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जगदलपुर । सुरक्षाबलों की 9वीं बटालियन की वाहन सड़क हादसे का शिकार हो गई. हादसे में 4 जवान घायल हो गए. जिसमें से एक जवान का पैर फैक्चर हो गया है. जिन्हें डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है. जहां इलाज जारी है. मिली जानकारी के अनुसार दंतेवाड़ा से बलौदाबाजार जा रही जवानों की 407 वाहन कोंडागांव चिकलकुटी के पास टिप्पर से जा टकराई ।
कोंडागांव थाना प्रभारी ने बताया कि 9वीं बटालियन की टीम सुबह दंतेवाड़ा से मेस का सामान लेकर निकली थी. जवान इन सामानों को लेकर बलौदाबाजार जा रहे थे. वाहन 407 में चार जवान थे जिसमें वाहन को भरत लाल साहू चला रहे थे. जबकि अन्य जवान में घनश्याम बघेल, सूर्य प्रकाश प्रदीप कुमार बैठे हुए थे ।

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रायपुर । नक्सल हमले में मारे गए विधायक भीमा मंडावी की मौत मामले की बीजेपी जांच कराने की मांग कर रही है. इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, तो वहीं बीजेपी के बड़े नेता बयानबाजी कर रहे है. लेकिन कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने बताया कि 10 अप्रैल को ही राज्य सरकार ने न्यायिक जांच कराने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है. आचार संहिता लगने की वजह से राज्य सरकार इसका ऐलान नहीं कर सकती. अनुमति मिलते ही राज्य सरकार भीमा मंडावी की मौत की न्यायिक जांच का कराने की आदेश देगी ।
शैलेश नितिन त्रिवेदी ने बताया कि राज्य सरकार ने भीमा मंडावी की हत्या की न्यायिक जांच की मांग की गई है. लेकिन बीजेपी इस पर राजनीति कर रही है उसे ऐसा नहीं करना था. राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग को लिखी चिठ्ठी को सार्वजनिक किया है. कांग्रेस इस घटना की पीड़ा और भयावहता को समझती है. क्योंकि कांग्रेस ने भी पहले नक्सली हमले में अपने नेता खोए है. निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद न्यायिक जांच होगी. बीजेपी को निर्वाचन आयोग पर विश्वास करना चाहिए ।

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पत्थलगांव । रायगढ़ लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए छग के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ताबड़तोड़ दौरा कर रहें है. इसी सिलसिले में आज भूपेश बघेल जशपुर के कांसाबेल में एक सभा को संबोधित करने पहुंचे. जहां सीएम ने भाजपा पर जमकर निशाना साधते हुए कांग्रेस प्रत्याशी लालजीत सिंह राठिया के पक्ष में लोगों से समर्थन करने की मांग कर रहे हैं ।
भूपेश बघेल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद किए गये वादों को पूरा किया जा रहा है. सबसे पहले उन्होंने बीस लाख किसानों का दस हजार करोड़ का लोन माफ किया है. उन्होंने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि इस पार्टी से जुड़े लोग झूठ बोलने की मशीन है. रमन सिंह की सरकार को जनता ने उखाड़ फेंका है चाउर वाले बाबा अंतिम समय में दारू वाले बाबा बन चुके थे. उन्होंने कहा बस्तर सहित छग के सभी सीटों पर जीत दर्ज करेंगे ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा भाजपा की सरकार में पत्रकार सवाल नही पूछ सकते सवाल करने पर इनके नेता भड़क जाते है. पूर्व सीएम का दामाद करोड़ों रूपए लेकर फरार है. भाजपा के राज में ऐसा घोटाला हुआ है भूपेश बघेल ने अपने आप को कहा वे गांव के एक छोटा इंसान है और वैसा ही रहेंगे ।
