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रायपुर ।  छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि उत्पाद से बायो फ़्यूल उत्पादन बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है ।
 अभी सबसे ज्यादा विदेशी धन पेट्रोलियम पदार्थों में लग रहा है. खेती को लाभ का धंधा बना दिया जाए, तो लोग नौकरी के पीछे नहीं भागेंगे.  मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि उत्पाद से यदि हम बायोफ्यूल बनाएंगे, तो लोगों को लाभ भी होगा, रोजगार मिलेगा, नैसर्गिक संसाधनों का नुकसान कम होगा. विदेशी धन भी बचेगा. इसे निरंतर बनाया जा सकता है. धान और गन्ना से रॉ मटेरियल उपलब्ध हो जाएंगे ।
इस कार्यशाला में  उद्योग मंत्री कवासी लखमा, आदिम जाति कल्याण मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह भी शामिल हुए. कार्यशाला में देशभर के कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे ।

 
रायपुर । फोन टैपिंग मामले में आईपीएस रजनेश सिंह EOW दफ्तर पहुंचे। उन्होंने करीब ढाई घंटे तक अपना बयान दर्ज कराया। लंच के बाद फिर से एक बार कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रजनेश सिंह से पूछताछ की जाएगी। इस बारे में ईओडब्लू एसपी आई एलेसेल ने कहा कि पूछताछ के लिए आईपीएस रजनेश को बुलाया गया था, करीब दो घंटे चली पूछताछ। अभी लंच के बाद फिर से कई महत्वपूर्ण सवालों पर पूछताछ की जाएगी। आपको बता दें कि रजनेश सिंह पर फोन टेपिंग करने का आरोप हैं, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। हालांकि हाईकोर्ट ने उन्हें राहत मिली है। जमानत मिलने के साथ-साथ उन्हें इस बात की राहत मिली हुई है, कि उनके खिलाफ कोई फोर्सली कार्रवाई नहीं की जा सकी। आज पहली बार वो एसआईटी के सामने पेश हुए हैं। इसके पहले भी कई बार रजनेश सिंह के खिलाफ बयान दर्ज करने का नोटिस उन्हें जारी किया जा चुका था, लेकिन पहली बार वो इस तरह से ईओडब्ल्यू में पेश हुए हैं।

रायपुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में राज्य की महत्वाकांक्षी योजना ‘ नरवा, गरुवा, घुरवा अउ बारी’ की समीक्षा की. इस अवसर पर मुख्य सचिव सुनील कुजूर,अपर मुख्य सचिव आरपी मंडल, केडीपी राव, सीके खेतान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
 

 

रायपुर ।  विधायक विकास उपाध्याय ने पश्चिम विधानसभा में आने वाले तीनो जोन की लगातार लिए बैठक जोन एक,जोन पांच,जोन आठ के सफाई कर्मचारी,ठेकेदार,सुपरवाइजर,स्वास्थ विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर वार्ड में लोगो की समस्या को दुरुस्त कर समाधान करने को कहाविधायक विकास उपाध्याय जनता की समस्या के समाधान के लिए स्वयं रहेंगे उपस्थितवार्ड में बिजली,पानी,साफसफाई की व्यवस्था को दुरुस्त ,ओर नियमित रूप से नाली की सफाई के निर्देश दिए वार्ड में गर्मी में पानी की समस्या को देखते हुए अधिकारियों से नियमित रूप से पानी का टैंकर भेजने का दिए निर्देश- विकास उपाध्याय  

 
 
