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रायपुर।  ऐसा दूसरी बार हुआ है जब पैथोलॉजी चलाने वाली संस्था को नोटिस थमाया गया है।  दरअसल पैथोलॉजी चलाने वाली संस्था के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थी कि वे मरीजों को टेस्ट के नाम पर डॉक्टर द्वारा लिखी गई टेस्ट से ज्यादा टेस्ट कर अधिक पैसे वसूलते थे।  ऐसा कारनामा उसके द्वारा पहले भी किया जा चुका है।  लेकिन प्रबंधन की ओर से केवल कारण बताओ नोटिस की ही कार्रवाई हर बार की जाती है।  एक बार फिर ये नोटिस थमाया गया है।  मरीजों से जांच के नाम पर अधिक पैसे लेने के आरोप में लल्लूराम। कॉम ने पहले भी खबर प्रकाशित की थी।  जिसकी जांच अस्पताल अधीक्षक द्वारा कराई गई, जांच के बाद मरीजों की शिकायत और नोटिस देने की कार्रवाई की गई है।  पैथोलॉजी संचालक को नोटिस दिए जाने की पुष्टि डीकेएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ केके सहारे ने की है। 

डॉक्टरों की भी लापरवाही आई सामने
इस मामले में डॉक्टरों की लापरवाही भी सामने आई है।  दरअसल जिस कॉलम में जांच का जिक्र किया जाता है उस कॉलम को कई बार डॉक्टर खाली छोड़ देते थे, जिसका फायदा पैथोलॉजी संचालक उठाता था और चालाकी से खाली कॉलम में अपने से टिक कर लेता।

रायपुर। बैंकों द्वारा इन दिनों पैसे जमा करने से लेकर पैसे निकालने तक का शुल्क लिया जा रहा है। सबसे ज्यादा उपभोक्ताओं के लिए दुखदायी बात है बचत खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना। आमतौर पर बैंक बचत खातों में मिनिमम एवरेज बैलेंस न रहने पर जुर्माना लगता है, लेकिन सभी बैंकों में मिनिमम बैलेंस की राशि और जुर्माना अलग-अलग होता है।
यह बैंक खाते के प्रकार पर भी निर्भर करता है। बैंकिंग अधिकारियों के अनुसार अधिकांश शासकीय बैंकों में अर्ध शहरी क्षेत्रों के लिए 2000 रुपये, शहरी क्षेत्रों के लिए 3000 रुपये तक मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी है। निजी बैंकों में यह राशि 10000 रुपये तक होती है। इस खबर के जरिए हम आपको बता रहे हैं कि एसबीआइ और बैंक ऑफ बड़ौदा के मिनिमम बैलेंस के बारे में।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआइ) के ग्राहकों के लिए बचत खाते में न्यूनतम राशि रखना अनिवार्य है, लेकिन बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (बीएसबीडी) में यह नियम लागू नहीं होता। एसबीआइ की शाखाओं को मेट्रो, ग्रामीण, शहरी और अर्ध शहरी में बांटा गया है। मेट्रो और अर्ध शहरी शाखाओं में ग्राहकों के लिए खाते में 3000 रुपये एवरेज मंथली बैलेंस (एएमबी) रखना अनिवार्य है। अर्धशहरी क्षेत्रों के लिए यह 2000 रुपये, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1000 रुपये है।
मेट्रो और शहरी क्षेत्र की बैंक शाखाओं में जो ग्राहक खातों में 1500 रुपये या उससे कम बैलेंस रखते हैं उन पर 10 रुपये प्रति महीना जुर्माना और जीएसटी लगता है। अगर बैलेंस निर्धारित सीमा से 50-75 फीसद से कम है तो उन्हें 12 रुपये पेनाल्टी राशि और जीएसटी पेनाल्टी स्वरूप देना होगा। अगर बैलेंस 3000 रुपये के 75 फीसद से कम है तो पेनाल्टी राशि 15 रुपये होगी और साथ में जीएसटी भी देना होगा।
बैंक ऑफ बड़ौदा
