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 पंचायत तंत्र – रायपुर। सोनिया गांधी को पार्टी अध्यक्ष पद पर बने रहने मान-मनौव्वल का दौर जारी है। कांग्रेस शासित राज्यों के कई बड़े नेता-मंत्री सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बने रहने अपील कर रहे हैं। मंत्री टीएस सिंहदेव ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अध्यक्ष के पद पर बरकरार रहते हुए मार्गदर्शन देने की गुजारिश की है। टीएस सिंहदेव ने पार्टी की अंदरुनी बातों पर सार्वजनिक रूप से हो रही चर्चा के बीच अपनी बात कहने की मजबूरी बताते हुए कहा कि अगर आप स्वास्थ्यगत अथवा अन्य किसी कारण से पद पर नहीं रहना चाहती हैं तो राहुल गांधी को निश्चित तौर पर पार्टी अध्यक्ष पद का दायित्व संभालना चाहिए। 
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में आज सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश कर दी है। उन्होंने कहा कि मुझे रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू करें। सोनिया गांधी ने बीते कल रविवार को भी पार्टी के नेताओं से नया अध्यक्ष खोजने को कहा था। राहुल गांधी पहले ही पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर चुके हैं।

पंचायत तंत्र -नई दिल्ली। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के नतीजों का ऐलान किया जा रहा है। देशभर में छत्तीसगढ़ को सबसे स्वच्छ राज्य का दर्जा मिला है। सर्वे में पाटन 25 हजार की जनसंख्या में सबसे स्वच्छ पाया गया है। वहीं 25 से 50 हजार की जनसंख्या में जशपुर सबसे स्वच्छ है। तो 50 हजार से 1 लाख की जनसंख्या में धमतरी सबसे स्वस्छ पाया गया है। 1 से 10 लाख की जनसंख्या में अंबिकापुर सबसे स्वच्छ शहर है। वहीं देश में छत्तीसगढ़ सबसे साफ राज्य घोषित किया गया है। छत्तीसगढ़ के सभी शहर ODF घोषित किया गया है।
शहरी विकास मंत्रालय के मुताबिक, प्राचीन पवित्र शहर वाराणसी गंगा नदी के किनारे बसा सबसे साफ शहर है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी लोकसभा में शहर का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने इस उपलब्धि के लिए शहर के लोगों को प्रेरित किया है।

 
 
 पंचायत तंत्र- अयोध्या । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रजा ने सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड को सुझाव दिया है अयोध्या में बन रही मस्जिद का नाम अगर रखना है तो मोहम्मद साहब के नाम पर नाम रखा जाए और इसे “मस्जिद ए मोहम्मदी” का नाम दिया जाए ।
मोहसिन रजा ने कहा कि इस देश में बाबर के नाम पर कोई भी चीज स्वीकार नहीं होगी. वह मस्जिद हो या कोई और क्योंकि बाबर ने कोई अच्छा काम नहीं किया. बाबर के नाम पर मुसलमानों के सभी फिरके भी एकमत नहीं होंगे और हम भी तो स्वीकार नहीं करेंगे ।
मोहसिन रजा ने कहा, जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम राम पुरुषों में उत्तम हैं, उसी तरीके से पैगंबर मोहम्मद साहब मुसलमानों में महापुरुष हैं और उन्हें हिंदुओं में भी उतना ही सम्मान प्राप्त है. इसलिए अगर इस मस्जिद का नाम ही रखना है तो इसका नाम “मस्जिद ए मोहम्मदी” रखा जाए, यह मेरा सुझाव सुन्नी बोर्ड को है ।
मोहसिन रजा ने कहा, रही बात योगी जी के वहां के कार्यक्रम में शामिल होने की तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें मस्जिद बनाने की अनुमति मिली है तो वहां मस्जिद बनेगी और जब भी किसी अच्छे कॉलेज के लिए किसी को भी बुलाया जाएगा, चाहे मुझे बुलाया जाए या फिर बीजेपी में किसी भी बड़े पद पर बैठे हुए व्यक्ति को, तो सभी लोग जाएंगे. अच्छे काम के लिए हम लोग सभी जगह जाते हैं ।
 

