डराते- धमकाते रहे, लेकिन अब उन्हीं ग्रामीणों के बीच सुकून मिल रहा है। परिवार के साथ रहने से जिंदगी बढ़़ रही है। यह बात दो साल पहले अपनी प्रेमिका के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली सन्नु तारम का है। सन्नु आज पुलिस लाइन में रहकर फोर्स के लिए काम कर रहा है। उसके साथ उसकी पत्नी और प्रेमिका भी रहती है। ये भी कभी नक्सली लीडर हुआ करती थी।
सन्नु अपनी प्रेमिका आयती के साथ 2017 में पुलिस के समक्ष हथियार डाला था। तब वह सेक्शन प्लाटून नंबर 2 का कमांडर था। उसकी प्रेमिका आयती भी एलजीएस की डिप्टी कमांडर थी। सन्नु के सरेंडर के बाद उसकी पत्नी सुशीला तारम भी सितंबर 2018 में नक्सली संगठन छोड़कर पुलिस के पास आ गई। अब दोनों महिलाएं डीआरजी का हिस्सा बनकर लाल लड़ाकों को मात देना चाहती हैं।
उनका कहना है कि नक्सल संगठन में आजादी नहीं है। न परिवार के साथ रह सकते हैं और मिलने दिया जाता है। विवाह के बाद भी पति के साथ रहने नहीं देते हैं। पति का नसबंदी करा दिया था। जबकि हम मात़त्व सुख लेना चाहती थी। अपनी बात रखने पर लीडर मारपीट भी करते थे। समाज के ऐसे दुश्मनों को मार भगाना ही समाज सेवा है।
इनका कहना है
दंतेवाड़ा में नक्सलियों से सामना करने के लिए डीआरजी में बेहतरीन कमांडो हैं। डीआरजी से नक्सली खौफ खाते है। इस टीम स्थानीय लोग और जानकार रखे गए हैं। अब डीआरजी की नई टुकड़ी महिलाओं की बनाई गई है। जिसमें चुनिंदा 30 कमांडोज को शामिल किया है। इनका चयन करने में काफी दिक्कत हुई लेकिन डीएसपी दिनेश्वरी नंद के नेत़त्व में ये सुपर-30 महिला फाइटर्स बेहतर परिणाम देने तैयार हैं। इस टीम में आत्मसमर्पित नक्सली और शहीद जवानों के साथ स्थानीय बोली-भाषा और भौगोलिक परिस्थिति के जानकारों का शामिल किया गया है। ये सभी तरह के हथियार चलाने के साथ तैराकी और बाइक चलाने में भी दक्ष हैं। महिला कमांडोज को नक्सल मोर्च पर भेजने के कई लाभ मिलेंगे। महिला नक्सलियों की गिरफ्तारी से लेकर उनके सामने फायर खोलने में ये सुपर-30 फाइटर्स नहीं हिचकिचाएंगे।
-डॉ अभिषेक पल्लव, एसपी दंतेवाड़ा
”नारी अब अबला और कमजोर नहीं है, हर क्षेत्र में अपनी मौजूगदगी दर्शा रहीं है। चाहे वह नक्सल मोर्चा ही क्यों न हो। हमारी टीम बुधवार को पुरूष जवानों के साथ गोंडेरास के जंगल में पहुंची थी। जहां दो नक्सलियों का मार गिराया और एक महिला नक्सली का शव भी बरामद किया। यहां तक तक उस शव का पोस्टमार्टम की कार्रवाई भी सुपर-30 की महिला फाइटर्स ने पूरी करवाई है। सुपर-30 की युवतियों में अदम्य साहस और हौसला है।
-दिनेश्वरी नंद, डीएसपी एवं प्रभारी डीआरजी महिला कमांडोज

मुंगेली। जिले के जिला अस्पताल रोड के पास चलती जायलो कार में आग लग गई. समय रहते ड्राइवर ने कार से कूद कर अपनी जान बचाई. जिससे कोई अनहोनी होने से टल गया।
जायलो कार चालक दाउपारा से बाईपास होते हुए जिला अस्पताल की रोड़ पर चल रहा था, तभी कार में अचानक आग लग गई. कार धूं-धूंकर जलने लगी, ड्राइवर रहते कार से कूदकर अपनी जान बचाई. कार में आग देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया. घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पा लिया है. बहरहाल भीषण गर्मी के कारण कार में आग लगने की आशंका जताई जा रही है।
अमीर बनने और करोड़ों बैंक बैलेंस रखने के शौक में कर डाली 1 करोड़ 75 लाख की ठगी, दो शातिर ठग गिरफ्तार