बैंक ऑफ बड़ौदा ने बचत खाते पर मिनिमम तिमाही एवरेज बैलेंस की सीमा को बढ़ा दिया है। नया नियम फरवरी से लागू हो गया है। शहरी ग्राहकों के लिए मिनिमम बैलेंस 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है।
अर्धशहरी ब्रांच के लिए मिनिमम बैलेंस 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है। ग्राहक अगर अपने खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रखते हैं तो उन्हें जुर्माना देना होगा। बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक शहरी और मेट्रो ब्रांच के ग्राहक मिनिमम बैलेंस नहीं रखते हैं तो उन पर 200 रुपये जुर्माना किया जाएगा। अर्ध-शहरी शाखाओं के लिए जुर्माने की राशि 100 रुपये होगी।

रायपुर । छत्तीसगढ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन की उपस्थिति में पूर्व भाजपा सांसद एवं स्वतंत्रता सेनानी रेशमलाल जांगड़े के पुत्र हेमचंद जांगड़े एवं उनकी पत्नि कमला जांगड़े ने कांग्रेस प्रवेश किया ।
जांजगीर लोकसभा प्रत्याशी रवि भारद्वाज के पक्ष में काम करने का वादा किया. उन्होंने कांग्रेस पार्टी को जिताने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही ।

रायपुर । राफेल लड़ाकू विमान सौदा मोदी सरकार के लिए तो मुसीबत बना ही है, साथ ही छत्तीसगढ़ के एक गांव के लिए भी परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। राफेल विवाद की वजह से आपसाप के लोग पूरे गांव औऱ वहां रहने वाले लोगों का मजाक बनाते हैं। दरअसल छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन छेत्र में एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम ‘राफेल है। इस गांव में करीब 2000 परिवार रहते है।
गांव में रहने वाले कहते हैं कि दूसरे गांवों के लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं। वे कहते हैं कि यदि कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो हमारी जांच होगी। हम गांव का नाम बदलने का अनुरोध लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय भी गए थे लेकिन हम उनसे मिल नहीं सके। उन्होंने कहा, ”राफेल विवाद के कारण यह नाम केवल नकारात्मक ध्यान आकर्षित करता है, लेकिन हमारे गांव की कोई परवाह नहीं करता। राज्य के बाहर तो अधिकतर लोगों को गांव के बारे में पता भी नहीं है।
गांववालों ने बताया कि पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी जरूरतें भी नहीं हैं। खेती बारिश के आसरे है क्योंकि यहां सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। गांव वालों को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि गांव का नाम राफेल क्यों रखा गया और इसका क्या अर्थ है।
उन्होंने कहा, ”हमें नहीं पता, लेकिन गांव का नाम राफेल दशकों पुराना है। साल 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन से भी पहले यह नाम है। मुझे इस नाम के पीछे का तर्क नहीं पता।
हालांकि, शिक्षित लोगों को अब ‘राफेल’ के जिक्र से असुविधा नहीं होती। सरपंच धनीराम ने बताया कि उड़िया भाषा में ‘राफेल’ का अर्थ पलायन से है। गांव के लोग रोजीरोटी के लिए पलायन करते थे तभी से पहले गांव का नाम ‘राफेल’ हो गया। अब चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर इस गांव को लेकर एक अलग तरह का मजाक चल रहा है।
सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि यदि कांग्रेस सत्‍ता में आई तो छत्तीसगढ़ के इस गांव का नाम बदल कर कुछ और रख दिया जाएगा। यह भी चुटकी ली जा रही है कि यदि कांग्रेस केंद्र में आई तो गांव के लोगों के खिलाफ जांच होगी।

रायपुर । राजधानी के राखी थाना क्षेत्र अंतर्गत कुहेरा गांव में पुलिस ने गवर्मेंट केरोसिन टैंकर से केरोसिन बेच रहे दो आरोपी को गिरफ्तार किया है. उनके पास से 200 लीटर अवैध केरोसिन भी जब्त किया है, जिसकी कीमत 12 लाख रुपए आंकी गई है ।
जानकारी के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि गवर्मेंट केरोसिन टैंकर से ड्राइवर केरोसिन निकालकर बेच रहा है. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कुहेरा गांव के तालाब के पास टैंकर नंबर सीजी 05 एई 4584 पर केरोसिन बेचता पाया गया. वाहन चालक भारत सिन्हा धमतरी से केरोसिन टेंकर से 200 लीटर केरोसिन कीर्तन साहू को बेचते हुए पकड़ा गया. जिनके पास उक्त संबंध में कोई कागजात नहीं था ।
आरोपी ड्राइवर
जिसके बाद पुलिस ने टैंकर और 200 मिट्टी का तेल जब्त कर लिया. इसके साथ ही दोनों आरोपी भारत सिन्हा और कीर्तन साहू को धारा 3, 7 आवस्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जेल भेज दिया है ।

रायपुर । जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे और जोगी परिवार की असली ताक़त नेता नहीं है बल्कि छत्तीसगढ़ की जनता का जोगी के प्रति दिली लगाव है. यह लगाव भावनात्मक है, सैद्धान्तिक है और वैचारिक है. जो लोग यह चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के निर्णय, छत्तीसगढ़वासियों छत्तीसगढ़ के माटी में ही करें, जो लोग हमारी ‘छत्तीसगढ़ प्रथम’ विचारधारा में आस्था रखते हैं. उन्हीं लोगों के कारण आज 82 साल के इतिहास में पहली बार छत्तीसगढ़ में मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल का गठन हो पाया है ।
अमित जोगी ने कहा कि लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय हमने लिया. हम नहीं चाहते कि हमारे कारण ग़ैर-सांप्रदायिक ताक़तों का वोट बटे. हमारा पहला और अंतिम उद्देश्य प्रदेश की 11 सीटों में है भाजपा को परास्त करना है. 14 परसेंट वोट लेकर भी हमने यह कठिन फ़ैसला देशहित में लिया क्योंकि हमें मालूम है कि आज हमारा भारत वर्ष निर्णायक मोड़ से गुज़र रहा है. नफ़रत और साम्प्रदायिकता की ताक़तों को अगर परास्त करना है, तो सभी ग़ैर-सांप्रदायिक ताक़तों को एक होना पड़ेगा. कुछ लोगों ने इस निर्णय को बहाना बनाकर पार्टी छोड़ने का फ़ैसला किया, वे सत्ता-लोभी हैं ।
68 विधायकों का बहुमत लेकर जो इंडीयन नेशनल कांग्रेस के पक्ष में सत्ता का धुर्वाकर्षण बना है. उसकी चपेट में हमारे कई साथियों का आना स्वाभाविक है, लेकिन उनको ये बात समझनी पड़ेगी आज नहीं तो कल यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि यह जो धुर्वाकर्षण है, ये इतना भयंकर है- एक “ब्लैक होल” की तरह है- कि जो कोई भी इसकी चपेट में आएगा उसका राजनीतिक अस्तित्व स्वयमेव समाप्त हो जाएगा. मैं दावे के साथ कहता हूँ कि जिन साथियों ने हमारा साथ छोड़ा है, तीन महीनों बाद, छ: महीने बाद, उनका क्या हश्र होने वाला है, ये पूरा छत्तीसगढ़ देखेगा. जो हमारे नहीं हो सके, वो किसी और के भी नहीं हो पाएंगे ।
