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खरसिया । बिलासपुर से रायगढ़ की ओर से आ रहा शराब से भरा मेटाडोर क्रमांक सीजी Cg 04. Lw 2271 सड़क किनारे मिट्टी में धंसकर पलट गया.खरसिया के बोतल्दा गांव के पास की ये घटना है. पलटे मेटाडोर में चालक बाल-बाल बच गया है.सड़क पर बिखरी पड़ी शराब की बोतलों को देखकर आस-पास के गांव के लोग शराब लूटने पहुंच गए ।
मिली जानकारी के अनुसार घटना ग्राम बोतल्दा के पास सुबह की है.जैसे ही लोगों को पता चला की शराब का मेटाडोर पलट गया है शराब लूटनो के लिए शराबियों का हूजूम उमड़ पड़ा ।
वाहन चालक के मना करने पर भी लोग आजू-बाजू से शराब की बोतले निकलते रहे. लोगों ने जमकर जाम झालकाए. खरसिया थाना प्रभारी को जब इसकी जानकरी मिली तो मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया ।
राजिम । फिंगेश्वर ब्लाक के अन्नदाता नहर से पानी नहीं छोड़े जाने से परेशान हैं. शिकायतों के बाद भी निराकरण नहीं होने पर ग्राम छुइहा के आक्रोशित किसानों ने आज पानी की मांग को लेकर जल संसाधन कार्यालय का घेराव कर दिया. किसानों ने चेतावनी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा पहले सिंचाई के लिए पानी दिया. जिससे 25 सौ हेक्टेयर में धान की फसल लगाई गई है. लेकिन धान की जब बाली आने वाली है. तब सिंचाई विभाग ने पानी देना बंद कर दिया है, जिससे फसल पूरी तरह से धूप में झुलस रही है ।
किसानों ने लगातार मांग करने पर भी पानी जरूरत के हिसाब से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. इसी वजह से परेशान किसानों ने जल संसाधन कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा. किसानों ने कहा कि फिंगेश्वर जल संसाधन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मॉनिटरिंग जरुर किया, लेकिन किसानों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया. जिसके चलते पानी की कमी से खेतों में अब दरारें आने लगी हैं. हमारी मांगे जल्द से जल्द पूरी की जाए ।
धान की फसल चौपट की कगार पर
आपको बता दें कि छुइहा गांव जो कि टेल एरिया में हैं. इस वजह से यहां के किसानों को अपनी फसल को बचाने के लिए हर बार पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ता है. वहीं पीड़ित किसानों ने बताया कि अभी रवि का फसल लगाये हुए हैं, जिसमें विगत 17 दिनों से पानी के अभाव में लगभग 200 एकड़ धान की फसल चौपट होने की कगार पर आ गई है ।
जल्द व्यवस्था की जाएगी-कलेक्टर
इस मामले में कलेक्टर ने कहा कि सिंचाई विभाग के अधिकारी से बात करके तुरंत मामले की जानकरी लेता हूं. अभी तो सिकासार से लगातार पानी दिया जा रहा है. किसानों को पानी की कोई दिक्कत ना हो इसकी व्यवस्था जल्द की जाएगी ।
दंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद राज्य में सक्रिय नक्सली संगठनों व सरकार के बीच शांति वार्ता की अटकलों के बीच नक्सलियों ने एक बार फिर अपना खूनी चेहरा दिखाया है। दंतेवाड़ा के भाजपा विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर नक्सलियों ने हमला कर उनकी जान ले ली।
यही नहीं, उनकी सुरक्षा में तैनात चार अन्य पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर नक्सलियों का क्रूर चेहरा सामने आ गया है। माना जा रहा है कि नक्सली अभी भी बातचीत के जरिए शांति के रास्ते पर आने के बजाय हिंसा पर उतारू हैं।
राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ये चर्चा अटकलों के साथ सामने आ रही थी कि राज्य सरकार व नक्सलियों के बीच शांति के लिए वार्ता होने की संभावना है। दरअसल इन चर्चाओं का आधार बस्तर से आई मीडिया रिपोर्ट की वजह से बनी थी।
बस्तर से ऐसी खबरें आई थीं कि नक्सलियों ने कुछ स्थानों पर पोस्टर लगाकर ये संदेश देने की कोशिश की कि वे सरकार के साथ बाचतीत को तैयार हैं। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा था कि ये बात उनके समक्ष मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से आई है। नक्सलियों ने सरकार से बातचीत के लिए कोई पेशकश नहीं की है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने फिर ये बयान दिया कि नक्सली अगर संविधान में विश्वास जताएं व हथियार छोड़कर आएं, तो उनके साथ बातचीत की जा सकती है। मुख्यमंत्री के इन दोनों बयानों के बाद नक्सलियों की ओर से न कोई बयान जारी किया गया, न किसी माध्यम से कोई संदेश दिया गया।
