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Author: admin

panchayattantra24.-दुर्ग। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना पर आज दुर्ग के वृन्दावन होटल में एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों और किसानों के बीच इन योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना था, ताकि वे सौर उर्जा का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन सके। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव ने योजनाओं की महत्ता को बताते हुए आम
नागरिकों, किसानों, ऊर्जा उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम एवं सौर ऊर्जा आधारित कृषि पंप जैसी पहलों के लिए प्रोत्साहित किया। मंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि एवं भारत देश के नागरिकों को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा स्वच्छ एवं सस्ती हरित बिजली उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का शुभारंभ फरवरी 2024 में किया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत आवासीय भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता न सिर्फ अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन करके उसे ग्रिड में बेचकर आर्थिक लाभ भी कमा सकते हैं। मंत्री श्री यादव ने कहा अब देश के नागरिक उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक बन सकते हैं। देश का हर नागरिक ऊर्जा क्षेत्र मं आत्मनिर्भर बने और पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बने। मंत्री श्री यादव ने किसानों के हित में चल रही पीएम-कुसुम योजना की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह योजना विशेष रूप से किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे वे बिजली से चलने वाले पंपों की जगह सोलर पंप का उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा जो किसान परंपरागत खेती के लिए ट्यूबवेल आदि का उपयोग करते हैं, वे अब सौर ऊर्जा के माध्यम से खेती कर सकते हैं। यह न केवल उनके खर्चों को घटाएगा, बल्कि उन्हें ऊर्जा उत्पादक भी बनाएगा।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाई गई हर योजना जनहित और राष्ट्रहित की मूल भावना से प्रेरित होती है। बघेल ने कहा कि जहां एक ओर कृषि भूमि का दायरा घट रहा है, तो वहीं जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हो रही है। इसके परिणामस्वरूप देश प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, जल संकट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, एक स्थायी समाधान बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा भगवान सूर्य से प्राप्त ऊर्जा असीम है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस शक्ति को पहचाना और इसी को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा आधारित योजनाएं शुरू कीं। इन योजनाओं से हमें मुफ्त बिजली भी मिलेगी और आमदनी भी बढ़ेगी। इस दौरान सांसद विजय बघेल एवं विधायक ललित चंद्राकर ने सूर्य रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि भारत आज ग्रीन (हरित) ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है और इसका श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है, जिन्होंने ऊर्जा के क्षेत्र में दूरदृष्टि का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह से सूर्य की शक्ति को ऊर्जा में बदलने पर जोर दे रहे हैं, उसका देशभर में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। आज देश के हजारों लोग अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली के उत्पादक और उपभोक्ता दोनों बन चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान सांसद श्री बघेल ने पीएम सूर्यघर योजना के 10 लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और पीएम कुसुम योजना के 08 लाभार्थियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान इन योजनाओं के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए दिया गया। इसके उपरांत जीआईजेड इंडिया के प्रतिनिधि निलांजन घोष द्वारा प्रतिभागियों को योजनाओं से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही प्रश्न-उत्तर का भी आयोजन किया गया, जिससे लाभार्थियों और इच्छुक लोगों को अपने संदेह दूर करने का अवसर मिला। इस अवसर पर सीएसपीडीसीएल निदेशक आर.ए.पाठक, कार्यपालक निर्देशक एस.के.गजपाल, मुख्य अभियंता संजय खंडेवाल, नागार्जुन बिम्बिसार अधीक्षण अभियंता आर एंड पीएम, अतिरिक्त मुख्य अभियंता एच.के.मेश्राम, कार्यपालक निदेशक राजनांदगांव शिरीष शैलेट, अधीक्षण अभियंता एस मनोज, आर के मिश्रा एवं जे जगन्नाथ प्रसाद एवं विद्युत विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सहित जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

