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देवाधिदेव भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि पर्व इस बार महासंयोग लेकर आ रहा है। यह संयोग भक्तों के लिए विशेष फलदायी होने जा रहा है। इस दिन दोपहर 2:39 बजे त्रयोदशी और चतुर्दशी का मेल होगा और यही समय शिवरात्रि का श्रेष्ठ पुण्यकाल होगा। त्रयोदशी की उदया तिथि में शिवयोग तो प्रदोष व रात्रि में सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग होगा।
महाशिवरात्रि को कालरात्रि भी कहा गया है। सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान शिव का ब्रह्मा से रुद्र रूप में अवतरण हुआ। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे कालरात्रि कहा गया। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है। इस दिन ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जाएं चरम पर होती हैं। इसलिए शिवरात्रि को की गई पूजा-अर्चना, जप दान आदि का फल कई गुना होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 27 योग में से प्रतिदिन एक योग उपस्थित होता है। इन 27 योग में एक शिव योग भी है जिसे परमकल्याणकारी और भगवान शिव की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस बार महाशिवरात्रि के दिन शिव योग है जो दुर्लभ शुभ संयोग है। जलाभिषेक के अलावा शिव उपासना में बेलपत्र का विशेष महत्व है। तीन दलों से युक्त एक बिल्वपत्र जो भगवान शिव को अर्पित करते हैं तो यह हमारे तीन जन्मों के पापों का नाश करता है। दूध, चमेली, बेला और श्वेतार्क के पुष्प तथा श्वेत चंदन भगवान शिव को अर्पित करें। स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। मानसिक एकाग्रता के लिए दूध से एवं सर्वसिद्धि के लिए गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें।

panchayattantra24.com,रायपुर । मंगलवार हनुमान जी का बेहद प्रिय दिन है. इस दिन जो भी लोग हनुमान जी का पूजन करते हैं तो वो कुंडली से शनि के बुरे प्रभाव को कम कर देते हैं और जीवन में सुख-शान्ति लाते हैं ।
इसके अलावा मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा कर कुंडली के दोषों से भी मुक्ति पाई जा सकती है. लेकिन यहीं अगर मंगलवार को कुछ गलतियां कर दी जाएं तो वो आपके सभी बने बनाए काम बिगड़ सकते है ।
मनोबल बढ़ाती है हनुमान चालीसा
प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ने से पवित्रता की भावना का विकास होता है और मनोबल बढ़ता है. मनोबल ऊंचा रहेगा तो सभी संकटों से मुक्ति मिलेगी. हनुमान चालीसा की एक पंक्ति हैं- अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, असवर दिन जानकी माता ।
अकारण भय व तनाव मिटता है (आपके पास हैं सिर्फ 10 मिनट… तो जरूर सुने ये बेहद प्यारा भजन)
हनुमान चालीसा में एक पंक्ति है- भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे.. या सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना.. यह चौपाई मन में अकारण भय को समाप्त कर देती है. हनुमान चालीसा का पाठ आपको भय और तनाव से छुटकारा दिलाने में बेहद कारगर है ।
क्या करें-क्या न करें (हनुमान चालीसा सुनने यहां क्लिक करें)
लोगों में ऐसी मानता है कि मंगलवार को अपने बाल व नाखून ना काटे.
मंगलवार के धार वाली चीजे ना खरीदे मतलब चाकू, कैंची आदि ।
मंगलवार के दिन दक्षिण दिशा में कोई भी धार वाली चीज ना रखें, कैंची अथवा चाकू.
मंगलवार के दिन रसोई घर खाना बनाते समय रोटी या सब्जी को जलने ना दे.
सबसे महत्वपूर्ण बात मंगलवार के दिन किसी भी प्रकार का मांसाहार घर में न पकाएं.
मंगलवार के दिन हनुमान जी को गुड़ का भोग लगाएं और लाल गाय को खिलाएं.
मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाएं और मूर्ति पर चमेली के तेल का दीपक करें.
