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बिलासपुर  ।  मामला बिलासपुर जिले के सरकंडा इलाके का है. आरोपी रवि कौशिक महिला के यहां ड्राइवरी का काम करता था. उसका घर में आना जाना लगा रहता था. आरोपी उसके पति के गैरमौजूदगी में भी घर में रहता था. दो साल पहले आरोपी ने महिला का बाथरूम में नहाते समय वीडियो बना लिया. फिर वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर दो साल तक दुष्कर्म करता रहा । 
महिला बार-बार धमकी और दुष्कर्म के लिए दबाव डालने से तंग आ गई और इसकी जानकारी अपने पति को दी. फिर पति-पत्नी ने सिटीकोटवाली थाने में आरोपी ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज करवाया. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी रवि कौशिक को गिरफ्तार कर लिया है. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है । 

 
 
बिलासपुर । बिलासपुर के सीईओ जिला पंचायत के दफ्तर में भीषण आग लगी गई है. आग लगने की वजह से दफ्तर में चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई । कर्मचारियों ने कार्यालय से भागकर अपना जान बचाई है।      
बताया जा रहा है कि जिला कार्यालय में आग शार्ट सर्किट से लगी है. आग की लपटों से कई महत्वपूर्ण फाइल जलकर खाक हो गए है. जिससे लाखों के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है. आग की लपटे उतनी तेज है कि दूर से दिखाई दे रही है. चारों तरफ धुएं का गुब्बार दिख रहा है।      
घटना सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई. सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है।      
वहीँ घटना की सुचना मिलते ही मौके पर स्थानीय विधायक शैलेश पाण्डेय भी पहुँच गए हैं जहाँ पर उन्होंने अधिकारीयों को तत्काल राहत कार्य के निर्देश दिए हैं ।      

 
बिलासपुर। बचपन में ही मेरे मा-बाप खत्म हो गए थे। एक एकड़ की जमीन में खेती किसानी कर जीवन यापन कर रही थी कि मुझसे एक गलती हो गई। मै एक लड़के के प्यार में पड़ गई और उस पर विस्वास किया। लेकिन मुझे पता नहीं था कि वो मुझे बीच मझधार में छोड़कर चला जाएगा। अब मैं बिन ब्याही मां हूं और मुझे समाज का सामना भी करना है। मुझे मेरी चिंता नहीं बस चिंता है तो इस बच्चे की इसे कैसे पालूंगी। मै चाहती तो हूं कि इसे किसी को गोद दे दूं लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा है। दबी जुबां से कहे गए ये शब्द हैं एक 21 वर्षीय बिन ब्याही मां के हैं जो जिला अस्पताल में डॉक्टरों को अपनी आपबीती सुना रही थी।
एक सप्ताह तक चला जिला अस्पताल में इलाज : रायगढ़ क्षेत्र की एक युवती को 14 मई को जिला अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। युवती के साथ कोई नहीं था। भर्ती होने के दूसरे दिन युवती ने एक बेटी को जन्म दिया। मां की हालत ठीक थी लेकिन नवजात कि तबियत बिगडऩे के कारण जिला अस्पताल के एसएनसीयू बार्ड में भर्ती कराया गया था। मां और उसका बच्चा पूरे एक सप्ताह तक जिला अस्पताल में रहे और 20 मई को जिला अस्पताल से छुट्टी लेकर चले गए।
नवजात को चुराने की कोशिश हुई : जिला अस्पताल की नर्सों ने बताया कि जिस दिन युवती ने बच्चे को जन्म दिया था उसी दिन युवती का कोई रिलेटिव युवक आया और नवजात को खिलाने के बहाने गोद में ले लिया। मौका देखकर भागने लगा तो मौजूद नर्सों ने उसे पकड़ लिया। नवजात को युवक से छुड़ाया गया। बाद में पता चला कि आरोपी युवक युवती का जीजा था। इस मामले ने पूरे अस्पताल प्रबंधन को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था कि आखिर एसएनसीयू से सुरक्षित वार्ड में बगैर परमिशन के कोई कैसे नवजात को चुरा सकता है। समय रहते युवक की हरकत पकड़ में आ गई नहीं तो सिविल सर्जन को इस मामले मे जबाब देते नहीं बनता।
सिविल सर्जन अंजान, अस्पताल से कब चली गई युवती:
अस्पताल की नर्सों ने कहा कि बीते दिन ही युवती अपने बच्चे को लेकर घर चली गई है। उसके साथ उसके कुछ रिस्तेदार भी थे। वहीं इस मामले में सिविल सर्जन एसएस भाटिया कहा कहना है कि मुझे अभी जानकारी नहीं है कि युवती की छुट्टी हो गई है कि नहीं मै स्टाफ से पूछता हूं। गंभीर मामला सामने आने के बाद पुलिस और अन्य संस्थाएं भी युवती से संपर्क कर रहीं हैं। पुलिस ने बयान दर्ज किए हैं। जांच और शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच करेगी।