इस कार्यक्रम में जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री उमेश पटेल पत्थलगांव विधायक रामपुकार सिंह कुनकुरी विधायक यूडी मिंज जशपुर विधायक विनय भगत सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे ।

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रायपुर  । रितेश्वर महाराज लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं को जागरुक करने मतदाता जागरण महोत्सव आयोजित कर रहे हैं. रितेश्वर महाराज के मुताबिक, प्रजातंत्र व्यवस्था के अंतर्गत मतदान राष्ट्र प्रदत्त हमारा बड़ा अधिकार एवं सच्चे नागरिक तथा राष्ट्रभक्त के लिए एक अहम् एवं पुनीत कर्तव्य है. इस अभियान के तहत 13 अप्रैल को मनेंद्रगढ़ के राम मंदिर में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जहां महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया. रितेश्वर महाराज का शनिवार शाम को कटघोरा में और रविवार को बिलासपुर में कार्यक्रम होगा ।

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रायपुर । चिड़ियाघर के पिंजरे में बंद शेर की दहाड़ सुनकर बच्चा भी नहीं दहलता और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का दावा करने वाले किसी भी राजनीतिज्ञ के बयान पर प्रदेश की जनता का अब ऐतबार नहीं रहता. यही कारण है कि देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह की छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान नक्सलियों के खिलाफ गुर्राहट बस्तर में फुसफुसाहट भर का भी असर छोड़ पाने में नाकाम रही ।
पांच साल से देश के गृहमंत्री पद का दायित्व संभाल रहे राजनाथ सिंह का गत दिवस दुर्ग में क्रोध से भरा बयान आया कि ‘भाजपा विधायक भीमा मंडावी की नक्सलियों द्वारा की गई हत्या से मैं बेहद दुखी हूं और इन हत्यारों को छोडूंगा नहीं.’ गृहमंत्री का यह लहजा छत्तीसगढ़ की आवाम में कोई भरोसा या उम्मीद जगा पाने में इसलिए नाकाम है क्योंकि पांच साल तक गृहमंत्री रह चुकने के बाद भी झीरम नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाना तो दूर उसके लिए जिम्मेदार लोगों को पहचान पाने तक में वह नाकाम रहे हैं. नक्सली मोर्चे पर भी उनके खाते में शून्य बटा सन्नाटा ही दर्ज है ।
चार दशक से बस्तर में नक्सली नासूर बन भोले-भाले आदिवासियों के जीवन में भय का और सरकारों के लिए तनाव का कारण बने हुए हैं. किसी समय इन नक्सलियों को भटके हुए युवा करार देने वाले तमाम प्रगतिशील राजनीतिज्ञ भी पिछले कुछ समय से हिंसक घटनाओं के अतिरेक से आखिरकार इन्हें लोकतंत्र के लिए खतरा मानने को तैयार हो गए. लेकिन, इस स्वीकार्यता के बाद भी राजनीतिक स्वार्थों की खातिर तमाम राजनीतिक दल ‘बुलेट बनाम बैलेट’ की लड़ाई में एक साथ आने को तैयार नहीं हैं ।
तीन दिन पहले दंतेवाड़ा के विधायक भीमा मंडावी पर हुआ नक्सली हमला क्या महज एक भाजपा नेता पर हमले की निगाह से देखा जाना न्यायोचित है? पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और बृजमोहन अग्रवाल को जहां इसमें राजनीतिक साजिश दिखाई दे रही है वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पुलिस अधिकारियों के तर्कों से सहमत हो इसे विधायक की लापरवाही का नतीजा करार दे देने को तत्पर रहे हैं. निश्चित ही यह दोनों दलीलें तर्क की कसौटी पर खरी नहीं उतरती हैं ।