 
पंचायत तंत्र- अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास (Mahant Nritya Gopal Das) ने शनिवार को एक क्विंटल सोना-चांदी (Gold-Silver) और पैसे राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिए. महंत नृत्य गोपाल दास को राम भक्तों ने बीते एक महीने में ये सोना-चांदी और पैसे दान में दिए थे. महंत नृत्य गोपाल दास ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को एक क्विंटल सोना-चांदी और पैसे सौंप दिए. बता दें कि रामलला की आधारशिला रखने से पहले ही राम भक्तों के द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और महासचिव के पास सहयोग की राशियां मिलने लगी थीं. अब तक राम मंदिर ट्रस्ट को तकरीबन 30 करोड़ रुपये और कई टन सोना और चांदी दान में मिल चुके हैं ।
एक क्विंटल से ज्यादा सोना और चांदी आया
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर निर्माण को लेकर पिछले 2 महीने से ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के पास आ रहे राम भक्त कुछ ना कुछ दे रहे थे. विशेष रुप से चांदी दे रहे थे. वही मणिराम दास छावनी के पुजारी दिवंगत बजरंग दास ने भी मंदिर निर्माण के लिए 40 किलो के चांदी के ईंट दी थी. ऐसे ही 10 किलो 1 किलो 5 किलो कुल मिलाकर एक क्विंटल चांदी रखी थी और सोने के दाने भी थे जिसे आज सुरक्षित रखने के लिए ट्रस्ट को सौंपा है ।
2.महंत नृत्य गोपाल दास को राम भक्तों ने बीते एक महीने में ये सोना-चांदी और पैसा चढ़ाया था.5 फीसदी रिटर्न की गारंटी गोल्ड बांड में सोने में आने वाली तेजी का फायदा तो मिलता ही है. इस पर सालाना 2.5 फीसदी ब्याज भी मिलता है. ब्याज निवेशक के बैंक खाते में हर 6 महीने पर जमा किया जाएगा. अंतिम ब्याज मूलधन के साथ मेच्योरिटी पर दिया जाता है. मेच्योरिटी पीरियड 8 साल है, लेकिन 5 साल, 6 साल और 7 साल का भी विकल्प होता है. अगर सोने के बाजार मूल्य में गिरावट आती है तो कैपिटल लॉस का खतरा भी हो सकता है ।
सभी तीर्थस्थलों की मिट्टी और जल मंगाया जा रहा है
अयोध्या में राम जन्मभूमि की आधारशिला रखे जाने के लिए ट्रस्ट के द्वारा सभी तीर्थ स्थलों की मिट्टी और जल मंगाया गया था और आज भी उसका लगातार आना जारी है. भारत के प्राचीन तीर्थ स्थल और समुद्र सरोवर और कुंडों के जल का आना अनवरत जारी है. शनिवार को बुलंदशहर से द्वादश महा लिंगेश्वर महापीठ 11 वर्षों से अभिमंत्रित रुद्राक्ष तथा 21 अभिमंत्रित चांदी के सिक्के 12 ज्योतिर्लिंग के मिट्टी और जल चांदी के नाग-नागिन के जोड़े वास्तु दोष निवारण यंत्र और नौ रत्नों को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास को सौंपा गया ।
ट्रस्ट के सदस्यों से यह मांग की गई है कि यह सारा सामान राम जन्मभूमि के नींव के अंदर डाला जाए, जिससे कि मंदिर निर्माण की बाधाएं समाप्त हो और यथाशीघ्र राम मंदिर का निर्माण शुरू हो. राम मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए अकेले महंत नृत्य गोपाल दास की मणिराम दास छावनी पर एक क्विंटल से ज्यादा सोना और चांदी आया है, जिसको आज ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के माध्यम से ट्रस्ट को सौंपा गया है  ।
आधारशिला 5 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने रखा था
आपको बताते चलें कि राम मंदिर निर्माण की आधारशिला 5 अगस्त को प्रधानमंत्री के रखे जाने के बाद भी लगातार श्रद्धालु सोना और चांदी दे रहे हैं. जिसको ट्रस्ट बाकायदा स्वीकार कर रहा है. सभी सामान एक जगह सुरक्षित रखा जा रहा है. रामलला के मंदिर निर्माण के निमित्त राम भक्तों में उल्लास है और ज्यादा से ज्यादा राम भक्त राम मंदिर के निर्माण में सहयोग करना चाहते हैं ।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास की माने तो जो कुछ भी रामलला के मंदिर के निर्माण के निमित्त आ रहा है. वह राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास भेजा जाएगा. अभी संपूर्ण आकलन करके बताना मुश्किल है कि कितनी चांदी और सोने का सामान आया है ।
मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुए लोग घर-घर जाएंगे
ट्रस्ट का कहना है कि अगले कुछ दिनों में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुए लोग घर-घर जाएंगे और राम भक्तों से सहयोग मांगेंगे. मंदिर निर्माण की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और जल्दी मंदिर निर्माण शुरू होगा हमारी इच्छा है. 2022 की रामनवमी भगवान के गर्भ ग्रह में बनाया जाए मौजूदा समय में फैली महामारी की वजह से कार्य में देरी जरूर हुई है, लेकिन उसके बाद भी हमारी प्राथमिकता रहेगी कि हम समय से कार्य पूरा कर लें ।
 