मंगलवार के दिन अगर हो तो लाल रंग का रूमाल अपनी जेब में रखें.
मंगलवार के दिन किसी गरीब मजदूर को चाय पिलाएं और खाना खिलाएं.
इस दिन कोशिश करें गरीब लोगो और बालकों में मिठाई बाटें ।

panchayattantra24.com, साल में आने वाली दो मुख्य नवरात्रि चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि के बारे में तो हर कोई जानता है लेकिन इसके अलावा तीन और नवरात्रि मनाई जाती हैं. ये हैं पौष गुप्त नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, और माघ गुप्त नवरात्रि. माघ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को माघ गुप्त नवरात्रि कहते हैं. इस बार माघ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत 12 फरवरी से यानी आज से हुई है. इस नवरात्रि को शिशिर नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है।
नवरात्रि के महाप्रयोग
एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां की मूर्ति या प्रतिकृति की स्थापना करें. मां के समक्ष एक बड़ा घी का एकमुखी दीपक जलाएं. सुबह और शाम मां के विशिष्ट मंत्र का 108 बार जप करें. मंत्र होगा – “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे.” तंत्र मंत्र की साधना करने वाले लोग माघ गुप्त नवरात्रि में आधी रात में मां दुर्गा की पूजा करते हैं।
जाने इस शुभ योग के बारे में
इस बार नवरात्रि पर बहुत ही शुभ योग बन रहे हैं. सर्वार्थसिद्धियो, त्रिुपष्कर अमृतसिद्धि और राजयोग रहेंगे. इन दस दिनों में एक तरफ मां की पूजा अर्चना विशेष फलदायी रहेगी, वहीं इन दिनों में इन शुभ योगों के कारण कोई भी मंगलकार्य शुरू हो सकते हैं. इसके अलावा इन 10 दिनों में भवन, वाहन आदि की खरीददारी भी शुभ रहेगी।
जाने कुछ खास उपाय
धन संबंधी परेशानी के लिए
नवरात्रि के प्रथम दिन कन्याओं को सुगंधित और ताजा फूल भेंट में देना शुभ होता है. इसके साथ ही, कोई श्रृंगार सामग्री भी अवश्य दें
मां को प्रसन्न करने के लिए
आप मां को प्रसन्न करना चाहते है तो सफेद वस्त्र छोटी कन्याओं को दें।
कार्यों में सफलता के लिए
अगर कार्यों में सफलता पाना चाहते हैं तो लाल वस्त्र छोटी कन्याओं को दें।
बच्चों की उन्नति के लिए
प्रथम दिन मां को प्रसन्न करने के लिए श्वेत फूल अर्पित करें।
भौतिक कामना के लिए
अगर आपके दिल में कोई भौतिक कामना है तो गुलाब, चंपा, मोगरा, गेंदा, गुड़हल पुष्प अर्पित कर खुश करें।
स्वास्थ्य के लिए
पहले दिन देवी के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का वरदान मिलता है जिससे शरीर निरोगी रहता है।
पंचायत तंत्र – एक बार देवी पार्वती ने देवों के देव महादेव से पूछा, ऐसा क्यों है कि आप अजर-अमर हैं लेकिन मुझे हर जन्म के बाद नए स्वरूप में आकर, फिर से बरसों तप के बाद आपको प्राप्त करना होता है? आपके अमर होने के रहस्य क्या हैं? महादेव ने पहले तो देवी पार्वती के उन सवालों का जवाब देना उचित नहीं समझा, लेकिन पार्वती के हठ के कारण कुछ गूढ़ रहस्य उन्हें बताने पड़े।
शिव महापुराण में मृत्यु से लेकर अजर-अमर तक के कई प्रसंग हैं, जिनमें एक साधना से जुड़ी अमरकथा बड़ी रोचक है। जिसे भक्तजन अमरत्व की कथा के रूप में जानते हैं। हर वर्ष हिम के आलय (हिमालय) में अमरनाथ, कैलाश और मानसरोवर तीर्थस्थलों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सैकड़ों किमी की पैदल यात्रा करते हैं, क्यों? यह विश्वास यूं ही नहीं उपजा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ की गुफा ही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने पार्वती को अमर होने के गुप्त रहस्य बतलाए थे, उस दौरान उन दो ज्योतियों के अलावा कोई तीसरा प्राणी वहां नहीं था। न महादेव का नंदी और न हीं उनका नाग, न सिर पे गंगा और न ही गणपति या फिर कार्तिकेय…!