अगर भीमा मंडावी पर हमला राजनीतिक साजिश है तो फिर छह साल पूर्व घटित झीरम हादसे को भी महज नक्सली हमला कैसे स्वीकार कर लिया जाए? जिस हमले में कांग्रेस नेतृत्व की एक पीढ़ी ही पूरी तरह खत्म हो गई. राजनाथ सिंह के बयान के प्रति अविश्वास और आक्रोश भी इसलिए है क्योंकि पांच साल में वह इस जघन्य हत्याकांड में मामले में कुछ भी ठोस करके दे पाने में नाकाम रहे, लेकिन आज आपके पार्टी के विधायक के साथ यह घटना घटित हो गई तो आपके बाजू फड़कने लगे. नक्सली वारदातों को यदि जिम्मेदार राजनीतिज्ञ ही अगर दलगत हित के आधार पर देखते रहेंगे तो लोकतंत्र का सूली पर चढ़ जाना तय ही है ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दलील है कि इलाके के थानेदार ने भीमा मंडावी को इस मार्ग पर जाने से रोका था, लेकिन वह नहीं माने और यह सब घटित हो गया. अगर यह दलील सही भी है तो भी इलाके की पुलिस को क्लीन चिट देने की इतनी जल्दबाजी की जरूरत क्या थी क्या यह सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए कि जब चुनाव के चलते अस्सी हजार पुलिस और अर्ध सैनिक बलों के जवान वहां मौजूद थे, तो नक्सली इतनी मात्रा में विस्फोटक का उपयोग कैसे कर पाए उस इलाके में तो हथियारों की कोई फैक्ट्री भी नहीं है फिर भी इन अपराधियों के पास इस किस्म के अत्याधुनिक हथियार हममें से किसकी गद्दारी से इनके पास पहुंच जाते हैं ।
भीमा मंडावी पर जब हमला हुआ तो उनकी गाड़ी अकेली थी. पायलट और फालो वाहन उनसे इतने अधिक पीछे क्यों रह गए ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब अनुत्तरित हैं. लेकिन इन सवालों की आड़ में सरकार को संलिप्त ठहराने की कोशिश राजनीतिक अवसरवाद ही मानी जाएगी. ठीक वैसे ही जैसे झीरम में रमन सरकार को शामिल बताया जाना. क्योंकि चाहे बात डा. रमन सिंह की हो या भूपेश बघेल की, उनका सार्वजनिक जीवन और आचरण किसी को यह सवाल उठाने की इजाजत नहीं देता कि वह राजनीतिक लाभ के लिए कभी भी ऐसी राह चुन सकते हैं ।
यह बात समझने की जरूरत हममें से हर एक को है कि बस्तर में नक्सलियों की बंदूक से निकली गोली से कोई व्यक्ति भर नहीं मरता है। झीरम में शहीद होने वाले महज कांग्रेसी नहीं थे और ना भीमा मंडावी केवल भाजपाई ही थे. यह सब हमारे भाई थे जिनका विश्वास लोकतंत्र पर था. नक्सली बनाम लोकतंत्र की लड़ाई में जीत की उम्मीद ‘लोक’ तभी कर सकता है जब ‘तंत्र’ स्वार्थ त्याग कर एक राय हो कंधे से कंधा मिलाकर मैदान में उतरे. यह समय एक दूसरे के खिलाफ बयान देकर राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति करने का नहीं है, निर्णायक लड़ाई के लिए आमजन और सुरक्षा बलों का आव्हान करने का है ।
संकट के क्षणों में कर्तव्य पालन का उदाहरण सीखने के लिए हमारे राजनीतिज्ञों को कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है. भीमा मंडावी के पिता और उनकी पत्नी का उदाहरण हमारे सामने है, जिन्होंने अपने पुत्र और पति की मौत के महज छत्तीस घंटे बाद ही बेखौफ मतदान कर साहस और कर्तव्य पालन की जो मिसाल कायम की है, उस पर हर भारतीय गर्व महसूस कर सकता है ।
क्या यह बेहतर ना होता कि भीमा मंडावी की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए अलग-अलग साधनों से दंतेवाड़ा पहुंचे भूपेश बघेल और डा. रमन सिंह एक साथ वहां पहुंचते. हमले के बाद उपजी परिस्थितियों की समीक्षा के लिए सभी दलों के प्रमुखों को भी साथ बिठाया जाता. नक्सली हिंसा के खिलाफ बयान अलग-अलग जारी करने की जगह इन नेताओं ने साथ बैठकर जारी किया जाता. स्मरण रहे कि ‘अनेकता में एकता ’ की बुनियाद पर ही भारत का वजूद है. हुक्मरानों में अगर यह सामूहिकता का भाव रहता हो तो जनता के भीतर भी यह भाव बना रहता कि….वह सुबह कभी तो आएगी. अभी तो बस वह क्रुद्ध हैं और हम क्षुब्ध ।

