रायपुर । प्रशासन के कड़े निर्देश के बाद नगर निगम और कलेक्टोरेट ने भी वाटर हार्वेस्टिंग करने के लिए कड़ा रुख अपनाया लिया है, नए एवं पुराने मकानों और बिल्ंिडगों में अब तक हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है उन्हें अब हर हाल में अनिवार्य रूप से लगाना ही पड़ेगा नहीं तो पैनाल्टी लगना तय है।
मानसून सक्रिय होने वाला है। पिछले दो सालों में कम बारिश के कारण भूगर्भीय जलस्तर रसातल में चला गया है। कई वार्ड और मोहल्ले के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है, रतजगा कर पानी के टैंकर का इंतजार करते देखसकते है, हाहाकार मचा तो लोगों को पानी की कीमत समझ में आ गई है। कुछ लोग तालाब को बचाने, तो कोई कुआं साफ कराने में जुटा हुआ है। इस सबके पीछे कारणों पर नजर डाले तो साफ दिखाई दे रहा है कि वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगवाने में स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की उदासीनता और बिल्डरों और निजी मकान मालिकों ने सरकारी अपील को गंभीरता से नहीं लेना है। वाटर हार्वेस्टिंग लगाने निगम प्रशासन ने बिल्डरों और निजी मकान मालिकों से शुल्क लेकर भी सिस्टम नही लगवाया। लोगं ने वाटर हार्वेस्टिंग लगाने निगम के खजाने में 12 करोड़ रुपए जमा हैं, लेकिन निगम शुल्क जमा कर वाटर हार्वेस्टिंग लगाना भल गई कोई पहल नहीं की। जानकारी के अनुसार नगरीय प्रशासन द्वारा वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर बनाए गए चलताऊ नियमों के चलते लोग इसे नहीं अपना रहे थे। अब नए नियम में 1500 वर्गफीट से अधिक के भवनों में सिस्टम लगवाना अनिवार्य है। मकान का नक्शा पास कराने से पहले निगम इसके एवज में पैसे भी जमा कराता है, लेकिन वर्षा जल बचाने की मुहिम में निगम खुद पिछड़ जाता है। प्रशासन के निर्देशों के पहले ही निगम ने वाटर हार्वेस्टिंग लगवाने का कार्य शुरू कर दिया था। निगम द्वारा 2011 से ही इस प्रणाली को अमल में लाया गया, लेकिन जांच में पाया गया की पिछले आठ सालों से जिन मकानों में हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना था उनमें से अभिकतर लोगों ने इसे नहीं अपनाया है । निगम ने अब कड़ा रुख अपनाया है।
घर-घर जाकर लोगं को जागरुक करें: कलेक्टर : कलेक्टर डा. एस भारतीदासन ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे निगम के साथ मिलकर लोगों के घर-घर जाकर उन्हें हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए जागरुक करें। इस बार हर छोटे-बड़े मकान में सिस्टम लगाना अनिवार्य है । पिछले साल जिले के सभी सरकारी भवनों में यह सिस्टम लग चुका है। जहां नहीं लगा, इस बार पूरा किया जाएगा। इसके अलावा उद्योगों, अस्पतालों और कमर्शियल कांप्लेक्सों समेत सभी निजी बड़े निर्माणों में भी सिस्टम लगे। पिछले आठ सालों में 3000 मकान मालिकों ने सिस्टम लगवाने 12 करोड़ निगम में जमा किए लेकिन हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा। निगम ने नक्शा पास करते समय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए लोगों से सुरक्षा निधि के तौर पर निश्चित राशि ले लिया और सिस्टम नहीं लगवाया। शहर में पिछले आठ सालों में बने तीन हजार मकानों से निगम ने इस मद में 12 करोड़ लिए हैं, लेकिन निगम के ढिलाई के चलते बहुत से घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया है। कलेक्टर की सक्रियता के बाद निगम अफसरों ने फैसला लिया है कि रखे हुए इन पैसों से नगर निगम लोगों के घरों में पहुंचकर सिस्टम लगवाएगा ।
वर्गफीट से वसूली जाती है राशि
1506-2152 वर्गफीट 7000, 2153-3229 वर्गफीट 10000, 3230-4305 वर्गफीट 12000, 4306 वर्गफीट से अधिक 15,000
भूगर्भ जल रिचार्ज करने का सबसे उपयुक्त समय बारिश होती है। शहर के सभी आवासों में रेन-वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा दिया जाए तो यहां का जलस्तर 15 से 20 फीट तक आ जाएगा।
जल संकट
केंद्रीय भू-जल बोर्ड के रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में पिछले तीन-चार सालों में भू-जल स्तर में जबरदस्त कमी आई है आकड़ों पर गौर करे तो पिछले दो वर्षो में राजधानी का जल स्तर 20 से लेकर 80 फीट नीचे चला गया है। जिसके चलते जिला प्रशासन और नगर निगम ने पहले से ही बोर खनन में बैन लगा दिया है।
नए-पुराने सभी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग लगाना जरूरी है। जिन भवनों में सिस्टम नहीं लगाए जाएंगे, उन पर पेनाल्टी लगाया जाएगा।
-बीआर अग्रवाल (नगर निवेशक )