गुप्त स्थान की तलाश में महादेव ने अपने वाहन नंदी को सबसे पहले छोड़ा, नंदी जिस जगह पर छूटा, उसे ही पहलगाम कहा जाने लगा। अमरनाथ यात्रा यहीं से शुरू होती है। यहां से थोड़ा आगे चलने पर शिवजी ने अपनी जटाओं से चंद्रमा को अलग कर दिया, जिस जगह ऐसा किया वह चंदनवाड़ी कहलाती है। इसके बाद गंगा जी को पंचतरणी में और कंठाभूषण सर्पों को शेषनाग पर छोड़ दिया, इस प्रकार इस पड़ाव का नाम शेषनाग पड़ा।
अमरनाथ यात्रा में पहलगाम के बाद अगला पड़ाव है गणेश टॉप। मान्यता है कि शिव ने एकांत की तलाश में इसी स्थान पर अपने पुत्र गणेश को छोड़ा था। इस जगह को महागुणा का पर्वत भी कहते हैं। इससे आगे महादेव ने पिस्सू नामक कीड़े को भी त्यागा था। जहां पिस्सू को त्यागा था, उस जगह को पिस्सू घाटी कहा जाता है।
इस प्रकार महादेव ने अपने पीछे जीवनदायिनी पांचों तत्वों को स्वंय से अलग किया। इसके पश्चात पार्वती संग एक गुफा में महादेव ने प्रवेश किया। कोई तीसरा प्राणी, यानी कोई कोई व्यक्ति, पशु या पक्षी गुफा के अंदर घुसकर कथा को न सुन सके इसलिए उन्होंने चारों ओर अग्नि प्रज्जवलित कर दी। फिर महादेव ने जीवन के गूढ़ रहस्य की कथा शुरू कर दी।
कहा जाता है कि कथा सुनते-सुनते देवी पार्वती को नींद आ गई। महादेव को यह पता नहीं चला, वह सुनाते रहे। उस समय दो सफेद कबूतर कथा सुन रहे थे और बीचबीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। महादेव को लगा कि पार्वती सुन रही हैं। दोनों कबूतर सुनते रहे। कथा समाप्त होने पर महादेव का ध्यान पार्वती पर गया तो उन्हें पता चला कि वे तो सो रही हैं। तो कथा सुन कौन रहा था?