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रायपुर । भाजपा सरकार के दौरान सरकार के प्रचार प्रसार के नाम पर आर्थिक अनियमिताओं के आरोप सरकारी संस्था संवाद पर लगे थे इस मामले में अब नामजद एफआईआर कराई गई है ।
आईएएस अधिकारी राजेश कुमार टोप्पो एवं अन्य के खिलाफ आईएएस ने दो अलग अलग मामलो में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा, 7C , 13 (A) के तहत मामला दर्ज किया है. सरकार की ओर से EOW के अधिकारी जीवन प्रकाश कुजूर ने यह एफआईआर दर्ज कराई गयी है ।
मेकअप आर्टिस्ट की तरह डॉ रमन का चेहरा चमकाने का काम करते थे आईएएस टोप्पोः उचित शर्मा
इस मामले में मेसर्स क्यूब मीडिया एन्ड ब्रांडिंग प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाया गया है. दोनों ही मामले वर्ष 2016 -17 और 2017 – 18 में वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े है. इसमें राजेश कुमार टोप्पो के अलावा मेसर्स मूविंग फिक्सल प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद को भी आरोपी बनाया गया है. इस मामले के पहले संवाद के उमेश मिश्रा, पंकज गुप्ता, हीरालाल देवांगन, जेएल दरिया की कमेटी ने प्रारंभिक जांच की थी. जांच रिपोर्ट ईओडब्ल्यू को भेजी गई. उसी रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है. अब तक इस मामले में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. चर्चा है कि ईओडब्ल्यू केस से जुड़े अधिकारियों को नोटिस देकर बयान के लिए बुलाएगी ।
लगातार विवादों में रहे है टोप्पो
राजेश टोप्पो वो आईएएस अधिकारी है जो अक्सर विवादों में रहे है. जनसंपर्क विभाग के तत्कालीन आयुक्त रहते हुए टोप्पो ने नियमों का जमकर मखौल उड़ाया. एक नौकरशाह होने के नाते उन्हें विमान के इकोनॉमी क्लास में यात्रा करने की अनुमति है, लेकिन उन्होंने बिजनेस क्लास में सफर किया था, अपने गृह नगर रांची से दिल्ली तक की यात्रा भी सरकारी खर्चे पर की. बिजनेस क्लास में उनकी यात्रा पर सरकारी खजाने से 20 हजार 779 रुपए भुगतान किया गया. इसके अलावा दिल्ली की पांच सितारा होटल जेडब्ल्यू मैरियट में 20 हजार रोजाना के किराए पर रुकते थे. इसका भुगतान भी शासकीय खजाने से किया गया था. जबकि, एक आइएएस को 6 हजार रुपए तक प्रतिदिन किराया भुगतान की अनुमति होती है. इससे भी अधिक चौंकाने वाला सच यह है कि उन्होंने चंडीगढ़ शहर के अंदर घूमने के लिए 4 दिन में 73 हजार 626 रुपए खर्च कर डाले थे ।
    चुनाव आयोग ने हटाया था टोप्पो को
    छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होने थे, ऐसे में चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को जनसंपर्क आयुक्त राजेश टोप्पो को उनके पद से हटाने का आदेश दिया था. यह निर्णय चुनाव आयोग ने टोप्पो के एक कथित ऑडियो टेप को सुनने के बाद लिया था. इस टेप में टोप्पो एक पत्रकार से कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने की बात कर रहे थे. इसके साथ ही वो इस काम के लिए कथित रूप से पैसों की पेशकश करते पकड़े गयी थी ।

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गरियाबंद । जिला अस्पताल से महज 4 किमी की दूरी पर स्थित कोडोहरडी के जंगल में लाखों की सरकारी दवाइयां फेंक दी गई है. फेंकी गई दवाइयां में से ज्यादातर एक्सपाइरी हो चुकी है. सूत्रों के मुताबिक इन दवाइयों की कीमत लगभग 7 लाख रुपए है. फेंकी गई दवाइयों में ज्यादातर आयरन, कैल्शियम, बुखार, जुकाम व विटामिन के टॉनिक के अलावा केंद्र सरकार से चल रहे स्वाथ्य विभाग के कई सरकारी कार्यक्रम के तहत निःशुल्क वितरण किये जाने वाले दवाएं शामिल है. ऐसा अनुमान है कि इन दवाइयों का वितरण किया जाना था जो समय पर नहीं किया गया, जिसके कारण दवाइयां एक्सपायर हो गई और उन्हें फेंक दिया गया ।
