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Author: admin

रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. हाल ही में मध्यप्रदेश और राजस्थान में उन्होंने जमकर धुआंधार प्रचार-प्रसार किया है ।
सीएम बघेल एमपी के दौरे से आज छत्तीसगढ़ वापस लौटे हैं. कोलकाता में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में हिंसा पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि बंगाल की घटना भाजपा की गुंडागर्दी है, बीजेपी वालों ने ही ऐसी स्थिति निर्मित की है कल बनारस में भी झगड़ा करने की कोशिश कर रहे थे. ये पहली बार अमित शाह के चेहरे पर डर दिखाई दे रहा है बंगाल में अन्याय हो रहा इसलिए हम उनके साथ हैं ।
पीएम नरेंद्र मोदी जनता से अब तक बोलते आए झूठ
तो वहीं ‘मोदीलाइज’ पर सीएम बघेल ने कहा कि नरेंद्र मोदी शुरू से अब तक झूठ ही बोल रहे हैं, चाहे चाय वाला हो या जाति की बात हो सिर्फ झूठ ही बोले जा रहे हैं. ये मोदीलाइज ही है ।
डॉ. रमन सिंह बीजेपी से हुए रिटायर
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि डॉ. रमन सिंह अब बीजेपी से लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की तरह रिटायर हो गए हैं. रमन सिंह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तो हैं लेकिन भाजपा ने प्रचार के लिए उन्हें कही नहीं भेजा है ।
भाजपा का संबंध नक्सलियों से
नक्सल सहित विभिन्न मामलों में जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई पर सीएम ने बयान देते हुए कहा कि बहुत सारे लोगों को नक्सली समर्थक बताकर गिरफ्तार किया गया है.जो निर्दोष है उसे निष्पक्ष तरीके से न्याय तो मिलना ही चाहिए. भाजपा के सम्बंध नक्सलियों से हैं. झीरम घाटी नक्सल हमले में बीजेपी सरकार का ढुलमुल रवैया रहा है. इस पर भाजपा सरकार ने कभी ठोस कार्रवाई नहीं की ।
किसान ममाले पर जांच के निर्देश
बस्तर में किसानों की गिरफ्तारी पर सीएम भूपेश बघेल ने स्पष्ट कहा कि बीजेपी सरकार में किसानों को धोखा दिया जा रहा था ये उसका परिणाम है. कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए हैं. विधिक सहायता भी उपलब्ध कराएंगे ।
बनारस में फीके पड़े पीएम मोदी
तो वहीं बनारस में बीजेपी नेताओं के जमघट पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी नेता भीड़ जुटाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है बनारस में पीएम मोदी की सभाओं के लिए बाहर से लोग पहुंचे रहे हैं. बीजेपी की स्थिति को अब पार्टी के नेता भी जान चुके हैं. इसबार बार भाजपा की हावत पतली है. इसलिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बनारस में डेरा जमाए हुए हैं. बीजेपी नेताओं का अब हार का डर सताने लगा है ।
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के छह चरण की वोटिंग के बाद अब सातवें और आखिरी चरण में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह प्रचार-प्रसार में जुट गई है ऐसे में सीएम बघेल सातवें चरण के चुनावी प्रचार प्रसार में भई जा सकते हैं ।
8 राज्यों की 59 सीटों पर 19 मई को वोट डाले जाएंगे, इसमें बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश सहित पश्चिम बंगाल की सीटों पर वोटिंग होंगी. इसी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा दांव पर है तो योगी के सामने अपनी गृह जनपद की सीट बचाने की चुनौती है ।