उनकी दृष्टि तब उन कबूतरों पर पड़ी तो महादेव को क्रोध आ गया। वहीं कबूतर का जोड़ा उनकी शरण में आ गया और बोला, भगवन् हमने आपसे अमरकथा सुनी है। यदि आप हमें मार देंगे तो यह कथा झूठी हो जाएगी। इस पर महादेव ने उन्हें वर दिया कि तुम सदैव इस स्थान पर शिव व पार्वती के प्रतीक की तरह निवास करोगे।
अंततः कबूतर का यह जोड़ा अमर हो गया और यह गुफा अमरकथा की साक्षी हो गई। इस तरह इस स्थान का नाम अमरनाथ पड़ा। मान्यता है कि आज भी इन दो कबूतरों के दर्शन भक्तों को होते हैं। यहां हर वर्ष इन्हीं दिनों निर्मित होने वाला शिवलिंग किसी आश्चर्य से कम नहीं है।
पंचायत तंत्र – हर महीने की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को समर्पित गणेश चतुर्थी व्रत किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत 2 जनवरी 2021, शनिवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने से व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और बिगड़े काम बन जाते हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व-
कहा जाता है कि अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत करने वालों के सभी संकट दूर हो जाते हैं। भगवान गणेश के आशीर्वाद से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने वालों हर भगवान गणेश की कृपा सदैव बनी रहती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से कुंडली और विवाह से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं। जिन लोगों को शिक्षा से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें भी भगवान गणेश को समर्पित इस व्रत को रखने की सलाह दी जाती है।
संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त-
सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त – सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक।
शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त – शाम 5 बजकर 36 मिनट से शाम 6 बजकर 58 मिनट तक।
संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि-
1. सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।
2. एक चौकी लें। उस पर गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। अब पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा विराजित करें।
3. धूप, दीप और अगरबत्ती और फूल-माला भगवान को अर्पित करें।
4. भगवान को दूर्वा अतिप्रिय है। इसलिए संभव हो तो भगवान को दूर्वा अर्पित करें।
5. गणेश चालीसा, गणेश स्तुति और गणेश स्तोत्र का पाठ करें। गणेश मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
6. इसके बाद भगवान गणेश की आरती उतारें।
7. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करें।
पंचायत तंत्र – मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। ऐसा कहाजाता है कि इस दिन ही कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इसलिए मोक्ष की प्राप्ति के लिए इस व्रत को सबसे पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन से गीता-पाठ का अनुष्ठान प्रारंभ करें।कहा जाता है कि इस व्रत को रखना वाला जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मुक्ति प्रदान कर समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है।
मोक्षदा एकादशी व्रत मुहूर्त-
* एकादशी तिथि प्रारंभ- 24 दिसंबर की रात 11 बजकर 17 मिनट से
* एकादशी तिथि समाप्त- 25 दिसंबर को देर रात 1 बजकर 54 मिनट तक
व्रत में इन बातों का ध्यान रखें।
* पूजा में तुलसी के पत्तों को अवश्य शामिल करें।
* सुबह स्नान करके भगवान को गंगागल से स्नान कराएं।
* भगवान को रोली, चंदन, अक्षत आदि अर्पित करें।
* रात्रि में भगवान श्रीहरि का भजन-कीर्तन करें।
* द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें।
* मोक्षदा एकादशी से एक दिन पहले दशमी के दिन सात्विक भोजन करना चाहिए।
