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Author: admin
सुकमा | डीवीसी कमांडर अर्जुन को जन अदालत में सजा देने का ऐलान किया गया है. इस संबंध में नक्सली सचिव विकास के हस्ताक्षरित एक फरमान जारी हुआ है. नक्सलियों ने जारी किये गए प्रेस नोट में बताया है कि 2001 से अर्जुन नक्सली संगठन मे शामिल हुआ था. 2012 से 2015 तक अर्जुन कोन्टा एरिया कमेटी कमांडर था |
नक्सलियों का आरोप है कि डीवीसी कमांडर अर्जुन ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए. नक्सलियों का आरोप है कि अर्जुन ने उसके विचारधारा को बीच में ही छोड़कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. इस बात से वे बेहद खफा हैं. इसलिए अर्जुन को जन अदालत में सजा दी जाएगी. इधर पुलिस ने अर्जुन के सरेंडर करने की पुष्टि नहीं की है |
रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिए गए निर्देश पर प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.के.पटनायक इस समिति के अध्यक्ष रहेंगे।
छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता अथवा अतिरिक्त महाधिवक्ता, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव, महानिदेशक जेल (नक्सल ऑपरेशन प्रभारी), पुलिस महानिदेशक और बस्तर संभाग के कमिश्नर इस समिति के सदस्य होंगे।
रायपुर । स्कूल शिक्षा विभाग ने स्थानीय स्तर पर होने वाली स्कूल की वार्षिक परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। पहली से चौथी तक की परीक्षा 2 अप्रैल से शुरू होगी और 9 अप्रैल तक चलेगी। पहली से चौथी के बीच परीक्षाओं के बीच काफी दिनों का अंतर दिया गया है। 2 अप्रैल के बाद 4 अप्रैल, फिर 8 अप्रैल और उसके बाद 9 अप्रैल को परीक्षा होगी। वहीं 6वीं और सातवीं की परीक्षा 11 अप्रैल तक चलेगी।
रायपुर । राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में छत्तीसगढ़ को दो पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को बेस्ट परफार्मिंग स्टेट के अवार्ड से नवाजा गया है। इसके साथ ही अंबिकापुर राष्ट्रीय स्तर पर देश का दूसरे नंबर का सबसे स्वच्छ शहर बना है। इस सूची में स्टील सिटी के नाम से मशहूर भिलाई शहर को 11वें नंबर पर जगह मिली है। अंबिकापुर शहर ने अपनी कचरा निपटारे की अनोखी प्रणाली के चलते देशभर में यह गौरव हासिल किया है।
इंदौर के बाद अंबिकापुर देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुआ है। अंबिकापुर शहर में सफाई की यह कवायद आज से 5 साल पहले शुरू हुई थी। यहां तत्कालीन कलेक्टर रीतु सेन के द्वारा नगर निगम के सहयोग से एक व्यवस्था लागू की गई थी जिसके परिणामस्वरूप अंबिकापुर शहर एक स्वच्छ शहर बन गया।
अंबिकापुर में 40 साल पुराने डंपिंग यार्ड को सेनेटरी पार्क बना दिया गया। 25 एकड़ का यह क्षेत्र आज एक खूबसूरत बगीचे में बदल गया है। महिलाओं की समिति घरों से कचरा एकत्र कर रही है। इस कचरे की छटनी होती है। गीले कचरे के निदान के लिए कंपोस्ट मशीन लगाई है।
इसके अलावा 160 प्रकार का कचरा ठोस कचरे के रूप में मिलता है। सेनिटेशन सेंटर में इस पूरे कचरे को पृथक किया जाता है। हर महीने इसकी बिक्री होती है। वेंडर्स का नगर निगम से रजिस्ट्रेशन होता है। करीब तीन साल में अंबिकापुर नगर निगम में लगभग दो करोड़ की आमदनी कचरा बेचने से हो चुकी। इसके अलावा कंपोस्ट खाद से भी आय हो रही है।