रायपुर । लोकसभा चुनाव परिणाम आते ही छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार के काले कारनामों को धड़ाधड़ उजागर करने वाली है। कांग्रेस भवन के राजनीतिक हलकों में यह सुगबुगाहट पिछले एक सप्ताह से कांग्रेसियों में गोपनीय चर्चा में सामने आई है। कांग्रेसी नेता तो यहां तक कह रहे है कि रमनसिंह ने जो जो बैक डेट में फाइल साइन किए उसकी भी जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हो गई है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ ग्रहण करने साथ ही तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह को तलब किया और चुनाव परिणाम आने के सात दिनों के अंतराल में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने जिन महत्वपूर्ण फाइलों को बैक डेट में हस्ताक्षर किए उसकी जानकारी मंगाने के साथ मुख्य सचिव अजय सिंह से सारे विभागीय फाइल भी निकलवाई है। सूत्र बताते है कि भूपेश सरकार सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने अपने काले कारनामों को दबाने के लिए शपथ ग्रहण से पहले सभी महत्वपूर्ण फाइलों में बैक डेट में हस्ताक्षर किए है। जिसे सत्ता संभालने के बाद भूपेश बघेल ने चिन्हाकिंत कर लिया है। कांग्रेसियों का तो यहां तक कहना है कि यदि भूपेश बघेल उन फाइलों के मुद्दे को लेकर लोकसभा चुनाव में मोर्चा खोल देते तो रमनसिंह सहित कई तत्कालीन मंत्रियों को लेने के देने पड़ सकते थे।
भूपेश बघेल ने बड़ी सोच और राजनीतिक सुचिता का परिचय दिया
लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ी सोच और राजनीतिक सुचिता का परिचय देते हुए उन फाइलों को अध्ययन के लिए अपने पास रख लिया। अब 23 तारीख को चुनाव परिणाम आने वाले है। राजनीतिक दौड़धूप से निवृत्त होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तत्कालीन सरकार के काले कारनामें को रोज उजागर करने वाली है। मुख्यमंत्री बघेल ने राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए इसे लोकसभा चुनाव में आसानी से भुना सकते थे, लेकिन भूपेश बघेल न्याय संगत कार्रवाई पर विश्वास रखते है, इसलिए उन्होंने उन सभी पुराने विभागीय घोटाले जिन पर बैक डेट पर रमनसिंह के हस्ताक्षर हुए भंड़ाफोड़ कर सकते थे, जिससे भाजपा की रही सही लुटिया भी डूब सकती थी। लेकिन वे दोहरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण लोकसभा चुनाव में व्यस्त हो गए। समयाभाव के चलते जल्दबाजी कोई काम नहीं करना चाहते थे। उम्मीदवारों के क्षेत्र में प्रचार की जिम्मेदारी की भी भूपेश बघेल पर थी। लोकसभा चुनाव संपन्न होते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी संरक्षक सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र में व्यस्त हो गए । लगातार राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव के साथ यूपी, उडि़सा, झारखंड, मध्यप्रदेश में प्रचार और समर्थन हासिल करने में व्यस्त रहे। इस कारण इन सभी घोटालों उजागर नहीं किया। राजीव भवन में तगड़ी घुसपैठ करने वाले नेताओं की मानें तो 15 मई को मुख्यमंत्री जैसे ही प्रवास से लौटेंगे, पुराने सबी फाइलों का अध्ययन करेंगे और 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद धड़ाधड़ उन मामलों को उजागर कर जनता के सामने भाजपा सरकार के 15 साल के काम काज का लेखा जोखा रखेंगे जिसमें उन्होंने सत्ता जाने के बाद भी मोह नहीं चोड़ पाए और पुराने डेट में पेंडिंग पड़े फाइलों को सीएम हाउस में बैठकर निपटाते रहे और बहाना बना दिया कि अभी बंगला तैयार नहीं हुआ है इसलिए कुछ दिन आर सीएम हाउस में रहेंगे।
अब पूर्व सीएस अजय सिंह पर कसेगा शिकंजा