पंचायत तंत्र- अयोध्या l राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार सुबह अयोध्या पहुंचे। पीएम मोदी तकरीबन साढ़े 11 बजे साकेत महाविद्यालय के ग्राउंड पर विमान से उतरे और सीधे हनुमानगढ़ी दर्शन के लिए रवाना हो गए। पीएम मोदी का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत किया। प्रधानमंत्री हनुमानगढ़ी में बजरंगबली का आशीर्वाद लेकर बहुप्रतीक्षित राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। पीएम मोदी निर्धारित मुहूर्त में भूमि पूजन के साथ मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी। इनमें नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा, अजिता, अपराजिता, शुक्ला व सौभाग्यनी शामिल हैं। पूजन के बाद इन शिलाओं को राम मंदिर में सुरक्षित रखा जाएगा। पुन: नींव के लिए गर्भगृह का गहराई में उत्खनन होने पर रामलला के सिंहासन के ठीक नीचे इन्हें रखवाया जाएगा।
अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। इस दौरान, पीएम के साथ यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद हैं।

 
पंचायत तंत्र- स्वाभाविक है कि विकास दुबे जैसे दुर्दांत आतंकी के साथ किसी की सहानुभूति नहीं हो सकती। विकास दुबे और उसके गैंग ने 8 पुलिस वालों को जिस बेरहमी से मारा उसके बाद जनमानस में जो गुस्सा था वो सबने देखा ही है।महाकाल परिसर में जो हुआ वो लोगों के गले उतर नहीं रहा था। अब एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वाभाविक है कि विकास दुबे भारतीय कानून व्यवस्था के तहत सख्त से सख्त सजा का हकदार था। लेकिन जिन परिस्थितियों में यह सब कुछ घटा वो स्वाभाविक प्रतीत नहीं हो रहीं हैं, इसलिए सवाल भी स्वाभाविक हैं।
कोई सवाल अगर पुलिस नाम की संस्था के हौसले कम करते हों तो व्यापक जनहित में ऐसे सवालों को कुछ देर के लिए रोक लीजिए। गहरी सांस लीजिए,थोड़ा सोचिए, फिर तय कीजिये कि कोई सवाल यदि पुलिस के लोकतांत्रिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए ज़रूरी हों तो भी क्या उनके लिए जगह न रखी जाए? सोचिए कि लोकतंत्र कानून के राज से मजबूत होगा या अराजकता से?
जिस समय आप किसी ऐसे हत्यारे को सरेआम गोलियों से भून डालने की कामना कर रहे होते हैं तब सोचिए कि क्या आपने कभी उस समय एक सवाल भी किया था, जब आपकी आँखों के सामने कोई एक व्यक्ति अपराध करते करते विकास दुबे बन जाता है ।
सोचिए कि सड़क पर त्वरित न्याय से खुश होने वाले हम या आप क्या कभी उस व्यवस्था पर सवाल उठा भी पाते हैं जो विकास दुबे बनाती है? सोचिए कि जब आप किसी चुनाव में वोट देने के लिए घर से निकलते हैं तो क्या आपने कभी यह सोचा था कि आपको एक अपराध मुक्त,सभ्य और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए वोट देना है? सोचिए कि वोट देते समय आपकी प्रज्ञा का हरण कौन कर जाता है! सोचना छोड़िए हममें से करीब-करीब आधे से कुछ कम तो वोट भी नहीं देने जाते ।