पंचायत तंत्र – मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। मोक्षदा एकादशी का यह पावन व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। इस व्रत का लाभ व्रती के साथ उनके पितरों को भी प्राप्त होता है। मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। एकादशी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है।
मान्यता है कि इस उपवास से उत्तम और मोक्ष प्रदान करने वाला कोई दूसरा व्रत नहीं है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्रती और उसके पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। व्रत कथा को श्रवण व पाठन करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। इस उपवास को करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भगवान श्रीहरि विष्णु के निमित्त यह उपवास पूर्ण निष्ठा व श्रद्धा से करना चाहिए। मोक्षदा एकादशी पापों के बंधन से मुक्त कराती है। इस दिन पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। भगवान को गंगागल से स्नान कराएं। मोक्षदा एकादशी के दिन सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की आरती करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। इस दिन पीले फूलों से भगवान का शृंगार करें और उनको भोग लगाएं। मोक्षदा एकादशी पर उपवास रखकर श्रीहरि के नाम का संकीर्तन करते हुए रात्रि में जागरण करें। यह व्रत रोग, दरिद्रता, तनाव और कलह का नाश करता है।

panchayattantra24.com,साल 2020 ने सभी को न दिखने वाले ऐसे कुछ जख्म दिए है तो उन्हें शादी ताउम्र याद रहेंगे. लेकिन इस साल आप जो भी शुभ कार्य न कर पाएं हो उसके लिए अब नए वर्ष यानी 2021 आपके लिए कई शुभ घड़ियां लेकर आया है, जिसमें पूरे साल आप जनवरी से दिसंबर तक शुभ कार्य कर सकते है ।
ज्योतिष के अनुसार इस दिन में आप आप गृह प्रवेश, नया बिजनेस, स्टार्टअप, नई जॉब, जमीन या घर लेने के बारे में सोच रहे हैं ये दिन आपके लिए शुभ हो सकते है ।
जनवरी- 5 जनवरी, 6 जनवरी, 8 जनवरी, 14 जनवरी, 17 जनवरी, 26 जनवरी और 30 जनवरी सबसे शुभ तिथियां हैं. आप दुकान या मकान से जुड़े किसी भी शुभ कार्यों को इन तिथियों पर कर सकते हैं ।
फरवरी- दूसरे महीने फरवरी में 12 फरवरी, 14 फरवरी, 16 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी और 28 फरवरी सबसे शुभ तारीखें होंगी. घर में हवन, पूजन या गृह प्रवेश से जुड़े कार्य इन तारीखों पर करना उत्तम रहेगा ।
मार्च- तीसरे महीने मार्च में 8 मार्च, 9 मार्च, 14 मार्च, 20 मार्च, 21 मार्च, 24 मार्च और 26 मार्च सबसे शुभ दिन रहने वाला है. इनमें से किसी भी तारीख पर आप किसी भी तरह के शुभ कार्य संपन्न कर सकते हैं ।
अप्रैल – ज्योतिषियों के मुताबिक, 2021 के चौथे महीने अप्रैल में केवल तीन शुभ तिथियां ही होगीं. आप 1 अप्रैल, 11 अप्रैल या 20 अप्रैल को किसी भी तरह का शुभ कार्य निपटा सकते हैं ।
मई- पांचवें महीने में 6 मई, 8 मई, 10 मई, 12 मई, 16 मई, 18 मई, 20 मई, 21 मई और 30 मई सबसे शुभ दिन होंगे. जमीन या प्रॉपर्टी संबंधित समझौते करने के लिए ये तारीखें बेहद शुभ साबित होंगी ।
जून- छठे महीने में 2 जून, 3 जून, 10 जून, 12 जून, 15 जून, 16 जून, 21 जून, 22 जून, 25 जून और 27 जून भी शुभ तारीख हैं. वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स या घर का कोई कीमती सामान खरीदने के लिए ये एकदम सही समय रहेगा ।
जुलाई- इसी तरह सातवें महीने में 3 जुलाई, 4 जुलाई, 13 जुलाई, 25 जुलाई, 20 जुलाई, 22 जुलाई, 25 जुलाई, 26 जुलाई और 31 जुलाई सबसे शुभ तारीखें होंगी ।
अगस्त – इसके अलावा सातवें महीने में 6 अगस्त, 7 अगस्त, 8 अगस्त, 9 अगस्त, 12 अगस्त, 16 अगस्त, 20 अगस्त, 27 अगस्त और 28 अगस्त भी सबसे शुभ तारीखें हैं. इन तारीखों पर आप किसी भी तरह का शुभ कार्य कर सकते हैं ।
सितंबर- आठवें महीने में 2 सितंबर, 4 सितंबर, 8 सितंबर, 13 सितंबर, 14 सितंबर, 17 सितंबर, 19 सितंबर, 20 सितंबर, 22 सितंबर, 25 सितंबर, 26 सितंबर और 29 सितंबर भी शुभ कार्यों को निपटाने के लिए एकदम सही तारीख हैं ।