वहीं जिला अस्पताल गरियाबंद में जरूरत से ज्यादा खरीदी गई दवाई के मामले में भ्रष्टाचार का मामला सामने आ चुका है. कहा जा रहा था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दवा खरीदी में मनमानी की गई थी. चर्चा थी कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के करीबी वाले धमतरी के एक फर्म से निविदा में गड़बड़ी कर दवाओं का क्रय किया गया था, मामले की जांच कलक्टोरेट से हो रही थी, तत्कालीन सीएमएचओ को हटाए जाने के बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया. वहीं दवा खरीदी घोटाले की जांच से लेकर खरीदी की प्रक्रिया के दस्तावेज सूचना के अधिकार के तहत 8 से भी ज्यादा आरटीआई एक्टिवेट ने मांगे थे. लेकिन उसकी जनकरी नहीं दी गई ।

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रायपुर । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज से आय पर चर्चा करेंगे. यह चर्चा रिंग रोड स्थित वालफोर्ट सिटी के पीछे स्थिति बीएसयूपी की कॉलोनी के बीच की जाएगी ।
चर्चा में मुख्यमंत्री गरीबों की आमदनी को लेकर उनसे बात करेंगे. कांग्रेस इस चुनाव मे गरीबों की आय दोगुनी करने का वादा कर रही है ।
गौरतलब है कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय पर चर्चा की थी. जिसमें जगह-जगह मोदी अपनी 3डी इमेज से चाय की चुस्कियों के बीच लोगों से संवाद करते थे. जिसका उनकी जीत में बड़ा योगदान माना जाता है ।
इसी तर्ज पर भूपेश बघेल आय पर चर्चा करने जा रहे हैं. इस आयोजन के ज़रिये भूपेश कांग्रेस की सबसे महत्वाकांक्षी योजना न्याय की जानकारी देकर वोटरों को साधने का प्रयास करेंगे ।
चर्चा सुबह 10:30 बजे शुरू होगी. कांग्रेस लगातार ऐसे कार्यक्रम के ज़रिये न्याय को लोगों के बीच ले जाएगी.

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गरियाबन्द  । पुल निर्माण की मांग को लेकर बहिष्कार करने वाले 11 गांव में शामिल निष्तिगुड़ा गांव में भाजपा प्रत्यशी पहुंचे, तो पूरा गांव स्वागत में जुट गया. गांव के सरपंच ने कहा कि कुछ लोग बहकावे में आकर सभा में पहुंच गए थे. बाकी 10 गांव जाने की हिम्मत भाजपाई नहीं जुटा पाए. उधर कांग्रेसी नेता झिरिपानी में सभा लेकर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की ।
दरअसल पांच दिन पहले 11 गांव के लोगों ने पुल निर्माण शूरू नहीं होते तक किसी भी मतदान में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया था. उन्ही 11 में शामिल निष्तिगुडा ग्राम जब भाजपा प्रत्याशी चुन्नी लाल साहू पहुंचे, तो ग्रामीणों ने जमकर स्वागत किया. गांव के बरगद पेड़ के नीचे सभा भी लिया. 700 की आबादी वाले इस गांव में 300 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी थी. ग्रामीणों ने भाजपा प्रत्याशी के साथ सीधे संवाद कर विकास के नाम पर मतदान करने की अपनी मंशा जाहिर कर दिया. मामले में ग्राम सरपँच शिव शंकर नायक ने कहा कि ग्राम के प्रमुख व आधे से ज्यादा लोग अभी भी अपने निर्णय ओर अडिग है. कुछ लोग बहकावे में आकर सभा में शामिल हो गए ।
कांग्रेसी नेता झिरिपानी पहुंच मतदान करने की अपील