कानपुर एनकाउंटर ऐसी कोई इकलौती घटना नहीं है जिस पर तकनीकी सवाल उठें या अंतहीन बहस होती रहे।किसी दुर्दांत अपराधी की मौत का शोकगीत कोई नहीं गाना चाहेगा लेकिन कानपुर एनकाउंटर फिर एक ऐसा मौका ज़रूर है कि हमको आपको यह तय करना होगा कि हम कैसा समाज चाहते हैं,कैसा देश चाहते हैं? अगर समाज ऐसा ही हो जो ना विकास दुबे बनने की प्रक्रिया पर मुंह खोले और ना जिसमें यह सवाल करने की इच्छा हो कि जब घटना स्थल से 2 किलोमीटर पहले मीडिया को रोक दिया गया था तब क्या एनकाउंटर हो चुका था,तो संतोष कीजिये कि अब आप लगभग ऐसे ही समाज का हिस्सा हैं।लेकिन अगर आपको लगता है कि आपको कानून का राज चाहिए, आपको ऐसा समाज चाहिए जिसमें हम आप जैसे नागरिकों की न्याय व्यवस्था पर आस्था अटूट रहे तो इसके लिए आपको सिर्फ सवाल पूछने हैं। आपको सिर्फ इतना ही तो करना है कि टीवी एंकर्स के नज़रिए से सब कुछ देखना छोड़ देना है और अपने विवेक को काम पर लगाना है। जब हम ऐसा कर पाएंगे तब यह भी तो देख पाएंगे कि वो कौन सी ताकते हैं,वो कौन सी प्रवृत्तियां हैं,वो कौन सी साज़िशें हैं जो हमें सवाल करने से रोकती हैं,जिन्होंने हमारी चेतना का हरण कर लिया है,जो हमें मजबूर कर रहीं हैं कि हम इस व्यवस्था में बस ताली-थाली पीटने वाले दर्शक बने रहें ।
अगर लोकतांत्रिक समाज की हमारी आकांक्षा बची है, अगर कानून के राज की आकांक्षा बची है तो इन आकांक्षाओं का एनकाउंटर कर रही प्रवृत्तियों की शिनाख्त ज़रूरी है।
आज यह चर्चा अलोकप्रिय लग सकती है लेकिन लोकप्रियता का आंनद बड़ा नशीला होता है। हम ना महंगाई समझते हैं, ना बेरोजगारी समझ पाते हैं, न अपराध मुक्त समाज समझ पाते हैं,ना शिक्षा के सवाल समझ आते हैं,विदेश नीति वगैरह को तो छोड़िए हम पीने के साफ पानी तक की बात नहीं कर पाते। ये आनंद बड़ा उन्मादी बना देता है। हमें कभी सिर्फ दर्शक तो कभी विदूषक सा बना देता है। हम देख ही नहीं पाते कि हमारे लिए नायकत्व के प्रतिमान कितनी खामोशी से बदलते जा रहे हैं। झूठ हमारे लिए सब से बड़ा सच बन गया और हम इस हकीकत का एहसास भी नहीं करना चाहते ।
फिलहाल इतना ही सोचिए कि अब उन सवालों का जवाब कौन देगा जो विकास दुबे से होने थे ? ये तो ऐसा सवाल है जो शहीद पुलिस वालों के परिजन भी कर रहे हैं! हम आप तो उनके साथ हैं न? तो सवाल कीजिये ।
अच्छा चलिए, इस सवाल से असुविधा हो रही हो तो इतना तो पूछ ही लीजिए कि सीबीएसई के पाठ्यक्रम को हल्का करने के लिए लोकतांत्रिक अधिकार,धर्मनिरपेक्षता और खाद्य सुरक्षा जैसे पाठ ही हटाने क्यों ज़रूरी थे ।
 