अंबिकापुर मॉडल की पूरे देश में चर्चा हुई। शहर को अपनी श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इसके बाद यहां राष्ट्रीय स्तर की कई स्वच्छता कार्यशालाओं का भी आयोजन हुआ जिसमें देश भर से निकायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके बाद सफाई के अंबिकापुर मॉडल को राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में लागू किया।
सूची में भिलाई को मिला 11वां स्थान
भिलाई शहर का नाम देश सबसे स्वच्छ शहरों में 11वें नंबर पर है। इस औद्योगिक शहर की संरचना वर्ष 1955 में रशियन वास्तुशिल्पों के सहयोग से तैयार की गई थी। यहां पर्यावरण और उद्योग के बीच अच्छा संतुलन देखने को मिलता है। टाउनशिप में अच्छी खासी हरियाली है। इसके साथ ही यहां के लोग भी सफाई को लेकर काफी जागरूक हैं। भिलाई नगर निगम ने भी कचरे के निपटारे के लिए अंबिकापुर मॉडल को अपनाया है और इसी के साथ यहां भी सफाई के क्षेत्र में व्यापक काम हुआ।
रायपुर । इस साल विदेशी और देसी मदिरा की खपत बेतहाशा बढ़ी है। इन दोनों की खपत में करीब 42 प्रतिशत का उछाल आया है। इसमें विदेशी शराब 31.7 और देशी 12.5 फीसद बिक्री सिर्फ जनवरी माह तक हुई है। इसी गति से लगभग फरवरी माह में भी खपत रही। आबकारी के आकड़ों के मुताबिक गत वर्ष दो लाख 28 हजार 21 लीटर माल्ट अंग्रेजी शराब की खपत जनवरी तक हुई थी। जबकि इस वर्ष जनवरी माह में 38 लाख 66 हजार 633 लीटर माल्ट अंग्रेजी शराब मदिरा प्रेमी पी गए। लगभग यही हाल देशी शराब का भी रहा।
गत वर्ष 84 लाख 46 हजार 918 माल्ट लीटर की खपत हुई थी। इसके सापेक्ष में इस साल के सिर्फ जनवरी माह तक 86 लाख 99 हजार 832 लीटर की खपत बढ़ी है। आकड़ों पर गौर करें तो देशी मदिरा प्रेमी अंग्रेजी शराब प्रेमी से अधिक है।
वैसे अभी विभागीय अधिकारियों का दावा है कि अभी मार्च खत्म होने तक शराब की खपत में और भी वृद्धि होगी। 900 करोड़ रुपये की बिकी शराब आय के नजरिए से 900 करोड़ स्र्पए की शराब इस साल के जनवरी माह तक बेची जा चुकी है, जबकि पिछले वर्ष 900 करोड़ स्र्पए की आय हुई थी। इसमें देशी और विदेशी दोनों प्रकार की शराब की खपत से आई राशि भी शामिल है। यानी पिछले साल की अपेक्षा इस बार 8.6 प्रतिशत अधिक आय हुई।
मार्च तक खपत और आय में और होगी वृद्धि
अभी आबाकरी विभाग फरवरी के आकड़ों को जुटा नहीं पाया है। लेकिन मार्च तक खपत के साथ आय में वृद्धि होने की संभावना है। आबकारी अधिकारी के अनुसार मार्च तक स्टॉक में बचे देशी और विदेशी ब्रांडों के खपत पहले कराने के निर्देश दिए गए हैं।
होली के पूर्व तक पुरानी ही ब्रांड बिकेगी
होली तक सभी पुरानी ब्रांड के देशी और विदेशी शराब के स्टॉक को खपाने की रणनीति बनाई गई है। कई ऐसी ब्रांड भी हैं, जिनकी डिमांड कम है। इसमें अधिकांश ऐसी ब्रांड हैं जो कभी प्रचलन में ही नहीं रही। लेकिन पीने के शौकीन लोग इसे लेने से परहेज करते हैं।
नए साल में नई ब्रांड की फिर मिलेगी शराब
नए वित्तीय वर्ष में रायपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में नई कंपनियों के ब्रांड की शराब मिलेंगी। अपनी शराब को बेचने के लिए आधा दर्जन कंपनियों ने आबकारी को आवेदन भी दिए हैं, लेकिन इस बार बढ़े रेट पर शराब मिलेगी
अभी इसकी खपत में और वृद्धि होगी। बचे हुए स्टॉक को जल्द खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। – बीआर नेताम, प्रभारी उपायुक्त आबकारी विभाग