बिलासपुर । सुकमा जिला अस्पताल में डॉक्टर के उपस्थित नहीं होने और ऑक्सीजन सिलेंडर खाली होने के कारण मरीज की मौत मामले में हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही माना है. हाईकोर्ट ने पीड़िता को दस लाख रुपए मुआवजा और बच्चे के नाम से ढाई लाख एफडी जमा करने का सरकार को निर्देश दिया गया है. राशि का भुगतान 2 महीने के अंदर करने के लिए कहा है ।
दरअसल बस्तर के जगदलपुर में रहने वाले हितेश देवांगन की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने बीपीएल कार्डधारी होने के आधार पर राज्य शासन के संजीवनी योजना के तहत आर्थिक मदद की गुहार लगाते हुए सिविल सर्जन को आवेदन दिया था. सिविल सर्जन ने इसे राज्य शासन को फारवर्ड कर दिया था, लेकिन इस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया. इधर मरीज की स्थिति बिगड़ने पर जगदलपुर के डॉक्टरों ने हैदराबाद ले जाने की सलाह दी. मरीज के परिजन उसे कार से जगदलपुर से हैदराबाद ले जा रहे थे । इसी दौरान सुकमा के पास स्थिति ज्यादा बिगड़ने पर उसे दोपहर के करीब 2.15 बजे सुकमा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टर उपस्थित नहीं थे. सांस लेने में तकलीफ होने के कारण परिजनों ने ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत बताई, लेकिन जिला अस्पताल में उपलब्ध ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था. कुछ देर बाद मरीज की मौत हो गई ।
पत्नी ने सरकारी अस्पताल की स्थिति और मुआवजा अनुकंपा नियुक्ति की मांग की, जस्टिस गौतम भादुड़ी ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी अस्पताल की इसे घोर लापरवाही माना और पत्नी को दस लाख मुवायजा और बच्चे के नाम से ढाई लाख एफडी जमा करने का सरकार को निर्देश दिया है. जस्टिस भादुड़ी ने इस मामले में सरकारी अस्पताल के लिए कमेटी बनाये जाने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. पूर्व में 2016 में फर्जी रिपोर्ट दी थी की सरकारी अस्पताल की अव्यवस्था दूर कर दी गई है, लेकिन कोर्ट स्वास्थ सुविधा पर लापरवाही के लिए नारजगी भी जाहिर की और नए सिरे से रिपोर्ट देने का आदेश दिया है ।