हमें अपनी विचारधारा पर केन्द्रित रहकर नई सोच के लोगों को जोड़ना है. ऐसे लोग जिनकी पहली और आखिरी निष्ठा छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति है. कई मुद्दे ऐसे हैं जिनको लेकर सभी राष्ट्रीय दलों ने हमारे प्रदेश के ढाई करोड़ वासियों के साथ कुठराघात किया है. ये मुद्दे किसी से छुपे नहीं है. चाहे वह पोलावरम बाँध निर्माण का मुद्दा हो, कन्हर नदी में बाँध के निर्माण का मुद्दा हो, नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेश का मुद्दा हो, महानदी के जल बँटवारे का मुद्दा हो, कोयला खदानों की रॉयल्टी का मुद्दा हो या GST लागू करने का मुद्दा हो, इन सब मुद्दों में छत्तीसगढ़ के साथ लगातार कुठराघात हुआ है, अन्याय हुआ है, और अब छत्तीसगढ़ की जनता इस अन्याय को, इस छलावे को, ज़्यादा दिन नहीं बर्दास्त करने वाली ।
पिछले विधानसभा चुनावों में हमें अपने चुनाव चिंह को जनता तक पहुँचाने के लिए बहुत कम समय मिला. संसाधनों का भी अभाव था. ऊपर से हम पर आरोप लग रहे थे कि हम फलां पार्टी की ‘बी टीम’ है. लोकसभा न लड़के हमने इन सब आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है और एक नई बुनियाद कायम करी है. आने वाले स्थानीय चुनावों में, नगरीय निकाय चुनावों में, जिला पंचायत चुनावों में, जनपद चुनावों में, पंचायत चुनाव में, हम अपने अधिकृत चिन्ह “हल चलाता किसान”-जो छत्तीसगढ़ के किसानों का गौरव का प्रतीक बन चुका है- से हर वॉर्ड में चुनाव लड़ने जा रहे है. भले ही विधानसभा में हमारा कब्ज़ा न हो लेकिन मैं विश्वास के साथ कहता हूँ कि हम प्रत्येक पंचायतों में, जनपद में, जिला पंचायत में, नगर पंचायत में, नगर पालिकाओं में, नगर निगम में, अपनी सरकार बनायेंगे और राज्य सरकार और केंद्र सरकार को मजबूर करेंगे ये जो संस्थाएं है इनको पूर्ण रूप से ऑटोनामस करें, पूर्ण रूप से आर्थिक रूप से स्वतंत्र करें ताकि वे स्थानीय समस्याओं को देखते हुए अपने फ़ैसले ख़ुद ले सके ।
हमारे शपथ पत्र की नक़ल करके सरकार तो कांग्रेस पार्टी ने बना ली. पर नक़ल करने में भी अक्ल की ज़रूरत है. पहले 90 दिनों में 9 बार कर्ज़ा लेना पड़ा है. आज राजकोष ख़ाली हो चुका है. सरकार के पास अपनी घोषणाएँ पूरी करने की न तो नियत है और न ही नीति है और ये बात छत्तीसगढ़ का हर एक व्यक्ति समझ चूका है. 2018 में जो विधानसभा चुनाव के नतीजे आये थे, वो अपवाद थे. हमको अगर छत्तीसगढ़ को अपने पाँव पर खड़े करना है, तो दिल्ली से निर्णायक लड़ाई लड़नी पड़ेगी. राष्ट्रीय दल यह समझते हैं कि छत्तीसगढ़ के लोग बड़ी आसानी से कुचले जा सकते है. आँध्रप्रदेश के लिए पोलावरम बाँध बनेगा और छत्तीसगढ़ के कोंटा और सुकमा के लोग जल समाधि ले लेंगे, यह अब संभव नहीं है. उत्तर प्रदेश में कन्हर नदी में बांध बन जायेगा, सोनभद्र में पानी बरसेगा और सनावल के लोग जल समाधि ले लेंगे, यह भी संभव नहीं है. नगरनार इस्पात संयंत्र की नीलामी हो जाएगी, अडानी और अम्बानी हमारे पूर्वजों द्वारा संरक्षित कोयले का खनन करेंगे और एक रुपया भी छत्तीसगढ़ को नहीं देंगे, ये भी संभव नहीं है. महानदी का सारा पानी का उपयोग उड़ीसा करेगा और छत्तीसगढ़ के किसान लगातार अकाल की मार झेलते रहेंगे, ये भी अब संभव नहीं है. इन सभी मुद्दों पर राष्ट्रीय पार्टियों ने मौन धारण किया हुआ है. आख़िर क्यों? जवाब स्पष्ट है कि अगर ओडिशा और उत्तर प्रदेश और झारखंड और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच चुनाव करना है तो दूसरे राज्यों को महत्व दिया जाएगा और छत्तीसगढ़ को कुचला जायेगा ।