रायपुर । बिरगांव संतोष नगर में एक दंपत्ति ने फांसी लगाकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा दंपत्ति ने कर्ज और उधारी से परेशान होकर फांसी लगा ली। घटना देर रात करीब 2 बजे के आसपास की बताई जा रही। दंपत्ति नड्डा मुरकू बनाने का काम करता था ।
मिली जानकारी के अनुसार मोहनलाल(45) ने रात 2 बजे करीब अपनी पत्नी राधा साहू(36) और पुत्र सेवक राम(18) के साथ फांसी लगा ली। फांसी लगाने से दोनों दंपत्ति की मौत हो गई लेकिन बेटे सेवक की रस्सी अचनक टूट गई जिस वजह से उसकी जान बच गई। जिसके बाद सेवक राम ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर पुलिस जांच में जुट गई है।
रायपुर । राजधानी के शहीद स्मारक के उद्घाटन पर सियासत गरम हो गई है। भाजपा ने उद्घाटन समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को नहीं बुलाने पर भूपेश सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने एक वीडियो जारी करके कहा कि शहीदों के सम्मान की परिकल्पना भाजपा सरकार ने की थी, लेकिन सरकार इस पर राजनीति कर रही है। इस मुद्दे पर राजनीति से उपर उठकर सोचने की जरूरत है।
भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि पूर्व मंत्री राजेश मूणत के कार्यकाल में निर्मित 3डी पिक्चर के माध्यम से क्रांतिकारियों की जीवन के नित्य प्रदर्शन के लिए भव्य डोम से युक्त शहीद स्मारक का लोकार्पण 10 अक्टूबर को होना था,लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते यह कार्यक्रम टल गया।
शहीद स्मारक भवन के नवस्वरूप का बुधवार को प्रदेश सरकार उदघाटन करने जा रही है, इस पर खुशी जाहिर करते हुए प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा कि प्रदेश की जनता को मिलने वाली इस सौगात के पीछे शहर को सुन्दर स्वरूप देने की भाजपा सरकार की सोच थी।
साथ ही देश भर के क्रांतिकारियों जिसमें छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह भी शामिल है, के जीवनी से आम जनता को परिचित कराने का उद्देश्य साकार होने जा रहा है।
भवन की भव्यता एवं उद्देश्य पर उन्होंने कहा कि हर कहीं संकीर्ण मानसिकता का परिचय देने वाली कांग्रेस सरकार आज जिस स्काई वाक पर हल्ला मचा रही है, उसी पर चलते हुए शहर एवं राज्य की जनता शहीद स्मारक के समीप क्रांतिकारी वीर शहीदों के शौर्य से परिचित हो सकती थी। यह विडंबना ही है, कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को सरकार ने आमंत्रित करना भी उचित नहीं समझा। यह कांग्रेस पार्टी एवं उनके मुख्यमंत्री की संकीर्णता का परिचायक है।
खंडवा । खालवा जनपद के गांव आंवला नागौतार में रसोई गैस की टंकी फूटने पर भड़की आग से कच्चे-पक्के 15 से अधिक मकान बुरी तरह जल गए। वहीं दो मवेशियों की जलकर मौत हो गई। हादसे में ग्रामीणों के घरों में रखी हुई अनाज कपड़े सहित सभी सामग्री जलकर राख हो गई है।
अचानक आग लगने से खलबली मच गई देखते ही देखते 15 घर आग की लपटों से राख के ढेर में तब्दील हो गए। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका लेकिन तब तक आदिवासी परिवारों का सब कुछ जलकर खाक हो गया था।