panchayattantra24.-महासमुंद। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल 23 सितम्बर को महासमुंद जिले के दौरे पर रहेंगें। निर्धारित कार्यक्रम अनुसार वे 10ः30 बजे नवा रायपुर से ग्राम खट्टी महासमुंद के लिए प्रस्थान करेंगे। तत्पश्चात प्रातः 11ः30 बजे वे ग्राम खट्टी में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे तथा दोपहर 02ः00 बजे नवा रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।

panchayattantra24.-रायपुर। राज्य हाऊसिंग बोर्ड ने शांति नगर, और बीआईटी आवासीय-व्यावसयिक योजना का डीपीआर तैयार कर लिया है। बताया गया कि इस पूरी योजना का क्रियान्वयन निजी भागीदारी से होगा। खास बात ये है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल पूरी योजना से असहमत हैं, और वो इस मसले पर सीएम विष्णुदेव साय से चर्चा कर सकते हैं। अग्रवाल ने शांति नगर और बीआईटी मैदान पर किसी तरह आवासीय और व्यावसायिक निर्माण का विरोध किया है। उन्होंने दोनों जगहों पर आक्सीजोन, या खेल मैदान बनाने का सुझाव दिया है। रायपुर सांसद ने इस सिलसिले में सीएम विष्णु देव साय, और आवास पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी को चिट्ठी भी लिखी थी। बताया गया कि बृजमोहन के पत्र पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि अग्रवाल इस मसले पर सीएम विष्णुदेव साय से चर्चा करने वाले हैं। इससे परे राज्य हाऊसिंग बोर्ड ने दोनों ही योजना का डीपीआर तैयार कर राज्य शासन को भेज दिया है।
राज्य हाऊसिंग बोर्ड के आयुक्त अवनीश शरण ने कहा कि शांति नगर-बीआईटी योजना का डीपीआर तैयार कर राज्य शासन को भेज दिया गया है। इस पर सीएस की कमेटी विचार करेगी, और इसकी मंजूरी के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक दोनों ही योजना का क्रियान्वयन निजी भागीदारी से करने का फैसला लिया गया है। इसमें आवासीय, विद्यालय और व्यावसायिक निर्माण किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक दोनों ही योजना करीब 2 हजार करोड़ के आसपास की है।

panchayattantra24.-जगदलपुर. मणिपुर में हुए उग्रवादी हमले में बस्तर का लाल रंजीत सिंह कश्यप शहीद हो गया. आज शहीद रंजीत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गृहग्राम गांव बालेंगा पहुंचा. पूरा गांव शहीद की अंतिम यात्रा का साक्षी बना. इस दौरान गांव की गलियां शहीद रंजीत अमर रहे के नारों से गूंज उठीं. हर आंख नम थी, हर दिल गर्व और गम के मिले-जुले भाव से भरा हुआ था.
मंत्री केदार कश्यप, स्थानीय विधायक लखेश्वर बघेल, कलेक्टर हरीश एस और एसपी शलभ सिन्हा सहित प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने भी गांव पहुंचकर शहीद रंजीत सिंह कश्यप को श्रद्धांजलि दी. दरअसल 19 सितंबर को मणिपुर के विष्णुपुर जिले में 33 असम राइफल्स के काफिले पर हमला हुआ था. उसी हमले में रंजीत ने अपने प्राणों की आहुति दे दी. 2016 में असम राइफल्स से जुड़ने वाले रंजीत अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे. परिवार में उनकी पत्नी और तीन बेटियां हैं, जिनमें से सबसे छोटी मासूम अभी केवल चार महीने की है.
पिछले महीने ही रंजीत घर आए थे. उन्होंने पत्नी से वादा किया था कि अगली बार लंबी छुट्टी में आएंगे और बेटी का नामकरण करेंगे, लेकिन वो लौटे भी तो तिरंगे में लिपटे हुए. गांव वालों के मुताबिक रंजीत बचपन से ही बेहद मिलनसार और मददगार थे. देश सेवा का जज्बा उनमें हमेशा से था.
panchayattantra24.-कवर्धा। कवर्धा में बीते दिन दुर्गा माता पंडाल को लेकर दो समुदाय के बीच जमकर विवाद हुआ. इस मामले में गृह मंत्री विजय शर्मा मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशासन ने दोनों पक्षों से बैठकर बातचीत की है. कुछ लोगों द्वारा व्यवस्था तोड़कर पंडाल को हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन शासन ने निर्णय लिया है कि माता वही विराजेंगी, जहां पहले विराजती थीं. यह स्थल पिछले कई वर्षों से माता के पूजन का केंद्र रहा है. दरअसल, कामठी गांव के जब शिव मंदिर परिसर में दुर्गा माता की मूर्ति स्थापना को लेकर हिंदू समाज और गोंडवाना समाज के बीच कई बार विवाद खड़ा हो चुका है. इस साल भी पंडाल लगाने को लेकर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई. गोंडवाना पार्टी के समर्थकों ने पंडाल उखाड़कर फेंक दिया और मंदिर की बाउंड्रीवाल पर ताला जड़ दिया, जिसके बाद दुर्गा समिति के लोग विरोध में जुटे, और पुलिस के साथ झूमाझटकी हो गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए.
