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रायपुर । लोकसभा के मानसून सत्र के पहले दिन बस्तर सांसद दीपक बैज ने बच्चों से जुड़ा बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला उठाया. उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री से कुपोषित बच्चों को लेकर सवाल किया कि देश मे कुपोषित बच्चों की संख्या राज्य-संघ राज्य क्षेत्रवार कितनी है ? इसके साथ ही उन्होंने कुपोषित बच्चे के अस्थि संक्रमण के चपेट में आने से विकलांगता में वृद्धि की कोई डेटा क्यों नही है? देश मे NFHS-4 के वर्ष 2015-16 के अनुसार आदिवासी बच्चों में बौनेपन 43.5%, कम वजन 45.3% और कृशता 27.4% है क्यों ?? केंद्र सरकार के द्वारा वर्ष 2019-20 में 16,334.88 रु. करोड़ राशि देने के बाद भी पांच राज्यों में बच्चे कुपोषण के चपेट में क्यों ?? जिसमे पहले झारखंड फिर दूसरे में बिहार,तीसरे में मध्यप्रदेश व चौथे स्थान गुजरात और पांचवे स्थान में उत्तरप्रदेश है. इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि कब तक कुपोषण को नियंत्रित करेंगे ।
जिसके जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन लिखित उत्तर प्रस्तुत किये. प्रस्तुत किये गए लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के अनुसार देशभर में पाँच वर्ष से कम आयु के 35.7% बच्चे कम वजन वाले, 21% निष्क्रिय और 38.4% बच्चे छोटे कद वाले हैं. राज्य / संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण अनुलग्नक-| पर है ।
यद्यपि कुपोषित बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में अल्प रोग प्रतिरक्षण के कारण अस्थि संक्रमण सहित किसी भी संक्रमण की चपेट में अधिक आते हैं, किंतु कुपोषित बच्चों में ऐसे अस्थि संक्रमण – जिसके कारण बच्चे विकलांगता की चपेट में आ रहे हैं, में वृद्धि को प्रमाणित करने वाला कोई डेटा नहीं है ।
यद्यपि कुपोषण के मुद्दे को समाप्त करने के लिए मुख्य कार्यक्रम एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) है, जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है, किंतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ कर रहा है, जिसमें जीवनभर वंचित जनसंख्या में अल्प-पोषण को कम करने के विभिन्न कार्यक्रम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व संपूरण कार्यक्रम, स्वास्थ्य केंद्रों में अत्यधिक गंभीर कुपोषणग्रस्त रुग्ण बच्चों का प्रबंधन – उपयुक्त शिशु एवं युवा बाल फीडिंग प्रक्रियाओं में सुधार, विटामिन ए संपूरण, राष्ट्रीय कृमिनाशन दिवस आदि शामिल हैं. बाल्यावस्था रुग्णता जैसे डायरिया रोग की रोकथाम, जो बाल्यावस्था कुपोषण की अप्रत्यक्ष रूप में रोकथाम करती है. इस उद्देश्य के लिए गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा (आईडीसीएफ) कार्यान्वित किया जा रहा है. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) पोषण संबंधी सहायता देने वाली एक अन्य कार्यनीति है, जिसमें गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को स्वास्थ्य केंद्र में रहने के दौरान निःशुल्क आहार देना शामिल है. अन्य कार्यक्रम जैसे रोग प्रतिरक्षण, गृह आधारित युवा बाल परिचर्या कार्यक्रम (एचबीवाईसी) जैसे रोगों के साथ-साथ कुपोषण को दूर करते हैं और पोषण संबंधी स्थिति में सुधार लाते हैं. राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-1|| एवं IV के अनुसार, छोटे कद, कम वजन एवं खून की कमी हेतु बाल कुपोषण में कमी आई है ।