सत्ता परिवर्तन के बाद तक अजय सिंह ही मुख्य सचिव रहे है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबसे पहले अजय सिंह को ही तलब किया और राज्य के विभागीय ढांचे की जानकारी मांगी । जिसमें खास तौर पर भूपेश बघेल ने पेंडिंग फाइलों की सूची मांगी। तब पता चला कि कोई भी फाइल पेंडिंग नहीं है। तब मुख्यमंत्री को खटका कि कैसे पेंडिंग फाइल नहीं होगी। सत्ता परिवर्तन के एक सप्ताह तक मुख्यमंत्री पद के लिए दिल्ली दौड़ के चलते पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने फायदा उठाते हुए सारे पेंडिंग फाइलों को बैक डेट पर हस्ताक्षर कर निपटा दिए। यह बात भूपेश बघेल को हजम नहीं हुआ, उन्होंने तत्काल सुनील कुजूर को मुख्य सचिव नियुक्त कर पुराने सारे फाइलों की स्टडी करने को कहा तब यह बात सामने आया कि पूर्व सीएस ने भी झूठ बोला कि कोई पेंडिंग फाइल नहीं है। दरअसल सारे पेंडिग फाउलों को बैक डेट में हस्ताक्षर कर डा. रमनसिंह ने निपटा दिया था। जिसमें सबसे ज्यादा वित्तीय घोटाले, राजस्व संबंधी जमीन के मामले, उद्योगों को एनओसी देने के मामले, बिल्डरों के जमीन कब्जा के मामले थे। नियुक्ति और प्रमोशन संबंधी फाइल थे। जिसमें अजय सिंह की पत्नी की नियुक्ति का मामला, सीएम के प्रमुख सचिव अमनसिंह की संविदा नियुक्ति का मामला, स्टेट गैरेज में मंत्रियों के लिए नई गाड़ी खरीदी का मामला शामिल है।
समुंद सिंह के पास समुंदर जैसा पैसा, सीएम के पास पहुंची फाइल
आबकारी विभाग से रिटायर्ड ओएसडी की तथाकथित नियुक्ति और उनके अधिकार को लेकर सरकार समीक्षा कर चुकी है। ओएसडी होने के बाद भी समुंद सिंह आबकारी मंत्री से भी पावरफुल थे, सारे निर्णय उनके ही मार्ग दर्शन में लिया जाता था, समुंद सिंह ही तय करता था, कि कौन सा ब्रांड कौन सी डिस्लरी से शराब बनवाना है और शराब खरीदना है। जिससे सरकार को अधिक से अधिक राजस्व मिल सके। इसके आड में समुंद सिंह मंत्री से लेकर अधिकारियों को रेवड़ी बांटा करता था।
रायपुर शहर के सहकारी बैंकों में हुए घोटाले के खुलेगे पोल
आरटीआई एक्टीविस्टों की टीम जल्द ही प्रदेश के सहकारी बैंकों में हुए घोटाले की पोल खोलने वाली है। जनता से रिश्ता को मिली जानकारी के अनुसार कर्ज माफी से लेकर कर्ज देने के मामले में किसानों के साथ बैंक अधिकारियों ने जो घोटाला किया है उसकी जानकारी एकत्रित की है। जिसका सिलसिले वार प्रकाशन किया जाएगा। आरटीआई एक्टीविस्ट अब्दुल वाहिद ने बताया कि फिल हाल अभी राजधानी के सहकारी बैंकों में हुए गड़बडिय़ों को उजागर किया जाएगा जिसमें कालर खड़े कर किसानों की कर्ज माफी, व्यवसायिक ऋण जो गरीबों को दिया गया उसकी वसूली की स्थिति में गड़बड़ी उजागर हुई है। सहकारी बैंक के स्वयंभू अध्यक्ष और प्रबंधकों ने अपने अधिकारों का किस तरह दुरूपयोग किया खुलासा किया जाएगा।

रायपुर । राजस्थान में अलवर जिले के थानागाजी इलाके में दलित महिला से दबंगों द्वारा उसके पति के सामने ही सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद अब मध्य प्रदेश के धार में एक व्यक्ति और उसकी दो महिला रिश्तेदारों को पेड़ से बांधकर पीटे जाने का मामला सामने आया है. यह घटना धार की अर्जुन कॉलोनी में हुई. व्यक्ति किसी विवाहित महिला को कथित तौर पर भगा कर ले गया था ।
मुख्य पुलिस अधीक्षक संजीव मुले ने बताया कि इस घटना की बाबत केस दर्ज कर लिया गया है. मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सुनीता नाम की महिला का धार के मुकेश के साथ विवाह हुआ था. लेकिन बाद में वह कथित तौर पर रवि के साथ दूसरे शहर में चली गई. मुकेश ने इस बारे में रवि के रिश्तेदार और अन्य लोगों से संपर्क किया. दोनों पक्षों के बीच समझौते की पेशकश के बाद रवि और उसकी रिश्तेदार संगीता और उर्मिला धार पहुंचे ।