 
रायपुर । भाजपा शासनका में हुए 16 सौ करोड़ के ई-टेंडरिंग घोटाले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार कंपनियों पर पांच साल के लिए प्रतिबंधित (डिबार) कर दिया है। इन पर रिगं बनाकर प्रदेश में बीज सप्लाई का टेंडर हासिल करने के घोटाले में संलिप्तता की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई है। ये कंपनियां अगले 5 साल तक राज्य में टेंडर नहीं भर पाएंगी। साथ ही इन पर नजर रखने के लिए निगरानी टीम का गठन भी किया गया है, ताकि किसी दूसरे नाम से टेंडर हासिल न कर सकें। यह गड़बड़ी राज्य बीज निगम में ऑन लाइन टेंडरिंग में महालेखाकार की आपत्तियों के बाद पकड़ी गई है।
फर्जीवाड़े का खुलासा
महालेखाकार ने बीज निगम के वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 का ऑडिट ऑब्जर्वेशन किया था। इसमें खुलासा हुआ कि कई बोलीदारों ने अलग-अलग कंपनी दिखाकर टेंडर हासिल कर लिए। मसलन, मेसर्स बीजो शीतल सीड्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कलश सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस का पता और फोन नंबर एक समान पाए गए हैं। इसी तरह डीलक्स रिसाइकिलिंग प्राइवेट लिमिटेड और आशापुरा रिसाइकिलिंग सिस्टम मुंबई के फोन नंबर, पते और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स एक ही पाए गए हैं।
दस्तावेजों का पुन: परीक्षण कराया गया
ऑडिट ऑब्जर्वेशन में की गई आपत्ति के बाद मेसर्स बीजो शीतल सीड्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स कलश सीड्स प्राइवेट लिमिटेड दोनों संस्थाओं के आरसीओ में ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों का पुन: परीक्षण कराया गया। दस्तावेजों ने दोनों संस्थाओं का पता एक ही पाया गया। इस सिलसिले में दोनों संस्थाओं को नोटिस जारी किया गया। यह भी बताया गया कि दोनों ही संस्थाओं की तरफ से एक ही तरह का जवाब पेश किया गया।
जालना महाराष्ट्र की हैं दोनों संस्थाएं
संस्था के संचालकों ने बताया कि दोनों कंपनियों का कार्यालय एक ही बिल्डिंग में है। लेकिन फोन नंबर और फैक्स के एक समान होने के संबंध में कोई ठोस जवाब पेश नहीं कर सके, जिससे यह साफ हो सके कि दोनों संस्थाएं अलग-अलग हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों कंपनियों का कार्यालय एक ही जगह पाया गया। कंपनी के संचालक मंडल में समीर सुरेश अग्रवाल का नाम संचालक के रूप में अंकित पाया गया, इससे यह साफ होता है कि दोनों ही संस्थाओं द्वारा मिलकर निविदा भरा गया है। दोनों संस्थाएं जालना (महाराष्ट्र) की बताई गई हैं।
दस्तावेजों की पड़ताल के बाद हुआ
गड़बड़ी का खुलासा
इसी तरह वर्ष-2015-16 में डीलक्स रिसाइकिलिंग प्राइवेट लिमिटेड और आशापुरा रिसाइकिलिंग सिस्टम मुंबई द्वारा भी ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों की पड़ताल के बाद गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। इन दोनों कंपनियों के संचालक लक्ष्मी शाह, मणीलाल शाह और जिगनेश शाह बताए जाते हैं। दोनों कंपनियों के फोन नंबर, फैक्स नंबर और ईमेल एड्रेस एक ही थे और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के तीनों नाम भी एक ही हैं। इस सिलसिले में दोनों संस्थाओं को बीज निगम ने नोटिस जारी किया था। दो नोटिस का संस्था की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। तीसरी बार जारी नोटिस के जवाब में कंपनी की तरफ से अधिवक्ता ने दोनों ही संस्थाओं के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, फोन नंबर, फैक्स नंबर और ईमेल एड्रेस एक समान होना स्वीकार किया। इससे स्पष्ट हो गया कि दोनों संस्थाओं ने मिलकर टेंडर भरा।
सभी कंपनियों की सुरक्षा निधि तत्काल प्रभाव से राजसात की गई
मेसर्स आशापुरा रिसाइकिलिंग सिस्टम व मेसर्स डीलक्स रिसाइकिलिंग प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स बीजो शीतल व मेसर्स कलश सीड्स द्वारा जमा की गई सुरक्षा निधि को तत्काल प्रभाव से राजसात कर दिया गया है। ये 5 वर्ष किसी भी टेंडर में भाग लेने सकेंगे।
-जनमेजय मोहबे,बीज निगम के एमडी