रायपुर । छत्तीसगढ़ में पुलिस कर्मियों को एक बड़ा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है. पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने के लिए पुलिस विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। जिलों के एसपी को ये आदेश जारी किया गया है। एसपी को साप्ताहिक अवकाश के लिए रोस्टर बनाना है। सूत्रों के मुताबिक कई जिलों के एसपी ने रोस्टर तैयार भी कर लिया है। कई जगहों पर पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश मिलना शुरू हो गया है।
डीजीपी डीएम अवस्थी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि पुलिस कर्मियों को अब साप्ताहिक अवकाश मिलेगा। डीजीपी अवस्थी ने कहा कि पुलिस विभाग ने सप्ताहिक अवकाश के लिए आदेश जारी कर दिया गया है। कई जगहों पर पुलिस कर्मियों को सप्ताहिक अवकाश मिलना शुरू भी हो गया है। जहां नहीं मिल रहा है, वहां भी जल्द ही अवकाश मिलना शुरू हो जाएगा।
पुलिस परिवार ने किया था आंदोलन : बता दें कि जून 2018 में प्रदेशभर के पुलिस परिवारों ने राजधानी रायपुर में आंदोलन किया था। इस आंदोलन में पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिए जाने की मांग प्रमुख थी। प्रदेश में दिसंबर 2018 में नई सरकार बनने के बाद पुलिस कर्मियों की मांग को लेकर एक समिति गठित की गई थी। इसमें पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने की मांग को प्रमुखता से मानने की बात कही गई थी। इसके बाद गठित एक समिति ने अपनी रिपोर्ट विभाग को दी। फिर आगे की कवायद शुरू हो गई है।
पुलिस अधिकारी-कर्मचारी महिला व बाल हितैषी बनें: डीजीपी
पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के विशेष आतिथ्य में पुलिस मुख्यालय द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से बाल हितैषी पुलिस थाना विकसित किए जाने के लिए प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ स्थानीय न्यू सर्किट हाउस स्थित सभाकक्ष में हुआ। पुलिस महानिदेशक अवस्थी ने प्रदेश के सभी जिलों से आए नोडल पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल थाना ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पुलिस अधिकारी-कर्मचारी को बाल हितैषी और महिला हितैषी होना आवश्यक है, तभी हम विश्वसनीय पुलिस की कल्पना साकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में जब प्रत्येक महिला और प्रत्येक बच्चा पुलिस को अपना मित्र समझने लगेगा तो सम्भवत: इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन की आवश्यकता नहीं होगी। अवस्थी ने यूनिसेफ के अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए सुझाव दिया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं के आयोजन के स्वरूप में परिवर्तन लाते हुए बच्चों के पालकों के लिए भी शहरी और ग्रामीण स्तरों पर कार्यशाला आयोजित किया जाए, क्योकि बच्चों का अधिकतम समय अपने परिवार के बीच व्यतित होता है। कार्यशाला में विशेष महानिदेशक आरके विज ने प्रदेशभर से आए पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस की भूमिका बच्चों के लिए संवेदनशील है।
ॉपुलिस को अपने थानों में ऐसा खुशनुमा वातावरण तैयार करना चाहिए कि वहां आने वाला कोई भी नागरिक भयभीत न हो। कार्यक्रम में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रशांत दास ने पुलिस को बाल हितैषी बनाए जाने के प्रति जागरुकता लाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम में उप पुलिस महानिरीक्षक एससी द्विवेदी, नेहा चंपावत, सहायक पुलिस महानिरीक्षक पूजा अग्रवाल सहित पुलिस मुख्यालय और यूनिसेफ के अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर । राजधानीवासियों को बहुप्रतीक्षित इंतजार के बाद शंकर नगर स्थित अनुपम नगर ब्रिज की सौगात मिलने वाली है, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज इस ओवरब्रिज का लोकार्पण करेंगे। पिछले 8 सालों से यह ब्रिज अधूरा पड़ा था, जिससे शहर की सुंदरता में यह दाग की तरह नजर आ रहा था। अब जाकर यह ब्रिज पूर्ण हुआ है, अभी भी इस ओवरब्रिज को शुरू होने में वक्त लग सकता हैं। इस ब्रिज को सुंदर बनाने के लिए वालपेंटिंग से सुंदर बनाया जा रहा है। वही यह ब्रिज का काम तत्कालीन भाजपा शासन के लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत द्वारा सन 2012 में शुरू किया गया था लेकिन आगे यह ब्रिज रेलवे लाइन को क्रॉस करते हुए मोवा विधानसभा की ओर निकलता है जिसकी वजह से वहां रेलवे की तरफ से कार्य में थोड़ा प्रभाव पड़ा था और उस समय लोक निर्माण विभाग का कार्य दक्षिण विधायक बृजमोहन अग्रवाल के हाथों में था जिसके चलते कई वर्षो से यहाँ का काम अटका पड़ा था। लेकिन अब यह ब्रिज तैयार हो गया हैं, इससे अच्छी बात और कोई हो ही नहीं सकता।
मोवा-सड्डू को जोड़ता ब्रिज : शंकर नगर स्थित अनुपम नगर का यह ब्रिज रेलवे क्रॉसिंग करते हुए पास के मोवा,सड्डू ,बलोदा बाज़ार ,राम नगर ,अनुपम नगर और विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को ब्रिज का लाभ सबसे अधिक मिलेगा। आये दिन यहाँ रेलवे के चलते जाम की स्थिति बनी रहती थी, अब वहां के लोगों के लिए आसान हो जाएगा।
महिलाओं को समर्पित वालपेंटिंग्स : इस ब्रिज की खूबसूरती नीचे दीवारों और पिल्लरों पर बने प्रसिद्ध और विश्व ख्याति प्राप्त महिलाओ की पेंटिंग से बढ़ गयी हैं। इन दीवारों पर पहली भारतीय बैडमिंटन प्लेयर साइना नेहवाल की तस्वीर है, भारत की ्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की तस्वीर पिल्लरों में उकेरा गया हैं। वही इन तस्वीरों के नीचे उनकी उपलब्धियां स्लोगन लिख उनके बारे लोगों को बताया जा रहा है।
गार्डनिंग और लाइटिंग की तैयारी : ब्रिज के नीचे खाली पड़े जगहों पर ठेले वाले और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा न बन सके इसलिए ब्रिज के नीचे छोटा सा गार्डनिंग का काम किया जा रहा है जिससे इस ब्रिज की खूबसूरती बढ़े भी और वहां से गुजऱते हुए लोगों को मनमोहक लगे, इसके साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी यहाँ कई पेड़ पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है। ब्रिज के ऊपर एलईडी लाइट्स का काम भी प्रगति में हैं।
अन्य ब्रिज की तरह न हो कबाड़ : शहर की सुंदरता कर लोगों की सुगमता को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट सिटी और लोक निर्माण विभाग का यह पृथक प्रयास हर छोर पर ब्रिज फ्लाईओवर हो या अंडर ग्राउंड ब्रिज बनाया गया। लेकिन वर्तमान में सभी ब्रिज की हालत बेहाल है । इसलिए ब्रिज के मेंटनेंस पर संबंधित विभाग को मुस्तैद रहना होगा।
मैं जब लोक निर्माण विभाग मंत्री था, तब 2012 में भूमिपूजन किया था ब्रिज बनाने के लिए काम भी शुरू हो गया था, फिर यह विभाग बृजमोहन अग्रवाल जी के हाथों में था उसके बाद वापस मुझे दिया गया जिस पर मैंने काम शुरू किया, वापस थोड़ा बीच में रेलवे विभाग से लेट हुआ पर अब बन गया है, लोगों को अब आसानी होगी, समय की बचत होगी, शहर स्मार्ट बनेगा, इस उद्देश्य से मैंने इस ब्रिज व शहर के अन्य ब्रिज को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल किया था ।
– राजेश मूणत, पूर्व लोक निर्माण मंत्री