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कलेक्टर, एसपी और अन्य अधिकारियों की अगुवाई में भारी पुलिस बल तैनात किया. कलेक्टर गोपाल वर्मा ने आश्वासन दिया कि परंपरा के अनुसार दुर्गा स्थापना की जाएगी, जबकि एसपी धर्मेंद्र छवई ने हिंदू समाज को यह भरोसा दिलाया कि किसी को इस धार्मिक आयोजन को रोकने नहीं दिया जाएगा. यह विवाद पहले भी हुआ था, क्योंकि गोंडवाना पार्टी समर्थक इसे अपनी जमीन मानते हैं, जबकि हिंदू समाज का कहना है कि सालों से यहां धार्मिक आयोजन होते आ रहे हैं.
गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों के द्वारा भेजे गए पत्र पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “मायावादियों द्वारा भेजे गए पत्र के बाद एक और पत्र आया. उनकी पुरानी परंपरा से हम वाकिफ हैं. नक्सलियों से अपील है कि सिविलियन किलिंग बंद करें.” विजय शर्मा ने यह भी कहा कि जहां-जहां आईडी बिछाए गए हैं, वहां से नक्सली उठाए जाएं या फिर किसी नजदीकी कैंप में सूचना भेजें. “जनता, जानवर और जवानों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आईडी खत्म होनी चाहिए,” उन्होंने कहा. डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि अगर नक्सली ऐसा कदम उठाते हैं, तो उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी.
रिश्तेदारों के बीच जमीन बंटवारे में रजिस्ट्री शुल्क माफ़, बड़ी राहत
panchayattantra24.-रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूमि रजिस्ट्री की पुरानी व्यवस्था बेहद जटिल और समय लेने वाली थी। एक साधारण रजिस्ट्री कराने में नागरिकों को कई-कई दिन दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। फाइलें हफ्तों तक पड़ी रहती थीं और काम पूरा होने में महीनों लग जाते थे। इस प्रक्रिया में बिचौलियों का दबदबा इतना ज्यादा था कि बिना उनकी मदद के आम आदमी का काम निकलना लगभग असंभव हो जाता था। सीएम विष्णुदेव साय की सरकार ने भूमि रजिस्ट्री समस्या को पहचानते हुए भूमि रजिस्ट्री को पूरी तरह डिजिटल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। कम्प्यूटरीकृत रजिस्ट्री प्रणाली, मोबाइल एप, आधार-PAN इंटीग्रेशन, My Deed मॉड्यूल और जियो-रेफ्रेशिंग जैसी आधुनिक तकनीकें इस सुधार की रीढ़ बनकर उभरीं। यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि नागरिक सशक्तिकरण और सुशासन की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।
दस्तावेज़ों की गड़बड़ी भी एक बड़ी समस्या थी। खसरा-खतौनी में गलत एंट्री, नकली बिक्री पत्र, फर्जी हस्ताक्षर और एक ही ज़मीन की दोहरी बिक्री जैसी घटनाएँ आम थीं। इससे न केवल किसानों और आम नागरिकों को परेशानी होती थी बल्कि लंबी मुकदमेबाज़ी भी खड़ी हो जाती थी। ग्रामीण और दूरदराज़ के लोग अपनी रजिस्ट्री कराने के लिए कई बार 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर तय करते थे। इसमें उनका समय, श्रम और धन तीनों की बर्बादी होती थी।पारदर्शिता की कमी सबसे बड़ी खामी थी। नागरिकों को यह भी पता नहीं चलता था कि उनकी फाइल किस स्थिति में है। बार-बार दफ्तर जाकर जानकारी लेनी पड़ती थी और हर बार नए बहाने सुनने को मिलते थे। परिणामस्वरूप, आम जनता में व्यवस्था के प्रति अविश्वास गहराता जा रहा था और भूमि विवादों की संख्या लगातार बढ़ रही थी।