 
 
पंचायत तंत्र । देश के सारे बांधों और जलाशयों में पिछली साल की तुलना में बहुत ज्यादा पानी भरा हुआ है. ऊपर से मॉनसून में आ चुका है. मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार भी मॉनसून में सामान्य स्तर की बारिश होगी. ऐसे में बांधों में भरा पानी कहां जाएगा? बांध नहीं खोले गए तो भी बाढ़ की आशंका रहेगी और खोल दिए गए तो भी. आइए जानते हैं कि इस बार मॉनसूनी बारिश में देश के 16 राज्यों में क्या होगा…केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission – CWC) के 11 जून के बुलेटिन के अनुसार देश के 123 जलाशय (बांध) पिछली साल के इसी समय की तुलना में 173 फीसदी ज्यादा भरे हुए हैं ।
अगर इस बार मॉनसूनी बारिश ज्यादा हुई तो बांधों में और पानी जमा होगा. इसके बाद अलग-अलग राज्य सरकारों और प्रशासन को मजबूरी में बांधों के गेट्स को खोलना पड़ेगा. जिससे बांध के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ आने की आशंका है. अगर ज्यादा बारिश होती है तो सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार और राज्य सरकारें बाढ़ प्रबंधन के लिए तैयार हैं. क्या पहले से भरे हुए बांधों को और भरने दिया जाएगा या उससे पहले कोई इंतजाम किया जाएगा ।
हर साल बाढ़ से यूपी, बिहार, असम, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश समेत कई राज्य परेशान होते हैं. इस साल बांधों में पानी पिछली साल की तुलना में ज्यादा है तो ऐसी स्थिति में क्या होगा. क्या ये प्रयास किया जा सकता है कि बांधों से धीरे-धीरे पानी कम किया जाए, ताकि मॉनसून के अंत तक ये सारे बांध फिर से अपनी पूरी क्षमता के साथ भर जाएं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो बांधों की वजह से बाढ़ (Dams induced flood) आने की आशंका ज्यादा है. पिछली साल कर्नाटक-महाराष्ट्र और साल 2018 में केरल में आई बाढ़ ताजा उदाहरण हैं बांधों की वजह से आई बाढ़ के. इन राज्यों में बांधों से पानी छोड़ने और मॉनसूनी बारिश की वजह से भयावह बाढ़ आई थी ।
देश के उत्तरी क्षेत्र (Northern Region) के बांधों और जलाशयों में 11 जून 2020 तक औसत स्टोरेज 39 फीसदी है, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 29 फीसदी था. उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान आते हैं. इनमें 8 जलाशय CWC के तहत आते हैं ।
पूर्वी क्षेत्र (Eastern Region) के बांधों और जलाशयों में 28 फीसदी पानी भरा है. जबकि पिछली साल ये सिर्फ 19 फीसदी था. इस क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और नगालैंड आते हैं. इन राज्यों के 18 जलाशय CWC के तहत आते हैं.  पश्चिमी क्षेत्र (Western Region) के बांधों में 35 फीसदी पानी भरा हुआ है. जबकि, पिछली साल ये इसी समय में ये 11 फीसदी था. पश्चिमी क्षेत्र में आने वाले राज्य गुजरात और महाराष्ट्र के 42 जलाशय CWC के तहत आते हैं ।
मध्य क्षेत्र (Central Region) के बांधों में 38 फीसदी पानी जमा हुआ है. जबकि, पिछले साल इस समय में ये 24 फीसदी था. इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आते हैं. इन राज्यों के 19 जलाशय CWC के तहत आते हैं ।
दक्षिणी क्षेत्र (Southern Region) के बांधों में 24 फीसदी पानी है. वहीं, पिछले साल इसी समय इन बांधों में 12 फीसदी पानी था. इस रीजन में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु आते हैं. इन राज्यों के 36 जलाशय CWC के तहत आते हैं ।
CWC ने अपने बुलेटिन में बताया है कि गंगा, सिंधु, नर्मदा, तापी, माही, साबरमती, कच्छ की नदियों, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, कावेरी में पिछली साल की तुलना में सामान्य जलस्तर है. यानी पानी की कमी नहीं है. बारिश होने पर इनका फैलाव क्षेत्र और बढ़ेगा ।
पिछले साल की तुलना में इस समय देश के इन 16 राज्यों के जलाशयों में पानी का स्टोरेज बेहतर है. ये राज्य हैं- पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु ।
पूरे देश में सिर्फ हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा और नगालैंड हैं, जहां के जलाशयों में पिछले साल की तुलना में पानी कम है. लेकिन मॉनसूनी बारिश अच्छी हुई तो ये भी अपनी क्षमता के अनुरूप भर जाएंगे ।
 