लिहाजा नक्सलियों से वार्ता की पहल केवल अटकल साबित हुई। नक्सली अगर शांति के रास्ते पर जाने की सोच रखते, तो एक चुने हुए जनप्रतिनिधि पर इस तरह का कायराना हमला नहीं करते।
पुलिस का खुफिया तंत्र फिर फेल
छत्तीसगढ़ में जब कभी नक्सली हमले की कोई बड़ी वारदात होती है, सबसे पहले यही सवाल सामने आता है कि पुलिस या उससे संबंधित खुफिया विभाग को नक्सलियों के आने-जाने या किसी प्रकार की गतिविधि की कोई जानकारी क्यों नहीं मिली। मंगलवार को हुई घटना के बाद भी यही सवाल सामने आ रहा है।
इससे पहले झीरम घाटी कांड से लेकर कई अन्य बड़े हमलों के दौरान भी ये बात सामने आई है कि नक्सलियों के बड़ी संख्या में जमा होने के बाद भी खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल पाती। कई अवसरों पर पुलिस व सरकार के उच्चाधिकारियों ने खुफिया तंत्र फेल होने की बात स्वीकार करते हुए इसमें सुधार करने की बात कही है, लेकिन क्या सुधार किया गया, यह पता नहीं लगता।
दूसरी ओर जानकार ये भी मानते हैं कि बस्तर दंतेवाड़ा के दूरदराज के इलाकों में पुलिस से लिए सूचनाएं एकत्र करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। दूसरी ओर नक्सलियों का अपना सूचना तंत्र है, जिसके माध्यम से वे पुलिस व सुरक्षा बलों की आवाजाही पर पूरी नजर रखे होते हैं। मौका मिलते ही हमला करते हैं।
झीरम घाटी कांड की याद हुई ताजा
बस्तर में एक और जनप्रतिनिधि की नक्सल हमले में मौत के साथ ही करीब 6 साल पहले हुए झीरम घाटी कांड की याद एक बार फिर ताजा हो गई। 2013 में राज्य विधानसभा चुनाव के कुछ महीना पहले तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के नेतृत्व में कांग्रेस की परिवर्तन रैली निकाली गई थी ।
इस रैली पर नक्सलियों ने भीषण हमला किया था। नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार, दिनेश पटेल सहित कई नेताओं तथा सुरक्षा कर्मियों सहित कई लोगों की मौत हो गई थी ।
दंतेवाड़ा । विधायक भीमा मंडावी का पार्थिव शरीर जिला भाजपा कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। जहां केदार कश्यप, प्रत्याशी बेदूराम कश्यप सहित कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ताओं ने उपस्थित होकर अपनी श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद विधायक मंडावी के पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन लाया गया। जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, डीएम अवस्थी ने श्रद्धांजलि दी। वहीं उनके अंतिम दर्शन देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा
दंतेवाड़ा । नक्सली हमले में शहीद बीजेपी विधायक भीमा मंडावी का अंतिम संस्कार आज किया जाएगा. भीमा मंडावी का पार्थिव शव भाजपा कार्यालय लाया गया है, जहां पर प्रदेश भर के भाजपाई अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
दंतेवाड़ा भाजपा कार्यालय में सबुह से ही भीड़ जुटने लगी है. अंतिम दर्शन को लोगों का उमड़ा हुजूम पड़ा है. पूर्व मंत्री केदार कश्यप भी पहुंच चुके हैं।
बतादें की दिवंगत मंडावी के अंतिम संस्कार में पूर्व सीएम रमन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, सौदान सिंह, अनिल जैन समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता मौजूद रहेंगे. इसके अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल रहेंगे।
मरवाही/रायपुर । मरवाही क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता चंद्रिका तिवारी की पुलिस की पिटाई मेंं मौत के बाद सियासी बवाल मच गया. इस मामले में सांसद लखन साहू के नेतृत्व भाजपाइयों ने मरवाही थाने के बाहर धरना दिया, प्रदर्शन किया. इधर मामले में बवाल मचते देख मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी ईलातालिश एक्का को हटा दिया गया. एसपी ने थाना प्रभारी को हटाते हुए पुलिल लाइन बिलासपुर अटैच कर दिया है.
देखिए धरना प्रदर्शन का वीडियो
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता चंद्रिका तिवारी की मौत पुलिस हिरासत में हुई है. मौत की वजह थाना प्रभारी की ओर से की गई मारपीट है. इस मामले में मरवाही थाना प्रभारी एक्का के खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है.