रायपुर। प्रदेश के आम नागरिकों की समस्याओं और उनकी मांगों से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अब सीधे रू-ब-रू होंगे । मुख्यमंत्री श्री बघेल अब हर बुधवार को भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के लिए जरिए प्रदेश की जनता से मिलकर उनकी मांगों और समस्याओं को सुनेंगे और उनके निराकरण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश संबंधित विभागीय अधिकारियों को देंगे। भेंट-मुलाकात कार्यक्रम राजधानी रायपुर के मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हर बुधवार को प्रात: 11 बजे से आयोजित होगा। भेंट-मुलाकात की शुरूआत आगामी 3 जुलाई से हो रही है। भेंट-मुलाकात में आम नागरिकों को अपने क्षेत्र की समस्याएं और मांगें सीधे मुख्यमंत्री को बताने का मौका मिलेगा।

रायपुर । हीरापुर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कबाड़ी की दुकान और पंडरी स्थित कपड़ा दुकान में भीषण आग लग गई है। मौके पर फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम मौजूद है। जानकारी के अनुसार आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे है। आग बुझाने की कोशिश जारी है। राजधानी के एक बड़े पंडरी कपड़ा मार्केट की दुकान में देर रात भीषण आग लग गई है। आग लगने की सूचना मिलते ही मौके पर फायर बिग्रेड की दो गाडियां रवाना कर दी गई है। आग कैसे लगी, इसकी जांच की जा रही है। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी पंडरी कपड़ा मार्केट पहुंचे जहां आग पर नियंत्रण पाने दमकल कर्मी मशक्कत करते रहे ।

रायपुर । छत्तीसगढ़ से राज्य सभा सांसद रामविचार नेताम ने शुक्रवार को राज्य सभा मे तारांकित प्रश्न के माध्यम से छत्तीसगढ़ में फसल बीमा योजना के विषय को उठाया. उन्होंने अपने प्रश्न में विभागीय मंत्री को जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसान तो सही समय पर अपना बीमा का प्रीमियम भरते है पर जब फसल में नुकसान होता है तो इस योजना के माध्यम से होने वाला लाभ किसानों को सही समय पर नही मिल पा रहा है. जिसकी वजह से किसानों का इस महत्वकांशी योजना पर भरोसा कम हो रहा है ।
नेताम ने सरकार से सवाल किया था कि छत्तीसगढ़ में इस योजना के कार्यान्वयन में सरकार को कितनी सफलता मिली है और साथ ही इस योजना के अंतर्गत अभी तक छत्तीसगढ़ के कितने किसानों का बीमा किया गया है. जिस पर केंद्रीय राज्य मंत्री पुरषोत्तम रूपला ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ में हर साल किसानों के बीमा करने में वृद्धि हुई है साथ ही उन्हें हर प्रकार की क्षति का भुगतान योजना के मापदंड अनुसार किया गया है. इसके साथ ही मंत्री ने नेताम को आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ में किसानों को होने वाले नुकसान का भुगतान सही समय पर किया जाएगा. ज्ञात हो नेताम हर सत्र में छत्तीसगढ़ से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को उठाते रहे हैं ।

रायपुर । सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बैठाना आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए टेढ़ीखीर साबित हो सकता है. यहां एक अनार 100 बीमार वाली कहावत सिद्ध हो रही है. बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी के बाद सीएम भूपेश बघेल ने 1 मंत्री का पद छोड़कर मंत्री मंडल का गठन कर लिया था. मंत्रीमंडल के गठन के 6 महीने बाद अब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें निगम मंडलों पर टिकी हुई है।
लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब मंत्रीमंडल विस्तार और निगम मंडलों में नियुक्ति को लेकर इंतजार और अटकलों के बीच पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव का बयान आया है. सिंहदेव भी मान रहे हैं कि निगम मंडल में कार्यकर्ताओं और नेताओं को एडजस्ट करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. सिंहदेव ने कहा कि 100 से कम पदों के लिए 1500 से ज्यादा दावेदार हैं. हर ब्लॉक से कम से कम 5-5 लोगों की मंशा है, कुछ लोगों को ही एडजेस्ट करना बड़ी चुनौती है, सब मिलकर सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बैठाकर काम करेंगे ।