 
 
पंचायत तंत्र – नई दिल्ली । विश्व साइकिल दिवस पर देश के पुरानी साइकिल कंपनियों में से एक एटलस साइकिल की साहिबाबाद, उत्तरप्रदेश स्थित साइकिल फैक्ट्री बंद हो गई है. कोरोना के दंश को नहीं झेल पाने के कारण बंद हुई फैक्ट्री के करीबन हजार कर्मचारी अब बेरोजगार हो गए हैं ।
साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट- 4 में सन् 1989 से कंपनी के प्लांट में साइकिल का निर्माण हो रहा था. प्लांट में सुबह काम करने पहुंचे लोगों को गेट पर कंपनी प्रबंधन का नोटिस चस्पा मिला, जिसमें आर्थिक संकट के चलते काम बंद करने की जानकारी कर्मचारियों व कई विभागों को दी. कर्मचारियों से कहा गया है कि वह रोजना गेट पर आकर हाजिरी लगाएं, जिससे वह कंपनी में उत्पादन न होने पर भी वेतन के हकदार रहें ।
कंपनी प्रबंधन ने नोटिस के जरिए बताया कि कंपनी के पास पैसा न होने से उत्पादन नहीं हो रहा है. जब तक कहीं से कंपनी के पास पैसे का प्रबंध नहीं होता तब तक दोबारा काम नहीं शुरू हो सकता है. ऐसे में अब कंपनी को दोबारा चलने के लिए बड़ी रकम की जरूरत है ।
 

 
 