GST प्रणाली लागू कर दी गयी है. गब्बर सिंह टैक्स का हमारे प्रदेश में क्या प्रभाव पड़ रहा है, अभी तक लोगों को समझ में नहीं आ रहा है. GST टैक्स उपभोग पर लगता है, उत्पादन पर नहीं है, लेकिन छत्तीसगढ़ की जो अर्थव्यवस्था है वो 70% उत्पादन आधारित है. आज हमें हमारे अपार संसाधनों का- न कोयला का, न लोहे का, न सोने का, न हीरे का, न क्लीनकर का, न सीमेंट का, न बिजली का, न वनोपज का- राज्य को राजस्व मिलेगा. सीधे-सीधे 25 हज़ार करोड़ रुपया सालाना का नुक़सान होगा. हमारे ग्रामीण अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा जायेगी. राजकोष ख़ाली हो जायेगा. ऐसे में हम मौन धारण करके नई बैठेंगे. समस्या की जो जड़ है, वहाँ तक हम को पहुँचना पड़ेगा. अगर कांग्रेस और भाजपा के नेता वास्तव में छत्तीसगढ़ का लाभ चाहते हैं, हित चाहते हैं, तो उन्हें अपने ही पार्टी के दिल्ली के नेताओं के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करनी होगी. लेकिन उनमे यह हिम्मत नहीं है ।
देश में 29 राज्य है. कोई तो कारण होगा कि उनमें से 26 राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां अपनी सरकार बना चुकी है. केवल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ अपवाद है. यह अपवाद ज़्यादा दिनों तक नहीं रहेगा. छत्तीसगढ़ में अब लोग जाग रहे है. दो महीने में हमारी पार्टी को अगर 14% वोट मिला है, हमारे सात विधायक आज विधानसभा में बैठे है, तो स्पष्ट रूप से दिख रहा कि छत्तीसगढ़ की जनता अपनी क्षेत्रीयता को अहमियत देने लगी है. पहले उनको विश्वास नहीं था कि कोई क्षेत्रीय पार्टी स्थापित हो सकती है. पहले उनको विश्वास नहीं था कि छत्तीसगढ़ की राजनीति त्रिकोणीय हो सकती है. लेकिन हमने यह करके दिखा दिया और अब इस विश्वास के बलबूते हम आगे क़दम उठाने जा रहे है ।
हमें नेताओं की जरुरत नहीं हैं, जितने भी नेता आज छत्तीसगढ़ में उछलकूद कर रहे हैं, 90 पर्सेंट ऐसे नेता जोगी परिवार की पैदाईश है और जोगी परिवार को नेता बनाना आता है. क्योंकि जोगी परिवार का सीधा-सीधा लगाव छत्तीसगढ़ की जनता से है. जोगी परिवार को तमाम मुश्किलों के बावजूद लगातार छत्तीसगढ़ महतारी का आशीर्वाद मिलता रहा है और इसीलिए तमाम कोशिशों के बावजूद हमें कोई फसा नहीं पाया. हम पर कोई आरोप सिद्ध नहीं कर पाया है और यही हमारी असली ताकत है। इस पूंजी को हमें पिरोह के रखना है. हम जनता के बीच जाएंगे हम उनके गाँव जाएंगे, हम एक-एक वार्ड जायंगे, एक-एक पंच का चुनाव हम लड़ेंगे, अपने स्वार्थ के लिए नहीं छतीसगढ़ को अगर बचाना है, छतीसगढ़ को अगर बढाना है, छत्तीसगढ़ का अगर भविष्य बनाना है, तो क्षेत्रीय पार्टी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है ।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जो क्षेत्रीयवाद है- नरवा, घुरवा, गरवा, बारी- ये फ़र्ज़ी क्षेत्रीयवाद है. आज भी भूपेश बघेल को अगर कोई फ़ैसला लेना होता है, तो दिल्ली जाना पड़ता है. अगर रमन सिंह को कोई फ़ैसला लेना होता है, तो दिल्ली जाना पड़ता है. लेकिन जोगी की एक ऐसी पार्टी है जिसको फ़ैसल लेने दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा. हमारी पार्टी का आलाकमान हमारी प्रदेश की जनता है और उनके लिए हर हद तक लड़ाई लड़ने के लिए हम तैयार है ।