बताया जाता है कि जब ये लोग पिछले मंगलवार को अर्जुन कॉलोनी पहुंचे तो इनको एक खंभे से बांधकर काफी देर तक पीटा गया. इस मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में संतोष बाई, सायरी, रेखा तथा मुकेश पिता हीरालाल और बलवंत शामिल हैं. बाकी चार आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं ।

जगदलपुर । जिले में बुधवार को ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर ग्रामीणों ने जेल में बंद दो किसानों को रिहा करने की मांग की. ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से इस मामले में सज्ञान लेने की मांग की है साथ ही किसानों के रिहा करने की भी गुहार लगाई है। बताया जा रहा है कि बस्तर से किसानों ने पैदल मार्च निकाला है।पैदल मार्च निकालकर ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी भी दी है।किसानों की रिहाई नहीं होने पर जगदलपुर में भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।इस पैदन मार्च में काफी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और किसानों को रिहा करने का नारा भी लगाया ।
क्या है पूरा मामला: कर्ज के चलते किसानों को जेल की सजा होने की शिकायत बस्तर ब्लॉक के दो किसानों के परिवार ने जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी।जानकारी के मुताबिक पीडि़त किसानों को एजेंटों द्वारा खेत में ड्रिप कराने के नाम से बैंक से लोन दिलवा दिया गया था।पर अशिक्षित किसानों को ये नहीं मालूम था कि उन्हे फंसाया जा रहा है। 40 हजार हाथ में देकर उन्हे 4 लाख रुपए का कर्जदार बनाया गया।
वहीं एक किसान को तो मात्र 60 हजार देकर 10 लाख का कर्जदार बना दिया गया।बैंक से लगातार किसानों को लोन अदा करने के लिए नोटिस दिया गया लेकिन किसानों को जब पता चला की उनका कर्ज लाखों में है तो उनके होश उड़ गए।उसके बाद बैंक द्वारा चेक बाउंस को लेकर उन्हे पेशी में बुलाया गया और उन्हे जेल भेज दिया गया।इस बात की जानकारी लगने के बाद पीडि़त किसानों के परिवार ने बस्तर कलेक्टर से किसानों की रिहाई की गुहार लगाई थी।
मामले में एसडीएम जांच
कर्ज के मामले में जेल भेजे गए किसानों का मामला संज्ञान में आते ही जिला प्रशासन बस्तर द्वारा मामले की जांच अनुविभागीय दण्डाधिकारी के माध्यम से कराई जा रही है। जांच में प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला आ रहा है तथा जांच पूरी होते ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। किसानों को जमानत के माध्यम से राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिला प्रशासन द्वारा नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बस्तर जिले के कलेक्टर डॉ. अय्याज तम्बोली ने बताया कि माड़पाल निवासी श्री तुलाराम मौर्य और बस्तर निवासी श्री सुखदास को खेती-किसानी हेतु लिए गए कर्ज के कारण जेल भेजे जाने के मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी श्री जीआर मरकाम के माध्यम से कराई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक को किसानों के खिलाफ धोखाधड़ी करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टेट बैंक के कृषि विकास शाखा द्वारा चेक बाउंस होने के कारण दायर परिवाद के आधार पर प्रथम श्रेणी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी न्यायालय द्वारा तुलाराम मौर्य और श्री सुखदास को नेगोशियेबल, इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।