अम्बिकापुर । करोड़ों के बैंक बैलेंस रखने के शौक में दो युवकों ने फर्जी अकाउंट बनाकर एक करोड़ 75 लाख की ठगी कर डाली. लेकिन अब दोनों शातिर ठग पुलिस के गिरफ्त में पहुंच गए हैं. मामला अंबिकापुर जिले के गांधीनगर थाने इलाके का है।
मिली जानकारी के अनुसार गांधीनगर इलाके के पीजी कॉलेज के सामने स्थित केनरा बैंक के बैंक मैनेजर द्वारा एक खाते में करोड़ो रूपये की संदिग्ध लेन-देन की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी. गाधीनगर की टीम ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सादे कपड़ों में केनरा बैंक के आस-पास तैनात कर दिया गया. जिससे आरोपी के पैसे निकालने बैंक आने पर पकड़ा जा सके. तभी फर्जी आधार कार्ड पर लगे फोटो से मिलता-जुलता हुबहु व्यक्ति दिखाई दिया. जिसे तत्काल घेराबंदी कर पकड़ा गया ।
आरोपी अरविन्द बेक ने पूछताछ करने पर बताया कि अपने मित्र कपिल देव के साथ वर्ष 2017 में उसके साथ उसके मुआवजे के प्रकरण के निराकरण के लिये बिलासपुर गया था तब उसने देखा की 56 लोगों की सूची देखी, जो कि जगन्नाथपुर के हैं और मुआवजा प्राप्त नहीं किये हैं. 56 लोगों का कुल 14 करोड़ 50 लाख राशि का भुगतान एसईसीएल के पास बकाया है।
आरोपी अरविन्द बेक
जगन्नाथपुर निवासी कमल साय के खाते में एसईसीएल मुआवजा 1 करोड़ 85 लाख आना था. आरोपी ने कमल साय के आधार कार्ड पर फर्जी तरीके से अरविन्द की फोटो लगा ली और कमलसाय के नाम से एक खाता खुलवाया. फिर शातिर तरीके से अपने खाते में मुआवजे का राशि 1 करोड़ 85 लाख में से 1 करोड़ 75 लाख 56 हजार 592 आ गए. तब बैंक प्रबंधन को शक हुआ औऱ उन्होंने पुलिस को सूचना दी. तब पूरे खेल का खुलासा हुआ. दोनों आरोपी अरविन्द बेक और वाहिद हुसैन पहले भी कई अपराध कर चुके हैं. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

जशपुर । युवती को बहन के घर छोड़ने का झांसा देकर युवक जंगल में ले गया. युवती द्वारा विरोध करने पर धमकी देकर हवस का शिकार बना लिया. आरोपी फिर युवती को जंगल में छोड़कर फरार हो गया. पीड़िता घर पहुंचने के बाद नजदीकी थाना में मामला दर्ज कराया. शिकायत के बाद पुलिस आरोपी की सरगरमी से तलाश की. पुलिस को 15 दिन बाद आरोपी को जिले के नारायणपुर से गिरफ्तार करने में सफलता मिली ।
दरअसल, 26 साल की युवती जशपुर में किराए के मकान में रहकर मजदूरी का काम करती थी. 20 अप्रैल को पीड़िता गोविंदपुर बस स्टैंड में अपनी सगी बहन के घर कमलपुर जाने के लिए बस का इंतजार कर रही थी. इसी बीच गोविंदपुर का रहने वाला आरोपी जुनेद पीड़िता के पास बस स्टैंड पहुंच गया और पीड़िता को उसकी बहन के घर कमलपुर अपनी मोटर साइकिल में छोड़ देने की बात करने लगा
युवती उसके झांसे में आकर मोटर साइकिल में बैठ गईं. आरोपी पीड़िता की बहन के घर कमलपुर छोड़ने के बजाय गोविंदपुर और कमलपुर के बीच पड़ने वाले जंगल में ले जाकर युवती के साथ मार-पीट की, फिर बलात्कार कर फरार हो गया ।
घटना के दो दिन बाद 22 अप्रैल को पीड़िता ने आरोपी जुनेद के खिलाफ थाने मे रिपोर्ट दर्ज कराई. पीड़िता की शिकायत पुलिस ने अपराध दर्ज किया. शिकायत के बाद ही पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई. खोजनबीन के बाद आरोपी जुनेद को नारायणपुर गांव से गिरफ्तार कर लिया ।