अक्टूबर- के महीने में 1 अक्टूबर, 9 अक्टूबर, 10 अक्टूबर, 12 अक्टूबर, 14 अक्टूबर, 15 अक्टूबर, 18 अक्टूबर, 21 अक्टूबर, 23 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 26 अक्टूबर सबसे शुभ तारीखें होंगी ।
नवंबर- साल के 11वें महीने में 2 नवंबर, 8 नवंबर, 10 नवंबर, 11 नवंबर, 12 नवंबर, 20 नवंबर, 22 नवंबर 23 नवंबर, 24 नवंबर और 26 नवंबर सबसे शुभ तारीख होंगी. शादी-विवाह के मामले में ये तिथियां सबसे शुभ रहेंगी ।
दिसंबर- 2021 के आखिरी महीने में 4 दिसंबर, 5 दिसंबर, 10 दिसंबर, 13 दिसंबर, 15 दिसंबर, 18 दिसंबर, 19 दिसंबर, 22 दिसंबर, 25 दिसंबर और 31 दिसंबर सबसे शुभ दिन रहेंगे ।

पंचायत तंत्र 24.com, देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी है. मान्यता है कि माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर पूजन-अर्चन करने से आर्थिक संकट समाप्त हो जाता है. खासकर शुक्रवार को यहां जाना चाहिए. महालक्ष्मी और लक्ष्मी के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है ।
पद्मावती का मंदिर : तिरुपति के पास तिरुचुरा नामक एक छोटा-सा गांव है. इस गांव में देवी पद्मावती का सुंदर मंदिर है. यह मंदिर ‘अलमेलमंगापुरम’ के नाम से भी जाना जाता है. लोक मान्यता है कि तिरुपति बालाजी के मंदिर में मांगी मुराद तभी पूरी होती है, जब श्रद्धालु बालाजी के साथ-साथ देवी पद्मावती का आशीर्वाद भी ले लें ।
दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर : भारतीय राज्य तमिलनाडु के जिले वेल्लू में स्थित थिरुमलई कोड गांव श्रीपुरम में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को ‘दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर’ कहा जाता है. 100 एकड़ में फैला यह मंदिर चेन्नई से 145 किलोमीटर दूर पलार नदी के किनारे स्थित है ।
पद्मनाभस्वामी मंदिर : पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुअनंतपुरम् में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है, लेकिन यहां से अपार मात्रा में ‘लक्ष्मी’ की प्राप्ति हुई थी. यह मंदिर अपने सोने के खजाने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. भगवान विष्णु को समर्पित पद्मनाम मंदिर को त्रावणकोर के राजाओं ने बनाया था. इसका जिक्र 9वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है, लेकिन मंदिर के मौजूदा स्वरूप को 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था ।
मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर : समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित यह मंदिर अत्यंत सुंदर, आकर्षक और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. ज्ञात इतिहास के अनुसार इस महालक्ष्मी मंदिर की स्थापना अंग्रेजों के काल में हुई. उस समय देवी लक्ष्मी एक ठेकेदार रामजी शिवाजी के स्वप्न में प्रकट हुईं और उन्हें समुद्र तल से देवियों की 3 प्रतिमाएं निकालकर मंदिर में स्थापित करने का आदेश दिया. मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती तीनों देवियों की प्रतिमाएं एकसाथ विद्यमान हैं ।
कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर : कोल्हापुर महाराष्ट्र का एक जिला है. कहा जाता है कि यहां स्थित महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण चालुक्य शासक कर्णदेव ने 7वीं शताब्दी में करवाया था. इसके बाद शिलहार यादव ने 9वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण करवाया था. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में देवी महालक्ष्मी की लगभग 40 किलो की प्रतिमा स्थापित है जिसकी लंबाई लगभग 4 फीट की है. कहा जाता है कि यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7,000 साल पुरानी है ।
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कुछ अचूक टोटके…
लक्ष्मीनारायण मंदिर : दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक लक्ष्मीनारायण मंदिर को मूल रूप में 1622 में वीरसिंह देव ने बनवाया था, उसके बाद पृथ्वीसिंह ने 1793 में इसका जीर्णोद्धार कराया. इसके बाद सन् 1938 में भारत के बड़े औद्योगिक परिवार बिड़ला समूह ने इसका विस्तार और पुनरुद्धार कराया जिसके बाद इसे बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है ।