 
 
रायपुर । बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे के निर्माण में देरी पर हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने 15 जुलाई तक हर हाल में सड़क तैयार करने के निर्देश दिया है. साथ ही ग्रीष्म अवकाश ख़त्म होने से पहले 17 जून तक जवाब प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिया है. बता दें कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने हाईकोर्ट में प्रस्तुत दो अलग-अलग शपथ पत्रों में रेत और सीमेंट की कमी व फंड नहीं होने का हवाला देते हुए रायपुर-बिलासपुर फोरलेन निर्माण में देरी की बात स्वीकार की थी. एनएचएआई ने कहा कि अब मात्र 14. 5 किलोमीटर निर्माण ही बचा हुआ है. फोरलेन के बचे हुए निर्माण कार्य के लिए ठेका कंपनी को प्रतिदिन अट्ठारह सौ टन सीमेंट की जरूरत है लेकिन सीमेंट कंपनियां सिर्फ 400 से 500 टन ही आपूर्ति कर पा रही है ।

 
राजधानी रायपुर से हत्या का एक मामला सामने आ रहा है. एक महिला की निर्मम हत्या कर दी गई है. महिला का पहले सिर कुचाला गया फिर लाश को एक बांध के पास फेंक दिया गया. बताया जा रहा है कि मृत महिला एक भोजनालय में काम करती थी. फिलहाल पुलिस ने महिला की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. आस-पास के लोगों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।
मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी के नया रायपुर इलाके के कयाबांधा इलाके में एक महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई. महिला का सिर कुचलकर इस वारदात को अंजाम दिया है. महिला की लाश रविवार सुबह कयाबांधा के सुनसान इलाके में मिला. महिला की शिनाख्त रामेश्वरी बाई के रुप में हुई है जो उपरवारा गांव की रहने वाली है. बताया जा रहा है कि हत्या वाले स्थान से थोड़ी दूर में एक भोजनालय में ये महिला काम करती थी. पुलिस ने मामले में हत्या का आपराध दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।

रायपुर । एम्स में एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने का मामला. अमृत फार्मेसी पर कार्रवाई के लिए केन्द्र सरकार को लिखा गया पत्र..एम्स प्रबंधन ने कार्रवाई के लिए लिखा पत्र. दो नर्सिंग स्टाफ को भी नोटिस जारी ।

 
 
 
 

रायपुर । पुलिस कर्मचारी द्वारा लड़की से रेप करने का एक मामला छत्तीसगढ़ में सामने आया है।  ASI ने अपने घर में काम करने वाली लड़की का बालात्कार किया है। इससे पहले कवर्धा में आरक्षक ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था। अकेला देख दबोच लिया मिली जानकारी के अनुसार 24 साल की पीड़िता राजधानी के डीडीनगर के सेलटैक्स कॉलोनी में ASI राजेंद्र बर्मन के घर का काम करती थी ।
वह घर के काम के अलावा आरोपी के बच्चों को भी संभालती थी। एक दिन जब घर पर कोई नहीं था तो आरोपी ने उसे दबोच लिया और उससे जबरदस्ती करने लगा। लड़की चीखती चिल्लाती रही लेकिन आरोपी ने उसकी एक नहीं सुनी और उसका बालात्कार कर दिया। लड़की पहुंची पुलिस स्टेशन लड़की ने वहां से निकलकर घटना की शिकायत पुलिस में की और आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। पुलिस ने दुष्कर्म का मामला दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी ASI फिलहाल आरटीओ में पदस्थ है।

 
 
 
 