राज्य सरकार ने भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और ई-गवर्नेंस मॉडल को अपनाया है। अब नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की बजाय, घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध है। इस पहल ने न केवल समय और धन की बचत की है बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित की है। सरकार ने नागरिकों की सुविधा के लिए सुगम मोबाइल एप तैयार किया है। इस एप के जरिए लोग रजिस्ट्री की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं, आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और हर चरण की जानकारी समय-समय पर प्राप्त कर सकते हैं। यह एप नागरिकों को सीधा सिस्टम से जोड़ता है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त करता है।
छत्तीसगढ़ ने भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। यह सुधार केवल तकनीकी उन्नति नहीं बल्कि न्याय, पारदर्शिता और नागरिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। इस मॉडल ने साबित किया है कि ई-गवर्नेंस केवल एक नारा नहीं बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है। आने वाले वर्षों में जब इसे ब्लॉकचेन और एआई जैसी तकनीकों से जोड़ा जाएगा, तब यह पूरी तरह से विवाद-मुक्त, तेज़ और भरोसेमंद प्रणाली बनकर भारत के लिए एक आदर्श बनेगा।
जमीन रजिस्ट्री कराना अब हुआ आसान ऑनलाइन आवेदन: आवेदक भूमि रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल एप पर आवेदन करता है। PAN और आधार इंटीग्रेशन: खरीदार और विक्रेता की पहचान की पुष्टि PAN और आधार से होती है। इससे फर्जी लेन-देन की संभावना समाप्त होती है। My Deed मॉड्यूल: यह विशेष मॉड्यूल सभी दस्तावेज़, अनुबंध और सहमति पत्रों को सुरक्षित रूप से संग्रहित करता है। स्टांप शुल्क भुगतान: नागरिक अब डिजिटल माध्यम से स्टांप शुल्क जमा कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया और पारदर्शी हुई है। जियो-रेफ्रेशिंग प्रणाली: भूमि की लोकेशन और सीमाओं की पुष्टि डिजिटल मैपिंग से होती है। इससे भविष्य के विवाद काफी हद तक खत्म हो जाते हैं।
ऑनलाइन वेंडर लोकेशन: पोर्टल पर स्टांप वेंडरों की लोकेशन उपलब्ध होती है, जिससे लोगों को आसानी होती है। ई-रजिस्ट्री: प्रक्रिया पूर्ण होने पर डिजिटल हस्ताक्षर सहित अंतिम ई-रजिस्ट्री जारी कर दी जाती है, जो कानूनी रूप से मान्य होती है। बिचौलियों के मंसूबे पर फिरा पानी समय की बचत: अब रजिस्ट्री के लिए दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ता। भ्रष्टाचार पर रोक: बिचौलियों और अनावश्यक शुल्क से मुक्ति। पारदर्शिता: हर प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। सुगमता: नागरिक मोबाइल एप से कभी भी, कहीं भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। भविष्य के विवादों में कमी: जियो-रेफ्रेशिंग प्रणाली से भूमि की वास्तविक स्थिति की पुष्टि हो जाती है।
panchayattantra24.-बस्तर। बस्तर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण काछनगादी की रस्म 21 सितंबर की शाम निभाई गई है। 10 साल की बालिका पीहू दास पर काछनदेवी सवार हुईं। फिर बस्तर राजपरिवार के सदस्यों को बेल के कांटों से बने झूले पर झूलकर दशहरा मनाने की अनुमति दीं। करीब 617 साल से चली आ रही परंपरा को निभाया गया। दरअसल, जगदलपुर के भंगाराम चौक में स्थित काछनगुड़ी में रस्म को निभाया गया है। रविवार शाम बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव समेत अन्य सदस्य काछनगुड़ी पहुंचे थे। यहां पीहू पर काछनदेवी सवार हुईं। फिर परंपरा अनुसार बेल के कांटों से बने झूले पर सवार होकर उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप कमलचंद भंजदेव को फूल देकर पर्व मनाने अनुमति दीं।
कमलचंद भंजदेव ने कहा कि, काछन और रैला माता दोनों राजघराने की बेटियां थीं, जिन्होंने आत्म हत्या कर ली थी। उनकी पवित्र आत्मा यहीं पर विराजती हैं। काछन माता और रैला माता एक छोटी कन्या पर आती हैं।सालों से यह परंपरा चली आ रही है कि पितृ पक्ष के आखिरी दिन राज परिवार के सदस्य खुद आशीर्वाद लेने आते हैं। माता फूल के रूप में आशीर्वाद दीं हैं। जिससे बस्तर दशहरा निर्विघ्न संपन्न हो।