कांग्रेस में चुनाव का कमान सभांल रहे कछरू भट्टर व प्रचार अभियान प्रभारी जनक ध्रुव आज झिरिपानी ग्राम पहुंचकर बहिष्कार के लिए मन बना चुके ग्रामीणों को मताधिकार का प्रयोग करने की अपील किया है. पुल की समस्या को भाजपा की देन बताते हुए विकास के लिए मतदान करने की अपील की है ।
अन्य 10 गांव जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए
बहिष्कार का ऐलान करने वाले सभी गांव में नेताओं का प्रवेश वर्जित का बोर्ड लगा दिए हैं, ऐसे में इन गावों में अब तक किसी भी पार्टी की प्रचार टोली या नेता ग्राम प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. आज भाजपा प्रत्याशी का काफिला बहिष्कृत गांव के सीमा से लगे ग्राम दहीगाव, डूमरबहाल, केंदूबन, झाखरपारा तो गया पर घोषित गांव नहीं जा पाए. चुन्नी लाल साहू ने कहा कि निष्टिगुड़ा में ग्रामीणों का अपार स्नेह मिला. केंद्र में सरकार बनाना है इसलिए क्षेत्रीय मुद्दा से बढ़ कर राष्ट्रीय मुद्दे को लेकर ग्रामीण सहमत है. देश के विकास के नाम पर वो जरूर वोट देंगे. बाकी अन्य गांव में भी स्थानीय नेता ग्रामीणों को मना लेंगे. पूर्व भाजपा विधायक गोवर्धन माँझी जिनके कार्य काल में सेनमूड़ा घाट पर पूल को स्वीकृति मिली थी. उन्होंने ने भी कहा कि गलती नेता राजनेता की नहीं है. प्रशासनिक चूक के कारण काम अटका है, इस बात को हर गांव में जाकर बताया जाएगा. उन्हें मतदान के अधिकार का उपयोग करने मना लिया जाएगा ।
कांग्रेसी नहीं ले रहे रूचि
बहिष्कार करने वाले 11 गांव में सागुनभाड़ी को छोड़ कर अन्य सभी 10 गांव में भाजपा को बढ़त मिलती है. 70 फीसदी वोट भाजपा के झोली में जाता है. इसलिए इन गांव के ग्रामीणों को मनाने की पहल भाजपाई ने शूरू कर दिया है, जबकि वोट बैंक के गणित में माईनस मार्किंग के चलते कांग्रेस इन्हें मनाने की पहल नहीं कर रहा है ।

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रायपुर । पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के द्वारा दिए गए इतना छोटा आदमी वाले बयान पर सियासत गर्म हो गई है. अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रमन सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि आप बड़े आदमी बन गए थे, आपको मुबारक. मैं छोटा आदमी हूं, किसान का बेटा हूं. ऐसा ही रहूंगा. जिससे सभी किसान, युवा और आम जनता के बीच उपलब्ध रह सकू ।
मुख्यमंत्री ने ये लिखा है ट्वीट में…
    हां! मैं छोटा आदमी हूं, एक किसान का बेटा हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि मैं ऐसा ही रहूं हमेशा। ताकि बस्तर से लेकर सरगुजा तक और रायपुर से लेकर सुपेबेड़ा तक हर किसान, आदिवासी, युवा और आम जनता के बीच मैं सहज उपलब्ध रह सकूं। आप ‘बड़े आदमी’ बन गए थे। वह आपको ही मुबारक, रमन जी।
लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे नेताओं का बयानबाजी भी तेज हो गया है. बड़े से बड़े नेता एक दूसरे पर तंज कसते हुए बयान दे रहे हैं. औऱ ये बयानबाजी भी स्वभाविक है क्योंकि राजनीति में बयानबाजी ना हो तो वो राजनीति भी कैसी राजनीति ।
गौरतलब है कि कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने ट्विटर हैंडल से ‘देखो आइऩा मोदी जी’ का वीडियो को लोगों के साथ शेयर किया गया है. जिसके बाद प्रतिक्रिया आने का दौर जारी है. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कांग्रेस के वीडियो पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि इतना छोटा आदमी छोटे मन से छोटी-छोटी हरकतें करता है. मजाक का पात्र बनेगा ।

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