 
रायपुर । जो आपके पास अधिक है, वो यहाँ छोड़ जाएं जो आपकी जरूरत का है, यहाँ से ले जाएं इस उदेश्य से बनाया गया नेकी की दीवार की अब बड़ी दयनीय स्थिति में हैं। बता दे कि यह स्मार्टसिटी मोर रायपुर के तहत व प्रदेश में पूर्व सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की एक अनोखी प्रोजेक्ट्स में एक थी जिसे शहर के जरूरतमंद गरीब लोगो के लिए बनाया गया है। इस दिवार में आप जरूरतमंदो के लिए ना केवल कपडे बल्कि किताबें ,जूते या अन्य वास्तु जो आपके काम में नहीं है उसे आप इस दिवार पर रख सकते हैं। एक ओर जहाँ पूर्ववर्ती सरकार ने इस पर लाखो रूपए खर्च कर शहर के प्रमुख स्थानों पर बनाया था वहां की स्थिति आप साफ़ तौर पर इन तस्वीरो पर देख सकते हैं। ये हैं जी.ई रोड स्थित शहर के हृदय स्थल में बना हुआ अनुपम गार्डन से लगा हुआ नेकी का दिवार जहाँ आप देख सकते हैं कि, इस पर बने हुए शेल्फ ,विशिंग वेल यानि मन्नत मांगने वाला कुआँ और किताबो वाला पेड़ किस तरह खाली है और नीचे किस तरह से कपड़े बिखरे हुए है। यह नज़ारा नेकी के दिवार के दोनों तरफ का है जहाँ लोग अपनी चीज़े दान के रूप में नहीं बल्कि कूड़ेदान समझ कर फेंक कर जा रहे है। नतीजन ये कपड़े सड़क पर भी बिखरे हुए मिलेंगे वही दूसरी और ये नज़ारा है शंकरनगर स्थित बने हुए नेकी के दीवार का जहाँ बेतरतीब पड़े हुए है कपडे व अन्य सामान जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अन्य लोगो को अपनी वस्तुए रखने की जगह नहीं मिल पा रही है और वे इसे उचित जगह रखने की बजाय बेहिसाब से रख रहे हैं।
बारिश से बचाव नहीं
शहर को सूंदर बनाने के लिए 38 लाख रूपए खर्च कर बनाये गए इस नेकी के दिवार में बारिश के लिए कोई समूचे व्यवस्था नहीं किया गया हैं। जिससे दान किये गए कपडे जुते व किताबे हो रहे हैं खऱाब जिससे जरूरतमंद उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। 
असुरक्षित नेकी की दीवार
बता दे कि यहाँ जरूरतमंद लोगो के लिए यदि कोई दान करता है जैसे किताबे कपड़े व् अन्य कोई अमूल्य वस्तु तो वे चीज़े यहाँ सुरक्षित नहीं है। जी हां कुछ लोग जो जरूरतमंद नहीं है वे यहाँ के चीज़ो को उठाकर अन्य बाजारों में जाकर बेच देते है या कही पुराने कपड़े देकर इन्हे बदल देते है। इस तरह से यह नेकी की दिवार कई मायनो में असुरक्षित हैं बेसुध आला अधिकारी
स्मार्ट सिटी और नगर निगम की यह जिम्मेदारी हैं की शहर में बने इन जगहों की सही देखभाल करना व् आम लोगो तक इसका सही लाभ पहुंचना हैं। इन जगहों पर कोई देखरेख करने वाला चौकीदार भी नहीं हैं, वही जिम्मेदार अधिकारी बेसुध होगये हैं इन्हे न ही किसी प्रकार से सही जानकारी है और न ही इसे लेकर वे सजग है। इस बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह नेकी की दिवार आने वाले दिनों में इसकी स्थिति और कितनी बदहाल होने वाली हैं। देखना अब यह हैं कि कब जिम्मेदार अधिकारी इसकी सुध लेते है और इसका सही तौर पर सरंक्षण करते हैं।