ग्रामीणों द्वारा डायल हंड्रेड वे फायर फाइटर को सूचना दी गई लेकिन फायर फाइटर खालवा ब्लाक में दो आंवलिया होने से दूसरे आवलियां पहुंच गई। इस दौरान ग्रामीणों ने आसपास मौजूद पानी के साधनों से आग को बुझाने की कोशिश कुछ घरों में अनाज सहित चांदी के आभूषण भी जलकर खाक हो गए। प्रशासन द्वारा आग से प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर
के आवश्यक हर संभव मदद करने का प्रयास किया जा रहा है।
आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने पहुंच कर मोर्चा संभाला। कलेक्टर विशेष गढ़पाले और एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा की मौजूदगी में प्रशासनिक अमला आग बुझाने में जुटा रहा। पंचनामा कार्रवाई कर प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न और संभावित आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए हैं। कलेक्टर और एसपी ने स्वयं अपने हाथों से हादसे के शिकार लोगों को खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की चीजें वितरित की।
राज्यभर में चिटफंड कपनियों ने अवैध तरीके से कई वर्षों से फर्जीवाड़े का कारोबार कर पैसे दोगुना करने, जमीन और मकान देने समेत अन्य तरीका से डेढ़ दशक में करीब 1100 करोड़ रुपए की ठगी की और रकम समेट कर फरार हो गए, लेकिन उन्होंने राज्य में निवेश के पैसे से अर्जित संपत्ति इतनी कम छोड़ी है कि निवेशकों की रकम वापसी की राह कठिन हो गई है।
160 चिटफंड कंपनियों ने राज्य में सिर्फ 400 करोड़ रुपए की संपत्ति ही छोड़ी है। इनमें भी अधिकांश जमीनें और कमर्शियल भवनों में दफ्तर हैं। सभी संपत्तियाे को पुलिस ने जप्त किया है, लेकिन मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इन्हें नीलाम करने में इतने पचड़े हैं कि सालों गुजर जाने पर भी नीलामी का रास्ता साफ नहीं हुआ। ऐसी दशा में निवेशकों के पैसे वापसी पर संकट खड़ा हो गया है।
दरअसल चिटफंड कंपनियों द्वारा निवेशकों को लुभाने के लिए कई जगहों पर जमीन खरीदकर प्लाटिंग की गई। साथ ही दफ्तर खोलने बहुमंजिला अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदे। निवेशकों के पैसे समेट कर फरार होने के बाद सिर्फ जमीनें और फ्लैट ही पुलिस और प्रशासन के हाथ लगे हैं। इनकी कीमत भी ठगी की रकम की आधे से भी कम है। इन कंपनियों की संपत्ति नीलाम भी की जाती है तो निवेशकों की रकम वापसी के लिए 700 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी।
इतनी छोड़ गए संपत्ति
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राजधानी समेत राज्यभर में चिटफंड कंपनियों के संचालक करीब 300 से 400 करोड़ रुपए की संपत्ति छोड़ गए हैं। इनमें सिर्फ रायुपर में करोड़ों रुपए की संपत्ति को नीलाम करने साल 2016 से प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक उनके नीलाम करने पर फैसला नहीं हो सका। इसी तरह बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी समेत राज्यभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति का ब्योरा पुलिस के पास है।
लाखों ने अरबों किया निवेश
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक राज्यभर मे 160 चिटफंड कंपनियां अवैध रुप से छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित रही थीं। इनमें करीब 2 लाख 70 हजार निवेशकों ने 11 अरब 5 करोड़ रुपए निवेश किया, लेकिन एक भी निवेशक को कंपनी की तरफ से पैसे वापस नहीं किए गए हैं।
कुछ मामले में कोर्ट से स्टे