इंदौर का महालक्ष्मी मंदिर : इंदौर शहर के हृदयस्थल राजवाड़ा की शान कहे जाने वाले श्री महालक्ष्मी मंदिर के संबंध में कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1832 में मल्हारराव (द्वितीय) ने कराया था. 1933 में यह 3 तलों वाला मंदिर था, जो आग के कारण तहस-नहस हो गया था. 1942 में मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार कराया गया था. वर्तमान में मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करके इसे भव्य रूप दिया गया है ।
चौरासी मंदिर : यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के चंबा से 65 किलोमीटर दूर भरमौर जिला नगर में स्थित है. यहां महालक्ष्मी के साथ गणेशजी और नरसिंह भगवान की मूर्ति भी स्थित है. प्राकृतिक वादियों में बसा यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है ।
चंबा का लक्ष्मीनारायण का मंदिर : हिमाचल के चंबा में स्थित यह मंदिर पारंपरिक वास्तुकारी और मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण है. चंबा के 6 प्रमुख मंदिरों में यह मंदिर सबसे विशाल और प्राचीन है. भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर राजा साहिल वर्मन ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था. यह मंदिर शिखर शैली में निर्मित है ।
अष्टलक्ष्मी मंदिर : चेन्नई के इलियट समुद्र तट के पास स्थित यह मंदिर लगभग 65 फीट लम्बा और 45 फीट चौड़ा है. मंदिर में देवी लक्ष्मी के आठ स्वरूप 4 मंजिल में बने 8 अलग-अलग कमरों में स्थापित है. इस मंदिर में देवी लक्ष्मी अपने पति और भगवान विष्णु के साथ मंदिर की दूसरी मंजिल में विराजित है ।

पंचायत तंत्र 24.com,इस साल दिवाली से सात दिन पहले पुष्य नक्षत्र का योग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह पुष्य नक्षत्र 7 नवंबर शनिवार से शुरू होकर 24 घंटे 72 मिनट तक रहेगा। शनिवार को सुबह 8:05 बजे से पुष्य नक्षत्र का आरंभ होगा, जो कि रविवार को सुबह 8:05 बजे तक रहेगा। इस दौरान सभी तरह की खरीदारी को शुभ माना गया है। यानी दिवाली से पहले पूरे दो दिन, शनिवार और रविवार खरीदी के लिए मिलेंगे। यूं तो पुष्य नक्षत्र सभी के लिए शुभ है, लेकिन इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो लक्ष्मीजी प्रसन्न होती है। जानिए इन्हीं सावधानियों के बारे में
पुष्य नक्षत्र के दौरान क्या करें और क्या न करें
पुष्य नक्षत्र के दौरान सोने चांदी के आभूषण के साथ ही प्रॉपर्टी खरीदना शुभ माना गया है। साथ ही वाहन खरीदने के लिए इस दिन कोई मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है। इस दिन कोई नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं और नई नौकरी भी ज्वाइन कर सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन शंख मोती को अपनी दुकान में रखने से बरकत बनी रहती है। इसी तरह भगवान विष्णु की उपासना करने और दुकान या घर में श्रीयंत्र की पूजा करना भी शुभ है। इस दिन काला कपड़ा नहीं पहनना चाहिए। जहां तक संभव हो कोई भी काले रंग की चीज नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन सभी तरह की बुराइयों से दूर रहें।
इस दिन मानसिक शांति के लिए भी उपाय किए जाते हैं। हर राशि के लिए ज्योतिष में अलग अलग उपाय सुझाए गए हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनि शुभ भाव के स्वामी के रूप में हों, उनको नीलम धारण करने से बहुत लाभ होता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और पति पत्नी के बीच विवाद नहीं होता है।
इस दिन जन्में बच्चे प्रतिभावान और किस्मतवाले होते हैं। पुराणों तथा ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्मा जातक महान कर्म करने वाला, बलवान, कृपालु, धार्मिक, धनी, विविध कलाओं का ज्ञाता, दयालु और सत्यवादी होता है।