panchayattantra24.-महासमुन्द। छत्तीसगढ़ रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा दिवस 2025 के अंतर्गत जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा नशामुक्त भारत मैराथन का आयोजन किया जा रहा है। मैराथन मंगलवार 23 सितंबर 2025 को प्रातः 07ः00 बजे शासकीय बहुदिव्यांग विशेष विद्यालय, खैरा महासमुन्द से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेट महासमुन्द तक आयोजित होगी। इस अवसर पर विभिन्न वर्गों में प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें प्रतिभागियों को आकर्षक नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। जिसमें प्रथम पुरस्कार 2100 रुपए एवं द्वितीय पुरस्कार 1100 रुपए प्रदान किया जाएगा।
नशामुक्त भारत मैराथन में ओपन वर्ग में समस्त महिला एवं पुरुष भाग ले सकेंगे। इसी प्रकार 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के महिला एवं पुरुष प्रतिभागी होंगे। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए मोटराइज्ड ट्रायसायकल मैराथन एवं ट्रायसायकल मैराथन का आयोजन किया जाएगा। उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह ने अधिक से अधिक दिव्यांगजन, वरिष्ठजन, स्कूली एवं महाविद्यालयीन दिव्यांग छात्र-छात्राओं से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।
panchayattantra24.-नई दिल्ली: सरकार ने देश में जीएसटी रिफॉर्म्स लागू कर दिए हैं और आज 22 सितंबर से तमाम सामानों और सुविधाओं पर लोगों को बड़ी राहत मिली है. जहां दूध, घी, तेल से लेकर TV-AC और कार-बाइक तक सस्ती हो गई हैं, तो वहीं लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर लगने वाला जीएसटी जीरो हो गया है. जी हां, ये अब टैक्स फ्री हो गया है, जिसका असर पॉलिसी होल्डर्स को प्रीमियम भुगतान पर देखने को मिलेगा और उन्हें कम पैसा देना होगा. आइए कैलकुलेशन से समझते हैं कि 10,000 रुपये और 30000 रुपये के मासिक इंश्योरेंस प्रीमियम पेमेंट पर कितनी बचत होगी?
नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म के तहत जरूरी सामानों और सेवाओं पर नए सिरे से जीएसटी रेट्स लागू किए गए हैं. पहले लागू 12% और 28% के स्लैब को खत्म किया गया है, तो इनमें शामिल चीजों को 5% और 18% के स्लैब में डाल दिया गया है. बात अगर इंश्योरेंस पर लागू जीएसटी की करें, तो अब इसे शून्य कर दिया गया है. सरकार ने लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए पॉलिसीहोल्डर्स को ये बड़ा तोहफा दिया है. अब तक लाइफ-हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर 18 फीसदी की दर से ही जीएसटी लागू था.
देश में जब 1 जुलाई 2017 को तमाम टैक्सों को खत्म करते हुए सरकार ने जीएसटी लागू किया था, उसके बाद से इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाले टैक्स में ये पहली और फुल कटौती है. ये बदलाव सभी पर्सनल यूलिप प्लान, फैमिली फ्लोटर प्लान, सीनियर सिटीजंस प्लान समेत टर्म प्लान पर भी लागू हो गया है. अब बताते हैं कि आपको अपनी इंश्योरेंस प्रीमियम पेमेंट पर कितनी बचत होती है. इसकी कैलकुलेशन बेहद ही आसान है. अगर आपकी पॉलिसी का मंथली बेस प्रीमियम 30,000 रुपये था, तो उस पर 18% जीएसटी के हिसाब से 5400 रुपये मंथली जोड़कर 35,400 रुपये का पेमेंट करना होता था. लेकिन अब जीरो जीएसटी होने पर प्रीमियम पर टैक्स की अतिरिक्त लागत नहीं देनी होगी और सिर्फ बेस प्रीमियम का पेमेंट ही करना होगा. वहीं अगर किसी का प्रीमियम 10,000 रुपये है, तो उसे इस हिसाब से सीधे 1800 रुपये की बचत होगी.