बिलासपुर । विराट अपहरण कांड मामले में पकड़ाए पांचवे आरोपी राज किशोर को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। एक और खुलासा हुआ कि उसने पुलिस को गुमराह करने के लिए अपहरण में उपयोग की गई डस्टर कार को रामानुजगंज में छिपाया था। शनिवार देर रात पुलिस ने कार बरामद कर ली। विराट अपहरण कांड में पकड़े गए पांचवे आरोपी राजकिशोर पिता शत्रुघन सिंह ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि विराट के अपहरण के बाद वैगनआर कार से विराट को निकाल करवह अपनी डस्टर कार सीजी 04 के आर 5232 में बैठाकर घर ले गया था।
21 मई को वह रामानुजगंज चला गया और फिरौती के लिए विराट के पिता को कॉल किया। इसके बाद वह कार लेकर बिहार चला गया था। 23 अप्रैल को कार लेकर वह फिर से रामानुजगंज पहुंचा और बस स्टैण्ड के पीछे सुलभ काम्प्लेक्स के पास खाली जगह पर कबाड़ वाहनों के बीच उसने अपनी कार भी खड़ी कर दी थी, ताकि पुलिस को कार मिलने पर यह लगे कि आरोपी रामानुजगंज में हैं। इसके बाद वह फिर बिहार चला गया था। शनिवार देर रात पुलिस राज किशोर को लेकर रामानुजगंज पहुंची और कार को बरामद किया।

 
बिलासपुर । प्रदेश की पुलिस को हिला देने वाले विराट अपहरण कांड का मुख्य आरोपी 18 दिन बाद आज शुक्रवार को आखिरकार ​पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। बिहार के मीरगंज में छिपे आरोपी राजकिशोर को गिरफ्तार किया है। इसके पहले 27 अप्रैल से विराट की सगी बड़ी मां नीता सराफ समेत 4 आरोपी जेल में बंद हैं। किडनैपिंग के बाद किडनैपर्स 6 करोड़ रुपए फिरौती की मांग की थी। बता दें 20 अप्रैल की रात 8.20 पर बर्तन व्यवसायी विवेक सराफ के 6 वर्षीय बेटे विराट सराफ का करबला रोड स्थित भाजपा कार्यालय के सामने उनके घर से अपहरण किया गया था। अपहरणकर्ता कार से आए थे और उनका मुंह कपड़े से ढका हुआ था। एक सफ़ेद कलर की वेगनआर में सवार दो नकाबपोश अपहरकर्ताओं ने घर के बाहर खेल रहे विराट से पहले उसका नाम पूछा फिर उसके पिता का नाम पूछा और फिर गाड़ी में बिठाकर पुराने बस स्टैंड की ओर भाग गए थे। किडनैपिंग के बाद किडनैपर्स 6 करोड़ रुपए फिरौती की मांग की थी।

 
बिलासपुर। तखतपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महुआ शराब और महुआ लहान का जखीरा बरामद किया है। मामला जिले के तखतपुर थाना क्षेत्र के अतिसंवेदनशील माने जाने वाले ग्राम सोनबंधा कहा है। जहां स्थानीय पुलिस ने गांव क सरपंच पति ​शिवदास अनंत समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं मौके पर आरोपियों के पास से 640 लीटर महुआ शराब और दो हजार किलो महुआ लहान जब्त किया है जिसकी जुमला राशि करीब 70 हजार रुपए है। पुलिस आरोपियों को हिरासत में लेकर कार्रवाई में जुट गई है।

 
 
 
बिलासपुर । नागरिक आपूर्ति निगम में घोटाला मामले के आरोपी आईपीएस रजनेश सिंह को हाईकोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने रजनेश सिंह के खिलाफ किसी भी तरह के कड़े कदम उठाने, गिरफ्तारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी है. कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया है कि रजनेश सिंह के खिलाफ फोर्सली कदम नहीं उठाए जाएंगे. लेकिन रजनेश सिंह को भी SIT जाँच में सहयोग करने का निर्देशित किया गया है. रजनेश सिंह को राहत तो मिल गई लेकिन उन्हें भी अब जाँच में सहयोग करने के साथ जवाब देने के ईओडब्ल्यू के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा..आपको बता दें कि नान मामले के आरोपी मुकेश गुप्ता को भी इसी तरह की राहत कोर्ट से मिली थी । 

 
 