इस मामले में जांच अधिकारी श्री मरकाम के समक्ष दिए गए बयान के मुताबिक यह प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला लग रहा है। बताया गया कि तुलाराम मौर्य द्वारा 16 नवम्बर 2009 को भारतीय स्टेट बैंक की कृषि विकास शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड का तीन लाख रुपए, ड्रिप के लिए 2 लाख 3 हजार रुपए और फेंसिंग के लिए 60 हजार रुपए का कर्ज लिया गया था। इसी प्रकार का प्रकरण श्री सुखदास का भी है। इस मामले में किसानों के शीघ्र जमानत की कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन द्वारा विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और इस धोखाधड़ी के मामले में बैंक, दलालों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

दिल्ली । रेल विकास निगम लिमिटेड ने जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड को आने वाली रेल विकास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 89042 टन रेल आपूर्ति करने का कांट्रेक्ट दिया है। रेल विकास निगम लिमिटेड ने इस आशय का आर्डर 8 मई 2019 को जारी किया है। इसकी कीमत लगभग 665 करोड़ रुपये आंकलित की जा रही है।इस कांट्रैक्ट के हासिल होने पर जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक नौशाद अख्तर अंसारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भविष्य में कंपनी के रेल बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया हैइससे पहले, जुलाई 2018 में, जेएसपीएल ने भारतीय रेलवे को रेल की आपूर्ति के लिए पहली बार वैश्विक निविदा हासिल की। भारतीय रेलवे द्वारा मंगाई गई रेल की आपूर्ति के लिए पहले वैश्विक निविदा में 8 अग्रणी कंपनियों द्वारा बोली लगाई गई थी, जिसमें दुनिया के 7 शीर्ष निर्माता थे। वैश्विक निविदा के अनुसार, जेएसपीएल को लगभग एक लाख टन लंबी रेल की आपूर्ति करनी थी, जिसकी कीमत 568 करोड़ रुपये थी। यह आपूर्ति एक वर्ष की अवधि में भारतीय रेलवे को करनी थी। जेएसपीएल ने समय के साथ 4 महीने पहले ही रिकॉर्ड समय में डिलीवरी पूरी कर ली थी। इस वैश्विक निविदा के तहत 30000 टन रेल की आपूर्ति करने के लिए जेएसपीएल ने एक अतिरिक्त आॅर्डर हासिल किया। जेएसपीएल ने भारत में रेल के उत्पादन के लिए सेल के बाद दूसरा खिलाड़ी बनने के लिए 2003 में अपने रायगढ़ संयंत्र में भारत की सबसे आधुनिक रेल मिल स्थापित की थी। ज्ञात हो कि, जेएसपीएल की रेल सबसे लंबी रेल में से एक है, जो प्लांट परिसर के भीतर किए गए फ्लैश बट वेल्डिंग के माध्यम से 480 मीटर रेल पैनल तक जा सकती है। जेएसपीएल में प्रति माह 50,000 से अधिक मीटरिक टन रेल की आपूर्ति करने की क्षमता है। कंपनी पहले ही ईरान, बांग्लादेश और कुछ अन्य जैसे देशों को रेल की आपूर्ति कर चुकी है। भारत में, जेएसपीएल ने भारतीय रेलवे और इसकी महत्वाकांक्षी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं की आपूर्ति की थी। जेएसपीएल हेड हार्डेन्ड रेल्स का पहला और एकमात्र निर्माता भी है ।

रायपुर । छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार के गठन के बाद लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के निराकरण में तेजी आ गई है. वर्ष 2018 के आखिरी तीन महीनों की तुलना में वर्ष 2019 के शुरुआती तीन महीनों में समय-सीमा में निराकृत होने वाले आवेदनों का प्रतिशत 73 से करीब छह प्रतिशत बढ़कर 79 हो गया है. आवेदनों के निराकरण का प्रतिशत ही नहीं बढ़ा है, बल्कि इनके समय-सीमा में निराकरण होने की दर भी बढ़ी है. समय सीमा के बाद निराकृत किए जाने वाले आवेदनों में 28 प्रतिशत की कमी आई है, अधिकाधिक प्रकरणों का निराकरण अब समय-सीमा में हो रहा है ।