अगर टर्म इंश्योरेंस की बात करें, तो ये भी अब पहले से काफी सस्ता हो गया है. मान लीजिए आपने 30 साल की उम्र में 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस लिया है, तो आपका सालाना प्रीमियम करीब 15000 रुपये बनता था. इस पर बचत का कैलकुलेशन देखें, तो…
बेस प्रीमियम- 15000 रुपये
18% जीएसटी- 2700 रुपये
कुल प्रीमियम- 17,700 रुपये
लेकिन, अब जबकि सरकार ने इसे जीएसटी से फ्री कर दिया है और जीरो जीएसटी कैटेगरी में डाल दिया है, तो पॉलिसी होल्डर पर पड़ने वाला 18 फीसदी टैक्स का अतिरिक्त 2,700 रुपये का बोझ कम हो जाएगा और उसे 15,000 रुपये ही खर्च करने होंगे.
वहीं अगर कोई व्यक्ति फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस लेता है, तो उसे भी अब काफी पैसा बचने वाला है, क्योंकि यहां भी जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर जीरो कर दिया गया है. मान लीजिए, आपकी उम्र 35 साल और आपकी पत्नी की उम्र 33 साल है, इसके साथ ही आपके दो बच्चे हैं. पूरी फैमिली के लिए 10 लाख कवर का प्रीमियम औसतन सालाना 25,000 रुपये होता है. उस पर 18% GST लगता था, जो 4500 रुपये होता था, यानी कुल 29,500 रुपये भरना होता था. लेकिन अब जीएसटी नहीं लगेगा, इसलिए सीधे-सीधे 4500 रुपये बचने वाला है.
बीमा प्रीमियम को जीएसटी के दायरे से बाहर करते हुए जहां सरकार ने पॉलिसीहोल्डर्स को बड़ी राहत दी है, तो वहीं बीमा कंपनियों के आईटीसी यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर भी रुख साफ किया है. बीते दिनों केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने कहा था कि बीमा कंपनियां 22 सितंबर से हेल्थ-लाइफ इंश्योरेंस के लिए कमीशन और ब्रोकरेज समेत अन्य के लिए चुकाए जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर पाएंगी. ऐसे में बड़ा सवाल ये कि इसकी भरपाई कंपनियां कैसे करेंगी.
बता दें कि बीमा कंपनियां ग्राहकों से बेस प्रीमियम पर जीएसटी वसूलती थीं, तो मार्केटिंग, ऑफिस किराए समेत अन्य चीजों पर GST चुकाती भी हैं और इन खर्चों को प्रीमियम पर टैक्स से मिली राशि से समायोजित करने के बाद सरकार को देती हैं. अब इन खर्चों को लेकर कंपनियां कोई दावा नहीं कर पाएंगी. सरकार के इस कदम के बाद बीमा कंपनियों को इनपुट लागत बढ़ने पर अपने खर्चों पर दिए जाने वाले टैक्स का बोझ खुद उठाना होगा, ऐसे में ये संभावनाएं भी जताई जा रही हैं कि कंपनियां ग्राहकों पर बोझ डालते हुए अतिरिक्त लागत को उनके बेस प्रीमियम में जोड़ सकती है.
panchayattantra24.-सूरजपुर। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग रायपुर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में 25 सितंबर गुरूवार प्रातः 10:00 बजे ग्राम देवीपुर स्थित देवीपुर जलाशय एवं छठ घाट नगरपालिका सूरजपुर में बाढ़ आपदा पर मॉकड्रिल आयोजित किया जाना है। यह मॉकड्रिल आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने तथा जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
इसे लेकर जिला प्रशासन द्वारा अपील की गई है कि यह केवल एक प्रशिक्षण प्रक्रिया है और जिससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस दौरान जिले व क्षेत्र के नागरिकों को अभ्यास के दौरान शांति बनाये रखने एवं किसी भी प्रकार से घबराने की जरूरत नहीं है। सभी से अपील की गई है कि अफवाहों से बचे और दूसरो को सही जानकारी प्रदान करें और इस महत्वपूर्ण मॉकड्रिल में प्रशासन का पूरा सहयोग करें।