 
 बिलासपुर। हाईकोर्ट ने रेलवे एक्ट में उम्रकैद का प्रावधान नहीं होने के कारण ट्रेन हाईजैक करने के आरोपितों को दुर्ग सत्र न्यायालय ने मिली सजा को निरस्त किया है। हालांकि अन्य धाराओं में सुनाई गई सजा को यथावत रखा है। आरोपितों ने अपहरण के आरोपित को भगाने के लिए 2016 में जनशताब्दी एक्सप्रेस को हाईजैक किया था।
दुर्ग के व्यवसायी जयचंद वैद के अपहरण मामले में पुलिस ने अपहरणकर्ता उपेन्द्र उर्फ कबरा समेत अन्य को धनबाद से गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया था। आरोपित कबरा को अपहरण के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा होने पर बिलासपुर केन्द्रीय जेल में रखा गया था।
छह मार्च 2016 को आरोपित उपेन्द्र को आरक्षक वीरेन्द्र समेत तीन आरक्षक पेशी में लेकर दुर्ग गए थे। पेशी होने के बाद आरक्षक आरोपित को गोंदिया-रायगढ़ जनशताब्दी एक्सप्रेस से वापस बिलासपुर आ रहे थे। दुर्ग से छूटने के बाद और सरोना से पहले कुछ लोगों ने चेनपुलिंग कर ट्रेन रोकी।
बदमाशों ने इंजन में चढ़कर लोको पायलट धीरेन्द्र कुमार ठाकुर व एके तारम को बंधक बनाकर ट्रेन को हाईजैक कर लिया। खम्हरिया के पास आरोपितों ने गाड़ी रुकवाई और आरक्षकों की आंखों में मिर्ची पावडर डालकर उपेन्द्र को लेकर भाग गए। मौके पर पहले से वाहन की व्यवस्था थी। लेकिन आरोपितों की संख्या अधिक होने पर सभी एक वाहन से नहीं भाग पाए। ऐसे में सरोना की ओर से आ रही एक कार को लूट कर सभी भाग गए।
रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त होने से कुछ आरोपित पुलिस के हाथ लगे। इस मामले में पुलिस ने आरोपित उपेन्द्र सिंह, अनिल सिंह, प्रीतम सिंह, भागने में सहयोग करने वाले शंकर साव, बिल्लू सहित 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया गया। इस मामले में पुलिस ने तीन अलग-अलग अपराध दर्ज किया था।
रेल चालक की रिपोर्ट पर जनशताब्दी एक्सप्रेस को हाईजैक करने के आरोप में रेलवे एक्ट के तहत, वहीं सरोना पुलिस ने कार मालिक की रिपोर्ट पर डकैती व आरक्षकों की रिपोर्ट पर अलग से अपराध दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। दुर्ग के सत्र न्यायालय ने सभी आरोपितों को अलग-अलग धारा में सजा सुनाई एवं ट्रेन हाईजैक करने के मामले में रेलवे एक्ट के तहत सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
आरोपितों ने अधिवक्ता बीपी सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील पेश की। जस्टिस एमएम श्रीवास्तव व जस्टिस विमला सिंह कपूर की डीबी ने सुनवाई हुई। डीबी ने रेलवे एक्ट में उम्रकैद का प्रावधान नहीं होने पर सत्र न्यायालय के आदेश को रद किया है। कोर्ट ने अन्य धाराओं में सुनाई गई सजा को यथावत रखा है।

 
 
 
बिलासपुर । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक पद का प्रभार अजय विजयवर्गीय ने बुधवार को ग्रहण कर लिया है. विजयवर्गीय पश्चिम मध्य रेलवे महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं. इसके अलवा वे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, कोलकता में मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक के रूप में भी कार्य कर चुके है. विजयवर्गीय उससे पूर्व में पश्चिम मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के पद पर भी कार्य कर चुके हैं. आपको बता दें कि इससे पहले सुनील सिंह शोईन जीएम के पद पर कार्यरत थे. 30 अप्रैल को वे सेवानिवृत्त हो गए ।