इस अधिनियम के तहत प्राप्त होने वाले आवेदनों में नान डिजिटलाइज्ड नकल, मूल निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, अनुसूचित जाति-जनजाति प्रमाण-पत्र जैसे मामलों की संख्या सबसे अधिक होती है. माह जनवरी में नयी सरकार बनने के तुरत बाद शासन ने निर्देश जारी किए थे कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त होने वाले आवेदनों का निराकरण समय-सीमा के भीतर किया जाना सुनिश्चित किया जाए. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पहले कलेक्टर कान्फ्रेंस के दौरान ही सभी विभागों के अधिकारियों और जिला कलेक्टरों को कहा था कि इस संबंध में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।
वर्तमान में लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के अंतर्गत 200 से अधिक नागरिक सेवाओं को अधिसूचित किया गया है. 126 सेवाएं आनलाइन माध्यमों से प्रदान की जाती हैं. अधिनियम के तहत इन सेवाओं को समय-सीमा के भीतर प्रदाय किए जाने की बाध्यता है ।
अक्टूबर-दिसंबर 2018 तक की अवधि में 5 लाख 73 हजार 459 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 4 लाख 21 हजार 243 समय सीमा के भीतर अनुमोदित किए गए. जबकि जनवरी-मार्च 2019 की अवधि में 5 लाख 30 हजार 892 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 4 लाख 22 हजार 598 समय सीमा के भीतर अनुमोदित किए गए ।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में अब तक नान डिजिटलाइज्ड नकल (भूमि दस्तावेज आदि) के लिए 37 हजार 561 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 34 हजार 745 अनुमोदित कर दिए गए हैं. मूल निवासी प्रमाण-पत्र के लिए 20 हजार 340 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 20 हजार 194 आवेदन अनुमोदित कर दिए गए हैं. अनुसूचित जाति-जनजाति प्रमाण पत्र के लिए प्राप्त 14 हजार 755 आवेदनों में से 13 हजार 695 आवेदन अनुमोदित कर दिए गए हैं. इसी तरह के 43 से अधिक मामलों के लिए कुल 1 लाख 36 हजार 86 आवेदन अब तक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 1 लाख 33 हजार 674 अनुमोदित कर दिए गए हैं ।
अस्पताल की लापरवाही, हाईकोर्ट ने पीड़िता को 10 लाख मुआवजा और बच्चे के नाम एफडी जमा करने दिए निर्देश,

बिलासपुर । सुकमा जिला अस्पताल में डॉक्टर के उपस्थित नहीं होने और ऑक्सीजन सिलेंडर खाली होने के कारण मरीज की मौत मामले में हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही माना है. हाईकोर्ट ने पीड़िता को दस लाख रुपए मुआवजा और बच्चे के नाम से ढाई लाख एफडी जमा करने का सरकार को निर्देश दिया गया है. राशि का भुगतान 2 महीने के अंदर करने के लिए कहा है ।
दरअसल बस्तर के जगदलपुर में रहने वाले हितेश देवांगन की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने बीपीएल कार्डधारी होने के आधार पर राज्य शासन के संजीवनी योजना के तहत आर्थिक मदद की गुहार लगाते हुए सिविल सर्जन को आवेदन दिया था. सिविल सर्जन ने इसे राज्य शासन को फारवर्ड कर दिया था, लेकिन इस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया. इधर मरीज की स्थिति बिगड़ने पर जगदलपुर के डॉक्टरों ने हैदराबाद ले जाने की सलाह दी. मरीज के परिजन उसे कार से जगदलपुर से हैदराबाद ले जा रहे थे । इसी दौरान सुकमा के पास स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर उसे दोपहर के करीब 2.15 बजे सुकमा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टर उपस्थित नहीं थे. सांस लेने में तकलीफ होने के कारण परिजनों ने ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत बताई, लेकिन जिला अस्पताल में उपलब्ध ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था. कुछ देर बाद मरीज की मौत हो गई ।