रायपुर । हाईकोर्ट ने बर्खास्त 43 शिक्षकों को बहाल करने का आदेश जारी किया है. कोर्ट के इस आदेश के बाद बर्खास्त शिक्षकों के चेहरे पर रौनक लौटी है. रायपुर नगर निगम ने वर्ष 2014 नगरीय निकाय के अंतर्गत 43 शिक्षकों की भर्ती की थी, लेकिन कुछ दिनों बाद भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करते हुए सभी 43 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया था. इस पर शिक्षकों ने न्यायालय की शरण ली थी।
शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी बर्खास्त शिक्षकों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद सभी पक्षों से सुनवाई के पश्चात हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सभी 43 बर्खास्त शिक्षकों को बहाल करने का आदेश जारी किया है।
आज 20 जून को शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रतिनिधि मंडल वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में निगम आयुक्त से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा गया है, साथ ही सभी बर्खास्त साथियों को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की गई है. आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तलब कर मामले को संज्ञान में लिया है साथ ही जल्द से जल्द हाईकोर्ट के आदेशानुसार कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं प्रतिनिधिमंडल में धर्मेश शर्मा, भानु प्रताप डहरिया, विजेंद्र तिवारी, हरबंस सोनवानी, मालती साहू, वचन क्वेत्र, गायत्री साहू, लक्ष्मी कुमार भट्ट, शैलेन्द्र पात्रे, नरेंद्र साहू, आदि शामिल थे।
रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज सुबह नियमित विमान से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं. सीएम वहां पहुंचकर सीधे छत्तीसगढ़ सदन जाएंगे. वे यहां रात्रि विश्राम भी करेंगे. सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि दिल्ली में वित्त मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई है जिसमें शामिल होने वे जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के लिए समय मांगा है उनसे मुलाकात होगी तो कई विषयों पर चर्चा भी की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष बदलने के सवाल पर बोले सीएम भूपेश बघेल- यह राष्ट्रीय अध्यक्ष पर निर्भर करता है उनसे मुलाकात के बाद ही इस विषय पर कुछ कहा जा सकेगा।
मंत्रियों के प्रभार जिले बदलने पर बोले सीएम – दूसरे जिलों का प्रभार मिलेगा तो उसमें विभागीय कसावट भी आएगी और समीक्षा भी होगी. इसलिए ही प्रभार बदला गया है.मंत्री लोग ज्यादा से ज्यादा दौरा करें प्रदेश में लोगों से मिले जुलें, लोगों की समस्याओं के बारे में उनको जानकारी हो तो निश्चित तौर पर कसावट आएगी.लोकसभा चुनाव के समय प्रभार दिया था अब चुनाव हो गया है इस कारण से दूसरे जिले दिए गए हैं।

रायपुर । “ये मुख्यमंत्री ह तो बड़ गजबे किसम के ही जी, निमगा गंवईहा, देहाती किसम के छत्तीसगढ़िया. गाँव-गंवई म जाथे, गौठान म चौपाल लगाथे, ठेठ छत्तीसगढ़ी म गोठियाथे अउ तो अउ मॉल म छत्तीसगढ़ी फिलिम देखे बर घलोक चले जाथे. मोला तो ये देख के बड़ गरब होथे. सिरतोन म ये ह देहाती होये के परमान आय. देहाती होना सरम के नहीं बड़ गरब के बात हरय.” गुरतुर छत्तीसगढ़ी के राजा अउ ठेठ छत्तीसगढ़िया पद्मश्री श्यामलाल चतुर्वेदी बाबूजी आज ज़िंदा होथे तो भूपेश बघेल को देखकर उनके लिए छत्तीसगढ़ी में यही कहते.