वहीं सांसद लखनलाल साहू ने चुनाव के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं में दहशत फैलाने के लये घटना को अंजाम दिया गया है. कोरबा लोकसभा के प्रभावशाली कांग्रेस नेताओं के दबाव में पुलिस काम कर रही है. उन्होंने मौत के लिए जिम्मेदार थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई मांग की है.
सुनिए क्या कह रहा है मृतक चंद्रिका तिवारी का बेटा
वहीं इस मामले में पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने सफाई देते हुए कहा कि जमानत के बाद हार्टअटैक से चंद्रिका की मौत हुई है. घटना में लापरवाही के चलते टीआई को लाइन अटैच किया गया. मृतक के परिवारवालों की शिकायत पर एसडीओपी के नेतृत्व में जांच समिति बनाई गई है. घटना के दौरान सीसीटीवी खराब थी ये जानकारी मिली है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी.
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा के कुआकोंडा में नक्सली ब्लास्ट में विधायक भीमा मंडावी की भी मौत हो गई है. मंडावी अपने काफिले के साथ जा रहे थे उसी दौरान नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर दिया. ब्लास्ट में जिस गाड़ी को नक्सलियों ने उड़ाया बताया जा रहा है उस गाड़ी में भीमा मंडावी भी बैठे थे. मंडावी के अलावा उनके पीएसओ सहित 5 जवान भी घटना में शहीद हो गए हैं. डीआईजी पी सुंदरराज ने मंडावी की मौत की पुष्टि की है ।
घटना कुआकोंडा थाना क्षेत्र के नकुलनार-बचेली शार्टकट मार्ग की है. विधायक अपने समर्थकों के साथ इस मार्ग से गुजर रहे थे उसी दौरान श्यामगिरी के पास नक्सलियों ने ब्लास्ट कर दिया. बताया जा रहा है कि ब्लास्ट इतना जबरदस्त था कि इसकी गूंज आस-पास के इलाके तक सुनाई दी. आज श्यामगिरी गांव में मेला था ।
दंतेवाड़ा । भूपेश सरकार में बस्तर से एकमात्र आदिवासी मंत्री कवासी लखमा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई सियासी टिप्पणी सुर्खियों में है. लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार में जुटे कवासी ने एक सभा में मोदी पर हमला बोलते हुए कहा है कि बैलाडीला की खदान बस्तर की है, यह मोदी के बाप की नहीं है. दरअसल बैलाडीला में अडानी ग्रुप को माइनिंग लीज दी गई है, जिसका बस्तर में खासा विरोध दर्ज कराया जा रहा है ।
यह पहला मौका नहीं है कि जब कवासी ने बैलाडीला में अडानी ग्रुप को दी गई माइनिंग लीज का विरोध किया हो. इससे पहले भी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लखमा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि बस्तर में अडानी को घुसने नहीं देंगे. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार उद्योग विरोधी नहीं है, लेकिन गरीब, आदिवासियों का नुकसान कर हम किसी उद्योग को लगाने नहीं देंगे. चुनाव प्रचार के दौरान भी कवासी अक्सर अडानी को दी गई माइनिंग लीज का मुद्दा उठा रहे हैं.
नशे में दिन-रात डूबे हैं कवासी- रामविचार नेताम
बीजेपी से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ बीजेपी नेता रामविचार नेताम ने कवासी लखमा के बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि वह जिस विभाग में काम कर रहे हैं, उस विभाग के नशे में दिन रात डूबे हुए हैं. देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह बयानबाजी बेहद निंदनीय है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को यह संज्ञान लेना चाहिए और अपने मातहत मंत्री कवासी लखमा को कम से कम समझाइश दी जानी चाहिए कि मंत्रीपद की गरिमा का ध्यान रखें. उन्हें यह हिदायत दी जानी चाहिए कि भाषा कैसी होनी चाहिए. अगर उन्हें इस गरिमा का ध्यान नहीं है, तो ऐसे मंत्री को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए. मैं कवासी लखमा के बयान की घोर निंदा करता हूं. नरेंद्र मोदी की छवि वैश्विक नेतृत्व वाली है. ऐसे नेतृत्व के बारे में बात करना अपने आप में बहुत शर्मनाक है ।