नेता हमारे साथ रहे न रहे, जनता हमारे साथ है. इसमें कोई संदह नहीं होना चाहिए कि भविष्य हमारा है ।

रायपुर । सीएम भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पांच साल के कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी ने राज्य को कुछ नहीं दिया। जिससे राजस्व को भारी नुकसान हुआ और आर्थिक बोझ बढ़ता रहा। बघेल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के लिए पीएम बनना घाटे का सौदा रहा। उनकी नीतियों के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। बघेल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के दौरान कई योजनाओं को बंद कर दिया गया या तो कटौती कर दी गई। मोदी सरकार के आने के बाद से प्रदेश से गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या कम की गई। वन्य अधिकार के कानूनों को कम किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के हितों की योजनाएं भी बंद की गई। भूपेश बघेल ने कहा कि देश में कांग्रेस की सरकार आएगी तो प्रदेश की जनता के हितों का ध्यान रखा जाएगा। बता दें कि प्रदेश में आज पीएम मोदी की सभा होनी है। वे कोरबा और भाटापारा में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। जिसको लेकर सीएम बघेल ने उन पर निशाना साधा है।

रायपुर । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम को फिर मुद्दा बनाए जाने पर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने इसे विपक्षी दलों की हताशा का परिचायक बताया है ।
उसेंडी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और उसके सहयोगी दल ऐतिहासिक जीत हासिल कर रहे हैं और प्रथम चरण के मतदान का प्रतिशत इस बात की तस्दीक कर रहा है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इससे भयभीत नजर आ रहे हैं और इसीलिए उन्होंने अभी से ईवीएम का मुद्दा फिर से उठाया है. देश की राजधानी में विपक्षी नेताओं की संविधान बचाओ प्रेस कॉन्फ्रेंस दरअसल अपना वजूद बचाओ प्रेस कॉन्फ्रेंस थी क्योंकि आसन्न लोकसभा चुनाव में देश की जनता ऐतिहासिक जनादेश देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा व राजग की सरकार चुनने जा रही है और कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल अपना वजूद बचाने के ऐतिहासिक संघर्ष के दौर में जाने वाले हैं ।
उसेंडी ने कहा कि जब-जब भी विपक्ष को अपनी हार नजर आती है, वह हार का ठीकरा ईवीएम पर फोडऩा शुरू कर देता है. अगर ईवीएम पर कांग्रेस और विपक्ष को इतना ही अविश्वास है तो उन्हें उन राज्यों की सत्ता से अलग हो जाना चाहिए, जहां ईवीएम से ही वे सत्ता में आए हैं. उसेंडी ने कहा कि अगर वास्तव में ईवीएम को लेकर कांग्रेस गंभीर होती तो पहले छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान की विधानसभा को भंग कर दें, देती क्यूंकि उस मशीन ने ही कांग्रेस के पक्ष में फैसला दिया था ।