ऐसा मैं इस लिए कह रहा हूँ कि क्योंकि छत्तीसगढ़ में, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़िया होने के अर्थ को समझना है तो आपको श्यामलाल बाबूजी के व्यक्तित्व को जानना होगा. उनके मन में छत्तीसगढ़ के हित में काम करने वाले लोगों के लिए अथाह प्रेम रहा, मुझे ध्यान है 2013 में पं. रविशंकर शुक्ल विवि के कार्यक्रम में उन्होंने तात्कालीन राज्यपाल शेखर दत्त के लिए कहा था कि, “ये राज्यपाल बड़ अलग किसम के हे जी. येखर मन म छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़िया मन बर बड़ प्रेम हे. मै तो कहथव इन जीवन भर इही धरती हमरे तिर रहि जातिन.
यह सब मैं इसलिए बता रहा हूँ, क्योंकि छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ियों के हित में जो भी काम करता बाबूजी उन्हें खूब प्रोत्साहित करते, खुले मन से और हर मंच से उनकी तारीफ़ करते. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के काम-काज में अभी तक छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़ियों का हित होते दिख रहा है. तभी तो दिन बुधवार, तारीख़ 19 जून 2019 छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी सिनेमा के इतिहास में हमेशा महत्वपूर्ण दिन के लिए याद किया जाएगा, क्योंकि यह पहला अवसर था जब छत्तीसगढ़ी सिनेमा को प्रोत्साहित करने के लिए कोई मुख्यमंत्री मल्टीप्लेक्स तक पहुँचा हो. मुख्यमंत्री का मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने जाना उन सभी मल्टीप्लेक्स संचालकों के लिए एक संदेश है, जो छत्तीसगढ़ी फिल्मों को उपेक्षित करके रखे हुए हैं, जो छत्तीसगढ़ी फिल्मों को प्रदर्शित नहीं करते. वहीं यह उन सभी छत्तीसगढ़ी सिने कलाकारों का सम्मान भी है जिन्हें मल्टीप्लेक्स में फिल्म लगाने के लिए विरोध-प्रदर्शन करना पड़ा था. कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री के इस पहल से कलाकारों को ताकत भी मिली है, उनके विरोध को बल मिला है
पाठकों के मन में पढ़ते हुए कई सवाल हो सकते हैं कि मैं यह सब क्यों लिख रहा हूँ ? इस लेख को श्यामलाल बाबूजी के साथ जोड़कर लिखने का क्या अर्थ ? कहीं यह मुख्यमंत्री की जबरिया तारीफ तो नहीं ? कहीं यह चासनी वाला लेख तो नहीं…अन्य जो भी ? इन सब सवालों का एक ही जवाब है, छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़िया हित, जब प्रदेश को चलाने वाले की ओर से ऐसी पहल हो तो सराहना तो की ही जानी चाहिए. वइसे भी बाबूजी हमेशा यही कहते थे ‘देहाती होना मोर बर सरम के नहीं, गरब के बात हरय.” मैं भी यह कहता हूँ, छत्तीसगढ़ी बोलते वक़्त, खुद को छत्तीसगढ़िया बताते वक़्त, छत्तीसगढ़ी फिल्में देखते वक़्त( बशर्ते फिल्मे कला-संस्कृति पर आधारित हो, फूहड़ नहीं) आपको शर्म नहीं, गर्व होना चाहिए. काबर के मुख्यमंत्री ह तो सिरतोन म निमगा देहाती अउ ठेठ छत्तीसगढ़िया हरय.
उम्मीद है इन प्रयासो के साथ श्यामलाल बाबूजी की अंतिम इच्छा और पुरखों के सपनों के साथ करोड़ों छत्तीसगढ़ियों की मांग महतारी भाषा(माध्यम) में शिक्षा के अधिकार को भी मुख्यमंत्री भूपेश जल्द पूरा करेंगे.
निमगा- शुद्ध
देहाती- गाँव का