इधर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी मंत्री कवासी लखमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि- मंत्री की भाषा शिष्ट होनी चाहिए. सम्मानजनक होनी चाहिए. इससे पहले भी जो सरकारें काम करती रहीं और माइनिंग लीज का आबंटन करती रहीं, तो क्या वह कांग्रेस नेता के बाप की थी. यह देश की संपत्ति है, जनता की संपत्ति है ।
पिथौरा । प्रदेश में चल रही 108 एम्बुलेंस के एक चालक की लापरवाही ने एक नवजात का जीवन दुनिया में आते ही खतरे में डाल दिया है. अभी नवजात राजधानी के मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. 108 के जिला प्रभारी सूरज ने बताया कि शिकायत मिलते ही उक्त 108 को रायपुर तक भेज दिया गया था. अब उस लापरवाह स्टाफ पर भी आवश्यक कार्यवाही की जाएगी ।
घटना के सम्बंध में पिथौरा ब्लड डोनेशन ग्रुप के राजेश चौधरी एवं ग्राम लाहरौद के ग्रामीण विश्राम निषाद ने बताया कि विगत शनिवार को विश्राम की पत्नी तुलेश्वरी को प्रसव के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था. कल रविवार तक स्थानीय चिकित्सकों के प्रयाशों के बाद भी जब प्रसव में सफलता नहीं मिली, तब तुलस्वरी को तत्काल रायपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई. गरीब परिवार के विश्राम ने पूरा मामला स्थानीय ब्लड डोनेशन ग्रुप के राजेश चौधरी को दी. चौधरी ने तत्काल 108 की व्यवस्था करनी चाही, लेकिन पिथोरा की 108 रायपुर गई थी. गंभीर हालात को देखते हुए पटेवा की 108 उपलब्ध कराई गई. पटेवा 108 एम्बुलेंस में पदस्थ कर्मियों ने पहले तो पिथौरा पहुंचने के लिए एक घण्टा लगने की बात कही. इसके बाद चौधरी ने अस्पताल के पास ही खड़ी 102 एम्बुलेन्स से तुलेश्वरी को पटेवा तक ओर पटेवा से 108 द्वारा रायपुर तक ले जाने की सहमति बन गई ।
अब 102 के पटेवा पहुंचकर मरीज को 108 के सुपुर्द करने के बाद ही लापरवाही का सिलसिला प्रारम्भ हो गया. सबसे पहले पिथौरा से रायपुर स्थानांतरित मरीज को 108 कर्मियों ने पटेवा में ही उपचार की सलाह देकर पटेवा के अस्पताल में आधा घण्टा समय खराब कर दिया. इसके बाद अनमने ढंग से निकली 108 को उसके कर्मियों ने रायपुर ले जाने की बजाय आरंग शहर ले गए और उनके घर में काम की बात कह कर आरंग की एम्बुलेन्स में रायपुर भेजने के प्रयास करने लगे ।
इस बात की जानकारी चौधरी को होते ही उन्होंने तत्काल कलेक्टर महासमुंद एवं विधायक महासमुंद विनोद चन्द्राकर को घटना की जानकारी दी. जिस पर कलेक्टर और विधायक द्वारा तत्काल 108 के जिला प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए. 108 स्टाफ के उक्त हरकत से प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को रायपुर पहुंचने में एक घण्टा देर हो गई. प्रसव के बाद नवजात को आईसीयू में भर्ती किया गया है ।
जशपुर । जिला मुख्यालय से लगभग 60 किमी दूर कुंजारा एवं हल्दीमुंडा के बीच सौ मीटर का पुल बनाया जा रहा है, लेकिन यह पुल छह साल बाद भी नहीं बन पाया है. दरअसल, एक करोड़ 49 लाख 14 हजार की लागत से बनने वाला इस पुल का निर्माण कार्य 18 मार्च 2013 को प्रारंभ हुआ था, जिसे ठेकेदार को 31 मार्च 2016 को पूरा करना था. लेकिन ठेकेदार ने अधूरा निर्माण कर छोड़ दिया है ।
गौरतलब है कि अंग्रेजों के जमाने का यह पुल संकरा व जर्जर है. इसे देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने इस पुल के ठीक बगल में नया पुल का निर्माण पिछले छह वर्षों से कराया जा रहा है.पुराने पुल में वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर पार करते हैं. न चाहते हुए भी वाहन चालक इसको पार करने के लिए मजबूर है, इसके अलावा अन्य कोई विकल्प भी नहीं है. किसी व्यक्ति को यदि हल्दीमुण्डा, केरसई, सिंगीबहार, तपकरा एवं ओडिशा की ओर जाना है तो उसे इस पुल को पार करना मजबूरी है ।
निर्माण स्थल से हटा दिया साइन बोर्ड
छह साल पहले जब इस जगह पर पुल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था. उस दौरान वहा एक साइन बोर्ड लगाया गया था, जिसमें ठेकेदार का नाम, लागत, कार्य प्रारंभ और निर्माण कार्य पूर्ण होने की तारीख लिखी हुई थी. लेकिन कुछ समय बाद ही इस साईन बोर्ड को यहां से हटा दिया गया है. जिससे लोगों को यह जानकारी नहीं हो पाती है कि इस पुल का निर्माण कार्य कब पूरा होगा ।