पत्नी ने सरकारी अस्पताल की स्थिति और मुआवजा अनुकंपा नियुक्ति की मांग की, जस्टिस गौतम भादुड़ी ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी अस्पताल की इसे घोर लापरवाही माना और पत्नी को दस लाख मुवायजा और बच्चे के नाम से ढाई लाख एफडी जमा करने का सरकार को निर्देश दिया है. जस्टिस भादुड़ी ने इस मामले में सरकारी अस्पताल के लिए कमेटी बनाये जाने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. पूर्व में 2016 में फर्जी रिपोर्ट दी थी की सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था दूर कर दी गई है, लेकिन कोर्ट स्वास्थ सुविधा पर लापरवाही के लिए नारजगी भी जाहिर की और नए सिरे से रिपोर्ट देने का आदेश दिया है ।
बालौदाबाजार । रेत के अवैध उत्खनन की लगातार मिल रही शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. बालौदाबाजार जिले के पलारी विकासखंड के दतरेंगी में देर रात एसडीएम लविना पांडे ने अपनी टीम के साथ छापेमार कार्रवाई करते हुए अवैध रेत उत्खनन में लगे चैन माउंटेन 16 हाइवा और 3 बाइक जब्त किया है. यह सब कार्रवाई फिल्मी स्टाइल में की गई है।
एसडीएम ने कलेक्टर के निर्देश पर एक टीम तैयार की और रात करीब 1 बजे चल रहे अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ छापेमार कार्रवाई करने पहुंच गए. इस कार्रवाई की सूचना टीम के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी नहीं थी. टीम के सभी सदस्य के मोबाइल फोन कंट्रोल रूम में ही जमा करा दिया गया. जिससे इसकी जानकारी रेत माफियाओं तक न पहुंचे और हुआ भी कुछ ऐसा ही. इस तरह एक बड़ी छापेमार कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान रेत माफिया रात भर इधर-उधर भागते रहे, वो खदान में रखे अपना बाइक भी नहीं ले जा सके. यह कार्रवाई सुबह तक चली. इस कार्यवाही में एसडीएम और उनका पूरा अमला सहित पुलिस के जवान रात भर जब्ती की कार्रवाई में शामिल रहे और मौके से जब्त 16 हाइवा और बाइकों को पलारी थाने में खड़ा किया गया है।

कांकेर । उत्तर बस्तर डिवीजन कांकेर में लोकल ऑर्गनाइजेशन स्क्वॉड (एलओएस) की एक लाख की इनामी महिला नक्सली ने अपने 5 दिन के बच्चे के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। कांकेर पुलिस अधीक्षक कन्हैया लाल ध्रुव ने बताया नक्सली महिला सुनीता उर्फ हूंगी कट्टम गश्त के दौरान जंगल के पास डीआरजी टीम को मिली थी। कांकेर एसपी ने सरेंडर करने वाली महिला नक्सली को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की है। इसके अलावा सुनीता को शासन की ओर से मिलने वाली मदद भी दी जाएगी।
माओवादी सुनीता उर्फ हूंगी कट्टम साल 2014 में नक्सली संगठन में भर्ती हुई। साल 2018 में सुकमा जिले के किस्टाराम थाना इलाके के मेट्टाम गांव के रहने वाले नक्सली मुन्ना मंडावी से शादी की। इस बीच सुनीता गर्भवती हो गई और उसे माओवादियों ने जंगल में ही उसके हाल पर छोड़ दिया ।
दंतेवाड़ा । किरंदुल में एक लाख रूपए के इनामी नक्सली कमांडर ने सरेंडर किया है। जनमिलिशिया कमांडर मंगड़ु मरकाम ने एसपी के सामने आत्मसमर्पण किया है। मंगड़ु 2006 से मलंगीर एरिया कमेटी में सक्रिय था।सरेंडर्ड नक्सली ने कई वारदातों में शामिल होने की बात कबूला है ।