जानकारी के मुताबिक अधिकांश चिटफंड कंपनियों की छत्तीसगढ़ के अलावा भी दूसरे राज्यों में संपत्ति है। उनका वहां की पुलिस ने जप्त किया है और कोर्ट में मामले लंबित हैं। ऐसी संपत्ति को नीलाम करना कठिन होता है। यही नहीं, दर्जनभर चिटफंड कंपनियों की संपत्ति पर हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है। वहां से आदेश मिलने के बाद भी उनकी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
चिटफंड कंपनी की इतनी संपत्ति
– निर्मल इंफ्रा होम कार्पारेशन लिमिटेड भोपाल का डगनिया में 35 लाख का मकान और खरोरा में .834 हेक्टेयर जमीन कीमत 25 लाख
– आरोग्य धनवर्षा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मंदिर हसौद के उमरिया गांव में 5 डिसमिल की कीमत करीब 6 लाख
– देव्यानी प्रापर्टी प्राइवेट लिमिटेड की अमलीडीह में 3 जगहों की .357 हेक्टेअर जमीन की कीमत करीब 18 करोड़
– बीएन गोल्ड रियल स्टेट एलाइड लिमिटेड की एमएम शॉपिंग माल में 244 स्क्वॉयर फीट व वार्ड 2 में 4326 स्क्वायर फीट जमीन
– गोल्ड की इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ओर डेसीड बेनीफिट फंड लिमिटेड की 11 करोड़ रुपए की प्रापर्टी
ब्योरा लिया है
चिटफंड कंपनियों की छोड़ी संपत्ति का ब्योरा इकट्ठा किया गया है। उसकी कीमतों का अध्ययन किया जा रहा है।
– हेमकृष्ण राठौर, आईजी, सीआईडी
छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को विश्व बैंक के साथ एक करार किया है। जिसके तहत छत्तीसगढ़ सरकार विश्व बैंक से 25.2 मिलियन डॉलर यानि कि करीब 180 करोड़ रुपए कर्ज लेगी।
इस ऋण समझौते के तहत मिली राशि से छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के लिए एक एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली विकसित करेगी, साथ ही बेहतर सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के लिए एक प्लेटफार्म भी विकसित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट एंड अकॉउंटीबिलिटी प्रोग्राम के तहत छत्तीसगढ़ सरकार और विश्व बैंक के बीच यह समझौता हुआ है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित अत्याधुनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लाना है, जिसमें वर्तमान ट्रेजरी सॉफ्टवेयर के स्थान पर नए और आधुनिक आईएफएमआईएस (एकीकृत वित्तीय प्रबंधन और सूचना प्रणाली) प्रणाली स्थापित होगी एवं प्रशिक्षण के माध्यम से वित्त विभाग के अधिकारियों की क्षमता विकसित करके राजकोषीय सेल स्थापित किए जाएंगे।
यह कार्यक्रम पांच साल की अवधि के लिए है और इसमें भाग लेने वाले महत्वपूर्ण विभागों में वित्त विभाग और इसके संचालनालय कोष लेखा एवं पेंशन, राज्य शहरी विकास प्राधिकरण, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अलावा राज्य सरकार के अन्य राजस्व अर्जित करने वाले विभाग शामिल हैं। अपर मुख्य सचिव (वित्त) अमिताभ जैन द्वारा कार्यक्रम की सुनयोजित रूपरेखा तैयार करने में उल्लेखनीय मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
डॉ. कमलप्रीत सिंह, सचिव वित्त, छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य सरकार की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि समीर कुमार खरे, अतिरिक्त सचिव भारत सरकार और हिशम अब्दो, विश्व बैंक के एक्टिंग कंट्री डायरेक्टर ने भारत सरकार और विश्व बैंक की ओर से हस्ताक्षर किए।