बेमेतरा । जिले के नांदघाट इलाके में दिल दहाला देने वाला मामला सामने आया है जहां कुद नकाबपोशों ने बच्चों के सामने धारदार हथियार से उनकी मां की हत्या कर दी। जिस वक्त इस घटना को अंजाम दिया गया उस वक्त महिला के बच्चे भी पास ही थे। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंच महिला के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है। घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
मिली जानकारी के अनुसार बेमेतरा जिले के नांदघाट इलाके के गनियारी की है जहां सोमवार सुबह दिनदहाड़े एक महिला की हत्या कर दी गई। सोमवार सुबह गांव की महिला अपने घर पर काम कर रही थी। इसी दौरान कुछ नकाबपोश अचानक महिला के घर जबरदस्ती घुस गए। इससे पहले महिला कुछ समझ पाती बदमाशों ने महिला पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपियों ने धारदार हथियार से महिला पर कई वार किए जिसके बाद महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के दौरान महिला के बच्चे पास ही खेल रहे थे। जब आस-पास के लोगों ने महिला की खून से सनी लाश देखी, तब पुलिस को घटना की जानकारी दी। नानघाट पुलिस फिलहाल आस-पास के लोगों से भी घटना के संबंध में पूछताछ कर रही है।

कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल ने झोला छाप डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिले के खासकर बिलाईगढ़ और सरसीवां क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टरों के सक्रिय होने की सूचना पर एस.डी.एम. के नेतृत्व में गठित विकासखण्ड स्तरीय टीम को ऐसे लोगों की पहचान कर तत्काल दण्डात्मक कार्रवाई करने कहा है। श्री गोयल आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक लेकर जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के निराकरण के प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में जिला पंचायत के सी.ई.ओ. श्री एस.जयवर्धन सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने बैठक में समितियों में खाद-बीज की उपलब्धता और भीषण गर्मी में पेयजल समस्या जैसे समसामयिक विषयों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि खरीफ बोआई का मौसम जल्द शुरू होने वाला है। किसान इसकी तैयारी में लग चुके हैं। किसानों की मांग के अनुरूप सहकारी समितियों में खाद और बीज की निरंतर उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। खाद-बीज के लिए किसानों को किसी तरह की दिक्कत पेश नहीं आनी चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि प्रति सप्ताह सोमवार को इसकी समीक्षा की जाएगी। उप संचालक कृषि ने बताया कि संपूर्ण भण्डारण क्षमता का 49 प्रतिशत खाद्य बीज भण्डारित हो चुका है। गुणवत्ता के लिए खाद के 11 नमूने लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बीज-खाद की किसी भी सोसायटी में कमी नहीं है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि टेल एरिया तक पानी पहुंच चुका है। दो-तीन दिनों में तालाब भराई का काम पूर्ण हो जाएगा। जिला मुख्यालय में भी तालाबों के भरने से भू-जल स्तर में सुधार आया है। पेयजल तथा निस्तारी की समस्या कम करने में कामयाबी मिली है। कलेक्टर ने कहा जिला अस्पताल में आयुष विंग भी खोला जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने सी.एम.एच.ओ. को जिला अस्पताल में इसके लिए स्थान आरक्षित करके सूचित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र की भी समीक्षा की और इस संबंध में सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाने पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर की।
जशपुर । सीमेंट गोदाम में सहायक मैनेजर के तौर पर काम करने वाले 32 साल के युवक का मंगलवार की रात दो अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया. पुलिस के आला अधिकारी मामले की पुष्टि कर रहे हैं, लेकिन जांच में जुटी जशपुर पुलिस मामले में कुछ कहने से बच रही है।जानकारी के अनुसार, पत्थलगांव के सीमेंट व्यापारी मदन अग्रवाल के साईंटांगरटोली स्थित सीमेंट गोदाम में बतौर सहायक मैनेजर कार्यरत सद्दाम हुसैन मंगलवार की रात काम खत्म कर अपने गांव लोदाम लौट रहा था. इस दौरान दो अज्ञात लोग उसे जबरन मोटर साइिकल में बिठाकर ले गए. युवक के अपहरण की पुष्टि सरगुजा आईजी केसी अग्रवाल ने की है. लेकिन मामले में जशपुर पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है. बता दें कि साईंटांगरटोली गांव झारखंड की सीमा से सटा गांव है।