पंचायत तंत्र – नई दिल्ली । मानव सभ्यता के इतिहास में 28 मई एक नया अध्याय जुड़ जाएगा, जब अमेरिका के फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से निजी अंतरिक्ष विमान कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के रॉकेट में सवार होकर दो अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) पहुंचेंगे ।
आईएसएस जाने वाले दो अंतरिक्ष यात्री 53 वर्षीय डग हर्ले और 49 वर्षीय बॉब बेनकन ने मंगलवार को इसके लिए सफलतापूर्वक अभ्यास भी कर लिया है. नासा के व्यावसायिक क्रू प्रोग्राम के लिए दोनों का 2015 में ही विशेष चयन कर लिया गया था. दोनों ही सेना के भूतपूर्व टेस्ट पायलट हैं ।
बेनकन ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता में कहा था कि यह किसी भी टेस्ट पायलट स्कूल के छात्र के लिए अवसर होता है, जब वह किसी नए स्पेसशिप में यात्रा पर जाता है. और मैं खुशनसीब हूं कि मुझे यह सौभाग्या में अच्छे दोस्त के साथ मिल रहा है. दोनों की अंतरिक्ष यात्री पहले भी जरूरी जीवनरक्षक सामान, साइंस लेबोरेटरी और रिपेयरिंग के लिए दो रोबोट आईएसएस ले जा चुके हैं ।
अब बात स्पेसएक्स (SpaceX) की. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने वर्ष 2014 में पृथ्वी की निचली कक्षा तक अंतरिक्ष यात्रा के लिए दो निजी कंपनियों – बोइंग और स्पेसएक्स के साथ विमान की डिजाइन से निर्माण और उड़ान तक के लिए अनुबंध किया था. इसमें बोइंग से 4.2 बिलियन डॉलर और स्पेसएक्स से 2.6 बिलियन डॉलर का अनुबंध किया गया था ।
28 मई को केनेडी स्पेस स्टेशन से स्पेसएक्स के राकेट फाल्कन 9 के ड्रेगन एक्स कैप्सूल के जरिए दोनों अंतरिक्ष यात्री आईएसएस की यात्रा करेंगे. राकेट का नामकरण स्टार वार्स के मिलियम फाल्कन पर और कैप्सूल का नामकरण पफ द मैजिक ड्रैगन पर किया गया है. वर्ष 2011 के बाद पहली बार केनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे ।
नासा के आईएसएस को प्रोग्राम मैनेजर किर्क शिरमन इस उड़ान को लेकर खासे उत्साहित हैं. वे कहते हैं कि यह वाकई में व्यावसायिक उड़ान के लिहाज से अगला महत्वपूर्ण कदम और पृथ्वी के निचली कक्षा तक की यात्री के लिए जरूरी है. इसमें नासा अनेक उपभोक्ताओं में से एक है ।
 

 
पंचायत तंत्र – कोरोना संकट पर विपक्ष के नेताओं की एक बड़ी बैठक शुक्रवार को 3 बजे होगी. इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, एनसीपी नेता शरद पवार, डीएमके नेता एमके स्टालिन समेत 15 राजनीतिक दलों के नेता हिस्सा लेंगे।
हालांकि, अभी साफ नहीं है कि इस बैठक में कांग्रेस की ओर कोई प्रतिनिधि हिस्सा लेगा या नहीं. माना जा रहा है कि इस बैठक में कोरोना और लॉकडाउन को लेकर मोदी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में बात होगी और सरकार की ओर से राज्य सरकारों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर चर्चा की जाएगी।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसे वक्त में केंद्र को राजनीति नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राज्य अच्छा काम कर रहा है. केंद्र को समझना चाहिए कि बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है।
इससे पहले 26 अप्रैल को सीएम उद्धव ठाकरे ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘हमने केंद्र से दाल मांगी, क्योंकि हम अपने राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लोगों को अनाज देते हैं, लेकिन हमारे पास सिर्फ चावल है. इसलिए हमने दाल और गेहूं की मांग की है जो हमें अब तक नहीं मिली. मुझे लगता है कि दाल में कुछ काला है लेकिन दाल तो आने दो।
माना जा रहा है कि इन सभी मुद्दों को लेकर ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और विपक्ष के नेता अपनी रणनीति बनाएंगे. साथ ही राज्यों की ओर से केंद्र से मांगे गए राहत पैकेज पर भी चर्चा हो सकती है. अभी तक राज्यों के लिए केंद्र की ओर से राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया गया है।