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की विडंबना तो यह है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के प्रत्याशियों की ओर से अलग घोषणा पत्र जारी किया गया है. इसका साफ मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं ने अपने केन्द्रीय चुनाव घोषणा पत्र को खारिज कर दिया है. कांग्रेस के प्रदेश नेताओं को यह समझ आ गया है कि कांग्रेस का घोषणा पत्र देशद्रोही ताकतों के हितों की रक्षा करने वाला है. इसमें देशद्रोह से जुड़ी धारा हटाने और कश्मीर में सैन्यबल घटाने का वादा करके कांग्रेस ने अपना रहा-सहा जनाधार भी खो दिया है. स्थिति यह है कि कांग्रेस के प्रत्याशी अब अलग से घोषणा पत्र जारी करके मतदाताओं के बीच जा रहे हैं. उसेंडी ने कहा कि कांग्रेस अपनी इन्हीं विसंगतियों के चलते अस्तित्व की लड़ाई के ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है ।

रायपुर । प्रदेश में चुनाव को लेकर की जा रही सघन जांच के दौरान अवैध पैसों और वस्तुओं की बरामदगी का आँकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. यह आँकड़ा बढ़कर साढ़े छह करोड़ रूपए से अधिक हो गया है. निगरानी दल, धन और वस्तुओं के अवैध परिवहन तथा संग्रहण पर नजर रख रही है जिसमें 13 अप्रैल तक 6 करोड़ 63 लाख 14 हजार 69 रूपए की राशि तथा वस्तु बरामद की गई है. इसमें 5 करोड़ 63 लाख 76 हजार 605 रूपए से अधिक नकद राशि बरामद की गई है. इसमें आयकर विभाग ने 4 करोड़ 81 लाख 28 हजार रूपए जब्त किए हैं वहीं पुलिस विभाग ने जाँच के दौरान 82 लाख 48 हजार 605 रूपए जब्त किया गया है ।
13 अप्रैल तक जब्तशुदा इन वस्तुओं में 5 करोड़ 63 लाख 76 हजार 605 रूपए नकद शामिल है, वहीं इस दौरान 5 हजार 975 लीटर अवैध शराब जब्त की गई है, जिसकी कीमत 10 लाख 62 हजार 590 रूपए है. सघन जांच अभियान के तहत अधिकारियों ने अवैध लैपटॉप, साड़ी, प्रेशर कुकर आदि भी जब्त किए हैं, जिनकी कीमत 72 लाख 15 हजार 964 रूपए है. साथ ही 16 लाख पचास हजार रूपए के आभूषण तथा रत्न भी शामिल हैं ।

रायपुर । देश में चुनावी बयार चल रही है. वादों और घोषणाओं के बीच नेताओं के जहां अपने-अपने राग हैं वहीं आम जनता की अपनी तकलीफें. चुनाव की इस बयार के बीच जनता का दर्द भी सामने आने लगा है और लोग चुनाव के बहिष्कार की घोषणाएं भी करने लगे हैं. छत्तीसगढ़ में भी लगातार कई गांवों, मोहल्लों से इस तरह की खबरें आनी शुरु हो गई है ।
विष्णुदेव साय
ऐसा ही एक मामला जशपुर जिले से आ रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्री मंडल में शामिल एक मंत्री भी इस जिले के निवासी हैं. केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री विष्णुदेव साय के गांव बगिया के पड़ोसी गांव दारुपिसा के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र के पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दारुपिसा गांव में रहने वाले लोगों के साथ परिवार के बच्चों ने भी प्रदर्शन हाथों में तख्ती लेकर प्रदर्शन किया ।
दारुपिसा गांव के निवासियों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से सड़क और पीने का पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. हमारे गांव के पड़ोसी गांव वाले सांसद विष्णुदेव साय हो या बीजेपी-कांग्रेस के विधायक कोई नहीं सुनता हमारी समस्याओं को. हम लोग नेताओं से लेकर अधिकारियों तक का चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं लेकिन कोई नहीं सुनता. इसलिए अब हम लोगों ने मतदान नहीं करने का फैसला लिया है. जब तक इस गांव में पक्की सड़क नहीं बनता तब तक हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे ।